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इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट 2026 के सात चक्र
एआई प्रभाव के सात विषयों पर वैश्विक सहयोग का संवर्धन
Posted On:
08 FEB 2026 12:11PM

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मुख्य बिंदु
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- इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट 2026 किसी भी विकासशील देश में आयोजित पहला वैश्विक कृत्रिम मेधा शिखर सम्मेलन है।
- इसमें सात चक्रों या कार्य समूहों के माध्यम से 100 से ज्यादा देश शामिल हो रहे हैं। यह जिम्मेदार और समावेशी एआई को आकार देने में व्यापक वैश्विक भागीदारी को प्रतिबिंबित करता है।
- यह शिखर सम्मेलन तीन सूत्रों- जन, पृथ्वी और प्रगति पर आधारित है जो एआई पर वैश्विक सहयोग के लिए बुनियादी सिद्धांतों को परिभाषित करते हैं।
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परिचय

मौजूदा समय में भारत अपनी विकास यात्रा के एक महत्वपूर्ण चरण में है। कृत्रिम मेधा (एआई) इस विकास के एक अहम सहायक के रूप में उभर रही है। एआई भारत के लिए प्रौद्योगिकी के जनतंत्रीकरण, इसकी पहुंच सुनिश्चित करने तथा इसके समावेशन और वृहत समानता को आगे बढ़ाने के लिए रणनीतिक राष्ट्रीय साधन के तौर पर काम करता है। इस प्रौद्योगिकीय क्रांति ने मानवीय प्रयासों के हर क्षेत्र में प्रगति के लिए विस्तृत अवसरों के द्वार खोले हैं। वैश्विक प्रौद्योगिकी और प्रशासनिक मंचों पर भारत की भूमिका का लगातार विस्तार हो रहा है। इससे उभरती प्रौद्योगिकियों पर अंतरराष्ट्रीय नीति विमर्श को आकार देने में उसकी बढ़ती भागीदारी का पता चलता है।
इस बढ़ती भागीदारी के एक हिस्से के रूप में इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट 2026 का 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली में आयोजन किया जाएगा। यह किसी विकासशील देश में होने वाला पहला कृत्रिम मेधा शिखर सम्मेलन है।
यह शिखर सम्मेलन प्रभाव पर केंद्रित वैश्विक मंच के रूप में काम करेगा। यह कृत्रिम मेधा को सबके कल्याण और सुख के राष्ट्रीय दृष्टिकोण तथा मानवता के लिए एआई के वैश्विक सिद्धांत के अनुरूप अर्थव्यवस्थाओं में मापनीय परिणामों के रूप में आकार देगा। इसमें वैश्विक नेता, नीति निर्माता, नवोन्मेषक और विशेषज्ञ शासन, नवाचार और संवहनीय विकास में एआई के अनुप्रयोगों का प्रदर्शन और उसके मार्गों को परिभाषित करेंगे।
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आधारभूत सिद्धांतः एआई के प्रभाव को रेखांकित करने वाले तीन सूत्र
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इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 तीन आधारभूत स्तंभों या सूत्रों से निर्देशित है। ये सूत्र एआई में वैश्विक सहयोग को दिशा देने वाले बुनियादी सिद्धांतों को रेखांकित करते हैं।
- जनः मानव केंद्रित एआई के बढ़ावा देना जो अधिकारों का रक्षक हो, सेवाओं तक पहुंच बढ़ाए, विश्वास बनाए और समाजों के बीच न्यायसंगत लाभ सुनिश्चित करे।
- पृथ्वीः ऊर्जा कुशल प्रणालियों, संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग तथा जलवायु संरक्षण की कार्रवाइयों और पर्यावरण की सहनशीलता को बढ़ावा देकर पर्यावरणीय तौर पर संवहनीय एआई का उन्नयन।
- प्रगतिः नवोन्मेष, क्षमता निर्माण तथा उत्पादकता, प्रगति और विकास परिणामों को बढ़ाने के लिए एआई के उपयोग के जरिए समावेशी आर्थिक और प्रौद्योगिकीय विकास को समर्थन।
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विषय क्षेत्रः इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 के सात चक्र

इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 ने बड़े पैमाने पर उच्च स्तरीय भागीदारी को आकर्षित किया है। इसमें 15-20 शासन प्रमुख, 50 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मंत्री तथा 40 से अधिक वैश्विक और भारतीय मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के भाग लेने की संभावना है।
सम्मेलन में विचार-विमर्श एकदूसरे से जुड़े सात विषय क्षेत्रों के इर्दगिर्द निर्मित चक्रों या कार्य समूहों के माध्यम से आयोजित किए जाएंगे। हर चक्र एआई प्रभाव के एक बुनियादी क्षेत्र पर केंद्रित होगा और सूत्र को नीति और वास्तविक दुनिया में उपयोग के ठोस क्षेत्रों में परिवर्तित करेगा। इन कार्य समूहों के जरिए विश्व भर के 100 से ज्यादा देशों को जिम्मेदार और समावेशी एआई के भविष्य को आकार देने के काम में शामिल किया गया है।
हर चक्र कौशल निर्माण से लेकर नैतिक उपयोग सुनिश्चित करने तक एआई के सामाजिक प्रभाव पर बहुपक्षीय सहयोग को प्रोत्साहन देता है।
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चक्र
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केंद्र बिंदु
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मानव पूंजी
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कामकाज के एआई समर्थित भविष्य के लिए न्यायसंगत कौशलीकरण और कार्यबल के समावेशी परिवर्तन को बढ़ावा।
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सामाजिक सशक्तीकरण के लिए समावेशन
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डिजाइन में समावेशी एआई प्रणालियों को बढ़ावा देना जो विविध समुदायों का सशक्तीकरण और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करें।
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सुरक्षित और विश्वसनीय एआई
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पारदर्शिता, जवाबदेही और नवोन्मेष के लिए साझा सुरक्षा आधारित वैश्विक तौर पर भरोसेमंद एआई प्रणालियों का निर्माण।
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विज्ञान
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आधुनिक विज्ञान और वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने तथा खोजों को साझा वैश्विक प्रगति में तब्दील करने के लिए एआई का उपयोग।
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सहनशीलता, नवोन्मेष और कार्यकुशलता
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संवहनीय और संसाधन—कुशल एआई प्रणालियों को प्रोत्साहन जो जलवायु सहनशीलता और संवहनीयता को मजबूत करें।
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एआई संसाधनों का जनतंत्रीकरण
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विश्व भर में समावेशी नवोन्मेष और संवहनीय विकास के लिए बुनियादी एआई संसाधनों तक न्यायसंगत पहुंच को प्रोत्साहन।
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आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एआई
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विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं और समाजों में उत्पादकता, नवोन्मेष और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एआई का उपयोग।
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भारत इन चक्रों के जरिए स्थानीय चुनौतियों का हल करते हुए एआई के वैश्विक प्रतिमानों को स्वरूप देने की मंशा रखता है। इस शिखर सम्मेलन के नतीजे नीति निर्माताओं, निवेशकों और औद्योगिक नेताओं को आने वाले वर्षों में रास्ता दिखाएंगे।
मानव पूंजीः एआई में वैश्विक सहयोग का आधार भारत का प्रतिभा भंडार
भारत में एआई को तेजी से अपनाया जाना विभिन्न क्षेत्रों में नवोन्मेष और समावेशी विकास के नए मार्ग प्रशस्त कर रहा है। भारत प्रौद्योगिकी के विकास के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक-आर्थिक समूहों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करते हुए एआई संचालित अर्थव्यवस्था के लिए अपने कार्यबल की तैयारी को आगे बढ़ा रहा है। मानव पूंजी विषय पर कार्य समूह एक ऐसे न्यायसंगत एआई कौशल विकास परिवेश को आकार देकर इन प्रयासों को मजबूत करने पर केंद्रित है जो कार्यबल के सुचारू परिवर्तन में सहायक होगा और नागरिकों को उभरती भूमिकाओं के लिए सक्षम बनाएगा।
भारत के प्रतिभा-बल के प्रमुख राष्ट्रीय संकेतक
- एआई कौशल और प्रतिभा विकासः भारत एआई कौशल के विस्तार में दुनिया के चोटी के देशों में से एक है। एआई प्रतिभा के घनत्व के मामले में उसका 2016 से अब तक तीन गुना विकास हुआ है।
- एआई क्षमता में वैश्विक नेतृत्वः स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार भारत नियुक्तियों में लगभग 33 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के साथ वैश्विक एआई प्रतिभा अधिग्रहण में चोटी पर है। वह वैश्विक एआई जीवंतता टूल में शीर्ष तीन देशों में शामिल है।
- एआई कार्यबल का सशक्तीकरणः सरकार इंडिया एआई फ्यूचर स्किल्स के अंतर्गत एआई अनुसंधान और प्रशिक्षण में 500 पीएचडी, 5000 स्नातकोत्तर और 8000 स्नातक छात्रों को सहायता दे रही है।
- वैश्विक पहुंचः इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन इंडिया एआई मिशन के तहत 10 भारतीय एआई स्टार्टअप संस्थाओं को इंडिया एआई स्टार्टअप ग्लोबल इनिशिएटिव के लिए चुना गया है। विश्व के सबसे बड़े स्टार्टअप परिसर स्टेशन एफ, पेरिस और चोटी के यूरोपीय बिजनेस स्कूल एचईसी पेरिस के साथ यह वैश्विक गतिवर्द्धन कार्यक्रम भारत को एआई नवोन्मेष में विश्व मंच पर स्थापित करता है।
- रोजगार पर प्रभावः एआई कार्यबल को पुनर्परिभाषित कर भारत के प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र का कायाकल्प करने जा रहा है। इसमें अगले कुछ वर्षों में लाखों रोजगार पैदा करने की संभावना है।
कौशल, अनुसंधान और वैश्विक अनुभव में सरकार की अगुवाई में निवेश स्वदेशी क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप ढाल कर मजबूती दे रहा है। इन प्रयासों ने भारत को एआई पर बढ़ते वैश्विक सहयोग में भरोसेमंद और समावेशी भागीदार के रूप में स्थापित किया है।
सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन: समावेशी एआई के लिए भारत का दृष्टिकोण
एआई भारत को विभिन्न भाषाओं, क्षेत्रों और क्षमताओं वाले समुदायों के लिए सेवाओं तक पहुंच और भागीदारी में सुधार करके सामाजिक समावेश का विस्तार करने के लिए एक शक्तिशाली मार्ग दिखाता है। भारत का डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा एआई नवाचारों को ठोस सामाजिक परिणामों में बदलने के लिए एक मजबूत स्थिति प्रदान करता है। 'सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेश' पर काम करने वाला समूह ऐसे समावेशी-मूलक एआई समाधानों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करता है जो भारत की विविधता को दर्शाते हैं, संस्थागत तत्परता को मजबूत करते हैं, और यह सुनिश्चित करते हैं कि एआई प्रणालियाँ सुरक्षित, प्रासंगिक और उपयोगी बनी रहें, जिससे वंचित और कमजोर समुदायों को स्पष्ट लाभ मिले।
एआई के माध्यम से सामाजिक सशक्तिकरण को सक्षम बनाने वाली प्रमुख पहल
- वैश्विक हेल्थएआई से जुड़ाव: भारत स्वास्थ्य सेवा में एआई के सुरक्षित और नैतिक उपयोग के लिए वैश्विक मंच 'हेल्थएआई' के साथ जुड़ा है। यह जिम्मेदार नवाचार को सशक्त बनाता है और वैश्विक सर्वोत्तम पद्धतियों को अपनाने में मदद करता है।
- भाषिणी: भाषिणी प्लेटफॉर्म समावेशी और आवाज-आधारित डिजिटल संचालन को सक्षम बनाता है। यह 36 से अधिक लिखित भाषाओं, 22 स्वर भाषाओं और 350 से अधिक एआई भाषा मॉडलों में सहायता करता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक समावेश का विस्तार होता है।
- एआई-सक्षम किसान सेवा वितरण: 'किसान ई-मित्र' एक आवाज-आधारित एआई चैटबॉट है जो किसानों को 11 क्षेत्रीय भाषाओं में 'पीएम-किसान सम्मान निधि' सेवाओं का लाभ उठाने में सक्षम बनाता है। यह प्रतिदिन 20,000 से अधिक प्रश्नों का समाधान करता है और अब तक 95 लाख से अधिक प्रश्नों का उत्तर दे चुका है, जो सुलभ एआई-संचालित सेवा वितरण का एक प्रमाण है।
भारत-विस्तार: एआई-संचालित डिजिटल कृषि मंच
भारत-विस्तार, एक बहुभाषी एआई प्लेटफॉर्म है इसे 'एग्रीस्टैक' पोर्टल्स और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की कृषि पद्धतियों को एआई प्रणालियों के साथ एकीकृत करने के लिए केंद्रीय बजट 2026-2027 में प्रस्ताव रखा गया है। यह प्लेटफॉर्म डिजिटल कृषि विस्तार में सहायता करेगा, स्थान-विशिष्ट परामर्श को सक्षम बनाएगा और वैज्ञानिक एवं डेटा-संचालित निर्णय लेने में किसानों की पहुंच का विस्तार करेगा।
- अनौपचारिक कार्यबल समावेशन के लिए एआई: समावेशी सामाजिक विकास के लिए नीति आयोग की रिपोर्ट एआई (अक्टूबर 2025) विभिन्न सेवाओं तक पहुंच बढ़ाकर भारत के 49 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों को सशक्त बनाने की एआई की क्षमता को रेखांकित करती है।
डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में समावेशी डिजाइन को एकीकृत करके, एआई प्रणालियाँ विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों में सेवाओं तक पहुंच में सुधार कर रही हैं। यह भारत की एआई संचालन यात्रा के मुख्य परिणामों के रूप में विश्वास और सामाजिक सशक्तिकरण को मजबूत कर रही हैं।
सुरक्षित और विश्वसनीय एआई: राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप जिम्मेदार एआई को सक्षम बनाना
जैसे-जैसे एआई प्रणालियों का दायरा और प्रभाव बढ़ रहा है, लोगों के विश्वास और जिम्मेदार नवाचार को बनाए रखने के लिए विश्वसनीयता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रमुख हो गया है। भारत का नियामक ढांचा इसे वैश्विक एआई सुरक्षा प्रयासों में सार्थक योगदान देने की स्थिति में है। 'सुरक्षित और विश्वसनीय एआई' विषयक कार्य समूह संचालन क्षमता को मजबूत करने और विभिन्न देशों के बीच साझा सीख को सक्षम करने पर केंद्रित है।
सुरक्षित और जवाबदेह एआई विकसित करने के लिए भारत के प्रयास
- जिम्मेदार एआई परियोजना पोर्टफोलियो: 'सुरक्षित और विश्वसनीय एआई' स्तंभ के तहत, आशय पत्रों के माध्यम से 13 परियोजनाओं का चयन किया गया है। ये परियोजनाएं सुरक्षा, पूर्वाग्रह शमन, पारदर्शिता और जवाबदेही पर केंद्रित जिम्मेदार एआई उपकरण विकसित करने के लिए हैं।
- मिशन डिजिटल श्रमसेतु: नीति आयोग ने 'मिशन डिजिटल श्रमसेतु' का प्रस्ताव दिया है, जिसका उद्देश्य एक ऐसा तंत्र बनाना है जो एआई को सभी के लिए सुलभ और किफायती बनाए। यह मिशन अनौपचारिक श्रमिकों को सशक्त बनाने के लिए एआई और उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने पर केंद्रित है।
- इंडियाएआई सुरक्षा संस्थान: भारत, 'इंडियाएआई मिशन' के 'सुरक्षित और विश्वसनीय' स्तंभ के तहत इंडियाएआई सुरक्षा संस्थान की स्थापना कर रहा है। यह संस्थान एआई से जुड़े खतरों और सुरक्षा चुनौतियों के समाधान के लिए एक समर्पित निकाय के रूप में कार्य करेगा।
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एआई संचालन के दिशानिर्देश
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भारत के एआई संचालन के दिशानिर्देश, 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' से पहले, एआई को अपनाने की प्रक्रिया को राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के साथ जोड़ते हैं। इन सिद्धांतों को व्यवहार में लाने के लिए, दिशानिर्देशों में एक सुव्यवस्थित संचालन तंत्र का प्रस्ताव किया गया है।
- समग्र नीति विकास के समन्वय और एआई शासी समूह को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ जोड़ने के लिए एक एआई शासी समूह की स्थापना करना।
- राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एआई संचालन के मुद्दों पर विशेषज्ञों की जानकारी प्रदान करने के लिए एक प्रौद्योगिकी और नीतिगत विशेषज्ञ समिति का गठन करना।
- इंडियाएआई सुरक्षा संस्थान को अनुसंधान करने, मानक तैयार करने, परीक्षण विधियाँ और मानदंड विकसित करने, अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय मानक निकायों के साथ सहयोग करने और नियामकों एवं उद्योग को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित करना।
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भारत एक संतुलित एआई तंत्र का निर्माण कर रहा है जहाँ नवाचार जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ता है। 'सुरक्षित और विश्वसनीय एआई चक्र' समावेश, विकास और डिजिटल संप्रभुता की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को सुदृढ़ करता है।
लचीलापन, नवाचार और कार्यकुशलता: स्वदेशी नवाचार के जरिये स्थिति अनुकूलन का सुदृढ़ीकरण
एआई के प्रति भारत का दृष्टिकोण कार्यकुशलता और संवहनीयता पर अत्यधिक बल देने वाला है, यह प्रौद्योगिकी की प्रगति को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और समावेशी पहुंच के साथ जोड़ता है। ‘सुदृढ़ता, नवाचार और कार्यकुशलता ' विषयक कार्य समूह कार्यकुशलता को एक मुख्य डिजाइन सिद्धांत के रूप में बढ़ावा देने के लिए भारत की क्षमताओं का लाभ उठाता है। इसका उद्देश्य ऐसे अनुकूलनीय और जलवायु-सचेत एआई सिस्टम तैयार करना है जो पहुंच का विस्तार करें, वैश्विक असमानताओं को कम करें और एक लचीले, समावेशी एवं संवहनीय एआई तंत्र बनाने में सहायता करें।
कुशल एआई विकास के मापने योग्य परिणाम
- डेटा अवसंरचना का बढ़ना: एआई के विकास के साथ भारत की डेटा अवसंरचना की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसकी क्षमता 2030 तक लगभग 960 मेगावाट से बढ़कर 9.2 गीगावाट होने का अनुमान है।
- गिटहब भागीदारी: वैश्विक गिटहब एआई प्रोजेक्ट डेटा (2024) के अनुसार, भारत गिटहब पर सार्वजनिक जनरेटिव एआई परियोजनाओं में दुनिया भर में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरा है।
- वैश्विक एआई हब: वैश्विक तकनीकी दिग्गज एआई और डिजिटल बुनियादी ढांचे को गति देने के लिए भारत में भारी निवेश कर रहे हैं, जो देश के तकनीकी परिदृश्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस दिशा में प्रमुख प्रतिबद्धताओं में माइक्रोसॉफ्ट द्वारा डेटा सेंटर और एआई प्रशिक्षण के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये, अमेज़न द्वारा 2030 तक क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई-संचालित डिजिटलीकरण के लिए 2.9 लाख करोड़ रुपये, तथा गूगल द्वारा विशाखापत्तनम में 1 गीगावाट क्षमता वाले एआई हब के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।
ये प्रयास उन्नत तकनीकों तक पहुंच बढ़ाते हैं, जलवायु के प्रति सचेत नवाचार में सहायता करते हैं और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हैं।
विज्ञान: भारत में एआई-सक्षम वैज्ञानिक अनुसंधान
जैसे-जैसे अनुसंधान अधिक डेटा-सघन और सहयोगात्मक होता जा रहा है, ऐसी स्थिति में भागीदारी को व्यापक बनाने और स्वास्थ्य, कृषि एवं जलवायु जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक अनुसंधान को वास्तविक दुनिया के समाधानों में परिवर्तित करने का यह एक प्रबल अवसर भी है। अपने बढ़ते अनुसंधान आधार, डिजिटल अवसंरचना और 'ओपन साइंस' (विज्ञान)के प्रति प्रतिबद्धता के साथ, भारत एक अधिक न्यायसंगत वैश्विक अनुसंधान के क्षेत्र में योगदान देने के लिए अच्छी स्थिति में है। 'विज्ञान' विषयक कार्य समूह क्षेत्रों और संस्थानों में भागीदारी बढ़ाने वाले खुले और पारदर्शी एआई-सक्षम अनुसंधान और सहयोगात्मक ढांचों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करता है।
भारत के सहयोगात्मक एआई विज्ञान में प्रगति
- नवाचार का प्रभाव: भारत विश्व स्तर पर छठा सबसे बड़ा पेटेंट दाखिल करने वाला देश है। इसके अलावा, ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंक 81 से सुधरकर 38 हो गई है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान को वास्तविक समाधानों में बदलने की मजबूत क्षमता को दर्शाता है।
- अनुसंधान एवं विकास निवेश में वृद्धि: अनुसंधान और विकास पर राष्ट्रीय व्यय 2010-11 में 60,196 करोड़ रुपये से बढ़कर 2020-21 में 1.27 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो भारत के वैज्ञानिक अनुसंधान तंत्र के निरंतर विस्तार को दर्शाता है।
- एनआरएफ एआई-सक्षम अनुसंधान: अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) ने राष्ट्रीय अनुसंधान क्षमता को मजबूत करने के लिए 2023-2028 के दौरान अनुसंधान निधि में 50,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
- आईएमडी हाइब्रिड एआई पूर्वानुमान: भारत मौसम विज्ञान विभाग किसानों के लिए जलवायु सलाहकार के रूप में 'मौसम जीपीटी' के साथ-साथ बारिश, बिजली, कोहरे और आग की भविष्यवाणी के लिए हाइब्रिड एआई मॉडल का उपयोग कर रहा है, जिससे एआई-सक्षम वैज्ञानिक पूर्वानुमान प्रगति में तेजी आ रही है।
- स्टेलर टूल: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण का 'स्टेलर' टूल एक स्वदेशी रूप से विकसित आपूर्ति पर्याप्तता मॉडल है जिसे अप्रैल 2025 में शुरू किया गया था। यह 'डिस्कॉम' को मांग प्रतिक्रिया के साथ उत्पादन-पारेषण-भंडारण नियोजन में सहायता करता है, जो ऊर्जा सुरक्षा के लिए एआई-सक्षम वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाता है।
ये पहल सहयोगात्मक और 'ओपन एआई' विज्ञान में भारत की भूमिका को मजबूत करती हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर न्यायसंगत प्रगति को बढ़ावा मिलता है।
एआई संसाधनों का जनतंत्रीकरण: साझा एआई संसाधनों का विकास करना
एआई प्रणालियों का विकास कंप्यूट, डेटा और बुनियादी ढांचे तक पहुंच पर निर्भर करता है, लेकिन ये संसाधन देशों और संस्थानों के बीच असमान रूप से वितरित हैं। बहुपक्षीय सहयोग के साथ मिलकर ओपन और अंतरसंचालनीय अवसंरचना, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप संदर्भ-आधारित एआई विकास में सहायता कर सकता है। 'एआई संसाधनों का जनतंत्रीकरण' विषयक कार्य समूह न्यायसंगत पहुंच को आगे बढ़ाने और वैश्विक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करता है।
साझा एआई बुनियादी ढांचे के प्रमुख पड़ाव
- संप्रभु एआई कंप्यूट: 'इंडियाएआई मिशन' के तहत, संप्रभु और रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए एक सुरक्षित जीपीयू क्लस्टर का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 3,000 अगली पीढ़ी के जीपीयू स्थापित किए जाएंगे।
- 'इंडियाएआई कोष': इस प्लेटफॉर्म पर 20 क्षेत्रों में 7,400 से अधिक डेटासेट और 273 एआई मॉडल उपलब्ध हैं। यह शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को एआई नवाचार के लिए उच्च-गुणवत्ता वाले, भारत-केंद्रित डेटा तक पहुंच प्रदान करता है।
- एआई डेटा प्रयोगशाला नेटवर्क: भारत डेटा की व्याख्या और संग्रह में प्रशिक्षण देकर दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में जमीनी स्तर पर एआई कौशल विकसित करने के लिए 'एआई डेटा प्रयोगशाला' शुरू कर रहा है। इसके तहत देश भर में 570 प्रयोगशालाओं का एक नेटवर्क बनाया जा रहा है।
- राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन: इस प्रमुख मिशन ने आईआईटी, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान और अनुसंधान प्रयोगशालाओं में 40 से अधिक पेटाफ्लॉप मशीनें लगाई हैं, जिससे शिक्षा जगत के लिए एक उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग आधार तैयार किया गया है।
- ऐरावत: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा 2023 में शुरू किया गया भारत का प्रमुख एआई सुपरकंप्यूटर है, जिसे 'परम सिद्धि-एआई' के साथ एकीकृत किया गया है। यह उन्नत एआई अनुसंधान के लिए साझा कंप्यूटिंग शक्ति प्रदान करता है।
- कंप्यूट तक पहुंच: 'इंडियाएआई कंप्यूट पोर्टल' 38,000 से अधिक जीपीयू और 1,050 टीपीयू तक पहुँच का जनतंत्रीकरण करता है। यह आर्थिक चुनौतियों और सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर एआई मॉडल विकसित करने में सशक्त बनाता है।
- समावेशी मूल्य निर्धारण: भारत में कंप्यूट संसाधनों तक पहुँच 100 रुपये प्रति घंटे से भी कम की रियायती दरों पर उपलब्ध है, जबकि इसकी तुलना में वैश्विक दरें 200 रुपये प्रति घंटे से अधिक हैं।
ये प्रयास खुले, सुलभ एआई बुनियादी ढांचे, न्यायसंगत नवाचार और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत के दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हैं।
आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के लिए एआई: प्रभाव का विस्तार
यद्यपि एआई में आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति को गति देने की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इस वादे को बड़े पैमाने पर धरातल पर उतारना अभी भी एक चुनौती है। 'आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के लिए एआई' कार्य समूह ऐसे एआई समाधानों के विस्तार पर ध्यान केंद्रित करता है, जो मापनीय आर्थिक और सामाजिक परिणाम दे सकें।
एआई-संचालित आर्थिक और सामाजिक प्रभाव का सशक्तिकरण
- कृषि: कृषि क्षेत्र में, एआई-संचालित सलाहकार उपकरण बुआई के निर्णयों, फसल की पैदावार और इनपुट दक्षता (जैसे बीज और उर्वरक का सही उपयोग) में सुधार कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे चुनिंदा राज्य-स्तरीय कार्यान्वयनों में 30-50 प्रतिशत तक उत्पादकता वृद्धि दर्ज की गई है।
- स्वास्थ्य सेवा: स्वास्थ्य सेवा में, एआई अनुप्रयोग तपेदिक (टीबी), कैंसर, न्यूरोलॉजिकल विकारों और अन्य स्थितियों का प्रारंभिक पता लगाने में सक्षम बना रहे हैं, जिससे निवारक और नैदानिक देखभाल बेहतर हो रही है।
- शिक्षा: शिक्षा के क्षेत्र में, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 सीबीएसई पाठ्यक्रम, दीक्षा प्लेटफॉर्म और युवाएआई जैसी पहलों के माध्यम से एआई सीखने में सहायता करता है, जिससे छात्रों को व्यावहारिक एआई कौशल से लैस किया जा रहा है।
- न्याय वितरण: ई-कोर्ट्स चरण III अनुवाद, मुकदमें के प्रबंधन और नागरिक-केंद्रित सेवाओं के लिए एआई और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह क्षेत्रीय भाषाओं में पहुंच सुनिश्चित करके दक्षता और पारदर्शिता में सुधार कर रहा है।
- क्षेत्रीय राजस्व में उछाल: भारत के एआई-संचालित प्रौद्योगिकी क्षेत्र द्वारा 2025 में लगभग 280 बिलियन अमेरिकी डॉलर का राजस्व उत्पन्न करने का अनुमान है, जो बढ़ती डिजिटल मांग के बीच मजबूत आर्थिक विस्तार को गति दे रहा है।
- स्टार्टअप तंत्र: भारत में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप हैं और 2024 में शुरू किए गए लगभग 89% नए स्टार्टअप्स ने अपने उत्पादों या सेवाओं में एआई का उपयोग किया। यह एआई को व्यापक व्यापक स्तर पर अपनाने की भावना को दर्शाता है, जिससे नवाचार को गति मिलती है और सामाजिक उत्थान के लिए रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलता है।
ये सात चक्र मिलकर भारत के जिम्मेदार नवाचार, व्यापक भागीदारी और मापनीय प्रभाव के मार्ग प्रशस्त करते हैं। नीति, तकनीक, शासन और क्षमता निर्माण को एक साथ जोड़कर, ये साझा सिद्धांतों को विभिन्न देशों और क्षेत्रों में व्यावहारिक परिणामों में बदलने के लिए एक व्यवस्थित ढांचा प्रदान करते हैं।
निष्कर्ष
भारत-एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 वैश्विक एआई एजेंडे को आकार देने के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करता है। सात चक्रों और 'लोगों, ग्रह और प्रगति' के तीन सूत्रों पर आधारित, शिखर सम्मेलन कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए एक विकास-उन्मुख ढांचे को आगे बढ़ाएगा।
नीति को कार्यान्वयन के साथ और नवाचार को सार्वजनिक उद्देश्य के साथ जोड़कर, यह शिखर सम्मेलन जिम्मेदार एआई इस्तेमाल करने के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण स्थापित करता है। यह तकनीकी प्रगति को समावेशी विकास और संवहनीय विकास के साथ जोड़ता है।
यह शिखर सम्मेलन भारत को वैश्विक एआई सहयोग में एक संयोजक और भागीदार के रूप में स्थापित करता है, जो साझा मानकों, सहयोगात्मक ढांचे और सार्वजनिक कल्याण के लिए मापनीय समाधानों में सहायता करता है। यह संवाद से वितरण की ओर बदलाव का प्रतीक है, जो जिम्मेदार, समावेशी और विकास-केंद्रित एआई के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
संदर्भ
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
नीति आयोग
पीआईबी बैकग्राउंडर्स
भारत-एआई प्रभाव शिखर सम्मलेन 2026
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए)
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पीआईबी शोध
पीके/केसी/एसके
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