Economy

पीएम ई-ड्राइव योजना

प्रविष्टि तिथि: 01 OCT 2026 19:33 PM

 टिकाऊ भविष्य की दिशा में एक कदम

 

लक्षित नीतियों, वित्तीय प्रोत्साहन और सहायक उपायों से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तेजी से आगे बढ़ रही है। इस परिवर्तन के केंद्र में सितंबर 2024 में शुरू की गई पीएम ई-ड्राइव योजना है। इसका उद्देश्य ईवी अपनाने में तेजी लाना, चार्जिंग संबंधी बुनियादी ढांचे का विस्तार करना और घरेलू ईवी विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूत करना है।  11,900 करोड़ रुपये के परिव्यय और मार्च 2028 तक बढ़ाई गई अवधि के साथ, यह योजना विभिन्न ईवी श्रेणियों और बुनियादी ढांचे का समर्थन करती है। यह लगभग 28.30 लाख ईवी के लिए प्रोत्साहन प्रदान करती है और जून 2026 तक 26.59 लाख गाड़ियों की बिक्री में मदद कर चुकी है। यह योजना ई-बसों, चार्जिंग स्टेशनों और परीक्षण सुविधाओं को भी बढ़ावा देती है, जो पूरे भारत में स्वच्छ, टिकाऊ परिवहन को आगे बढ़ाती है।

 

 

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में भारत

देश तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ रहा है, और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने का चलन काफी बढ़ रहा है। इसे लक्षित नीतियों, वित्तीय प्रोत्साहनों और मिशन-संचालित पहलों के माध्यम से बढ़ावा दिया जा रहा है।

इन प्रयासों के केंद्र में पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट स्कीम (पीएम ई-ड्राइव स्कीम) है। अक्टूबर 2024 से लागू यह योजना अग्रिम खरीद प्रोत्साहन और चार्जिंग संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने में मदद करती है। सतत विकास को बढ़ावा देकर, यह योजना परिवहन से होने वाले पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने और वायु गुणवत्ता में सुधार करने का भी प्रयास करती है।

 

भारत में तेजी से ईवी परिवर्तन

वित्तीय वर्ष 2015-16 के 0.08 प्रतिशत से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 में ईवी को अपनाने का प्रतिशत 8.26 हो गया है। सालाना इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 2016 के लगभग 50,000 वाहनों से बढ़कर 2025 में 23 लाख वाहन हो गई, जो लगभग 46 गुना वृद्धि को दर्शाता है। घरेलू स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के साथ-साथ इनका निर्यात 2020 के 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में 84 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।

 

पीएम ई-ड्राइव योजना

पीएम ई-ड्राइव योजना पूरे भारत में लागू की गई है। शुरू में इसे दो साल की अवधि के लिए अधिसूचित किया गया था, लेकिन अब इस योजना को 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है।

  • इस योजना का कुल परिव्यय 11,900 करोड़ रुपये है।
  • यह विभिन्न वाहन श्रेणियों और उनसे जुड़े पुर्ज़ों में मांग को प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देती है।
    • इन श्रेणियों में पंजीकृत ई-रिक्शा और ई-कार्ट सहित इलेक्ट्रिक- दोपहिया वाहन (ई-2डब्ल्यू), इलेक्ट्रिक- तिपहिया वाहन (ई-3डब्ल्यू) और एल5, ई-एम्बुलेंस, ई-ट्रक, ई-बस, चार्जिंग संबंधी बुनियादी ढांचा और परीक्षण एजेंसियों का उन्नयन शामिल हैं।
    • पंजीकृत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को ₹2,500/ किलोवाट घंटे की प्रोत्साहन राशि मिलती है (जो प्रति वाहन ₹5,000 तक सीमित है)। यह नियम एक्स-फ़ैक्ट्री ₹1.5 लाख तक की कीमत वाले वाहनों पर लागू होता है, जिसके लिए कुल 2,767 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया गया है। इस योजना का उद्देश्य 45.79 लाख से अधिक पंजीकृत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का सहायता प्रदान करना है।
    • उप-घटक पंजीकृत इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों (एल5) के लिए बिक्री का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है और इस सेगमेंट को 26 दिसंबर 2025 को बंद कर दिया गया।
    • इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों (ई-रिक्शा और ई-कार्ट) के लिए सहायता मार्च 2028 तक जारी रहेगी।

 

 

पीएम ई-ड्राइव के माध्यम से डिजिटल प्रोत्साहन प्रदान करना

इस योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने और ग्राहकों के लिए मांग प्रोत्साहन को सुगम बनाने हेतु ई-वाउचर उपलब्ध कराए गए हैं। योजना पोर्टल के माध्यम से खरीदारी के समय आधार फेस-ऑथेंटिकेटेड ई-केवाईसी ई-वाउचर जनरेट करती है। ग्राहक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक डाउनलोड लिंक भेजा जाता है।

खरीदार ई-वाउचर पर हस्ताक्षर करता है और योजना के तहत मांग प्रोत्साहन का लाभ लेने के लिए इसे डीलर को जमा करता है। इसके बाद डीलर ई-वाउचर पर हस्ताक्षर करके पीएम ई-ड्राइव पोर्टल पर अपलोड करता है।

 

 पीएम ई-ड्राइव योजना की मुख्य उपलब्धियां

  • पीएम ई-ड्राइव योजना लगभग 28.30 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • जून 2026 तक 26.59 लाख ईवी बेची जा चुकी हैं।
  • पीएम ई-ड्राइव के तहत 14,028 ई-बसों की तैनाती के लिए 4,391 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।  इनमें से 14,000 ई-बसों का आवंटन हो चुका है (अगस्त 2026 तक)।
    • सात शहरों— दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे और सूरत — को 13,800 ई-बसें आवंटित की गई हैं।
  • इलेक्ट्रिक वाहन पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों और परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए अनुदान सहायता भी उपलब्ध है।
    • भारत भर में इलेक्ट्रिक वाहन पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए ₹2,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
    • 28 सितंबर 2026 तक 3 तेल विपणन कंपनियों और 10 राज्यों में 8147 चार्जर लगाने के लिए 851 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
    • वाहन परीक्षण एजेंसियों के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए 780 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

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ईवी इकोसिस्टम पर प्रभाव

पीएम ई-ड्राइव के तहत सरकारी सहायता से इलेक्ट्रिक वाहनों को व्यापक रूप से अपनाने, स्वच्छ परिवहन और भारत के ईवी विनिर्माण इकोसिस्टम के विकास को बढ़ावा मिल रहा है

खरीदारों के लिए

  • अग्रिम मांग प्रोत्साहन पात्र ई.वी. के खरीद मूल्य को कम करता है, जिससे इलेक्ट्रिक परिवहन की प्रारंभिक लागत कम करने में मदद मिलती है।
  • ई-वाउचर पात्र खरीदारों को खरीद मूल्य में अग्रिम छूट के रूप में मांग प्रोत्साहन प्राप्त करने में मदद करता है, जिसकी राशि बाद में भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) को प्रतिपूर्ति की जाती है।

शहरों के लिए

  • यह योजना इलेक्ट्रिक बसों और अन्य ईवी श्रेणियों के माध्यम से स्वच्छ और अधिक टिकाऊ परिवहन की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करती है।

उद्योग के लिए

  • पीएम ई-ड्राइव योजना भारत के घरेलू ईवी विनिर्माण इकोसिस्टम के विकास में मदद करती है और ईवी मॉडल्स के स्थानीयकरण को बढ़ावा देती है।
  • इस योजना के तहत पंजीकृत ओईएम ने अपने ईवी मॉडल को स्थानीयकृत किया है और एमएचआई की परीक्षण एजेंसियों से चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (पीएमपी) के अनुपालन का प्रमाण-पत्र हासिल किया है
  • यह योजना वाहन परीक्षण एजेंसियों के आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए 780 करोड़ रुपये प्रदान करती है, ताकि उन्हें नई और उभरती हुई तकनीकों से लैस किया जा सके।

 

स्वच्छ परिवहन वाले भविष्य की ओर

‘पीएम ई-ड्राइव’ पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने में मदद कर रहा है और साथ ही टिकाऊ परिवहन को गति दे रहा है। ईवी अपनाने और चार्जिंग संबंधी बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देकर, यह योजना स्वच्छ और अधिक टिकाऊ परिवहन की दिशा में भारत के बदलाव को सुदृढ़ करती है।

 

संदर्भ

भारी उद्योग मंत्रालय

https://pmedrive.heavyindustries.gov.in/

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2290696&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2053959&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2053889&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2298052&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2287125&reg=3&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2260368&reg=3&lang=1

https://pmedrive.heavyindustries.gov.in/docs/policy_document/Gazette%20Notification%2010%2008%202026%20on%20enhancement%20of%20Outlay%2011900%20cr.pdf 

https://heavyindustries.gov.in/sites/default/files/2025-07/psm_approved_sops.pdf

मंत्रिमंडल

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2053889&reg=48&lang=2

पीआईबी आर्काइव्ज़

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2294688&reg=48&lang=1

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पीआईबी रिसर्च

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पीके/केसी/आरटी/एसके

(तथ्य सामग्री आईडी: 151065) आगंतुक पटल : 39


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