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साधना सप्ताह 2026
नागरिक केंद्रित शासन के लिए क्षमता विकास को सुदृढ़ करना
Posted On:
04 APR 2026 3:54PM
प्रमुख बिंदु
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साधना सप्ताह 2026 का आयोजन 2 से 8 अप्रैल 2026 तक एक राष्ट्रव्यापी क्षमता विकास पहल के रूप में किया जा रहा है।
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इसमें 100 से अधिक केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों/संगठनों, 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों तथा 250 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों की सक्रिय भागीदारी है।
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मिशन कर्मयोगी ने आइगॉट पर 1.5 करोड़ से अधिक शिक्षार्थियों को जोड़ा है, जिसमें 8 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूर्ण किए गए हैं और विविध भाषाओं में 4,600 से अधिक पाठ्यक्रम हैं।
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यह मुख्य रूप से तीन विषयों—प्रौद्योगिकी, परंपरा और ठोस परिणामों—पर केंद्रित है।
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इस सप्ताह के दौरान कर्मयोगी क्षमता कनेक्ट, उन्नति पोर्टल और एआई पावर्ड शिक्षण उपकरणों सहित प्रमुख पहलों का शुभारंभ किया जाएगा।
परिचय
भारत की सबसे बड़ी सहयोगपूर्ण क्षमता विकास पहलों में से एक के रूप में स्ट्रेंथनिंग अडैप्टिव डेवलपमेंट एंड ह्यूमेन एप्टीट्यूड फॉर नेशनल एडवांसमेंट (साधना) सप्ताह 2026 का आयोजन 2 से 8 अप्रैल 2026 तक किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य नागरिक-केंद्रित शासन के लिए आवश्यक कौशलों को बढ़ावा देना है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, क्षमता विकास आयोग तथा कर्मयोगी भारत द्वारा आयोजित यह पहल उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों तथा प्रशिक्षण संस्थानों को एक साझा मंच पर लाई है। “हम बने कर्मयोगी” टैगलाइन के साथ यह पहल क्षमता विकास आयोग के स्थापना दिवस तथा मिशन कर्मयोगी के पाँच वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक है।

मिशन कर्मयोगी: लोक-केंद्रित शासन के लिए क्षमता विकास
साधना सप्ताह, मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत एक पहल है, जिसे सिविल सेवा क्षमता विकास के राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में भी जाना जाता है। यह केंद्रीय क्षेत्र की एक योजना है, जिसे कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा लागू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भविष्य-उन्मुख, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित सिविल सेवा का निर्माण करना है, जो नियम-आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर भूमिका-आधारित है और दक्षताओं द्वारा संचालित है। यह मिशन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सरकार के मानव संसाधन आधार को सुदृढ़ कर शासन में बदलाव लाने से संबंधित विजन को दर्शाता है। यह पहल क्षमता निर्माण और दक्षता-आधारित शिक्षण पर केंद्रित है, ताकि नागरिकों के लिए बेहतर परिणाम और सेवाएं प्रदान करने के लिए अधिकारियों को सही कौशल, दृष्टिकोण और जवाबदेही से लैस किया जा सके।
इस मिशन को दो संस्थानों का समर्थन प्राप्त है। 2021 में स्थापित क्षमता विकास आयोग मंत्रालयों, विभागों और संगठनों को उनकी क्षमता विकास योजनाओं की तैयारी और क्रियान्वयन में सहायता प्रदान करता है। 2022 में स्थापित कर्मयोगी भारत विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी), आइगॉट डिजिटल शिक्षण प्लेटफ़ॉर्म के प्रबंधन और संचालन के लिए उत्तरदायी है।
क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) मिशन कर्मयोगी फ्रेमवर्क का संरक्षक है, जिसका उद्देश्य क्षमता विकास और दक्षता-आधारित शिक्षण के माध्यम से सिविल सेवा सुधारों को आगे बढ़ाना है। यह व्यक्तिगत और संस्थागत क्षमताओं का विकास करते हुए, नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा देते हुए, भविष्य के लिए तत्परता और सार्वजनिक प्रशासन के सभी स्तरों पर आजीवन सीखने की संस्कृति को प्रोत्साहित करते हुए सरकार के मानव संसाधन आधार को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य करता है। यह आयोग शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह, नागरिक-केंद्रित और भविष्य के लिए तत्पर बनाने हेतु विभिन्न ढाँचों का निर्माण करता है, मानक निर्धारित करता है तथा सहयोग को बढ़ावा देता है।
मिशन कर्मयोगी पहल का एक प्रमुख हिस्सा आइगॉट कर्मयोगी डिजिटल शिक्षण प्लेटफ़ॉर्म है। यह व्यवहारिक, कार्यात्मक और विषयगत क्षेत्रों में ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान करता है, जिससे सरकारी कर्मचारी कभी भी और कहीं से भी सीख सकते हैं।
यह मिशन भारत सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों में मौजूदा सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों और आइगॉट कर्मयोगी प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से लागू किया जा रहा है। क्षमता विकास के प्रयास मुख्य रूप से इस डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के जरिए संचालित किए जाते हैं, जबकि विभिन्न मंत्रालय और विभाग अपनी-अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार क्षमता विकास योजनाएँ तैयार करते हैं।
पिछले पाँच वर्षों में, मिशन कर्मयोगी सिविल सेवाओं में क्षमता विकास के क्षेत्र में मौलिक परिवर्तन लाया है, जिसमें नियम-आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर भूमिका-आधारित ढाँचे को अपनाया गया है। सीखने की प्रक्रिया को अब विशिष्ट कार्यों और जिम्मेदारियों के लिए आवश्यक दक्षताओं के अनुरूप बनाया गया है।
मिशन कर्मयोगी: क्षमता विकास में बड़े पैमाने पर बदलाव
मिशन कर्मयोगी पिछले पांच वर्षों में क्षमता विकास में मूलभूत बदलाव लाया है। आइगॉट प्लेटफ़ॉर्म पर 1.5 करोड़ से अधिक शिक्षार्थियों ने पंजीकरण किया है, 8 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूर्ण किए गए हैं और 4,600 से अधिक पाठ्यक्रम विविध भाषाओं में उपलब्ध हैं। इसके अलावा, 130 से अधिक क्षमता विकास योजनाएँ तैयार की गई हैं और शिक्षण परिणामों को प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली के साथ एकीकृत किया गया है।
यह परिवर्तन इस बात को मान्यता देता है कि प्रभावी शासन केवल प्रशासनिक ज्ञान पर ही नहीं, बल्कि समस्या समाधान, सहयोग, नवाचार और समानुभूति जैसी व्यवहारिक क्षमताओं पर भी निर्भर करता है। यह मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के साथ-साथ प्रशिक्षण संस्थानों को भी क्षमता विकास को अपनी संगठनात्मक प्राथमिकताओं और सेवा प्रदायगी की आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित करने में सक्षम बनाता है।
साधना सप्ताह इस आधार को आगे बढ़ाते हुए दक्षता-आधारित क्षमता विकास को व्यापक स्तर पर सुदृढ़ करता है। साधना सप्ताह कर्मयोगियों के विकास के इस दर्शन पर जोर देने और पुनः पुष्टि करने के लिए मनाया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिविल सेवाओं में सुधारित कौशल और क्षमताएँ जमीनी स्तर पर बेहतर सेवा प्रदायगी में परिणत हों। यह पहल इस विचार को भी मजबूती प्रदान करती है कि मजबूत शासन उन सक्षम व्यक्तियों और संस्थानों द्वारा स्थापित होता है, जो विकसित भारत 2047 के विज़न की दिशा में मिलकर काम करते हैं।
राष्ट्रीय स्तर की मुहिम
साधना सप्ताह 100 से अधिक केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों, 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा 250 से अधिक सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों को एक एकीकृत राष्ट्रीय ढाँचे के तहत एक साथ लाया है। पहली बार, शासन के विभिन्न स्तरों पर क्षमता विकास के प्रयासों को एक साझा ढाँचे में समन्वित किया गया है, जिससे सीखने की प्रक्रिया एक साझा राष्ट्रीय मुहिम में परिवर्तित हो रही है। यह दृष्टिकोण सभी स्तरों के अधिकारियों की भागीदारी सक्षम बनाता है और इससे देशभर में विचारों, श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान और सहयोगपूर्ण रूप से समस्या समाधान को बढ़ावा मिलता है। साधना सप्ताह की शुरुआत नई दिल्ली में मिशन कर्मयोगी पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन के साथ हुई, जिसमें सरकार, प्रशिक्षण संस्थानों का वरिष्ठ नेतृत्व और नीतिगत विशेषज्ञ एक साथ आए।
साधना सप्ताह के तीन मुख्य विषय
साधना सप्ताह विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने के लिए आवश्यक कौशलों के विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए तीन सूत्रों – प्रौद्योगिकी, परंपरा और ठोस परिणाम – के गिर्द संरचित है।
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प्रौद्योगिकी: 3 और 4 अप्रैल के लिए यह मुख्य विषय रहेगा। इस दौरान नवीनतम और उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके शासन को अधिक कुशल और नागरिक-केंद्रित बनाने के तरीकों का पता लगाने पर जोर दिया जाएगा। इस दौरान शासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, डेटा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रियाओं तथा प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और ऑटोमेशन प्लेटफ़ॉर्म जैसे उभरते उपकरणों के उपयोग जैसे पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।
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परंपरा: 5 और 6 अप्रैल को परंपरा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस दौरान भारतीय ज्ञान प्रणालियों, भारतीय दर्शन से नैतिक प्रारूपों तथा समकालीन सार्वजनिक प्रशासन के लिए प्रासंगिक समुदाय-आधारित शासन के ऐतिहासिक उदाहरणों पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य इस बात का पता लगाना है कि वर्तमान दौर के शासन को नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक संवेदनशील बनाने के लिए इन्हें शासन व्यवस्था की मुख्यधारा में कैसे शामिल किया जाए।
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ठोस परिणाम: 7 और 8 अप्रैल के लिए यह फोकस थीम रहेगा। इसमें सार्वजनिक मूल्य को मापने, निगरानी के ढाँचों को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया जाएगा कि नीतियों से नागरिकों के जीवन में सुधार स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हो। नागरिक प्रभाव की ट्रैकिंग, नागरिकों के लिए प्राथमिक क्षेत्रीय परिणामों की स्पष्ट व्याख्या, और डैशबोर्ड आधारित निगरानी जैसे कुछ प्रमुख विषयों पर चर्चा होगी।

साधना सप्ताह के अपेक्षित परिणाम
सप्ताह के अंत में प्रत्येक मंत्रालय/विभाग से दो प्राथमिकता वाली प्रौद्योगिकी संबंधी पहलों के सुझाव देने की अपेक्षा है: क्षेत्र-प्रासंगिक दो स्वदेशी या पारंपरिक मॉडल और वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए आकलन करने योग्य तीन परिणाम प्रतिबद्धताएँ - प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाएगी। इन्हें फिर दस चिन्हित क्षेत्रों के तहत विभिन्न क्षेत्रों के समग्र संकलन में संयोजित किया जाएगा। ये चिन्हित क्षेत्र हैं: अवसंरचना, संसाधन, सुरक्षा और विदेश मामले, शासन, वित्त और अर्थव्यवस्था, कल्याण, वाणिज्य, मानव विकास, कृषि और ग्रामीण विकास तथा प्रौद्योगिकी।
आरंभ की जाने वाली प्रमुख पहलें
मिशन कर्मयोगी को और मजबूती प्रदान करने और सिविल सेवा इकोसिस्टम में क्षमता विकास को और व्यापक बनाने के लिए साधना सप्ताह के दौरान कई प्रमुख पहलों का शुभारंभ किया जा रहा है।
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कर्मयोगी क्षमता कनेक्ट: इसका उद्देश्य संरचित शिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से फ्रंटलाइन कर्मचारियों की क्षमताओं का विकास करना है, ताकि वे बेहतर दक्षता और डिजिटल जागरूकता के साथ नागरिक-केंद्रित सेवाएँ प्रदान कर सकें।
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राष्ट्रीय जन सेवा कार्यक्रम: युवा स्वयंसेवकों और अधिकारियों को सहायक या फैसिलिटेटर के रूप में प्रशिक्षित करके, जमीनी स्तर पर सेवा भाव को बढ़ावा देकर नागरिक सेवा डिलीवरी को सुदृढ़ बनाता है।
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उन्नति पोर्टल: यूनिफाइड न्यू-एज नेशनल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूशंस (उन्नति) पोर्टल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए एक एकीकृत डिजिटल आधार तैयार करता है, जो पूरे इकोसिस्टम में रीयल-टाइम निगरानी, सहयोग और डेटा-आधारित क्षमता निर्माण को सक्षम बनाता है।
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आइगॉट लर्निंग असेसमेंट फ्रेमवर्क: विश्वास पर आधारित मूल्यांकन प्रणाली पेश करता है, ताकि सीखने के परिणामों का वास्तविक कार्यस्थल पर लागू होना और शासन पर बेहतर प्रभाव डाला जाना सुनिश्चित हो सके।
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कर्मयोगी गान: समर्पण, सेवा और निरंतर सीखने की भावना को दर्शाता है, और मिशन कर्मयोगी के मूल्यों को सुदृढ़ बनाने के लिए इसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा।
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एआई पावर्ड अमृत ज्ञान कोष सुइट: एआई उपकरणों के माध्यम से शासन से संबंधित केस स्टडीज के निर्माण और उपयोग को बढ़ाता है, जो विश्लेषण, खोज और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल किए जाने में सहायता करते हैं।
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विकसित पंचायत के लिए क्षमता विकास : बेहतर निर्णय लेने और सेवाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए ई-लर्निंग मॉड्यूल और एआई-सक्षम उपकरणों के माध्यम से जमीनी स्तर पर शासन को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।
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वैज्ञानिकों के लिए प्रशासनिक क्षमता विकास: यह एक विशेष कार्यक्रम है, जिसे वैज्ञानिकों को प्रशासनिक भूमिकाओं में आने के दौरान शासन, नेतृत्व और निर्णय-लेने के कौशलों से लैस करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
निरंतर क्षमता विकास के लिए सीखने के मार्ग
साधना सप्ताह आइगॉट कर्मयोगी प्लेटफ़ॉर्म पर चयनित पाठ्यक्रमों, सामूहिक चर्चा सत्रों, विषयक वेबिनारों और प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा आयोजित व्यावहारिक कार्यशालाओं के माध्यम से सीखने के अनेक अवसर प्रदान करता है। ये गतिविधियाँ नेतृत्व, संचार, डेटा विश्लेषण, परियोजना प्रबंधन और डिजिटल शासन जैसी दक्षताओं पर केंद्रित हैं।
यह पहल समूचे शासन में निरंतर सीखने की संस्कृति को सुदृढ़ करती है तथा अनुकूलनशील और भविष्य के लिए तैयार संस्थाओं के निर्माण के महत्व को रेखांकित करती है। यह विकसित भारत 2047 के विज़न को साकार करने में सहायता देने के लिए मानव संसाधन विकास में लगातार निवेश की आवश्यकता पर जोर देती है।
निष्कर्ष
साधना सप्ताह 2026 भारत में भविष्य-उन्मुख सिविल सेवा प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करता है। निरंतर सीखने, सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देकर यह प्रभावी शासन की नींव को सुदृढ़ करता है।
जैसे कि भारत विकसित भारत 2047 के विजन की ओर बढ़ रहा है, यह पहल सिविल सेवकों को आवश्यक कौशल और दक्षताओं से लैस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी, ताकि वे उभरती चुनौतियों का सामना कर सकें और नागरिकों के लिए बेहतर परिणाम प्रदान कर सकें।
संदर्भ :
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2248331®=3&lang=2
पीआईबी शोध
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पीके/केसी/आरके
(Explainer ID: 158014)
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