Economy

लघु एवं मध्यम उद्यम विकास कोष

प्रविष्टि तिथि: 06 OCT 2026 19:04 PM

भारत के भावी अग्रणी उद्यमों को पूंजी उपलब्ध कराना

 

एसएमई को विकास के लिए पूंजी उपलब्ध कराने की नई पहल

एसएमई का वर्गीकरण

उद्यमों को संयंत्र और मशीनरी या उपकरणों में निवेश तथा वार्षिक कारोबार के आधार पर सूक्ष्म, लघु या मध्यम उद्यमों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। अप्रैल 2025 से प्रभावी नवीनतम मानदंडों के अनुसार, लघु उद्यम वह है जिसमें निवेश 25 करोड़ रुपये तक और वार्षिक कारोबार 100 करोड़ रुपये तक हो। मध्यम उद्यम वह है जिसमें निवेश 125 करोड़ रुपये तक और वार्षिक कारोबार 500 करोड़ रुपये तक हो।

लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये रोजगार, निर्यात, विनिर्माण उत्पादन और नवाचार में योगदान देते हैं। इनके विकास को समर्थन देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एसएमई विकास कोष (एसजीएफ) की स्थापना के लिए 10,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता को मंजूरी दी है।

यह कोष उच्च विकास क्षमता वाले ऐसे लघु एवं मध्यम उद्यमों को दीर्घकालिक इक्विटी पूंजी उपलब्ध कराएगा, जिनकी व्यावसायिक व्यवहार्यता और विस्तार की क्षमता प्रमाणित है। इसका उद्देश्य विनिर्माण, सेवा, प्रौद्योगिकी, नवाचार-आधारित क्षेत्रों और रणनीतिक मूल्य शृंखलाओं में अग्रणी उद्यमों के उभरने में सहायता करना है।

केंद्रीय बजट 2026-27 के तहत की गई समग्र घोषणाओं के हिस्से के रूप में, इस पहल का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के तंत्र को इक्विटी पूंजी, नकदी उपलब्धता और पेशेवर सहायता प्रदान करना है।

 

भारत का एमएसएमई तंत्र

अर्थव्यवस्था में योगदान: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, एमएसएमई का सकल घरेलू उत्पाद में 31.1 प्रतिशत, विनिर्माण उत्पादन में 35.4 प्रतिशत और निर्यात में 48.58 प्रतिशत योगदान है।

औपचारिक एमएसएमई आधार का विस्तार: 6 अक्टूबर 2026 तक, उद्यम और उद्यम सहायता मंच (यूएपी) के तहत कुल एमएसएमई पंजीकरण लगभग 9.78 करोड़ तक पहुंच गए। पंजीकृत एमएसएमई ने लगभग 43.28 करोड़ रोजगार अवसरों की भी जानकारी दी है।

एमएसएमई में महिलाओं की भागीदारी: महिलाओं के स्वामित्व वाले उद्यम कुल पंजीकरण का 37.6 प्रतिशत हैं।

प्रमुख आर्थिक गतिविधियों में एमएसएमई: पंजीकृत एमएसएमई का आधार व्यापार, सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्रों में फैला हुआ है। व्यापार में लगभग 4.08 करोड़ पंजीकरण हैं, इसके बाद सेवा क्षेत्र में लगभग 3.77 करोड़ और विनिर्माण क्षेत्र में लगभग 1.93 करोड़ पंजीकरण हैं।

 

 

एसएमई विकास कोष की परिचालन रूपरेखा

एआईएफ क्या हैं?

वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) भारत में स्थापित एक निजी रूप से एकत्रित कोष है, जो निवेशकों से धन जुटाता है और इसे एक निर्धारित नीति के अनुसार निवेश करता है।

निवेश संरचना और चयन

एसएमई विकास कोष को प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश कोष के रूप में तैयार किया गया है और यह एसजीएफ ढांचे के तहत स्थापित वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) के रूप में कार्य करेगा।

एसएमई विकास कोष का रणनीतिक फोकस

a) विनिर्माण को प्राथमिकता: एसएमई विकास कोष के आवंटन का एक बड़ा हिस्सा लघु और मध्यम विनिर्माण-केंद्रित उद्यमों के लिए निर्देशित किया जाएगा।

इस कोष का उद्देश्य विनिर्माण क्षमता का विस्तार, उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने, उत्पादकता में सुधार और निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही कंपनियों को सहायता प्रदान करना है।

b) औद्योगिक क्लस्टरों तक विकास का विस्तार: यह कोष टियर-II और टियर-III शहरों में औद्योगिक क्लस्टरों में काम कर रहे एसएमई पर भी विचार करेगा।

इससे संतुलित क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने, स्थानीय आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

एसएमई को समर्पित विकास कोष की आवश्यकता क्यों है?

अर्थव्यवस्था में एमएसएमई की व्यापक मौजूदगी के बावजूद, मौजूदा इक्विटी कोष मुख्य रूप से शुरुआती चरण के उद्यमों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिनमें सूक्ष्म उद्यम भी शामिल हैं। इससे लघु और मध्यम उद्यमों के लिए विकास हेतु इक्विटी पूंजी तक पहुंच को और बढ़ाने की गुंजाइश बनती है।

ऐसी पूंजी तब महत्वपूर्ण हो जाती है, जब एसएमई अपने कारोबार का और विस्तार करने का प्रयास करते हैं। यह उद्यमों को उनकी विकास यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ावों से आगे बढ़ने और बड़े स्तर तथा अधिक प्रतिस्पर्धात्मकता की दिशा में आगे बढ़ने में भी मदद कर सकती है। ये निवेश संभावनाशील एसएमई को उद्योग जगत में अग्रणी उद्यमों के रूप में विकसित होने में सहायता कर सकते हैं।

दीर्घकालिक विकास पूंजी एसएमई के विस्तार को कैसे सक्षम बनाती है

परिचालन का विस्तार

अधिग्रहण करना

नवाचार को बढ़ावा देना

वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकरण

उन्नत प्रौद्योगिकी को अपनाना

रणनीतिक निवेश करना

विनिर्माण क्षमता में निवेश करना

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करना

नवाचार, विकास और रोजगार पर प्रभाव

इस कोष से प्रमुख क्षेत्रों में उच्च क्षमता वाले एसएमई के विकास को मजबूत करने की उम्मीद है। इसका प्रभाव उद्यमों के विस्तार, प्रतिस्पर्धात्मकता और रोजगार सृजन तक पहुंचने का लक्ष्य रखता है।

  • इससे राष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रों में कार्यरत उद्यमों को सहायता मिलने की उम्मीद है।
  • यह एसएमई को क्षमता का विस्तार करने और परिचालन का विस्तार करने में भी मदद करेगा, जिससे रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
  • इस पहल का उद्देश्य ऐसी भारतीय कंपनियों की एक मजबूत श्रृंखला तैयार करना है, जिनके पास क्षेत्र-विशेष के अग्रणी उद्यम बनने के लिए आवश्यक स्तर, विनिर्माण क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता हो।

 

एमएसएमई के लिए व्यापक सहायता तंत्र

एमएसएमई को वित्त, रोजगार सृजन, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी, समग्र सहायता और सार्वजनिक खरीद सहित कई क्षेत्रों में सहायता प्रदान की जाती है।

प्रमुख क्षेत्र

प्रमुख कार्यान्वयन योजनाएं

ऋण और वित्तीय सहायता

सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी कोष न्यास (सीजीटीएमएसई)

रोजगार सृजन

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी)

शुरू से अंत तक सहायता

पीएम विश्वकर्मा

प्रशिक्षण और उद्यमिता विकास

एमएसएमई कौशल विकास, उद्यमिता और कौशल विकास कार्यक्रम (ईएसडीपी), एस्पायर

प्रौद्योगिकी अवसंरचना और सक्षमीकरण

एमएसएमई के प्रदर्शन में सुधार और तेजी लाना (आरएएमपी), शून्य दोष (जेडईडी) योजना, टूल रूम और प्रौद्योगिकी केंद्र

सार्वजनिक खरीद

एमएसएमई संबंध, एससी/एसटी हब

निष्कर्ष

एसएमई विकास कोष, सुधारों, डिजिटलीकरण, ऋण सहायता और कारोबार सुगमता से जुड़े उपायों के माध्यम से एसएमई क्षेत्र को मजबूत करने के जारी प्रयासों का पूरक है। निवेश को प्रोत्साहित करके यह कोष नवाचार-आधारित औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देगा, साथ ही आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत@2047 के विजन को आगे बढ़ाएगा।

छोटे उद्यमों के लिए यह सहायता विकास को अधिक समावेशी बनाने के भारत के व्यापक प्रयास को दर्शाती है, जिसमें देशभर में अवसरों का विस्तार किया जा रहा है।

संदर्भ

मंत्रिमंडल:

https://www.pib.gov.in/PressReleasepage.aspx?PRID=2319532&reg=48&lang=1

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई):

https://www.msme.gov.in/ministry/about-us/details/Title%3DWhat%27s-MSME-IzMzITMtQWa

https://dashboard.msme.gov.in/

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड:

https://www.sebi.gov.in/sebi_data/faqfiles/jan-2017/1485861425527.pdf

पीआईबी अभिलेखागार:

https://www.pib.gov.in/FactsheetDetails.aspx?ModuleId=16&NoteId=150826&id=150826&lang=2&reg=48

लघु एवं मध्यम उद्यम विकास कोष

*****

पीआईबी अनुसंधान

पीके/केसी/आरटी/वीएस

(तथ्य सामग्री आईडी: 151091) आगंतुक पटल : 21


Provide suggestions / comments
इस विश्लेषक को इन भाषाओं में पढ़ें : English , Bengali , Assamese , Kannada