Economy
भारत के सांख्यिकी और डेटा इकोसिस्टम का एआई-आधारित रूपांतरण
Posted On:
20 MAR 2026 11:55AM
मुख्य बिंदु
- एनऐसी कोडिंग के लिए एआई टूल्स, लेगेसी डेटा को अनलॉक करने, इंटेलिजेंट डॉक्यूमेंट सर्च और वेबसाइट पर एआई-सक्षम चैटबॉट शुरू किए गए हैं।
- e-Sankhyiki ने आधिकारिक सांख्यिकीय डेटा सेट्स तक आसान पहुंच के लिए एमसीपी और सेमांटिक सर्च को एकीकृत किया है।
- एनडीएपी विज़ुअलाइज़ेशन टूल्स और एआई-आधारित सर्च क्षमता के माध्यम से क्रॉस-सेक्टोरल एनालिटिक्स का विस्तार कर रहा है।
- डाटा इनोवेशन लैब जैसी संस्थागत पहलें सार्वजनिक डेटा कार्यों में एआई की तैयारियों को मजबूत कर रही हैं।
- भारत-विस्तार, मौसम पूर्वानुमान और आधार प्रमाणीकरण विभिन्न क्षेत्रों में एआई के व्यापक उपयोग को दर्शाते हैं।
- यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने उन्नत एआई-आधारित बायोमेट्रिक डीडुप्लिकेशन और दस्तावेज़ सत्यापन प्लेटफॉर्म शुरू किया है।
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परिचय
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) 21वीं सदी की सबसे परिवर्तनकारी तकनीकों में से एक के रूप में उभरी है, जो दुनिया भर में अर्थव्यवस्थाओं, संस्थानों और सार्वजनिक प्रणालियों के काम करने के तरीके को प्रभावित कर रही है।
ओईसीडी के अनुसार, सरकार में एआई को अपनाने से सार्वजनिक सेवा वितरण, निर्णय-निर्माण और प्रशासनिक दक्षता में सुधार के नए अवसर खुलते हैं।
भारत ने भी एआई को उत्पादकता बढ़ाने, नवाचार को गति देने और डेटा व डिजिटल उपकरणों के बेहतर उपयोग के माध्यम से शासन को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में पहचाना है। यह तकनीकी बदलाव भारत की सार्वजनिक डेटा प्रणालियों में तेजी से दिखाई दे रहा है, जहां एआई, मशीन लर्निंग और उन्नत डेटा विश्लेषण को वर्गीकरण, डेटा तक पहुंच और निर्णय-सहायता प्रक्रियाओं में शामिल किया जा रहा है, जिससे एक अधिक कुशल और उत्तरदायी डिजिटल इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है।
एआई- आधारित सांख्यिकीय डेटा तक पहुँच और सार्वजनिक डेटा प्लेटफ़ॉर्म
भारत के आधिकारिक सांख्यिकीय प्लेटफ़ॉर्म अब तेजी से AI-सक्षम डेटा एक्सेस सिस्टम की ओर बढ़ रहे हैं, जो उपयोगकर्ताओं के सार्वजनिक डेटा सेट के साथ इंटरैक्ट करने के तरीके को बेहतर बनाते हैं।
हाल ही में नीति आयोग और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की पहलों से यह स्पष्ट होता है कि एआई-आधारित इंटरफेस की ओर व्यापक बदलाव हो रहा है, जो सीधे प्रश्न पूछने (Direct Querying), प्राकृतिक भाषा खोज (Natural Language Search) और संदर्भ-आधारित जानकारी की उपलब्धता (Context-based Information Accessibility) को सक्षम बनाते हैं।
e-Sankhyiki प्लेटफ़ॉर्म के साथ एमसीपी एकीकरण
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डेटा प्लेटफ़ॉर्म
e-Sankhyiki पोर्टल को वर्ष 2024 में लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य देश में आधिकारिक सांख्यिकी के आसान प्रसार के लिए एक व्यापक डेटा प्रबंधन और साझा करने की प्रणाली स्थापित करना है।
वर्तमान में, इसमें 21 सांख्यिकीय उत्पाद शामिल हैं, जिनमें 136 मिलियन से अधिक रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, जो बेहतर डेटा खोज और प्रबंधन में सहायक हैं।
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फरवरी 2026 में, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने e-Sankhyiki पोर्टल, जो भारत का आधिकारिक सांख्यिकी के लिए राष्ट्रीय मंच है, पर मॉडल कॉन्टेक्स्ट प्रोटोकॉल (MCP) सर्वर का बीटा संस्करण प्रस्तुत किया।
यह पहल एनएसओ के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नागरिकों, शोधकर्ताओं और व्यवसायों के लिए आधिकारिक सांख्यिकी तक पहुंच को बेहतर बनाना है।
एमसीपी को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि उपयोगकर्ता अपने स्वयं के एआई-आधारित टूल्स और एप्लिकेशन के माध्यम से सांख्यिकीय डेटा सेट्स के साथ सीधे संवाद कर सकें। सर्वर वर्तमान में e-Sankhyiki पर उपलब्ध 21 सांख्यिकीय उत्पादों तक पहुंच प्रदान करता है। यह उपयोगकर्ताओं को बड़े डेटा फ़ाइलों को डाउनलोड किए बिना सीधे डेटा क्वेरी करने, आधिकारिक डेटा सेट्स को अपने विश्लेषणात्मक सिस्टम से जोड़ने, सांख्यिकीय रिपोर्टिंग को स्वचालित करने तथा एकीकृत इंटरफेस के माध्यम से अनेक डेटा सेट्स तक पहुंच प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
इससे डेटा प्राप्त करने में लगने वाला समय कम होने और विश्लेषण व निर्णय-निर्माण की दक्षता में सुधार होने की अपेक्षा है।
आधिकारिक सांख्यिकी से AI एजेंट को जोड़ने के चरण निम्न लिंक पर देखे जा सकते हैं:
https://datainnovation.mospi.gov.in/mospi-mcp#connect
e-Sankhyiki डेटा सेट्स के लिए सेमांटिक सर्च
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सेमांटिक सर्च फीचर का एक बीटा संस्करण विकसित किया गया है, जो उपयोगकर्ताओं को नेचुरल लैंग्वेज प्रॉम्प्ट्स के माध्यम से e-Sankhyiki पर उपलब्ध डेटा सेट्स को खोजने की सुविधा देता है।
यह फीचर बेहतर यूज़र एक्सपीरियंस के माध्यम से e-Sankhyiki डैशबोर्ड की उपयोगिता को बढ़ाएगा। नेचुरल लैंग्वेज प्रॉम्प्ट में दिए गए संदर्भ के आधार पर, सिस्टम उपयोगकर्ताओं को पोर्टल के सबसे उपयुक्त प्रोडक्ट पेज तक निर्देशित कर सकता है, जिससे आवश्यक सांख्यिकीय जानकारी तक पहुंच आसान हो जाती है।
e-Sankhyiki डेटा सेट्स के लिए सेमांटिक सर्च निम्न लिंक पर उपलब्ध है:
https://esankhyiki.mospi.gov.in/
सांख्यिकीय जानकारी तक पहुंच के लिए एआई चैटबॉट
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MoSPI वेबसाइट को अधिक इंटरएक्टिव और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए एक एआई -संचालित चैटबॉट भी प्रस्तुत किया गया है। यह चैटबॉट उपयोगकर्ताओं को सरल नेचुरल लैंग्वेज क्वेरी के माध्यम से डेटा सेट्स, रिपोर्ट्स और सांख्यिकीय प्रकाशनों को खोजने की सुविधा प्रदान करता है।
इसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह संदर्भ-आधारित उत्तर प्रदान करे और बातचीत की निरंतरता बनाए रखे, जिससे उपयोगकर्ता के साथ इंटरैक्शन अधिक सहज हो सके।
प्रश्नों के उत्तर देने के अलावा, यह चैटबॉट एम्बेडेड लिंक के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को वेबसाइट के संबंधित सेक्शन्स तक भी मार्गदर्शन करता है, जिससे वे आवश्यक सांख्यिकीय जानकारी तक तेज़ी से और कम प्रयास में पहुंच सकें।

सांख्यिकीय जानकारी के लिए एआई चैटबॉट निम्न लिंक पर उपलब्ध है: https://www.mospi.gov.in.
नेशनल डेटा एवं एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म (NDAP)
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2022 में लॉन्च किया गया NDAP विभिन्न सरकारी एजेंसियों के डेटा सेट्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है, उन्हें एक सुव्यवस्थित प्रारूप में प्रस्तुत करता है और विश्लेषण तथा विज़ुअलाइज़ेशन के लिए उपकरण प्रदान करता है। वर्तमान में एनडीएपी पर उपलब्ध डेटा 52 मंत्रालयों और 31 क्षेत्रों में वर्गीकृत है।
NDAP 2.0 के तहत, उन्नत विश्लेषणात्मक परत वाले एक अगली पीढ़ी के प्लेटफॉर्म की परिकल्पना की गई है, जो डेटा की खोजयोग्यता (Discoverability), उपयोगिता, क्रॉस-सेक्टोरल विश्लेषण और डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण प्रक्रियाओं को बेहतर बनाएगा। यह प्लेटफॉर्म उपयोग में आसानी बढ़ाने, उपयोगकर्ता सहभागिता को मजबूत करने और डेटा तक सहज पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखता है, जिससे डेटा का अधिक सहज और प्रभावी उपयोग संभव हो सके।
इसमें विज़ुअलाइज़ेशन और चार्ट्स के माध्यम से पूर्व-तैयार अंतर्दृष्टियाँ (Pre-curated Insights), क्षेत्र-विशिष्ट विश्लेषणात्मक मॉड्यूल, सूक्ष्म स्तर (Micro-level) के डेटा का सामंजस्य (Harmonisation), UI/UX सुधारों के माध्यम से बेहतर प्रस्तुति, तथा AI/ML आधारित सर्च इंजन शामिल हैं, जो उपयोगकर्ताओं के प्रश्नों के लिए AI-आधारित उत्तर प्रदान करने में सक्षम होगा।
ये सभी पहलें मिलकर भारत की सार्वजनिक सांख्यिकीय प्रणालियों में केवल डेटा उपलब्धता से आगे बढ़कर बुद्धिमान डेटा उपयोग (Intelligent Data Usability) की दिशा में परिवर्तन को मजबूत कर रही हैं।
सांख्यिकीय वर्गीकरण और सर्वेक्षण संचालन में AI

AI को सांख्यिकीय वर्गीकरण और सर्वेक्षण संचालन में एकीकृत किया जा रहा है, ताकि सटीकता में सुधार हो, मैन्युअल कार्यभार कम हो और फील्ड स्तर पर तेज़ निर्णय-निर्माण में सहायता मिल सके।
वर्गीकरण टूल्स और सर्च समाधानों के माध्यम से आधिकारिक सर्वेक्षण प्रक्रियाओं को अधिक कुशल, सुसंगत और सांख्यिकीय डेटा संग्रह की बढ़ती जटिलता के अनुरूप अधिक उत्तरदायी बनाया जा रहा है।
औद्योगिक वर्गीकरण के लिए एआई टूल
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आधिकारिक सांख्यिकी के निर्माण में नेशनल इंडस्ट्रियल क्लासिफिकेशन (NIC) के उपयोग को आसान बनाने के लिए एक AI/ML आधारित वर्गीकरण टूल शुरू किया गया है। यह टूल प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) का उपयोग करता है, जिससे हितधारक टेक्स्ट क्वेरी दर्ज कर सकते हैं और सबसे प्रासंगिक तीन एनआईसी कोड सुझाव प्राप्त कर सकते हैं।
यह पहल वर्गीकरण में मैन्युअल प्रयास को कम करने, गणनाकारों (Enumerators) की उत्पादकता बढ़ाने और सांख्यिकीय डेटा संग्रह में अधिक सटीकता सुनिश्चित करने में मदद करती है। इससे योजना और नीति-निर्माण के लिए उपलब्ध साक्ष्यों (Evidence) की गुणवत्ता भी मजबूत होती है।
एआई-सक्षम NIC कोड सेमांटिक सर्च टूल इस लिंक पर उपलब्ध है: https://nicfinder.mospi.gov.in/
MoSPI का एआई दस्तावेज़ सहायक: दस्तावेज़ों के लिए एआई-सक्षम इंटेलिजेंट सर्च समाधान
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दस्तावेज़ों के लिए एक एआई-संचालित इंटेलिजेंट सर्च समाधान विकसित किया गया है, जो उपयोगकर्ताओं को प्राकृतिक भाषा में अपलोड किए गए दस्तावेज़ों को खोजने की सुविधा प्रदान करता है। यह विभिन्न हितधारकों, विशेषकर फील्ड अन्वेषकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जिन्हें मैनुअल, रिपोर्ट्स, प्रकाशनों आदि का संदर्भ लेना होता है, जो अधिकतर पीडीएफ या इमेज फॉर्मेट में उपलब्ध होते हैं।
इस टूल में मंत्रालय द्वारा अप्रैल 2025 से प्रकाशित सभी नवीनतम दस्तावेज़ों का नॉलेज बेस शामिल है, जिसमें विभिन्न सर्वेक्षणों के लिए निर्देश पुस्तिकाएं भी सम्मिलित हैं।
यह चैटबॉट MoSPI वेबसाइट के AI Pilots of Offerings सेक्शन में तथा इस लिंक पर उपलब्ध है: https://statsdoc.ai.mospi.gov.in/
AI-आधारित लेगेसी डेटा एक्सट्रैक्शन और प्रोसेसिंग टूल
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NSO भारत का लेगेसी डेटा PDF, CSV, Excel फाइलों (जिनमें मर्ज्ड सेल्स, हिंदी टेक्स्ट आदि शामिल होते हैं) और इमेज जैसे विभिन्न प्रारूपों में संग्रहित है। इस डेटा को निकालने के लिए विस्तृत कोडिंग की आवश्यकता होती है। आवश्यक कोडिंग ज्ञान या संसाधनों के अभाव में, डेटा की उपयोगिता काफी प्रभावित होती है, जिससे प्रभावी विश्लेषण और निर्णय-निर्माण में बाधा आती है। इसलिए, लेगेसी डेटा को पुनर्जीवित (Rejuvenate) करना आवश्यक है, ताकि उसे आसानी से एक्सेस किया जा सके और उससे उपयोगी अंतर्दृष्टियाँ (Insights) प्रभावी तरीके से प्राप्त की जा सकें।
इस समस्या के समाधान के रूप में एक AI-आधारित टूल विकसित किया गया है, जो विभिन्न दस्तावेज़ों से लेगेसी डेटा को निकालकर उसे आगे की प्रोसेसिंग और विश्लेषण के लिए एक डेटाबेस में संग्रहीत करता है।
यह टूल MoSPI वेबसाइट के AI Pilots of Offerings सेक्शन में तथा इस लिंक पर उपलब्ध है: https://legacydata.ai.mospi.gov.in/
सार्वजनिक डेटा क्षेत्रों में AI के उदाहरणात्मक क्षेत्रीय उपयोग
भारत महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा क्षेत्रों में, जहाँ विश्वसनीयता, सुरक्षा और रियल-टाइम निर्णय सहयोग आवश्यक हैं, तेजी से AI का उपयोग कर रहा है। निम्नलिखित पहलें इस बात के उदाहरण हैं कि कैसे सार्वजनिक डेटा सेट्स, डिजिटल अवसंरचना और नीतिगत ढाँचे इस व्यापक परिवर्तन का समर्थन कर रहे हैं और जनकल्याण से सीधे जुड़े क्षेत्रों में सहायता को मजबूत बना रहे हैं।
स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए विश्वसनीय AI :
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a) हेल्थ एआई के लिए बेंचमार्किंग ओपन डेटा प्लेटफॉर्म (BODH): BODH को फरवरी 2026 में लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य विविध और अनाम (anonymized) वास्तविक दुनिया के स्वास्थ्य डेटा सेट का उपयोग करके एआई मॉडलों का व्यवस्थित मूल्यांकन करना है। यह प्लेटफॉर्म बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले एआई प्रणालियों का प्रदर्शन, मजबूती, पक्षपात और सामान्यीकरण क्षमता के आधार पर आकलन करता है। इससे बेंचमार्किंग मानकों की स्थापना में मदद मिलती है, जो राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के अनुरूप विश्वसनीयता और क्लिनिकल प्रासंगिकता को बेहतर बनाते हैं।
यह प्लेटफॉर्म रणनीतिक रूप से “एआई क्वालिटी टेस्टिंग ट्रिलेम्मा” — यानी विश्वसनीयता, खुलापन और कवरेज के बीच पारंपरिक संतुलन — की समस्या का समाधान करता है।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के ढांचे पर आधारित, BODH पूरे देश के डिजिटल स्वास्थ्य डेटा का उपयोग करता है, ताकि गोपनीयता सुरक्षा बनाए रखते हुए सुरक्षित मॉडल परीक्षण और सत्यापन को समर्थन मिल सके।यह एक ऐसा वातावरण प्रदान करता है, जहाँ डेवलपर्स विभिन्न डेटा सेट्स पर एआई प्रणालियों को प्रशिक्षित और मूल्यांकन कर सकते हैं, और नियामक अधिक मजबूत सांख्यिकीय विश्वसनीयता के साथ संरचित तृतीय-पक्ष आकलन कर सकते हैं। यह प्लेटफॉर्म स्वास्थ्य एआई मॉडलों के बेंचमार्किंग के लिए एक विश्वसनीय इकोसिस्टम विकसित करने और विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं में उनकी सुसंगतता (Consistency) को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
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ABDM: भारत में डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना का निर्माण
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को समर्थन देने के लिए आवश्यक बुनियादी डिजिटल अवसंरचना का निर्माण करना है। यह स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के विभिन्न हितधारकों को डिजिटल माध्यम (डिजिटल हाईवे) के जरिए आपस में जोड़ने का प्रयास करता है।
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b) भारत में स्वास्थ्य के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता की रणनीति (SAHI):
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BODH के साथ शुरू की गई, SAHI को स्वास्थ्य क्षेत्र में सुरक्षित, समन्वित और विश्वसनीय एआई समाधानों के विकास के लिए एक व्यापक ढांचे के रूप में परिकल्पित किया गया है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों, तकनीकी डेवलपर्स, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है, ताकि बड़े पैमाने पर अपनाने से पहले एआई समाधानों का सुरक्षा, प्रभावशीलता और नैतिक अनुपालन के कठोर मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया जा सके।
यह एक गवर्नेंस और ज्ञान-साझाकरण (Knowledge-sharing) प्लेटफॉर्म के रूप में भी कार्य करेगा, जो स्वास्थ्य एआई के विकास और कार्यान्वयन में सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रोत्साहित करेगा। साथ ही, यह मरीजों के डेटा की सुरक्षा, एल्गोरिदम के जिम्मेदार उपयोग और पूरे स्वास्थ्य तंत्र में जवाबदेही (Accountability) पर विशेष जोर देता है।
मौसम विज्ञान डेटा और AI-आधारित पूर्वानुमान
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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत India Meteorological Department और अन्य संस्थान प्रायोगिक मौसम और जलवायु पूर्वानुमान के लिए तेजी से AI-आधारित टूल्स का उपयोग कर रहे हैं। इनमें चक्रवात की तीव्रता के आकलन के लिए एडवांस्ड ड्वोरक तकनीक, साथ ही AI और मशीन लर्निंग आधारित फाउंडेशन मॉडल तथा हाइब्रिड सिस्टम शामिल हैं, जो मौसम पूर्वानुमान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता को डायनामिकल फोरकास्टिंग विधियों के साथ जोड़ते हैं।
AI से संबंधित शोध कई पूर्वानुमान क्षेत्रों में भी लागू किया जा रहा है, जिनमें शॉर्ट-रेंज वैश्विक पूर्वानुमान, वर्षा का डाउनस्केलिंग, आग के स्थान की भविष्यवाणी, कोहरे का पूर्वानुमान, बिजली और आंधी-तूफान अलर्ट, तथा न्यूमेरिकल वेदर प्रेडिक्शन सिस्टम में डीप लर्निंग के माध्यम से बेहतर वर्षा आकलन शामिल हैं।
कृषि निर्णय सहायता के लिए एआई
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- भारत-विस्टार (Bharat-VISTAAR: कृषि संसाधनों तक पहुँच के लिए वर्चुअली इंटीग्रेटेड सिस्टम): केंद्रीय बजट 2026–27 में प्रस्तावित भारत-विस्टार एक बहुभाषी AI-सक्षम प्रणाली है, जो AgriStack पोर्टल्स और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सलाहकारी संसाधनों को एकीकृत करेगी। यह किसानों को अनुकूलित सलाह (Customized Advisory) प्रदान करके कृषि उत्पादकता बढ़ाने, निर्णय-निर्माण में सुधार करने और जोखिम को कम करने में मदद करेगी।
- किसान e-मित्र (Kisan e-Mitra): 2023 में लॉन्च किया गया यह प्लेटफॉर्म किसानों को वॉयस-सक्षम AI सहायता प्रदान करता है, जो 11 क्षेत्रीय भाषाओं में प्रमुख सरकारी योजनाओं से संबंधित प्रश्नों के उत्तर देता है। दिसंबर 2025 तक यह 93 लाख से अधिक प्रश्नों का समाधान कर चुका है।
- राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (National Pest Surveillance System – NPSS): डिजिटल कृषि सहायता को और मजबूत करते हुए, NPSS AI और मशीन लर्निंग का उपयोग करके इमेज-आधारित विश्लेषण के माध्यम से कीट हमलों और फसल रोगों का पता लगाता है। दिसंबर 2025 तक यह 66 फसलों और 432 कीट प्रजातियों में 10,000 से अधिक विस्तार कार्यकर्ताओं (Extension Workers) को सहयोग प्रदान कर रहा है।

सामूहिक रूप से, ये पहलें डेटा-आधारित उपकरणों के उपयोग के माध्यम से विश्वसनीयता बढ़ाने, सेवा वितरण को सुदृढ़ करने और अधिक सूचित सार्वजनिक निर्णय-निर्माण का समर्थन करने पर बढ़ते संस्थागत जोर को दर्शाती हैं।
एआई एकीकरण को समर्थन देने वाली संस्थागत संरचना
भारत का डेटा इकोसिस्टम संस्थागत प्लेटफ़ॉर्म्स के माध्यम से लगातार सुदृढ़ हो रहा है, जो सार्वजनिक प्रणालियों में नवाचार, तकनीक अपनाने और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देते हैं। हाल की पहलों से यह स्पष्ट होता है कि समर्पित डेटा अवसंरचना, सहयोगात्मक शोध ढांचे और डिजिटल सार्वजनिक प्लेटफ़ॉर्म्स के जरिए आधिकारिक सांख्यिकी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को एकीकृत किया जा रहा है।
तकनीकी उपयोग के साथ-साथ साझेदारी और प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि उभरते हुए टूल्स दक्षता बढ़ाएं, पहुंच का विस्तार करें और विभिन्न क्षेत्रों में विश्वसनीय निर्णय-निर्माण को समर्थन दें।
डेटा इनोवेशन लैब: भारत का सांख्यिकीय सैंडबॉक्स
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डेटा इन्फॉर्मेटिक्स और इनोवेशन डिवीजन (DIID) के अंतर्गत डेटा इनोवेशन लैब (DIL) की स्थापना, भारत की राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणाली के आधुनिकीकरण में एक महत्वपूर्ण आधारशिला का प्रतिनिधित्व करती है। यह आधिकारिक सांख्यिकी के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने, उभरती तकनीकों को अपनाने और सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक रणनीतिक प्लेटफ़ॉर्म के रूप में कार्य करती है।
डेटा-आधारित प्रणालियों के बढ़ते महत्व को ध्यान में रखते हुए, DI लैब उन्नत तकनीकों जैसे AI, बिग डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड कंप्यूटिंग के उपयोग के माध्यम से सांख्यिकीय प्रक्रियाओं की दक्षता, सटीकता और पहुंच में सुधार पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य एक अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी सांख्यिकीय इकोसिस्टम का निर्माण करना है, जो साक्ष्य-आधारित नीतिनिर्माण और डेटा-केंद्रित शासन को समर्थन दे।
यह पहल तीन मुख्य स्तंभों—रिसर्च नेटवर्क, इनोवेशन और स्टूडेंट आउटरीच—पर आधारित है, जो मिलकर DI लैब पोर्टल के माध्यम से देश के डेटा इकोसिस्टम के विकास को समर्थन देते हैं। यह पोर्टल शोध, प्रयोग और सहभागिता के लिए एक सहयोगात्मक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के रूप में डिज़ाइन किया गया है।

जनवरी 2026 तक, MoSPI ने विभिन्न संस्थानों के साथ 17 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही, डेटा इनोवेशन लैब के अंतर्गत 12 नए AI उपयोग मामलों (Use Cases) का एक रिपॉजिटरी विकसित किया गया है, जिनमें से 2 उपयोग मामले वर्तमान में प्रोडक्शन में हैं।
सहयोगात्मक पारिस्थितिकी तंत्र और साझेदारियाँ: आधिकारिक सांख्यिकी में AI के एकीकरण की सफलता सरकार की विभिन्न एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच प्रभावी सहयोग पर निर्भर करती है। डेटा इनोवेशन लैब, NITI Aayog सहित शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के साथ साझेदारी में कार्य करता है। यह सहयोगात्मक दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि भारत का सांख्यिकीय आधुनिकीकरण प्रमुख संस्थानों के बीच व्यापक ज्ञान-साझाकरण से निरंतर लाभान्वित होता रहे।
AI-आधारित सांख्यिकीय प्रणालियों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण
‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की राष्ट्रीय भावना के अनुरूप, क्षमता निर्माण को पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ाकर तकनीक-आधारित प्रणालियों के माध्यम से सुदृढ़ किया जा रहा है। इसमें बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों को अपनाया जा रहा है, ताकि आधिकारिक सांख्यिकी की सटीकता, समयबद्धता और वैश्विक तुलनीयता में सुधार हो सके। राज्य स्तरीय सांख्यिकीय प्रणालियों के साथ सहयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है, साथ ही विश्वविद्यालयों और विशिष्ट संस्थानों के साथ साझेदारी का विस्तार किया जा रहा है। यह मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करने और भविष्य के लिए तैयार सांख्यिकीय कार्यबल के निर्माण की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करता है। एजेंटिक एआई (Agentic AI) की ओर बढ़ते रुझान के साथ, जहाँ एआई प्रणालियाँ अधिक स्वायत्त रूप से कार्य करने लगी हैं, राष्ट्रीय सांख्यिकीय प्रणाली प्रशिक्षण अकादमी (NSSTA) में प्रशिक्षण का दायरा भी और अधिक विस्तार होने की अपेक्षा है। साथ ही, कच्चे डेटा को संदर्भ प्रदान करने और एआई प्रणालियों में निहित पक्षपात (bias) के जोखिमों को संबोधित करने में मानव हस्तक्षेप की भूमिका पर विशेष जोर बना हुआ है। यह स्वीकार किया जाता है कि निरंतर क्षमता निर्माण आवश्यक है, ताकि सांख्यिकीय अधिकारी शासन के समर्थन में उच्च गुणवत्ता और निष्पक्ष डेटा तैयार करने के लिए सक्षम बने रहें।
भारतजेन: भारत की बहुभाषी एआई नींव का निर्माण
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जून 2025 में लॉन्च किया गया, भारतजेन (BharatGen) भारत का पहला सरकार-वित्तपोषित, संप्रभु (sovereign), बहुभाषी और मल्टीमोडल लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) है। इसे राष्ट्रीय अंतर्विषयक साइबर-भौतिक प्रणालियों के मिशन (National Mission on Interdisciplinary Cyber-Physical Systems) के अंतर्गत विकसित किया गया है और इंडियाAI मिशन के माध्यम से आगे बढ़ाया गया है। यह मॉडल 22 भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है और टेक्स्ट, वाणी (speech) तथा दस्तावेज़-विजन (document vision) क्षमताओं को एकीकृत करता है। भारत-केंद्रित डेटा सेट पर आधारित और शैक्षणिक संस्थानों के एक संघ (consortium) द्वारा विकसित, भारतजेन सार्वजनिक और विकासात्मक अनुप्रयोगों के लिए स्वदेशी रूप से विकसित एआई स्टैक स्थापित करता है। भारतजेन के उत्पादों तक पहुँचने के लिए: https://bharatgen.com/

उभरती प्रौद्योगिकियों के माध्यम से आधार को सशक्त बनाना
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- इनविज़िबल शील्ड: एक अरब से अधिक भारतीयों की पहचान की सुरक्षा
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने फरवरी 2026 में उन्नत एआई-आधारित बायोमेट्रिक डी-डुप्लिकेशन और दस्तावेज़ सत्यापन प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है, जो भारत की विकसित होती डिजिटल सुरक्षा संरचना का हिस्सा है। यह नया प्लेटफॉर्म फिंगरप्रिंट, चेहरे और आइरिस (iris) जैसी बायोमेट्रिक विधियों के बीच मिलान को सुदृढ़ करके नामांकन और अद्यतन की सटीकता में सुधार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नवीनतम एआई इंफेरेंस तकनीकों के साथ, UIDAI कई राज्यों में उन्नत डी-डुप्लिकेशन का कार्यान्वयन पूरा कर चुका है और आने वाले महीनों में इसे पूरे देश में लागू करने की दिशा में अग्रसर है।
- आधार विज़न 2032 तेजी से बदलते तकनीकी और नियामक परिवेश को ध्यान में रखते हुए, UIDAI ने आधार के भविष्य के विकास का मार्गदर्शन करने के लिए ‘आधार विज़न 2032’ के अंतर्गत एक व्यापक रणनीतिक और तकनीकी समीक्षा शुरू की है। इसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, क्वांटम कंप्यूटिंग, उन्नत एन्क्रिप्शन और अगली पीढ़ी की डेटा सुरक्षा प्रणालियों जैसी उन्नत तकनीकों को एकीकृत करना है, ताकि आधार की मजबूती (resilience) बढ़े, स्केलेबिलिटी में सुधार हो और भविष्य की डिजिटल आवश्यकताओं के अनुरूप सुरक्षित अनुकूलन सुनिश्चित किया जा सके।
एआई-आधारित आधार प्रमाणीकरण समाधान
UIDAI द्वारा विकसित AI और मशीन लर्निंग आधारित आधार फेस ऑथेंटिकेशन समाधान का तेजी से अपनाया गया है। वर्तमान में इसका उपयोग अनेक सरकारी सेवाओं में किया जा रहा है, जिससे लक्षित लाभार्थियों तक लाभों की सुगम और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित हो रही है। प्रधानमंत्री आवास (शहरी), पीएम ई-ड्राइव, पीएम-जय, पीएम उज्ज्वला, पीएम किसान और पीएम इंटर्नशिप सहित कई प्रमुख योजनाओं में बेहतर सेवा वितरण के लिए इस प्रणाली को एकीकृत किया गया है।
साथ मिलकर, ये पहल भारत में AI-सक्षम डेटा प्रणालियों के लिए दीर्घकालिक संस्थागत क्षमता निर्माण के व्यापक प्रयास को दर्शाती हैं। यह नवाचार, साझेदारी और मानवीय क्षमता के समन्वय के महत्व को भी रेखांकित करती हैं, ताकि विश्वसनीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को सुदृढ़ किया जा सके।
निष्कर्ष
भारत का अनुभव यह दर्शाता है कि एआई को बड़े पैमाने पर एकीकृत कर सार्वजनिक डिजिटल क्षमताओं को कैसे सशक्त बनाया जा सकता है। तकनीक से आगे बढ़कर, एआई का विकसित होता उपयोग भारत के इस व्यापक प्रयास को दर्शाता है कि डेटा को अधिक सार्थक, सुलभ और आम लोगों की रोज़मर्रा की जरूरतों के प्रति उत्तरदायी बनाया जाए। इसका उद्देश्य डेटा की गुणवत्ता और उसके व्यावहारिक उपयोग—दोनों को सुदृढ़ करना है, ताकि उत्तरदायी शासन और क्षेत्र-विशिष्ट निर्णय-निर्माण को बेहतर बनाया जा सके।
विकसित किए जा रहे कई समाधान भारत के विशिष्ट संदर्भों—जैसे भाषाई विविधता और सामाजिक-आर्थिक विकास के विभिन्न स्तरों—को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं। इस बात पर विशेष जोर दिया जा रहा है कि तकनीकी प्रगति समावेशी और व्यापक रूप से सुलभ समाधानों में परिवर्तित हो। ये पहल इस ओर संकेत करती हैं कि एआई भारत के सार्वजनिक डेटा परिदृश्य में एक सक्षम परत के रूप में उभर रहा है, जो जानकारी के वर्गीकरण, पहुंच, व्याख्या और उपयोग के तरीकों को बेहतर बना रहा है।
संदर्भ
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पीआईबी शोध
भारत के सांख्यिकी और डेटा इकोसिस्टम का एआई-आधारित रूपांतरण
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पीके/केसी/एके
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