Farmer's Welfare
सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण बाजार में बुनियादी नवोन्मेष का उत्सव
Posted On: 26 AUG 2026 11:43AM
भारत के जायकों को मिला नया क्षितिज
इंडिया हैबिटेट सेंटर में, भारत के विविध व्यंजनों की राष्ट्रीय प्रदर्शनी ने आगंतुकों का स्वागत किया। स्टॉलों पर अनूठे, विशिष्ट और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की एक प्रभावशाली श्रृंखला प्रदर्शित की गई, जिनमें से प्रत्येक ज़मीनी स्तर की उद्यमशीलता और क्षेत्रीय विरासत की कहानी बयां कर रही थी।
इस जीवंत पृष्ठभूमि के बीच, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने 24-25 अगस्त 2026 को पीएमएफएमई (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना) बाजार का आयोजन किया। 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शकों को एक साथ लाते हुए, इस बाजार ने भारत की समृद्ध पाक विविधता का उत्सव मनाया।

इस आयोजन ने सूक्ष्म खाद्य उद्यमों, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सहकारी समितियों और उद्यमियों को अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने, खरीदारों से जुड़ने और नए बाजारों की तलाश करने का एक मंच प्रदान किया। मोटे अनाज और मसालों से लेकर अचार, स्नैक्स, पेय पदार्थों और अन्य मूल्यवर्धित खाद्य पदार्थों तक, इस बाजार ने यह प्रदर्शित किया कि कैसे स्थानीय सामग्रियों और पारंपरिक विधियों को व्यापक पहुंच वाले आशाजनक ब्रांडों में बदला जा सकता है।

29 जून 2020 को शुरू की गई पीएमएफएमई योजना वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता के माध्यम से सूक्ष्म खाद्य उद्योगों की सहायता करती है, जिससे उद्यमियों को नई इकाइयाँ स्थापित करने या मौजूदा इकाइयों को बेहतर करने में मदद मिलती है।
फ़राज़ की कहानी भारत के सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलाव का एक हिस्सा है। पीएमएफएमई बाज़ार में खड़े होकर, फ़राज़ ने लोगों को 'एसएचएचई फूड्स' के स्टॉल पर रुकते हुए देखा, जहाँ उनकी टीम गर्व से बिहार से शुरू हुए अपने सफर के बारे में बता रही थी। फ़राज़ के लिए यह केवल बाज़ार में बिताया एक पल भर नहीं था, बल्कि इस बात की याद दिलाता एक अनुभव था कि उनका छोटा सा उद्यम कितनी दूर तक का सफर तय कर चुका है।

'एसएचएचई फूड्स प्राइवेट लिमिटेड' की शुरुआत 2021 में एक साधारण से विचार के साथ हुई थी: बिहार के मशहूर मखाने को एक नई और आधुनिक पहचान देना। टीम ने मूल्यवर्धित उत्पादों के साथ प्रयोग करना शुरू किया, जिसमें मखाना-मिश्रित कुकीज़ और आसानी से इस्तेमाल किए जा सकने वाले छोटे, सुविधाजनक मखाना पैक शामिल थे।
2021 में पीएमएफएमई योजना के साथ जुड़ने पर कंपनी को काफी बढ़ावा मिला, इससे उसकी पहचान बढ़ी, ब्रांड बनाने में मदद मिली और नए व्यापार के मौके खुले। पीएमएफएमई बाज़ार खुद भी ग्राहकों और बिज़नेस से जुड़े लोगों से संपर्क बनाने का एक अहम ज़रिया बनता जा रहा है।
इस योजना का असर और भी गहरा हुआ और इसने 'एसएचएचई फूड्स' को अपनी प्रसंस्करण इकाई को अपग्रेड करने में मदद की। पीएमएफएमई की क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी के तहत, जो प्रति इकाई 10 लाख रुपये तक की कुल परियोजना लागत का 35 प्रतिशत प्रदान करती है, कंपनी को अपने 10 लाख रुपये के ऋण पर 3 लाख रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली। इस सहायता ने इसे अधिक प्रतिस्पर्धी बनने, संचालन को औपचारिक रूप देने और विकास के नए रास्ते खोलने में मदद की। इस सहयोग से उन्होंने बेहतर मशीनरी में निवेश किया और अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाई, जिससे दैनिक प्रसंस्करण क्षमता मात्र 100 किलोग्राम से बढ़कर कम से कम 1,000 किलोग्राम प्रतिदिन हो गई। यह वृद्धि उनकी बिक्री के आंकड़ों में भी झलकती है: 2021 में 2.5-3 लाख रुपये से शुरू होकर, 'एसएचएचई फूड्स' की बिक्री अब 14 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। फ़राज़ के लिए ये आंकड़े महत्वाकांक्षा, समर्थन और तेजी से साकार होते एक सपने की कहानी बयां करते हैं। जैसे-जैसे यह योजना भारत के अलग-अलग तरह के खाद्य क्षेत्र में अपनी पहुँच बढ़ा रही है, इसका प्रभाव हर क्षेत्र में एक नया रंग और स्वाद ले रहा है।
उदयपुर में, यह प्रभाव परंपरा, प्रकृति और उद्देश्य से आकार ले रहा है। 2017 से, 'ट्राइबलवेदा' दो दुनियाओं को एक साथ ला रहा है - आदिवासी ज्ञान और आयुर्वेद, एक ऐसा संगम जो इसके नाम में ही झलकता है। जामुन का हर मौसम इस सफर में एक नई ऊर्जा भर देता है, जब 3,000 से 5,000 आदिवासी महिलाएं फल इकट्ठा करने के लिए जंगलों का रुख करती हैं और फिर इससे जामुन का सिरका, क्यूब्स और स्ट्रिप्स जैसे विशिष्ट, प्रिजर्वेटिव-मुक्त वाले उत्पाद बनाती हैं। इन महिलाओं के लिए, यह काम सिर्फ़ कमाई का ज़रिया नहीं है: इससे रोज़गार मिलता है, आजीविका मज़बूत होती है और उनके समुदायों के लिए नई संभावनाएँ खुलती हैं।

पीएमएफएमई ने इस सफर को और आगे बढ़ाया। बेहतर मशीनरी से कामकाज मज़बूत हुआ और बाज़ार तक ज़्यादा पहुँच मिलने से ‘ट्राइबलवेदा’ के उत्पादों को पहले से कहीं अधिक दूर तक पहुंचने में मदद की। आज अमेज़न, फ्लिपकार्ट और ब्रांड की अपनी वेबसाइट के माध्यम से ऑर्डर आते हैं और यह सफर भारतीय सीमाओं को पार कर दुबई और अमेरिका के ग्राहकों तक भी पहुंच गया है। जो शुरुआत थोड़े से ग्राहकों के साथ हुई थी, वह अब राजस्थान के जंगलों से कहीं आगे तक फैल चुकी है और एक साधारण से विचार को आगे बढ़ा रही है कि जब परंपरा को मौका मिलता है, तो दोनों ही फलते- फूलते हैं।
महाराष्ट्र में, मयूर हांडे का सफर इससे भी कम संसाधनों के साथ शुरू हुआ था: एक छोटा सा सेटअप और एक बड़ा सपना। 13 साल पहले शुरू हुई 'सोया रिच' सोया और टोफू के उत्पाद बनाती है। यह सोया को पीसकर दूध बनाती है, फिर उसे फ़र्मेंट करके टोफ़ू में बदला जाता है और पुदीना व स्मोक्ड जैसे फ़्लेवर मिलाकर नए उत्पाद बनाए जाते हैं। लेकिन नवाचार के लिए सही मशीनरी की आवश्यकता होती है और मशीनरी के लिए निवेश की; पीएमएफएमई से पहले, धन एक बड़ी रुकावट थी और ऋण में होने वाली देरी से विस्तार की गति और धीमी हो जाती थी।

'सोया रिच' 2021 में पीएमएफएमई योजना से जुड़ा और इस सहायता ने एक साथ कई कामों को आगे बढ़ाने में मदद की। 20 लाख रुपये की लागत वाली एक परियोजना के लिए, कंपनी ने इस योजना के तहत परियोजना की लागत का 35 प्रतिशत के पूंजीगत अनुदान के साथ बैंक ऋण लिया। यह सहायता केवल मशीनरी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने कंपनी को ब्रांड को मजबूत करने, पहुंच का विस्तार करने और व्यवसाय को सरकारी पोर्टलों से जोड़ने में भी मदद की। इसके परिणाम खुद बोलते हैं: एक छोटे से सेटअप से शुरू होकर, 'सोया रिच' अब आठ शहरों तक पहुँच रहा है और इसकी मासिक बिक्री लगभग 2 लाख रुपये से बढ़कर करीब 35 लाख रुपये हो गई है। यह सफ़र एक सीधा-सा संदेश देता है: सही मदद मिलने पर, छोटी शुरुआत भी बहुत आगे तक जा सकती है। जहाँ यह कहानी छोटी शुरुआत से आगे बढ़ी और फैली, वहीं एक और कहानी दशकों पहले शुरू हुई थी और आज नई ऊँचाइयाँ छू रही है।
पीयूष मोहंती के लिए, खाद्य प्रसंस्करण सिर्फ एक व्यवसाय नहीं बल्कि एक विरासत है जिसकी शुरुआत 1995 में ओडिशा में हुई थी। 'मालती फ़ूड प्रोडक्ट्स' में अलग-अलग तरह के मिलेट्स (मोटे अनाज) की सावधानी से सफ़ाई, पिसाई, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग की जाती है। कई सालों तक, भरोसेमंद मशीनरी न होने के कारण कंपनी वैसी गुणवत्ता हासिल नहीं कर पा रही थी जैसी उसने सोची थी। 2024 में पीएमएफएमई के साथ जुड़ने से एक नया मौका मिला: 9 लाख रुपये से अधिक की पूंजीगत सब्सिडी के माध्यम से कंपनी ने अपने को अपग्रेड किया, जिससे बेहतर प्रसंस्करण मशीनरी में निवेश करना संभव हो सका।

यह बदलाव जल्द ही नज़र आने लगा। बेहतर मशीनरी से उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार हुआ और बिक्री में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 'मालती फूड प्रोडक्ट्स' ने अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर अपनी मार्केटिंग का विस्तार किया, जबकि व्यापार मेलों में भागीदारी ने नए रास्ते खोले, जिससे उन्हें पहचान, जानकारी और मार्केट में काम के कनेक्शन मिले। हालाँकि, यह सार्थक बदलाव बिक्री के आँकड़ों या मशीनरी अपग्रेड में ही नहीं दिखता: यह बदलाव है उस भरोसे का, जिससे वे अब उन संभावनाओं के बारे में भी सोच पा रहे हैं जो पहले मुमकिन नहीं लगती थीं। बेहतर क्षमताओं और बाजार में बढ़ती मौजूदगी के साथ, मालती फूड प्रोडक्ट्स अब अगले साल से निर्यात शुरू करने की योजना बना रहा है—लगभग तीन दशक पुरानी यह कंपनी अब भारत से बाहर भी अपने कदम बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
असल में ये कहानियाँ सिर्फ़ कारोबार के बढ़ने के बारे में नहीं हैं, बल्कि सपनों के बड़े होने के हौसले के बारे में हैं। अपने रंगों, खुशबुओं और स्वादों के अलावा, यह बाज़ार एक ऐसा सन्देश छोड़ गया जो लंबे समय तक याद रहेगा: एक विचार कि अगर किसी सपने को मौका मिले, तो वह ज़िंदगी बदल सकता है।
संदर्भ
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय
https://www.pib.gov.in/PressReleaseDetail.aspx?PRID=2302922®=3&lang=1
पीआईबी बैकग्राउंडर
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=155134&ModuleId=3®=48&lang=2
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