Social Welfare
कैंसर की सस्ती दवाएं : नए सीमित मार्जिन का मरीजों पर क्या होगा असर
प्रविष्टि तिथि:
06 NOV 2026 14:12 PM
137 एंटी-कैंसर दवाओं पर व्यापार मार्जिन अधिकतम खुदरा मूल्य का 30% तक सीमित किया गया
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भारत सरकार की प्राथमिकता हर परिवार को किफायती और गुणवत्तापूर्ण कैंसर उपचार उपलब्ध कराना है। 17 अक्टूबर, 2026 को राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने पेटेंट प्राप्त दवाओं सहित 137 गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापार मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के 30% तक सीमित कर दिया। संशोधित मूल्य 9 नवंबर, 2026 से प्रभावी होंगे। 4 नवंबर, 2026 तक, 70 कंपनियों ने 120 दवाओं के लिए संशोधित एमआरपी की घोषणा की थी, जिसमें सबसे अधिक 96.45% की कमी और 3,357.49 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत दर्ज की गई थी। एमआरपी में औसतन कमी 20% से 70% तक है।
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कैंसर की दवाओं की कीमतों में औसतन 20% से 70% तक की कमी आई
भारत में कैंसर के इलाज को अधिक किफायती बनाने के लिए सरकार ने देश भर में खुदरा और अस्पताल फार्मेसियों सहित दवा आपूर्ति की कड़ी में अधिक मार्कअप पर सीमा लगा दी है।
- कंपनियों ने एमआरपी में औसतन 20% से 70% तक की कमी दर्ज की है। सबसे अधिक कमी 96.45% दर्ज की गई (4 नवंबर, 2026 तक)।
- इन एमआरपी में कमी के कारण, अनुमानित बचत 3,357.49 करोड़ रुपये है (4 नवंबर, 2026 तक)। यह अनुमान अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक बेची गई मात्रा पर लागू मूल और संशोधित कीमतों के बीच के अंतर को दर्शाता है।
- यह सीमा कैंसर रोधी दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) और खरीद मूल्य के बीच अंतर को लेकर राज्य अधिकारियों, रोगियों और नागरिकों की ओर से उठाई गई चिंताओं के उत्तर में निर्धारित की गई है।
- उपभोक्ता एनपीपीए वेबसाइट और आधिकारिक फार्मा सही दाम मोबाइल ऐप दोनों का उपयोग करके कीमतों की पुष्टि कर सकते हैं।
- नई कीमतें मार्च 2026 के वितरक मूल्य के आधार पर निर्धारित की गई हैं।
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व्यापार मार्जिन क्या है?
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व्यापार मार्जिन वह अंतर है जो निर्माता की ओर से स्टॉक रखने वाले/ वितरक से ली जाने वाली कीमत और किसी दवा के लिए रोगी की ओर से भुगतान की जाने वाले अधिकतम मूल्य (एमआरपी) के बीच होता है, जिसमें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) शामिल नहीं होता है। जब यह व्यापार मार्जिन बहुत अधिक होता है, तो आपूर्ति श्रृंखला में भारी मुनाफा जुड़ जाता है। इससे रोगियों के लिए अंतिम लागत बहुत बढ़ जाती है, जिससे पहले से ही महंगी कैंसर की दवाएं निर्माता की ओर से बेची जाने वाली कीमत से कहीं अधिक महंगी हो जाती हैं।
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इस आदेश के अनुसार, प्रत्येक दवा का नया अधिकतम खुदरा मूल्य मार्च 2026 के औसत वितरक मूल्य से निर्धारित किया गया है। उस मूल्य पर व्यापार मार्जिन 30% से अधिक नहीं हो सकता है, और उस पर जीएसटी जोड़ा जाएगा।

दवाओं की कीमतों को कैसे नियंत्रित किया जाता है
- मरीजों के लिए जीवन रक्षक आवश्यक दवाओं को अधिक किफायती बनाने के लिए, सरकार औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (डीपीसीओ), 2013 के अंतर्गत दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करती है।
- यह आवश्यक वस्तु अधिनियम के जनादेश के अंतर्गत है, जिसका उद्देश्य दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करना, मुनाफाखोरी को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि जरूरी उपचार किफायती बने रहें।
- डीपीसीओ, 2013 के अनुसार दवाओं को दो समूहों में बांटा गया है:
- अनुसूचित दवाएं: ये वे दवाएं हैं जो डीपीसीओ, 2013 की पहली अनुसूची में शामिल हैं, जो राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची (एनएलईएम), 2022 है। सरकार इनमें से प्रत्येक के लिए अधिकतम मूल्य निर्धारित करती है। एनएलईएम 2022 में 388 दवाएं सूचीबद्ध हैं, जिनमें से 63 कैंसर रोधी दवाएं हैं।
- गैर-अनुसूचित दवाएं: ये वे दवाएं हैं जो डीपीसीओ, 2013 की पहली अनुसूची में शामिल नहीं हैं। अनुसूचित दवाओं के उलट, जिनकी अधिकतम कीमत तय होती है, इनका विनियमन मूल्य निगरानी के माध्यम से किया जाता है: डीपीसीओ, 2013 के अनुच्छेद 20 के अंतर्गत, एक निर्माता बारह महीने में एमआरपी को 10% से अधिक नहीं बढ़ा सकता है, और यदि बढ़ोतरी 10% से अधिक हो जाती है, तो अगले बारह महीने के लिए कीमत को वापस 10% के स्तर पर लाना होगा।
- इन निर्धारित आवश्यक दवाओं के साथ-साथ अन्य दवाओं की उच्च कीमतों पर ध्यान देने के लिए, सरकार ने 2019 में 42 गैर-निर्धारित कैंसर-रोधी दवाओं को कवर करते हुए एक व्यापार मार्जिन युक्तिकरण (टीएमआर) हस्तक्षेप का प्रायोगिक परीक्षण किया, जिसने रोगियों के लिए लागत को सफलतापूर्वक कम किया।
- इसी आधार पर, और खुदरा और अस्पताल की कीमतों के बीच अधिक मार्जिन और अंतर दर्शाने वाले बाजार आंकड़ों के आधार पर, सरकार ने डीपीसीओ, 2013 के अनुच्छेद 19 के तहत अपनी असाधारण जनहित शक्तियों का इस्तेमाल किया। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के तहत गठित एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर, प्राधिकरण ने 17 अक्टूबर, 2026 के अपने आदेश के माध्यम से 137 गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं (पेटेंट वाली दवाओं सहित) को व्यापार मार्जिन युक्तिकरण के अंतर्गत लाया।
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राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची क्या है?
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राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची (एनएलईएम) भारत के लिए जरूरी, उच्च प्राथमिकता वाली दवाओं की एक आधिकारिक सूची है। इसका नवीनतम संशोधित संस्करण, एनएलईएम 2022, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 13 सितंबर, 2022 को सरकार के "सबको दवाई, सस्ती दवाई" के दृष्टिकोण के तहत जारी किया गया था।
इतिहास: इसे पहली बार 1996 में बनाया गया था, फिर 2003, 2011, 2015 और 2022 में अपडेट किया गया।
किसने बनाई: स्टैंडिंग नेशनल कमेटी ऑन मेडिसिन्स (एसएनसीएम) नामक एक विशेषज्ञ पैनल ने डॉक्टरों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों से बात करने और डब्ल्यूएचओ मानकों की जांच करने के बाद इसे बनाया।
- कम लागत: परिवारों के लिए चिकित्सा संबंधी खर्चों को कम करने में सहायक।
- बेहतर स्वास्थ्य सेवा: दवाओं की सुरक्षा, प्रभावशीलता और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करती है।
- बेहतर योजना: सरकारी खरीद, अस्पताल बजट, स्वास्थ्य बीमा और मेडिकल छात्रों के प्रशिक्षण में मार्गदर्शन प्रदान करती है।
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आदेश के पीछे कानूनी शक्ति: डीपीसीओ, 2013 का पैराग्राफ 19
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- सरकार के लिए विशेष शक्तियां: असाधारण परिस्थितियों में, सरकार मानक नियमों से परे जनहित में कार्रवाई कर सकती है।
- मूल्य निर्धारण या बदलाव: सरकार को किसी भी दवा के लिए अधिकतम (सीलिंग) मूल्य या खुदरा मूल्य निर्धारित करने का अधिकार है, जब तक वह इसे आवश्यक समझती है।
- पहले से तय कीमत में बदलाव: यदि कोई कीमत पहले से तय हो चुकी है, तो सरकार थोक मूल्य सूचकांक से जुड़े सामान्य वार्षिक संशोधन की प्रतीक्षा किए बिना, इसे सीधे बढ़ा या घटा सकती है।
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नई व्यवस्था कैंसर की दवाओं पर व्यापार मार्जिन को कैसे सीमित करती है
- व्यापार मार्जिन अधिकतम खुदरा मूल्य का 30% तक सीमित: व्यापार मार्जिन (निर्माता की ओर से वितरक से ली गई राशि और रोगी द्वारा भुगतान की गई राशि के बीच का अंतर) 30% से अधिक नहीं हो सकता।
- सभी रूपों पर लागू: यह नियम नीचे सूचीबद्ध सभी कैंसर-रोधी दवाओं पर लागू होता है, चाहे उनकी खुराक या रूप कुछ भी हो (गोलियां, इंजेक्शन आदि) और चाहे वे अकेले बेची जाएं या साथ में।
- मार्च 2026 की कीमतों के आधार पर: इस गणना के लिए प्रारंभिक मूल्य मार्च 2026 तक वितरक मूल्य (स्टॉक रखने वाले/ वितरक को मूल्य) होना चाहिए।
नई अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) की गणना कैसे की जाती है
इस आदेश में रोगी से ली जा सकने वाली अधिकतम खुदरा कीमत का सूत्र निर्धारित किया गया है:

इस आदेश के अंतर्गत आने वाली कैंसर रोधी दवाएं
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क्रम संख्या
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दवा का नाम
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क्रम संख्या
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दवा का नाम
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1
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एबेमेसिक्लिब
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70
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लेन्वाटिनिब
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2
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एबिराटेरोन एसीटेट
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71
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लोमुस्टीन
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3
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अकालाब्रुटिनिब
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72
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लोर्लैटिनिब
|
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4
|
अफैटिनिब
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73
|
लिम्फोसेक किट
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5
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एलेक्टिनिब
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74
|
मेस्ट्रोल
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6
|
अल्पेलिसिब
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75
|
मिडोस्ट्रुरिन
|
|
7
|
एमिवेंटामैब
|
76
|
मिरवेटक्सिमैब सोरवतंसाइन
|
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8
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एनास्ट्राज़ोल
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77
|
मिटोमाइसिन
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9
|
अपालुटामाइड
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78
|
मिटोक्सेंट्रोन
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10
|
एस्सीमिनिब
|
79
|
नेलाराबीन
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11
|
एटेज़ोलिज़ुमैब
|
80
|
नेटुपिटेंट
|
|
12
|
एवेलुमैब
|
81
|
निलोटिनिब
|
|
13
|
एक्सिटिनिब
|
82
|
निमोटुज़ुमैब
|
|
14
|
एज़ासिटिडाइन
|
83
|
निन्तेदानिब
|
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15
|
बेलेंटामैब मैफोडोटिन
|
84
|
निरापरिब
|
|
16
|
बेवाकिज़ुमैब
|
85
|
निवोलुमाब
|
|
17
|
बोसुटिनिब
|
86
|
ओबिनुटुज़ुमैब
|
|
18
|
ब्रेंटुक्सिमाब वेडोटिन
|
87
|
ओफातुमुमाब
|
|
19
|
ब्रिगाटिनिब
|
88
|
ओलापैरिब
|
|
20
|
बुसल्फान
|
89
|
ओसिमर्टिनिब
|
|
21
|
कैबाज़िटैक्सेल
|
90
|
पाल्बोसिक्लिब
|
|
22
|
कैबोज़ेंटिनिब (एस)- मैलिएट
|
91
|
पैनिटुमुमैब (वेक्टिबिक्स)
|
|
23
|
कैपमैटिनिब
|
92
|
पाज़ोपानिब (हाइड्रोक्लोराइड के रूप में)
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|
24
|
कार्फिलज़ोमिब
|
93
|
पेगास्पर्गिनेज़
|
|
25
|
कार्मुस्टाइन
|
94
|
पेगफिलग्रैस्टिम
|
|
26
|
सेरिटिनिब
|
95
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पेगीलेटेड इंटरफेरॉन अल्फा 2बी
|
|
27
|
सेटुक्सिमाब
|
96
|
पेम्ब्रोलिज़ुमैब
|
|
28
|
क्लैड्रिबाइन
|
97
|
पेमेट्रेक्स्ड
|
|
29
|
क्लोफाराबाइन
|
98
|
पर्टुज़ुमैब
|
|
30
|
क्रिज़ोटिनिब
|
99
|
पर्टुज़ुमैब + ट्रैस्टुज़ुमैब
|
|
31
|
साइटाराबाइन
|
100
|
प्लेरिक्सफ़ोर
|
|
32
|
डाब्राफेनिब
|
101
|
पोलाटुज़ुमाब वेडोटिन
|
|
33
|
डाकोमिटिनिब
|
102
|
पोमालिडोमाइड
|
|
34
|
डाराटुमुमाब
|
103
|
रामूसीरुमाब
|
|
35
|
डारोलुटामाइड
|
104
|
रेगोराफेनिब
|
|
36
|
डासैटिनिब
|
105
|
रेलुगोलिक्स
|
|
37
|
डाटोपोटामैब डेरक्सटेकन
|
106
|
रिबोसिक्लिब
|
|
38
|
डेसिटाबाइन
|
107
|
रुकापारिब
|
|
39
|
डेगारेलिक्स
|
108
|
रुक्सोलिटिनिब
|
|
40
|
डेनोसुमैब
|
109
|
सेल्परकेटिनिब
|
|
41
|
डोस्टारलिमैब
|
110
|
सेलुमेटिनिब
|
|
42
|
दुर्वालुमाब
|
111
|
सर्पलुलिमैब
|
|
43
|
एलरानाटामैब
|
112
|
सोटोरासिब
|
|
44
|
एनफोर्टुमैब वेडोटिन
|
113
|
सुनीटिनिब
|
|
45
|
एंट्रेक्टिनिब
|
114
|
टैल्केटामैब
|
|
46
|
एन्ज़ालुटामाइड
|
115
|
टेक्लिस्टामैब
|
|
47
|
एपिरुबिसिन
|
116
|
टेगाफुर + यूरासिल
|
|
48
|
एरडाफिटिनिब
|
117
|
टेगाफुर, गिमेरासिल और ओटेरासिल
|
|
49
|
एरिबुलिन मेसिलेट
|
118
|
टेमसीरोलिमस
|
|
50
|
एर्लोटिनिब
|
119
|
टेपोटिनिब
|
|
51
|
एस्ट्रामस्टाइन
|
120
|
थियोटेपा
|
|
52
|
एवरोलिमस
|
121
|
टिसलेलिज़ुमाब
|
|
53
|
एक्सेमेस्टेन
|
122
|
टोसिलिज़ुमैब
|
|
54
|
फ्लूडाराबिन
|
123
|
टोपोटेकन
|
|
55
|
फुल्वेस्ट्रेंट
|
124
|
टोरिपालिमाब
|
|
56
|
गिल्टेरिटिनिब
|
125
|
ट्राबेक्टेडिन
|
|
57
|
गोसेरेलिन एसीटेट
|
126
|
ट्रामेटिनिब
|
|
58
|
इब्रितुमोमैब
|
127
|
ट्रेमेलिमुमैब
|
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59
|
इब्रूटिनिब
|
128
|
ट्रेओसल्फान
|
|
60
|
इडेलालिसीब
|
129
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ट्राइफ्लुरिडाइन + टिपिरासिल
|
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61
|
इफोस्फैमाइड और मेस्ना
|
130
|
ट्रिप्टोरेलिन
|
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62
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निवोलुमैब और रेलैटिमैब
|
131
|
टुकाटिनिब
|
|
63
|
पेगिलेटेड लिपोसोमल इरिनोटेकन
|
132
|
वेमुराफेनिब
|
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64
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इनोटुजुमैब ओज़ोगामिसिन
|
133
|
वेनेटोक्लैक्स
|
|
65
|
इंटरफेरॉन अल्फा 2बी
|
134
|
विनोरेलबाइन टार्ट्रेट
|
|
66
|
इपिलिमुमैब
|
135
|
वोरासिडेनिब
|
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67
|
इवोसिडेनिब
|
136
|
ज़ानुब्रुटिनिब
|
|
68
|
लैपाटानिब
|
137
|
ज़ोल्बेटुक्सिमाब
|
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69
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लेज़र्टिनिब
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स्रोत: रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय, एनपीपीए आदेश एस.ओ. 5690(ई) दिनांक 17 अक्टूबर, 2026
मरीजों और कंपनियों के लिए क्या बदलाव आएंगे?
- निर्माताओं को मार्च 2026 से अपने औसत वितरक मूल्यों का इस्तेमाल कर अपनी अधिकतम खुदरा कीमतों की पुनर्गणना करनी होगी। रोगी सहायता कार्यक्रमों के अंतर्गत दी जाने वाली मुफ्त दवाएं और सरकार की ओर से सीधे बेची जाने वाली दवाएं इस गणना में शामिल नहीं होंगी।
- नई कम कीमतें 9 नवंबर, 2026 से प्रभावी होंगी। जो दवाएं पहले से ही नई मूल्य सीमा से सस्ती हैं, उन्हें और महंगा नहीं किया जा सकता।
- कंपनियों को एनपीपीए को अपने संशोधित मूल्यों की सूचना देनी होगी। उन्हें समाचार पत्रों में मूल्य कटौती प्रकाशित करनी होगी, अपनी वेबसाइटों पर भी इसे प्रदर्शित करना होगा और सभी खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों के साथ इसे साझा करना होगा।
- एनपीपीए ने इन दवाओं के संशोधित मूल्य अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिए हैं और कंपनियों की ओर से संशोधित मूल्य प्रस्तुत किए जाने पर सूची को अपडेट किया जाता है।
- 4 नवंबर, 2026 तक, 70 कंपनियों ने 120 दवाओं की 1,136 स्टॉक रखने वाली इकाइयों (एससीयू) के लिए संशोधित एमआरपी की रिपोर्ट दी थी।

- कंपनियों को बिना अनुमति के दवा उत्पादन कम करने की अनुमति नहीं है, और किसी दवा का उत्पादन पूरी तरह बंद करने से पहले उन्हें 6 महीने का नोटिस देना होगा।
- अस्पतालों और दवा दुकानों को नई कीमतें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होंगी। जो भी कंपनी कीमतें कम नहीं करती है, उसे अधिक वसूली गई राशि ब्याज सहित वापस करनी होगी।
कैंसर देखभाल के लिए विस्तृत सरकारी मदद
सरकार जनता को किफायती कैंसर उपचार, जांच और दवाएं उपलब्ध कराने के लिए कई स्वास्थ्य कार्यक्रम चला रही है।
एबी-पीएमजेएवाई: नकद रहित अस्पताल सेवाएं, जिसमें कैंसर उपचार भी शामिल है
- भारत सरकार आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के माध्यम से समाज के सबसे गरीब 40% परिवारों और 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को प्रति परिवार सालाना 5 लाख रुपये की मदद प्रदान करती है।
- इस योजना के अंतर्गत 30 जून, 2026 तक 1.92 लाख करोड़ रुपये की लागत से 12.69 करोड़ अस्पताल में भर्ती होने की अनुमति दी गई है।
- इस योजना के तहत सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी सहित 27 चिकित्सा विशिष्टताओं में 1,961 प्रक्रियाओं के लिए नकद रहित उपचार उपलब्ध है।
- इस योजना के अंतर्गत, मेडिकल ऑन्कोलॉजी के लिए 19.5 लाख प्रवेश मंजूर किए गए, जिनकी लागत लगभग 2,926 करोड़ रुपये है (4 नवंबर, 2026 तक)।
एनपी-एनसीडी: कैंसर की जांच से लेकर उपचार तक की देखभाल
- सरकार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत आने वाले अपने गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) के माध्यम से, कैंसर सहित गैर-संचारी रोगों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, मानव संसाधन विकास, जांच, शीघ्र निदान, रेफरल, उपचार और स्वास्थ्य संवर्धन को सुदृढ़ करती है।
- एनपी-एनसीडी के अंतर्गत:
- कैंसर रोगियों के लिए 770 जिला एनसीडी क्लीनिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 6,410 एनसीडी क्लीनिक और 524 डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित किए गए हैं।
- कैंसर उपचार इंफ्रास्ट्रक्चर को मजूबत करने के लिए, सरकार तृतीयक देखभाल कैंसर सुविधाओं को सुदृढ़ करने की योजना के अंतर्गत राज्य कैंसर संस्थानों (एससीआई), तृतीयक देखभाल कैंसर केंद्रों (टीसीसीसी) और एनपी-एनसीडी के तहत डीसीसीसी की स्थापना का सहयोग कर रही है, जिससे देश भर में गुणवत्तापूर्ण कैंसर देखभाल तक समान पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
- तृतीयक कैंसर देखभाल को मजबूत करने के लिए देशभर में 19 राज्य कैंसर संस्थान (एससीआई) और 20 तृतीयक कैंसर केंद्र (टीसीसीसी) को मंजूरी दी गई है।
- इसके साथ ही, टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) ने कैंसर देखभाल प्रदान करने के लिए वाराणसी, विशाखापत्तनम, न्यू चंडीगढ़, गुवाहाटी, संगरूर और मुजफ्फरपुर में छः अस्पताल स्थापित किए हैं।
- सभी 22 नए एम्स में निदान, चिकित्सा और शल्य चिकित्सा सुविधाओं सहित कैंसर उपचार सेवाएं भी उपलब्ध करा दी गई हैं।
- इसके अतिरिक्त, नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (एनसीआई), झज्जर और चित्तरंजन नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (सीएनसीआई), कोलकाता का दूसरा परिसर एडवांस निदान और उपचार सुविधाएं प्रदान करता है।
- यह कार्यक्रम भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम (एनसीआरपी) के माध्यम से जनसंख्या आधारित स्क्रीनिंग, जोखिम कारकों के बारे में जागरूकता पैदा करने और कैंसर निगरानी को मजबूत करने में भी मदद करता है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सामान्य कैंसर की जांच
- आयुष्मान आरोग्य मंदिर, जो देश भर में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र हैं, अपने समुदायों में कैंसर की जांच भी प्रदान करते हैं।
- देशभर में 1.86 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएएम) कार्यरत हैं (12 अगस्त, 2026 तक)। ये मंदिर 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की सामान्य कैंसर (मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) की जांच करने के साथ-साथ अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं भी प्रदान करते हैं।
- मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) और सहायक नर्स मिडवाइव्स (एएनएम) जैसे प्रशिक्षित फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के माध्यम से रोकथाम, नियंत्रण और स्क्रीनिंग सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
- जुलाई 2026 तक की गई स्क्रीनिंग:
- मुंह का कैंसर: 36.11 करोड़
- स्तन कैंसर: 16.94 करोड़
- गर्भाशय ग्रीवा कैंसर: 9.31 करोड़
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम के लिए निःशुल्क एचपीवी टीकाकरण
- राष्ट्रव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान 28 फरवरी, 2026 को सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 14 वर्ष की आयु की लगभग 1.2 करोड़ पात्र लाभार्थी लड़कियों के लिए शुरू किया गया था।
- इस अभियान के शुरू होने के बाद से (11 सितंबर, 2026 तक) भारत में एचपीवी वैक्सीन की 80 लाख से अधिक खुराकें निःशुल्क दी जा चुकी हैं।
कम लागत वाली दवाई की दुकानें: जन औषधि और अमृत
- सरकार आम जनता के लिए कैंसर की दवाओं सहित आवश्यक दवाओं को अधिक किफायती बनाने के लिए कई योजनाएं भी चलाती है।
- ये योजनाएं सस्ती कैंसर दवाओं, स्टेंट और प्रत्यारोपण तक पहुंच में सुधार करती हैं, जेब से होने वाले खर्च को कम करती हैं और दीर्घकालिक उपचार के प्रति प्रतिबद्धता को प्रोत्साहन देती हैं।
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी)
- पीएमबीजेपी के अंतर्गत 2,110 दवाइयां और 315 शल्य चिकित्सा उत्पाद, चिकित्सा उपभोग्य वस्तुएं और उपकरण शामिल हैं, जिनमें कैंसर सहित सभी प्रमुख चिकित्सा समूह शामिल हैं।
- देश भर में 20,149 जन औषधि केंद्र हैं (30 जून, 2026 तक)।
- वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक, पीएमबीजेपी ने देश भर के जन औषधि केंद्रों के माध्यम से 7,873.85 करोड़ रुपये की बिक्री की, जिससे नागरिकों को लगभग 37,200 करोड़ रुपये की बचत हुई (31 मार्च, 2026 तक)।
उपचार फार्मेसियों के लिए किफायती दवाएं और विश्वसनीय प्रत्यारोपण
- अमृत (उपचार के लिए विश्वसनीय प्रत्यारोपण और किफायती दवाएं) का उद्देश्य कैंसर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं को किफायती दामों पर उपलब्ध कराना है।
- इस पहल के तहत 6,500 से अधिक दवाएं, प्रत्यारोपण, शल्य चिकित्सा उत्पाद और अन्य स्वास्थ्य संबंधी वस्तुएं अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर औसतन 50% तक की छूट पर उपलब्ध हैं।
- 24 राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में 285 अमृत आउटलेट कार्यरत हैं।
- स्थापना के बाद से, अमृत ने 8.13 करोड़ से अधिक रोगियों को सेवा प्रदान की है।
- नेटवर्क के माध्यम से लगभग 22,323 करोड़ रुपये मूल्य की दवाएं और स्वास्थ्य उत्पाद एमआरपी पर वितरित किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप रोगियों को लगभग 10,969 करोड़ रुपये की बचत हुई है और उनके स्वास्थ्य देखभाल संबंधी खर्चों को कम करने में मदद मिली है (24 सितंबर, 2026 तक)।
कैंसर के इलाज के लिए फोन पर मदद
विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए, विशेष रूप से दूरस्थ और कम सुविधा वाले क्षेत्रों में, ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म के माध्यम से टेलीकंसल्टेशन सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इसमें कैंसर का इलाज भी शामिल है।
- 21 अक्टूबर, 2026 तक 50 करोड़ से अधिक मरीज कैंसर सहित सभी प्रकार के इलाज के लिए इस सेवा का उपयोग कर चुके हैं।
कैंसर के इलाज को किफायती और सुलभ बनाना
व्यापार सीमा सीमा लागू करने से सरकार की ओर से कैंसर देखभाल के हर चरण: आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्क्रीनिंग, लड़कियों के लिए निःशुल्क एचपीवी टीकाकरण, एबी-पीएमजेएवाई के तहत कैशलेस अस्पताल उपचार, और जन औषधि केंद्रों और अमृत फार्मेसियों में कम लागत वाली दवाएं; में दी जा रही सहायता और भी मजबूत होती है। ये सभी तरीके मिलकर अधिक परिवारों के लिए गुणवत्तापूर्ण कैंसर देखभाल को उनके निवास स्थान के करीब लाते हैं।
संदर्भ
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पीआईबी शोध
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पीके/केसी/आरटी/एमएम
(तथ्य सामग्री आईडी: 151170)
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