Social Welfare
बाल विवाह मुक्त भारत
बाल विवाह मुक्त भारत की दिशा में एक प्रतिज्ञा
Posted On:
08 JAN 2026 12:44PM
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मुख्य बिंदु
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- बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का लक्ष्य साल 2026 तक बाल विवाह की दर को 10% तक कम करना और 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाना है।
- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले ने 2025 में भारत का पहला बाल विवाह मुक्त जिला बनकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
- 17 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रशासन ने 75 ग्राम पंचायतों को "बाल विवाह मुक्त पंचायत" घोषित किया।
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प्रस्तावना
कानूनी रूप से प्रतिबंधित होने के बावजूद, बाल विवाह भारत में एक व्यापक सामाजिक चुनौती बना हुआ है, जो देश भर में लाखों युवकों और युवतियों को प्रभावित कर रहा है। यह युवा लड़कियों को गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों, खासकर कम उम्र में गर्भधारण, घरेलू हिंसा के प्रति उनकी संवेदनशीलता को बढ़ाता है और गरीबी तथा लैंगिक असमानता के दुष्चक्र को कायम रखता है। भारत में प्रगति के बावजूद, 20-24 वर्ष की आयु की 23% महिलाओं का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले हो गया था (राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5, 2019-21)।[1] यह बाल विवाह को एक निरंतर खतरा और एक जघन्य अपराध के रुप में पेश करता है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार[2] जैसे राज्य बाल विवाह की सबसे अधिक घटनाओं वाले राज्यों में से हैं, लेकिन पूरे देश में बाल विवाह के छिटपुट मामले सामने आते रहे हैं।
बाल विवाह क्या है?
बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत परिभाषित बाल विवाह, ऐसा कोई भी संबंध है, जिसमें महिला/लड़की 18 वर्ष से कम आयु की और पुरुष 21 वर्ष से कम आयु का हो। यह विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में गरीबी, लैंगिक असमानता और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के दुष्चक्र को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, भारतीय कानून के तहत बाल विवाह प्रत्यक्ष रूप से बाल बलात्कार के समान है।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अनुसार, 18 वर्ष से कम उम्र की पत्नी के साथ किसी पुरुष द्वारा किया गया कोई भी यौन कृत्य बलात्कार माना जाता है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी साफ किया है कि जब कोई पति बाल विवाह के दौरान अपनी 18 वर्ष से कम उम्र की पत्नी के साथ यौन संबंध बनाता है, तो यह गंभीर यौन उत्पीड़न माना जाता है, जो बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 के तहत दंडनीय अपराध है।
भारत में बाल विवाह के खिलाफ संघर्ष

भारत में बाल विवाह पर अंकुश लगाने के प्रयास 19वीं शताब्दी में ही शुरू हो गए थे। राजा राममोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर और महात्मा ज्योतिराव फुले जैसे समाज सुधारकों ने इस प्रथा के खिलाफ अभियान चलाए, जिसके परिणामस्वरूप 1891 में सहमति के लिए आयु अधिनियम और बाद में 1929 में बाल विवाह निषेध अधिनियम (शारदा अधिनियम) लागू हुआ, जिसमें लड़कियों के लिए न्यूनतम विवाह आयु 14 वर्ष और लड़कों के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई। आज़ादी के बाद, सरकार ने 1948 के संशोधन (लड़कियों के लिए 15 वर्ष) [3], 1978 के संशोधन (लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष) और अंत में 2006 के बाल विवाह निषेध अधिनियम (महिलाओं के लिए 18 वर्ष और पुरुषों के लिए 21 वर्ष) के ज़रिए इन सीमाओं को बढ़ाया। कानूनी उपायों के साथ-साथ, देश भर में कई जागरूकता अभियान भी गति पकड़ने लगे, जैसे केंद्र सरकार का बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान (2015 से), जिनका मकसद सामाजिक मानसिकता को बदलना, लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना और समुदायों को बाल विवाह की रिपोर्ट करने और उसका विरोध करने के लिए सशक्त बनाना था।
बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 (पीसीएमए)
बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006[4] ने बाल विवाह निवारण अधिनियम, 1929 (शारदा अधिनियम) का स्थान लिया, जिसका मकसद बाल विवाहों को केवल नियंत्रित करने के बजाय पूरी तरह से प्रतिबंधित करना और पीड़ितों को अधिक मजबूत सुरक्षा और राहत प्रदान करना था।
- अधिनियम में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि "बाल" वह पुरुष है, जिसकी आयु 21 वर्ष से कम या महिला जिसकी आयु 18 वर्ष से कम है। बाल विवाह की परिभाषा के मुताबिक दोनों पक्षों में से किसी एक का बाल होना आवश्यक है।
- बाल विवाह निषिद्ध[5] हैं और बाल पक्ष द्वारा (वयस्क होने के 2 वर्ष के भीतर जिला न्यायालय में याचिका दायर करके) रद्द किए जा सकते हैं। तस्करी, बल प्रयोग, छल या अनैतिक उद्देश्यों के मामलों में ये विवाह प्रारंभ से ही अमान्य होते हैं।
- दंड: संज्ञेय और गैर-जमानती अपराधों में वयस्क पुरुषों द्वारा बच्चों से विवाह करने, ऐसे विवाहों का आयोजन/संचालन/सहयोग/प्रचार करने/उपस्थित होने (माता-पिता/अभिभावकों सहित) के लिए 2 वर्ष तक का कठोर कारावास और/या 1 लाख रुपये का जुर्माना शामिल है। महिला अपराधियों को कारावास का प्रावधान नहीं है।
- राज्य बाल विवाह निषेध अधिकारियों (सीएमपीओ) की नियुक्ति करते हैं, ताकि ऐसे विवाहों को रोका जा सके, साक्ष्य एकत्र किए जा सकें, जागरूकता बढ़ाई जा सके और आंकड़े पेश किए जा सकें। मजिस्ट्रेट होने वाले विवाहों को रोकने के लिए निषेधाज्ञा जारी करते हैं (उल्लंघन करने पर विवाह अमान्य हो जाता है)।

बाल विवाह मुक्त भारत (बीवीएमबी)
27 नवंबर, 2024 को शुरू किया गया बाल विवाह मुक्त भारत (बीवीएमबी), जिसे बाल विवाह मुक्त भारत के नाम से भी जाना जाता है, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) की देश भर में बाल विवाहों के उन्मूलन की एक साहसिक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है। यह मिशन सतत् विकास लक्ष्य (एसडीजी) 5.3 के साथ जुड़ा हुआ है, जिसका मकसद 2030[6] तक बाल विवाह, कम उम्र में विवाह और जबरन विवाह सहित सभी हानिकारक प्रथाओं को समाप्त करना है। भारत के संवैधानिक अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत निहित और बाल विवाह निषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 जैसे ऐतिहासिक कानूनों द्वारा समर्थित, बाल विवाह मुक्त भारत एक व्यापक सामाजिक समस्या का समाधान करता है, जो विशेष रूप से छोटे बच्चों, खासकर अधिकांश मामलों में लड़कियों और विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले समुदायों को असमान रूप से प्रभावित करती है।


18 अक्टूबर 2024 को रिट पिटिशन (सिविल) संख्या 1234/2017 - सोसाइटी फॉर एनलाइटनमेंट एंड वॉलंटरी एक्शन और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य - में दिए गए एक ऐतिहासिक फैसले में, माननीय सर्वोच्च न्यायालय[7] ने देश भर में बाल विवाह को प्रभावी ढंग से रोकने और समाप्त करने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक व्यापक ढांचा और विस्तृत निर्देश जारी किए। न्यायालय ने बाल विवाह पर स्पष्ट प्रतिबंध के लिए विधायी संशोधनों का आग्रह करते हुए रोक लगा दी, क्योंकि यह स्वायत्तता को कमजोर करता है और अक्सर जबरन विवाह की ओर ले जाता है। बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत प्रवर्तन को मजबूत करने के लिए, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जिला/उप-जिला स्तर पर पूर्णकालिक समर्पित बाल विवाह निषेध अधिकारियों (सीएमपीओ) की नियुक्ति करने का निर्देश दिया गया, जो अन्य कर्तव्यों से मुक्त हों और समन्वय, निगरानी और शिकायत निवारण के लिए विशेष बाल विवाह निषेध इकाइयों की स्थापना करने का निर्देश दिया गया। सक्रिय रोकथाम उपायों में शामिल हैं:
- स्कूलों, आंगनवाड़ियों, गैर सरकारी संगठनों और धार्मिक नेताओं को शामिल करते हुए अनिवार्य बहुक्षेत्रीय जागरूकता अभियान
- पुलिस, न्यायपालिका, शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी-आधारित रिपोर्टिंग पर जोर दिया गया
- जोखिमग्रस्त क्षेत्रों का डेटाबेस बनाए रखना
यह निर्णय निर्णायक रूप से सजा से हटकर रोकथाम, संरक्षण और सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करता है, जिससे ढांचा अधिक मजबूत और बाल-केंद्रित बनता है।
इस प्रकार, बाल विवाह मुक्त भारत पहल, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना जैसी पिछली पहलों को आगे बढ़ाने का एक संजीदा प्रयास है, लेकिन यह बाल विवाह की रोकथाम और प्रतिक्रिया के लिए अधिक एकीकृत, प्रौद्योगिकी-आधारित दृष्टिकोण पेश करती है।
100 दिवसीय अभियान: बाल विवाह के विरुद्ध एक गतिवर्धक अभियान
4 दिसंबर, 2025 को, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गंभीरता के साथ 100 दिवसीय विशेष अभियान शुरू किया गया है, जिसमें प्रत्येक माह एक विशिष्ट जागरूकता अभियान के लिए समर्पित है।
इसके अलावा, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के लिए, अभियान दो प्रतिष्ठित सम्मानों की शुरुआत कर रहा है:
- बाल विवाह मुक्त ग्राम प्रमाण पत्र: यह प्रमाण पत्र उन गांवों/पंचायतों को दिया जाएगा, जो औपचारिक रूप से बाल विवाह को समाप्त करने और लंबे समय तक शून्य मामले दर्ज करने का संकल्प लेते हैं।
- बाल विवाह मुक्त भारत योद्धा पुरस्कार: बाल विवाह के मामलों में रिपोर्टिंग की दक्षता, रोकथाम की सफलता और बाल विवाह के मामलों में समग्र कमी के आधार पर मूल्यांकन किए गए शीर्ष 10 प्रदर्शनकारी जिलों को यह राष्ट्रीय उपाधि प्रदान की जाएगी। इन जिलों को आधिकारिक बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल पर प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा, उन्हें एक औपचारिक प्रशंसा प्रमाण पत्र भी मिलेगा और उनके उत्कृष्ट नेतृत्व और प्रतिबद्धता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक रूप से मान्यता दी जाएगी।

राष्ट्रव्यापी अभियान का आधिकारिक शुभारंभ 4 दिसंबर, 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में एक भव्य शुभारंभ समारोह के साथ हुआ, जिसके साथ ही एक समन्वित राष्ट्रीय शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित किया गया। यह एकजुट प्रतिबद्धता भारत के पूर्णत: बाल विवाह मुक्त राष्ट्र बनने के संकल्प को पुनः स्थापित करेगी।


महिला एवं महिला विकास आयोग द्वारा निर्धारित इन उपायों को लागू करने में राज्य सरकारों की अहम भूमिका है। मुख्य सचिवों को निर्देश दिया गया है कि वे जिला स्तरीय कार्यबल गठित करें, जिसमें सीएमपीओ, गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) और पीआरआई शामिल हों। यह कार्यबल साप्ताहिक निगरानी करेगा और बीवीएमबी पोर्टल के ज़रिए भौगोलिक रूप से चिह्नित प्रगति रिपोर्ट पेश करेगा। यह अभियान शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए बहुक्षेत्रीय समन्वय पर बल देता है।
बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की यह प्रमुख पहल एक केंद्रीकृत, सार्वजनिक रूप से सुलभ मंच प्रदान करती है, जिसमें भारत भर में नियुक्त सभी बाल विवाह निषेध अधिकारियों की सूची दी गई है, बाल विवाह के मामलों की वास्तविक समय में रिपोर्टिंग की सुविधा उपलब्ध है और बाल विवाह मुक्त भारत के निर्माण में हितधारकों और नागरिकों को शामिल करने के लिए चलाए गए जागरूकता अभियानों और कार्यों पर नज़र रखी जाती है।
देशव्यापी जागरूकता अभियान: एक झलक
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इस अभियान को पूर्ण रूप से वित्त पोषित करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें एनएफएचएस-वी आंकड़ों के ज़रिए पहचाने गए 257 उच्च-मामलों वाले जिलों (वे जिले जहां बाल विवाह का प्रचलन राष्ट्रीय औसत के बराबर या उससे अधिक है) को प्राथमिकता दी गई है।[8]


बाल विवाह रोकथाम अभियान इस समय पूरे जोर-शोर से जारी है, देश भर के राज्य और केंद्र शासित प्रदेश जोश-ओ-खरोश और समन्वय के साथ इसमें भाग ले रहे हैं। स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के लाखों छात्रों के साथ-साथ ग्राम पंचायतों सहित अन्य प्रमुख हितधारकों ने बाल विवाह विरोधी शपथ ली है।
बाल विवाह मुक्त भारत की ओर: अब तक की प्रगति
अपनी शुरुआत से ही, बाल विवाह मुक्त भारत (बीवीएमबी) मिशन ने पूरे भारत में बाल विवाहों पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है और राष्ट्रीय बाल संरक्षण लक्ष्यों के अनुरूप प्रमुख प्रवर्तन और जागरूकता संबंधी उपलब्धियां हासिल की हैं। इस प्रगति का एक मुख्य आधार बाल विवाह निषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 के तहत अनिवार्य रूप से देशव्यापी समर्पित बाल विवाह निषेध अधिकारियों (सीएमपीओ) की तैनाती है। राज्य स्तरीय निर्देशों के ज़रिए सशक्त इन अधिकारियों ने घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाने और राष्ट्रीय बाल हेल्पलाइन (1098) से जुड़ी त्वरित प्रतिक्रिया टीमों सहित सक्रिय मदद की है। प्रवर्तन की एक उल्लेखनीय उपलब्धि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) द्वारा जारी अक्षय तृतीया का 2025 का निर्देश था, जिसने सामूहिक विवाहों के लिए सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील उच्च मामलों वाले समय को लक्षित किया। इससे निगरानी में वृद्धि हुई, जिसके नतीजतन न्यायिक निषेधाज्ञा, सामुदायिक परामर्श और एफआईआर दर्ज करके सैकड़ों बाल विवाह के मामलों को रोका गया। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं के साथ एकीकृत इन प्रयासों से पीसीएमए के तहत दोषसिद्धि दर में वृद्धि हुई है, साथ ही कई गांवों में "बाल विवाह निषेध क्षेत्र" को बढ़ावा मिला है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी, बीवीएमबी को वैश्विक स्तर पर, खास तौर पर यूनिसेफ से, मजबूत समर्थन मिला है, जिसके तहत यूनिसेफ ने सीएमपीओ और वन स्टॉप सेंटर्स (ओएससी) के लिए डेटा-आधारित गतिविधियों और क्षमता-निर्माण कार्यशालाओं के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की है। एसडीजी 5.3 और संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन (यूएनसीआरसी) के अनुरूप, ये उपलब्धियां भारत को दक्षिण एशिया में बाल विवाह विरोधी रणनीतियों के लिए एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करती हैं, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के बीच निरंतर समन्वय शामिल है।
छत्तीसगढ़: बाल विवाह मुक्त भारत की दिशा में उम्मीद की किरण
छत्तीसगढ़ के बलोद जिले ने भारत का पहला बाल विवाह मुक्त जिला बनकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। लगातार दो वर्षों से, इसके 436 ग्राम पंचायतों और 9 शहरी स्थानीय निकायों में एक भी बाल विवाह का मामला दर्ज नहीं किया गया है। यह उल्लेखनीय उपलब्धि सरकार के निरंतर प्रयासों, सक्रिय सामुदायिक भागीदारी और व्यापक जागरूकता अभियानों का परिणाम है। बालोद की इस सफलता से प्रेरित होकर, छत्तीसगढ़ अब 2028-29 तक पूरे राज्य को बाल विवाह से पूरी तरह से मुक्त बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।[9]

इसी राज्य में एक अन्य उल्लेखनीय मिसाल के तहत, सूरजपुर जिले ने सामाजिक सुधार और सामुदायिक जागरूकता में एक सशक्त उदाहरण पेश किया है। 17 सितंबर, 2025 को, पोषण माह 2025 के शुभारंभ के अवसर पर, जिला प्रशासन ने गर्वपूर्वक 75 ग्राम पंचायतों को "बाल विवाह मुक्त पंचायत" घोषित किया।
इन पंचायतों को लगातार दो वर्षों तक बाल विवाह का एक भी मामला दर्ज न करने के लिए यह सम्मान प्राप्त हुआ है।[10] यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के लिए बेहद गौरव का क्षण है और भारत के हर हिस्से के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
निष्कर्ष
भारत में बाल विवाह उन्मूलन की यात्रा 19वीं सदी के सुधारों और 1929 के शारदा अधिनियम से शुरू हुई और 2006 के सशक्त बाल विवाह निषेध अधिनियम और 2024 के ऐतिहासिक सर्वोच्च न्यायालय के फैसले ने इसे और बल दिया। पिछले कुछ दशकों में इसकी व्यापकता में खासी कमी आई है। नवंबर 2024 में शुरू किया गया और इस वक्त जारी 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान (मार्च 2026 तक चलने वाला) द्वारा समर्थित बाल विवाह मुक्त भारत अभियान, इस लड़ाई में एक अहम किरदार निभा रहा है। समर्पित बाल विवाह निषेध अधिकारियों, बीवीएमबी पोर्टल की तकनीक-सक्षम रिपोर्टिंग और जमीनी स्तर पर मिली सफलताओं के ज़रिए, यह पहल रोकथाम, संरक्षण और सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के साथ सहजता से एकीकृत होती है।
लाखों लोगों द्वारा इस मिशन में शामिल होने से इस दिशा में जारी महत्वपूर्ण प्रयास न केवल गहरी जड़ें जमा चुकी सामाजिक मान्यताओं को चुनौती देते हैं, बल्कि सतत् विकास लक्ष्य 5.3 और एक विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप भी हैं। सरकार, समुदायों, गैर सरकारी संगठनों और नागरिकों की निरंतर सामूहिक कार्रवाई असमानता के इस चक्र को तोड़ने और हर बच्चे के शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वायत्तता के अधिकार को सुनिश्चित करने का वादा करती है। एक अटूट प्रतिबद्धता के साथ, भारत बाल विवाह से मुक्त भविष्य ज़रुर हासिल कर सकता है, जिससे लड़कियों और लड़कों की पीढ़ियां आगे बढ़ सकेंगी।
संदर्भ:
प्रेस सूचना ब्यूरो:
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2168554®=3&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=2197965®=3&lang=1
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय:
https://stopchildmarriage.wcd.gov.in/public/documents/noticeboard/campaign100days.pdf
https://socialwelfare.tripura.gov.in/sites/default/files/THE%20PROHIBITION%20OF%20CHILD%20MARRIAGE%20ACT%2C%202006.pdf
https://stopchildmarriage.wcd.gov.in/about#:~:text=The%20Prohibition%20of%20Child%20Marriage%20Act%20(PCMA),*%20Put%20in%20place%20a%20comprehensive%20mechanism
https://stopchildmarriage.wcd.gov.in/about#:~:text=The%20Prohibition%20of%20Child%20Marriage%20Act%20(PCMA),*%20Put%20in%20place%20a%20comprehensive%20mechanism
https://wdcw.ap.gov.in/dept_files/cm_cmp.pdf
https://x.com/Annapurna4BJP/status/1993968281439621226?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1993968281439621226%7Ctwgr%5Eb7b72c138a5947de31a0f178d352c201ede5d37d%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.pib.gov.in%2FPressReleasePage.aspx%3FPRID%3D2197965reg%3D3lang%3D1
https://x.com/MinistryWCD/status/1995429594141458665
https://rsdebate.nic.in/bitstream/123456789/421118/1/PD_104_02031978_9_p131_p222_17.pdf
विधि और न्याय मंत्रालय:
https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/6843/1/child_marriage_prohibition_act.pdf?referrer=grok.com
दूरदर्शन (डीडी नेशनल यूट्यूब):
https://www.youtube.com/watch?v=WxlPyjEk5Fk
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष:
https://india.unfpa.org/sites/default/files/pub-pdf/analytical_series_1_-_child_marriage_in_india_-_insights_from_nfhs-5_final_0.pdf
संयुक्त राष्ट्र महिला:
https://sadrag.org/wp-content/uploads/2025/01/Training-Guide-for-service-providers-GBV-compressed.pdf
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष:
file:///C:/Users/HP/Downloads/Ending_Child_Marriage-profile_of_progress_in_India_2023%20(1).pdf
बाल विवाह मुक्त भारत
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