Infrastructure
भारत के औद्योगिक गलियारों का दौरा
Posted On:
26 FEB 2026 12:50PM
केंद्रीय बजट 2026–27 में दुर्गापुर में समुचित संपर्क वाले नोड के साथ एक एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे के विकास की घोषणा की गई।
- 11 औद्योगिक गलियारों में विभिन्न परियोजनाएँ वर्तमान में कार्यान्वित की जा रही हैं, जिनमें 4 परियोजनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं और 4 पूर्णता के निकट हैं।
- राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और क्रियान्वयन ट्रस्ट (एनआईसीडीआईटी) को बजट अनुमान 2026–27 के तहत ₹3,000 करोड़ आवंटित किए गए।
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हाल में औद्योगिक गलियारे भारत के औद्योगिक पारितंत्र को सुदृढ़ करने की एक केंद्रीय रणनीति के रूप में उभरे हैं, क्योंकि वे उत्पादन लागत में कमी, व्यापक बाज़ार पहुँच तथा वैश्विक उत्पादन नेटवर्क के साथ अधिक सशक्त एकीकरण को सक्षम बनाते हैं। औद्योगिक गलियारा-आधारित विकास के इस मॉडल को आगे बढ़ाने के लिए भारत सरकार, राज्य सरकारों के साथ मिलकर, सुदृढ़ परिवहन संपर्क से समर्थित नियोजित आर्थिक क्षेत्रों के रूप में इन गलियारों की स्थापना कर रही है। यह प्रयास राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (एनआईसीडीपी) का पूरक है, जिसके माध्यम से देश भविष्य-उन्मुख विनिर्माण केंद्रों, मल्टी-मोडल कनैक्टिविटी तथा प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना से युक्त आधुनिक औद्योगिक गलियारों का एक नेटवर्क विकसित कर रहा है।
इस विज़न के अनुरूप, केंद्रीय बजट 2026–27 में दुर्गापुर में समुचित संपर्क वाले नोड के साथ एक एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे के विकास की घोषणा की गई। ये पहलें नए हरित औद्योगिक क्षेत्रों, प्रांतों और नोड्स की स्थापना कर रही हैं, जिन्हें वैश्विक स्तर पर अग्रणी विनिर्माण और निवेश गंतव्यों के साथ प्रतिस्पर्धा करने हेतु संरचित किया गया है।
औद्योगिक गलियारों की अवधारणा का अन्वेषण
औद्योगिक गलियारे रैखिक विकास क्षेत्र हैं, जो प्रमुख आर्थिक केंद्रों को सड़कों, रेलमार्गों, बंदरगाहों और हवाई अड्डों के एकीकृत नेटवर्क से जोड़ते हैं। इन गलियारों की विशिष्ट विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- उद्योग और मूलभूत अवसंरचना के बीच संपर्क को सुदृढ़ कर तीव्र औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन देना।
- प्रतिस्पर्धी एवं व्यवसाय-अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए निर्धारित मार्ग पर विश्व स्तर की अवसंरचना का सृजन करना।
- आर्थिक समूहन और औद्योगिक क्लस्टरिंग को सुगम बनाना, जिससे क्षेत्रों को अपनी विकास क्षमता का अधिकतम उपयोग करने में सहायता मिले।
- लक्षित निवेश और नियोजित औद्योगिक विकास के माध्यम से क्षेत्रीय शक्तियों का इष्टतम उपयोग।
- प्रमुख परिवहन मार्गों, विशेष रूप से रेल ट्रंक मार्गों पर विकास, जिससे माल तथा जनता की कुशल आवाजाही हेतु सुदृढ़ संपर्क सुनिश्चित हो।
औद्योगिक गलियारों को क्या अनिवार्य बनाता है?
औद्योगिक गलियारे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को रूपांतरित करने में मौलिक भूमिका निभाते हैं, क्योंकि ये ऐसे वातावरण का निर्माण करते हैं जहाँ उद्योग कुशलतापूर्वक, सतत् और प्रतिस्पर्धी ढंग से संचालित हो सकते हैं। उनका महत्व निम्नलिखित प्रकार से प्रदर्शित होता है:
- एकीकृत अवसंरचना औद्योगिक दक्षता को सुदृढ़ बनाती है: मल्टीमोडल परिवहन नेटवर्क, विश्वसनीय उपयोगिताएँ और आईसीटी-सक्षम सेवाएँ एक एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं, जो कुशल औद्योगिक संचालन और माल की आवाजाही को समर्थन देते हैं।
- प्लग-एंड-प्ले पारिस्थितिक तंत्र व्यवसाय तत्परता को तीव्रता प्रदान करते हैं: उपयोग हेतु तैयार सुविधाएँ, सुनिश्चित उपयोगिताएँ और सुव्यवस्थित अनुमोदन स्थापना समय को कम करते हैं, जिससे उद्योगों को तेजी से और प्रतिस्पर्धी ढंग से संचालन शुरू करने में मदद मिलती है।
- निरन्तरता हेतु की जाने वाली पहलें जिम्मेदार विकास सुनिश्चित करती हैं: अक्षय ऊर्जा उपयोग, अपशिष्ट पुनर्चक्रण प्रणाली और हरित भवन मानक, पर्यावरणीय प्रभाव को सीमित करते हुए, उद्योगों को विस्तार करने में मदद करते हैं।
- कौशल विकास पहलें क्षेत्रीय रोजगार को प्रोत्साहित करती हैं: प्रशिक्षण कार्यक्रम और शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारियां एक कुशल कार्यबल का विकास करती हैं, रोजगार सृजित करती हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को सुदृढ़ करती हैं।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र निवेश आकर्षित करते हैं और निर्यात को बढ़ावा देते हैं: एसईज़ेड कर प्रोत्साहन तथा नियामकीय लाभ प्रदान करते हैं, जो विदेशी निवेश को आकर्षित करते हैं और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारत की स्थिति को सुदृढ़ बनाते हैं।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी विकास परिणामों में सुधार लाती हैं: सरकार और उद्योग के बीच सहयोगी मॉडल बेहतर नियोजन, संसाधनों का कुशल उपयोग और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करते हैं।
- वॉक-टू-वर्क योजना जीवन की गुणवत्ता और उत्पादकता को बढ़ाती है: आवागमन में कमी, प्रदूषण में कमी, पैदल चलने के लिए अनुकूल लेआउट और हरित क्षेत्र स्वस्थ जीवनशैली और अधिक उत्पादक शहरी वातावरण का समर्थन करते हैं, जिससे औद्योगिक शहर निवेशक तथा श्रमिक, दोनों के लिए आकर्षक बनते हैं।
जैसे-जैसे भारत आधुनिक और समुचित संपर्क वाले औद्योगिक गलियारों के निर्माण को तेज कर रहा है, सरकार द्वारा संचालित विभिन्न पहलों के माध्यम से सतत्, प्रतिस्पर्धी और भविष्य-उन्मुख औद्योगिक विकास की नींव रखी जा रही है।
राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (एनआईसीडीपी):
भारत सरकार राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (एनआईसीडीपी) के अंतर्गत कई औद्योगिक गलियारा परियोजनाओं का विकास कर रही है, जो प्रधानमंत्री गति शक्ति ढांचे के तहत प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों के लिए समन्वित, मल्टी-मोडल संपर्क सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित हैं।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत 11 गलियारों में विभिन्न परियोजनाओं को कार्यान्वित किया जा रहा है। इन परियोजनाओं को एक निरन्तरता-केंद्रित ढांचे के माध्यम से विकसित किया जा रहा है, जो लो-कार्बन सिटी (एलसीसी) की ओर बदलाव का समर्थन करता है। इस दृष्टिकोण के मुख्य तत्व निम्नलिखित हैं:
- व्यापक हरित क्षेत्रों का निर्माण
- सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों की व्यवस्था
- ट्रांज़िट-ओरिएंटेड विकास (टीओडी) को अपनाना
- अक्षय ऊर्जा स्रोतों का एकीकरण
- पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता में कमी
- जल संसाधनों का संरक्षण और पुनर्चक्रण
- ठोस अपशिष्ट पदार्थों की व्यवस्थित पुनर्प्राप्ति और पुनर्चक्रण
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क्रम संख्या
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गलियारे का नाम
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परियोजना
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1.
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दिल्ली–मुंबई औद्योगिक गलियारा (डीएमआईसी)
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- ढोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र, गुजरात
- शेंद्रा–बिडकिन औद्योगिक क्षेत्र, महाराष्ट्र
- एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप – ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश
- एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप – विक्रम उद्योगपुरी, मध्य प्रदेश
- मल्टी मोडल लॉजिस्टिक्स हब एवं मल्टी मोडल ट्रांसपोर्ट हब (एमएमएलएच एवं एमएमटीएच), उत्तर प्रदेश
- एकीकृत मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब, नांगल चौधरी, हरियाणा
- दिघी पोर्ट औद्योगिक क्षेत्र, महाराष्ट्
- मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क, साणंद, गुजरात
- जोधपुर–पाली मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र, राजस्थान
- खुशखेड़ा–भिवाड़ी–नीमराना औद्योगिक क्षेत्र, राजस्थान
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2.
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चेन्नई–बेंगलुरु औद्योगिक गलियारा (सीबीआईसी)
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- कृष्णपट्टनम औद्योगिक क्षेत्र, आंध्र प्रदेश
- तुमकुरु औद्योगिक क्षेत्र, कर्नाटक
- पोन्नेरी औद्योगिक क्षेत्र, तमिलनाडु
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3.
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अमृतसर–कोलकाता औद्योगिक गलियारा (एकेआईसी)
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- रघुनाथपुर औद्योगिक पार्क, पश्चिम बंगाल
- हिसार एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर (आईएमसी), हरियाणा
- प्राग खुरपिया एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर (आईएमसी), उत्तराखंड
- राजपुरा–पटियाला आईएमसी, पंजाब
- कानपुर के निकट आईएमसी नोड, उत्तर प्रदेश
- बोकारो नोड, झारखंड
- गया में आईएमसी, बिहार
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4.
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विशाखापत्तनम–चेन्नई औद्योगिक गलियारा (वीसीआईसी)
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- कोपर्थी औद्योगिक क्षेत्र, आंध्र प्रदेश
- विशाखापत्तनम औद्योगिक क्षेत्र, आंध्र प्रदेश
- चित्तूर औद्योगिक क्षेत्र, आंध्र प्रदेश
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5.
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बेंगलुरु–मुंबई औद्योगिक गलियारा (बीएमआईसी)
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- धारवाड़ नोड, कर्नाटक
- सतारा नोड, महाराष्ट्र
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6.
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सीबीआईसी का कोयंबटूर से होते हुए कोच्चि तक विस्तार (ईसीकेसी)
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- पलक्कड़ औद्योगिक क्षेत्र, केरल
- धर्मपुरी–सेलम औद्योगिक क्षेत्र, तमिलनाडु
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7.
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हैदराबाद–नागपुर औद्योगिक गलियारा (एचएनआईसी)
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- ज़हीराबाद फेज़ 1, तेलंगाना
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8.
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हैदराबाद–वारंगल औद्योगिक गलियारा (एचडब्ल्यूआईसी)
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- हैदराबाद फेज़ 1, तेलंगाना
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9.
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हैदराबाद–बेंगलुरु औद्योगिक गलियारा (एचबीआईसी)
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- ओर्वकल औद्योगिक क्षेत्र, आंध्र प्रदेश
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10.
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ओडिशा आर्थिक गलियारा (ओईसी)
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- गोपालपुर–भुवनेश्वर–कलिंगनगर नोड तथा पारादीप–केंद्रपाड़ा–धामरा–सुबर्णरेखा नोड, ओडिशा
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11.
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दिल्ली–नागपुर औद्योगिक गलियारा (डीएनआईसी)
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औद्योगिक गलियारों के अंतर्गत कुछ परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति:
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गलियारे का नाम
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पूर्ण परियोजना
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विवरण
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निवेश
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दिल्ली–मुंबई औद्योगिक गलियारा (डीएमआईसी)
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ढोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (डीएसआईआर)
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- भारत की प्रथम सेमीकंडक्टर सिटी तथा डीएमआईसी के अंतर्गत 920 वर्ग किलोमीटर में विस्तृत सबसे बड़ा नोड
- ढोलेरा इंडस्ट्रियल सिटी डेवलपमेंट लिमिटेड (डीआईसीडीएल) द्वारा प्रबंधित, जो भारत सरकार तथा गुजरात सरकार का एक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) है।
- राष्ट्रीय राजमार्ग–8 तथा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स (डीएफसी) के माध्यम से सुदृढ़ संपर्क, जिससे कुशल लॉजिस्टिक्स एवं परिवहन सुनिश्चित होता है।
- बड़े तथा विस्तार योग्य भूमि खंड उपलब्ध कराता है, जिससे यह प्रमुख औद्योगिक एवं प्रौद्योगिकी निवेशों के लिए उपयुक्त है।
- 22.54 वर्ग किलोमीटर का एक्टिवेशन क्षेत्र लगभग पूर्ण हो चुका है, जहाँ समस्त ट्रंक अवसंरचना पहले ही स्थापित की जा चुकी है।
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आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार, डीएसआईआर, एसबीआईए, आईआईटी–जीएन तथा आईआईटी–वीयूएल जैसे चरण–I के शहरों ने सामूहिक रूप से 350 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन किया है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, औषधि तथा इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) जैसे क्षेत्रों में ₹2.02 लाख करोड़ के निवेश आकर्षित हुए हैं।
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शेंद्रा–बिडकिन औद्योगिक क्षेत्र (एसबीआईए)
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- विश्व-स्तरीय अवसंरचना तथा प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक सुविधाओं के साथ विकसित एक ग्रीनफील्ड स्मार्ट औद्योगिक शहर।
- छत्रपति संभाजीनगर में स्थित, यह औरंगाबाद हवाई अड्डे के निकट रणनीतिक रूप से अवस्थित है तथा गोल्डन क्वाड्रिलेटरल से पूरी तरह से कनेक्टेड है।
- एसबीआईए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस तथा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उच्च-विकासशील क्षेत्रों को लक्षित करता है।
- एसबीआईए में ₹67,815 करोड़ के निवेश को आकर्षित करने और 55,000 से अधिक रोजगार सृजित करने की क्षमता है।
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एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप–ग्रेटर नोएडा (आईआईटी–जीएन)
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- यह 747 एकड़ में फैला हुआ और डीएमआईसी के तहत एक प्रमुख परियोजना है।
- ग्रेटर नोएडा के दक्षिण-पूर्व में स्थित, यह सीधे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली–हावड़ा रेलवे लाइन से सटा हुआ है।
- संपर्क को निम्न के ज़रिए सुदृढ़ किया गया है:
- दिल्ली–हावड़ा रेलवे लाइन
- ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे
- बोरकी ट्रांजिट हब से निकटता
- दादरी लॉजिस्टिक्स हब से निकटता
- इस टाउनशिप को एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों के नेटवर्क के माध्यम से रणनीतिक पहुंच प्राप्त है, साथ ही प्रमुख हवाई अड्डों से निकटता का लाभ भी है, जिनमें शामिल हैं:
- इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (आईजीआई)
- नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेवर हवाई अड्डा)
- हिंडन हवाई अड्डा
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एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप–विक्रम उद्योगपुरी (आईआईटी–वीयूएल)
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- उज्जैन में 1,100 एकड़ में फैला और डीएमआईसी का एक प्रमुख नोड है।
- पीथमपुर–धार–मऊ निवेश क्षेत्र को संचालित करता है।
- स्टेट हाईवे 18 (एसएच–18) और उज्जैन–देवास रेलवे लाइन के निकट रणनीतिक रूप से स्थित।
- सुदृढ़ ट्रंक अवसंरचना से लैस, जिसमें शामिल हैं:
- सड़कें और आंतरिक परिसंचरण नेटवर्क
- भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति
- जल वितरण प्रणालियां
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी)
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गलियारे का नाम
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पूर्णता के निकट परियोजनाएं
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चेन्नई–बेंगलुरु औद्योगिक गलियारा (सीबीआईसी)
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तुमकुरु औद्योगिक क्षेत्र, कर्नाटक
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कृष्णपट्टनम औद्योगिक क्षेत्र, आंध्र प्रदेश
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दिल्ली–मुंबई औद्योगिक गलियारा (डीएमआईसी)
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एकीकृत मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब (आईएमएलएच), नांगल चौधरी, हरियाणा
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मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब एवं मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब, दादरी, ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश
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12 अतिरिक्त परियोजनाओं की पेशकश:
बजट 2024–25 की घोषणा के अनुसार, राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के तहत ₹28,602 करोड़ की कुल परियोजना लागत के साथ, 12 परियोजनाओं को अगस्त 2024 में भारत सरकार द्वारा मंज़ूरी दी गई। इन औद्योगिक स्मार्ट शहरों का लक्ष्य वैश्विक मानकों के अनुरूप विनिर्माण और निवेश केंद्र विकसित करना है, जिनमें प्लग-एंड-प्ले सुविधाएँ, स्मार्ट सिटी नियोजन और वॉक-टु-वर्क पारिस्थितिकी तंत्र शामिल हैं। ये शहर उच्च-स्तरीय, भविष्य-उन्मुख अवसंरचना का निर्माण करेंगे, जो मांग से पहले तैयार की गई हो।
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क्रम संख्या
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गलियारे का नाम
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परियोजना का नाम
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परियोजना का क्षेत्र
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परियोजना की लागत
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निवेश संभावना
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रोज़गार संभावना
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1.
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अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारा (एकेआईसी)
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आईएमसी खुरपिया, उत्तराखंड
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1,002 एकड़
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₹ 1,265 करोड़
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₹ 6,180 करोड़
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75,057 नौकरियां
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2.
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आईएमसी, राजपुरा पटियाला, पंजाब
|
1,099 एकड़
|
₹ 1,367 करोड़
|
₹ 7,500 करोड़
|
64,204 नौकरियां
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3.
|
आईएमसी हिसार, हरियाणा
|
2,988 एकड़
|
₹ 4,680 करोड़
|
₹ 32,417 करोड़
|
1,25,000 नौकरियां
|
|
4.
|
आईएमसी आगरा, उत्तर प्रदेश
|
1,058 एकड़
|
₹ 1,812 करोड़
|
₹ 3,447 करोड़
|
69,516 नौकरियां
|
|
5.
|
आईएमसी प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
|
352 एकड़
|
₹ 658 करोड़
|
₹ 1,600 करोड़
|
17,700 नौकरियां
|
|
6.
|
आईएमसी गया, बिहार
|
1,670 एकड़
|
₹ 1,339 करोड़
|
₹ 16,524 करोड़
|
1,09,185 नौकरियां
|
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7.
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दिल्ली–मुंबई औद्योगिक गलियारा (डीएमआईसी)
|
आईएमसी दिघी पोर्ट औद्योगिक क्षेत्र, महाराष्ट्र
|
6,056 एकड़
|
₹ 5,469 करोड़
|
₹ 38,000 करोड़
|
1,14,183 नौकरियां
|
|
8.
|
जोधपुर पाली मारवाड़, राजस्थान
|
1,578 एकड़
|
₹ 922 करोड़
|
₹ 7,500 करोड़
|
40,000 नौकरियां
|
|
9.
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विशाखापत्तनम–चेन्नई औद्योगिक गलियारा (वीसीआईसी)
|
कोप्पर्थी, आंध्र प्रदेश
|
2,596 एकड़
|
₹ 2,137 करोड़
|
₹ 8,860 करोड़
|
54,500 नौकरियां
|
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10.
|
हैदराबाद–बेंगलुरु औद्योगिक गलियारा (एचबीआईसी)
|
ओर्वकल, आंध्र प्रदेश
|
2,621 एकड़
|
₹ 2,786 करोड़
|
₹ 12,000 करोड़
|
45,071 नौकरियां
|
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11.
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हैदराबाद–नागपुर औद्योगिक गलियारा (एचएनआईसी)
|
ज़हीराबाद, तेलंगाना
|
3,245 एकड़
|
₹ 2,361 करोड़
|
₹ 10,000 करोड़
|
1,74,000 नौकरियां
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12.
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कोच्चि–बेंगलुरु औद्योगिक गलियारा
|
पलक्कड़, केरल
|
1,710 एकड़
|
₹ 3,806 करोड़
|
₹ 8,729
करोड़
|
51,000 नौकरियां
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|
योग
|
25,975 एकड़
|
₹ 28,602 करोड़
|
₹ 152,757 करोड़
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939,416 नौकरियां
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राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम लिमिटेड (एनआईसीडीसी):
राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम लिमिटेड (एनआईसीडीसी), जिसे पूर्व में दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा विकास निगम लिमिटेड (डीएमआईसीडीसी) के नाम से जाना जाता था, को जनवरी 2008 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (एनआईसीडीपी) के विकास, समन्वय और क्रियान्वयन के लिए निगमित किया गया था। एनआईसीडीसी:
- विनिर्माण, परिवहन और प्रौद्योगिकी को एकीकृत करने वाले स्मार्ट शहरों, औद्योगिक क्लस्टरों और मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक हब का विकास करके आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य रखता है।
- प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना, निर्बाध संपर्क और आधुनिक शहरी जीवन मानकों के साथ व्यवसाय-अनुकूल और चिरस्थायी पारिस्थितिक तंत्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
- विनिर्माण क्षेत्र को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित करता है और भारत के निर्यात को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाता है।
राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और क्रियान्वयन ट्रस्ट (एनआईसीडीआईटी):
7 दिसंबर 2016 को भारत सरकार ने डीएमआईसी परियोजना क्रियान्वयन ट्रस्ट फंड (पीआईटीएफ) के दायरे के विस्तार को मंज़ूरी दी और इसे राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और क्रियान्वयन ट्रस्ट (एनआईसीडीआईटी) के रूप में पुनः नामित किया। बजट अनुमान 2026–27 के तहत ट्रस्ट को ₹3,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
केंद्रीय बजट 2026–27 ने दुर्गापुर में एक प्रमुख नोड से सुसज्जित एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे के निर्माण की घोषणा करके भारत के औद्योगिक विस्तार को मजबूत गति दी है। यह पहल राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (एनआईसीडीपी) के व्यापक विज़न के अनुरूप है, जो परिवहन संपर्क और संचालन के लिए तैयार औद्योगिक सुविधाओं द्वारा समर्थित उन्नत उत्पादन केंद्रों के एक राष्ट्रीय नेटवर्क को आकार दे रहा है। 11 औद्योगिक गलियारों में विकास प्रगति पर है, जिनमें 4 स्थान पहले ही कार्यरत हैं और 4 पूर्णता की ओर बढ़ रहे हैं; सरकार धीरे-धीरे घरेलू विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ कर रही है, पर्याप्त निजी निवेश आकर्षित कर रही है और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित कर रही है। 12 अतिरिक्त परियोजनाओं की पेशकश वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण गंतव्य विकसित करने के भारत के इरादे को दर्शाता है, जो सतत् डिज़ाइन, प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशासन और उस कॉम्पैक्ट शहरी योजना पर आधारित हैं, जो पैदल काम पर जाने वाली जीवनशैली को प्रोत्साहित करती है। राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम लिमिटेड (एनआईसीडीसी) आधुनिक औद्योगिक नगर, लॉजिस्टिक हब और एकीकृत उत्पादन क्लस्टरों की योजना और मार्गदर्शन में केंद्रीय भूमिका निभाता रहा है। इस प्रयास को पूरक बनाते हुए, राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और क्रियान्वयन ट्रस्ट (एनआईसीडीआईटी) बड़े पैमाने पर अवसंरचना निर्माण, जलवायु-सजग शहरी प्रणाली और समन्वित गलियारा-स्तरीय विकास का समर्थन करता है। ये प्रतिबद्धताएँ भारत को अपने औद्योगिक आधार को सुदृढ़ करने, निर्यात संभावनाओं का विस्तार करने, क्षेत्रों के बीच संपर्क बढ़ाने और देश के दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों के अनुरूप भविष्योन्मुख औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की ओर मजबूती से अग्रसर करती हैं।
वित्त मंत्रालय
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
- https://www.investindia.gov.in/blogs/concept-industrial-corridors-and-international-best-practices
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- https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AU1421_xw039v.pdf?source=pqals
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- https://www.nicdc.in/projects/4-projects-nearing-completion/krishnapatnam-industrial-area-andhra-pradesh
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- https://www.nicdc.in/projects/12-new-projects/kopparthy-andhra-pradesh
- https://www.nicdc.in/projects/12-new-projects/orvakal-andhra-pradesh
- https://www.nicdc.in/projects/12-new-projects/zaheerabad-telangana
- https://www.nicdc.in/projects/12-new-projects/palakkad-kerala
- https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/184/AU2958_F5PrLx.pdf?source=pqals
- https://www.indiabudget.gov.in/doc/eb/vol1.pdf
- https://www.nicdc.in/resources/annual-reports/reports-of-nicdc
- https://www.commerce.gov.in/wp-content/uploads/2020/02/MOC_635963414360381849_Opportunities_India_CLMV_Region_EXIM_Bank.pdf
- https://www.dpiit.gov.in/ministry/about-us/details/Title=Industrial-Corridors-ITMwETMtQWa
शिक्षा मंत्रालय
भारत का महावाणिज्य दूतावास, हैम्बर्ग, जर्मनी
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