Social Welfare
सशक्त नारी, सशक्त भारत
प्रविष्टि तिथि:
14 AUG 2026 15:45 PM
भारत की विकास यात्रा में महिलाओं की अहम भूमिका
महिलाएं अब भारत की विकास यात्रा में महज़ लाभार्थी के तौर पर नहीं, बल्कि विकास को आगे बढ़ाने में सक्रिय भागीदार बन गई हैं। जीवन के अलग-अलग चरणों में किए जा रहे प्रयासों में अब बच्चियों, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास, उद्यमिता और नेतृत्व को शामिल किया गया है। स्वयं सहायता समूहों, उद्यमिता और डिजिटल समावेश के ज़रिए वित्तीय समावेश और नेतृत्व के अवसर बढ़े हैं। साफ-सफाई, आवास, स्वच्छ ईंधन और नल के पानी की बेहतर सुविधा ने महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को बढ़ाया है। शासन-व्यवस्था में बढ़ती भागीदारी भी देश के निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
शुरुआत की सुरक्षा, भविष्य का संवर्धन
स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण सहायता और संस्थागत प्रसव प्रणालियों के ज़रिए मातृ और प्रारंभिक बाल देखभाल को मज़बूत किया गया है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी)
• बीबीबीपी बच्चों के लिंगानुपात (सीएसआर) में गिरावट और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों को जीवन-चक्र के दौरान संबोधित करता है।
• यह संस्थागत प्रसव, लड़कियों के सेकेंडरी स्कूल में नामांकन, स्कूल छोड़ने की दर में कमी और प्रसव-पूर्व देखभाल के लिए रजिस्ट्रेशन पर ध्यान केंद्रित करता है।
• एनएफएचएस-5 (2019-21) की रिपोर्ट के अनुसार, लिंगानुपात प्रति 1,000 पुरुषों पर 1,020 महिलाएं थी, जबकि 2011 की जनगणना में यह प्रति 1,000 पुरुषों पर 943 महिलाएं थी।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई)
• यह गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सीधे लाभ हस्तांतरण देने वाली मातृत्व लाभ योजना है।
• महिलाओं को पहले जीवित बच्चे के लिए दो किस्तों में ₹5,000 मिलते हैं, दूसरे बच्चे के लिए ₹6,000 मिलते हैं, यदि वह लड़की हो।
• पहुंच: 5.13 करोड़ लाभार्थियों का नामांकन, 4.37 करोड़ लाभार्थियों को भुगतान, कुल ₹20,571 करोड़ का भुगतान (31 जुलाई 2026 तक) ।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए)
• यह उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के लिए हर महीने की 9 तारीख को सरकारी सुविधाओं में मुफ्त प्रसव-पूर्व जांच प्रदान करता है।
• पहुंच: 7.50 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं की जांच, 8,812 स्वयंसेवकों का पंजीकरण, 13 अगस्त 2026 तक देश भर में 22,000 से अधिक केंद्रों पर पीएमएसएमए की सुविधा उपलब्ध।
• 6.85 करोड़ से अधिक प्रसव-पूर्व जांच की गईं, फोकस्ड डिजिटल ट्रैकिंग के लिए 1.03 करोड़ उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान की गई।
जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसके)
• जेएसएसके के तहत हर गर्भवती महिला को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ़्त डिलीवरी (सीज़ेरियन सेक्शन सहित) की सुविधा मिलती है। साथ ही, मुफ्त ट्रांसपोर्ट, जांच, दवाएं, खून और खाने-पीने की सुविधा भी दी जाती है।
• वित्त वर्ष 2024-25: 1.99 करोड़ से ज़्यादा गर्भवती महिलाओं और 16.85 लाख से ज़्यादा बीमार शिशुओं को इस योजना का लाभ मिला।
• 2014-15 से अब तक, 18.05 करोड़ से ज़्यादा लोगों को इस योजना के तहत मदद मिली है।
नतीजे
• गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों (पहली तिमाही) में प्रसव-पूर्व जांच के लिए जाने वाली महिलाओं की संख्या एनएफएचएस-4 (2015-16) के 58.6% से बढ़कर एनएफएचएस-6 (2023-24) में 76.2% हो गई।
• चार या उससे ज़्यादा बार प्रसव-पूर्व देखभाल के लिए जाने वाली महिलाओं की संख्या एनएफएचएस-4 (2015-16) के 51.2% से बढ़कर एनएफएचएस-6 (2023-24) में 65.2% हो गई।
• राष्ट्रीय स्तर पर, अस्पताल में होने वाले जन्म एनएफएचएस -4 (2015-16) के 78.9% से बढ़कर एनएफएचएस -6 (2023-24) में 90.6% हो गए।
शिक्षा, कौशल और आगे बढ़ने की चाहत
एनईपी 2020 के तहत लड़कियों की शिक्षा अब सिर्फ स्कूल तक पहुँचने से आगे बढ़कर, लगातार पढ़ाई जारी रखने, तरक्की करने और मापने लायक नतीजे हासिल करने की दिशा में बढ़ गई है।
• जेंडर इन्क्लूजन फंड: यह पूरी स्कूल व्यवस्था में ज़रूरतमंद लड़कियों को खास मदद देता है।
• सुलभ उपाय: इससे स्कूल छोड़ने वालों की संख्या कम होती है और स्कूल व कॉलेज में पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलती है।
• मल्टी-डिसिप्लिनरी विकल्प: इससे लड़कियाँ एक ही फ्रेमवर्क के तहत अलग-अलग तरह की पढ़ाई कर सकती हैं।
समग्र शिक्षा और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी)
• भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था (2025-26): पूरे देश में 14.67 लाख स्कूल, 1.02 करोड़ शिक्षक और 24.72 करोड़ छात्र हैं।
• स्कूल में लड़कियों का नामांकन: 2025-26 में 11.96 करोड़ लड़कियों का नामांकन हुआ।
• केजीबीवी: नामांकन 6.07 लाख (2020–21) से बढ़कर 7.58 लाख (2025–26) हो गया।
छात्रवृत्ति और आर्थिक मदद
• केंद्रीय क्षेत्र छात्रवृत्ति: आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों की होनहार लड़कियों के लिए लगभग 50% छात्रवृत्ति आरक्षित हैं।
• राष्ट्रीय पीजी छात्रवृत्ति चुने हुए छात्रों को हर साल ₹1.5 लाख देती है, जिसमें हर साल 3,000 महिलाएं भी शामिल हैं।
• एआईसीटीई प्रगति छात्रवृत्ति: 2014-15 से हर साल 10,000 छात्रवृत्ति दी जा रही हैं, 2024-25 तक लगभग 36,000 लड़कियों को इसका लाभ मिला है।
• नतीजे: उच्च शिक्षा में महिलाओं का नामांकन 2021-22 में 2.07 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 2.18 करोड़ हो गया है। 2014-15 में 1.57 करोड़ (38.4%) के मुक़ाबले महिलाओं के नामांकन में लगभग 60.32 लाख की बढ़ोतरी हुई है।
स्टेम और उच्च शिक्षा में महिलाएं
• दिसंबर 2019 से, विज्ञान ज्योति योजना: 300 ज़िलों में 1.12 लाख से ज़्यादा लड़कियों (कक्षा IX-XII) को लाभ पहुँचा चुकी है (मार्च 2026 तक) ।
• आईआईटी/एनआईटी में अतिरिक्त सीटों ने महिलाओं की भागीदारी को 10% से कम से बढ़ाकर 20% से ज़्यादा कर दिया है।
• 2024-25 में स्टेम विषयों में यूजीसी नेट-जेआरएफ स्कॉलर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 53% से ज़्यादा थी।
कौशल और डिजिटल समावेश
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई)
पीएमकेवीवाई लघु-अवधि, उद्योगों की ज़रूरतों के अनुसार प्रशिक्षण देता है, लगभग 45% लाभार्थी महिलाएं हैं।
• पीएमकेवीवाई 1.0: 19.85 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया गया।
• पीएमकेवीवाई 2.0: 1.10 करोड़ उम्मीदवारों को ट्रेनिंग/ओरिएंटेशन दिया गया।
• पीएमकेवीवाई 3.0: 7.37 लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया गया।
• पीएमकेवीवाई 4.0: 28 लाख से ज़्यादा उम्मीदवारों को ट्रेनिंग दी गई, जिनमें से 19.36 लाख से ज़्यादा सर्टिफाइड हुए।
युवा किशोरियों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से आकांक्षाओं का पोषण (नव्या)
• नव्या (2025): 16-18 साल की लड़कियों को डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सिक्योरिटी और एआई सक्षम सेवाओं में प्रशिक्षण देता है, यह 27 आकांक्षी और पूर्वोत्तर ज़िलों और 19 राज्यों में चलाया जा रहा है।
• जून 2026 तक: शुरुआत से अब तक 1,060 लड़कियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
सम्मान के साथ स्वास्थ्य, पोषण और कल्याण
आयुष्मान भारत
• आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई): नकद रहित सेकेंडरी और टर्शियरी देखभाल देती है, 12 अगस्त 2026 तक 45.5 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं, जिनमें से 22.48 करोड़ कार्ड महिलाओं को जारी किए गए और अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज़ों में 5.25 करोड़ से ज़्यादा महिलाएं थीं।
• आयुष्मान आरोग्य मंदिर: 12 अगस्त 2026 तक 1.86 लाख से ज़्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत हैं, जो महिलाओं के लिए मातृत्व और निवारक स्वास्थ्य सुविधाएँ देते हैं।
• आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम): 12 अगस्त 2026 तक 110 करोड़ से ज़्यादा हेल्थ रिकॉर्ड्स को डिजिटल रूप से जोड़ा गया है, 12 अगस्त 2026 तक आभा खातों में महिलाओं की हिस्सेदारी 49.72% है।
सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0
मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 का मकसद कुपोषण से निपटना और बचपन के शुरुआती विकास को बेहतर बनाना है। यह पोषण और आंगनवाड़ी से जुड़ी कई पहलों को एक ही एकीकृत फ्रेमवर्क के तहत लाता है।
• 31 जुलाई 2026 तक, 8.94 करोड़ से ज़्यादा लाभार्थियों को सेवाएँ दी जा रही हैं, जिनमें 64.46 लाख से ज़्यादा गर्भवती महिलाएँ, 45.44 लाख से ज़्यादा स्तनपान कराने वाली माताएँ और 15.68 लाख किशोर लड़कियाँ शामिल हैं।
• पिछले पाँच सालों में 1.29 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ियों में अपग्रेड किया गया है।
• 31 जुलाई 2026 तक लगभग 13.31 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता काम कर रही थीं।
मिशन इंद्रधनुष
• 18 मार्च 2026 तक, यू-विन पोर्टल पर 11.87 करोड़ बच्चों और 3.96 करोड़ गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया था, यह पोर्टल इन लाभार्थियों के लिए टीकाकरण सेवाओं का डिजिटल रिकॉर्ड रखता है और उन्हें ट्रैक करता है।
• 5.46 करोड़ बच्चों और 1.32 करोड़ गर्भवती महिलाओं को ऐसी बीमारियों से बचाने के लिए टीका लगाया गया, जिनसे बचाव संभव है।
• 17 फरवरी 2026 तक, 8.73 करोड़ महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की जाँच की गई।
• 28 फरवरी 2026 को सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 14 साल की उम्र की लगभग 1.2 करोड़ पात्र लड़कियों के लिए देशव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया गया।
• 15 जुलाई 2026 तक, देश भर में कुल 52,10,302 लड़कियों को एचपीवी का टीका लगाया जा चुका है।
वित्तीय समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण
सुकन्या समृद्धि योजना

• इसमें ₹250 से जमा राशि शुरू होती है और सेक्शन 80सी के तहत 8.2% सालाना टैक्स-फ्री ब्याज मिलता है।
• उच्च शिक्षा और शादी के लिए आंशिक निकासी की सुविधा है, जिससे परिवार की व्यवस्थित बचत को बढ़ावा मिलता है।
• शुरुआत से लेकर अब तक, कुल जमा राशि ₹3.33 लाख करोड़ से ज़्यादा हो गई है (दिसंबर 2025 तक) ।
डीएवाई-एनआरएलएम- स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) व्यवस्था
• एसएचजी को एक देशव्यापी प्लेटफॉर्म के तौर पर बढ़ाया गया है, जिसमें 1.51 करोड़ सामुदायिक कैडर सदस्यों के साथ 7,627 ब्लॉक शामिल हैं।
• शुरुआत से लेकर 6 फरवरी 2026 तक, 50,548 से ज़्यादा प्रशिक्षित बैंक सखियों के ज़रिए एसएचजी ने ₹12.18 लाख करोड़ से ज़्यादा का बैंक क्रेडिट हासिल किया है।
• 30 जून 2026 तक, स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (एसवीईपी) के तहत 4.32 लाख उद्यमों को सहायता दी गई।
लखपति दीदी योजना
• यह स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को कम से कम ₹1 लाख की सालाना आय हासिल करने में मदद करती है।
• दायरा: 31 मार्च 2026 तक, 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, 757 जिलों, 94.31 लाख एसएचजी और 10.14 करोड़ एसएचजी सदस्यों तक पहुँच।
• इसे 6,611 मास्टर ट्रेनर्स, 4.09 लाख कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स (सीआरपी) और 3.87 करोड़ संभावित लखपति दीदियों (पीएलडी) के मज़बूत नेटवर्क के ज़रिए लागू किया जाता है।
प्रधानमंत्री जन धन योजना
• 12 अगस्त 2026 तक कुल 58.90 करोड़ जन-धन खाते खोले गए हैं।
• 1 जुलाई 2026 तक, 32.68 करोड़ जन-धन खाते महिलाओं के नाम पर हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई)
• 8 अप्रैल 2026 तक कुल मिलाकर 57.79 करोड़ से ज़्यादा लोन मंज़ूर किए गए हैं, जिनकी कुल राशि ₹40.07 लाख करोड़ है।
• मंज़ूर किए गए ऋण में से दो-तिहाई लोन महिला उद्यमियों को दिए गए हैं।
पीएम स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (स्वनिधि)
• पहुँच: 13 अगस्त 2026 तक इस योजना से 7,824,611 विक्रेताओं को फ़ायदा हुआ है, इनमें से 46% लाभार्थी महिलाएँ हैं।
नमो ड्रोन दीदी योजना
• इसमें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को खेतों में खाद और कीटनाशक छिड़कने के लिए ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
• इसे ₹1,261 करोड़ के बजट (2023-24 से 2025-26) के साथ मंज़ूरी दी गई है और इसका लक्ष्य महिला एसएचजी को 15,000 ड्रोन उपलब्ध कराना है।
• शुरुआत से अब तक, महिला एसएचजी को 1,094 ड्रोन बांटे गए हैं, जिनमें से 500 से ज़्यादा नमो ड्रोन दीदी पहल के तहत दिए गए हैं, जिससे खेती की उत्पादकता और आजीविका बेहतर हुई है।
वूमनिया (जीईएम)
• महिलाओं के नेतृत्व वाले 2.1 लाख से ज़्यादा उद्यम पंजीकृत हैं, वित्त वर्ष 2025-26 में 13.7 लाख ऑर्डर मिले।
• महिला एमएसएमई को ₹28,000 करोड़ से ज़्यादा का कॉन्ट्रैक्ट मिला, जो वित्त वर्ष 2024-25 के मुकाबले 27.60% ज़्यादा है, जेईएम के कुल ऑर्डर मूल्य का 5.6% हिस्सा इन्हें मिला।
सेल्फ हेल्प एंटरप्रेन्योर मार्ट (शी-मार्ट)
• केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित, जिसका मकसद 1 करोड़ महिलाओं को लाभ पहुंचाना है।
• यह उन्हें टिकाऊ उद्यमों का मालिक बनने और उन्हें चलाने में मदद कर रहा है।
संरक्षा, सुरक्षा, सम्मान और जीवन स्तर
मिशन शक्ति
• महिलाओं की सुरक्षा और सहायता के लिए संबल (सुरक्षा) और सामर्थ्य (सशक्तिकरण) वर्टिकल को मिलाता है।
• देश भर में 15.2 लाख वन स्टॉप सेंटर और 642 नारी अदालतें काम कर रही हैं।
• महिला हेल्पलाइन (181) ने 31 जुलाई, 2026 तक 1.05 करोड़ से ज़्यादा महिलाओं को 24x7 सहायता प्रदान की है और इसे इमरजेंसी रिस्पॉन्स (112) से जोड़ा गया है।
• शी-बॉक्स पोर्टल कार्यस्थल पर उत्पीड़न की ऑनलाइन रिपोर्टिंग की सुविधा देता है, ताकि शिकायतों का तेज़ी से समाधान हो सके।
प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई)
• पीएमएवाई-शहरी (2015) और पीएमएवाई-ग्रामीण (2016) के तहत बुनियादी सुविधाओं वाले पक्के घर दिए जाते हैं।
• पीएमएवाई -ग्रामीण: 13 अगस्त 2026 तक, 96.06 लाख से ज़्यादा (यानी कुल घरों का 24.73%) घर सिर्फ़ महिलाओं को आवंटित किए गए।
• पीएमएवाई -यू 2.0: 9 अगस्त 2026 तक, 1.25 करोड़ घरों को मंज़ूरी दी गई और 1 करोड़ घर महिलाओं को आवंटित किए गए।
भागीदारी, प्रतिनिधित्व और फैसले लेना
• 8 फरवरी 2026 तक, अंतिम मतदाता सूची में शामिल 96.88 करोड़ लोगों में से 47.15 करोड़ से ज़्यादा महिलाएँ थीं।
• 19 मार्च 2025 तक, 14.5 लाख महिलाएँ निर्वाचित पंचायती राज प्रतिनिधि के तौर पर काम कर रही थीं, जो कुल प्रतिनिधियों का लगभग 46% है।
• नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 (106वाँ संविधान संशोधन अधिनियम) लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान करता है, यह आरक्षण जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया के बाद लागू होगा।
• 2025 में, नेशनल डिफेंस एकेडमी से 17 महिला कैडेटों का पहला बैच पास आउट हुआ।
• 2026 की शुरुआत तक, 2022 से लेकर अब तक कुल 158 महिला कैडेट एनडीए में शामिल हो चुकी थीं।
विकसित भारत की नींव के तौर पर नारी शक्ति
सरकार के फोकस ने कल्याणकारी योजनाओं को महिलाओं के नेतृत्व, सम्मान और अवसरों के मंच में बदल दिया है। 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में महिलाएं कामगार, उद्यमी, किसान और लीडर के तौर पर अहम भूमिका निभा रही हैं। शिक्षा, आय और फैसले लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी का असर अब परिवारों और समुदायों तक भी पहुंच रहा है। उद्यमिता से लेकर ज़मीनी स्तर पर शासन-प्रशासन तक, नारी शक्ति मज़बूती और स्पष्ट मकसद के साथ आगे बढ़ रही है।
संदर्भ
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