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भारत के अंतर्देशीय जलमार्गों के जरिये एक यात्रा

Posted On: 27 APR 2026 11:24AM

मुख्य बिंदु

  • भारत में 111 राष्ट्रीय जलमार्गों का एक विस्तृत नेटवर्क है, जिसकी कुल लंबाई 20,187 किमी है और यह 23 राज्यों तथा चार केंद्र शासित प्रदेशों में फैला हुआ है। इनमें से इस समय 32 राष्ट्रीय जलमार्ग संचालन में हैं।
  • केंद्रीय बजट 2026–27 में अगले 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों (एनडबल्यूएस) को संचालन में लाने की घोषणा की गई है।
  • वित्त वर्ष 2024–25 में राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल परिवहन 145.84 मिलियन मीट्रिक टन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है।

 

परिचय

भारत के पास नदियों, नहरों, बैकवॉटर और खाड़ियों के रूप में अंतर्देशीय जलमार्गों का एक व्यापक नेटवर्क है। ये मार्ग माल परिवहन के लिए किफायती और पर्यावरण के अनुकूल साधन प्रदान करते हैं, क्योंकि इनमें ईंधन की खपत कम होती है और उत्सर्जन भी कम होता है। साथ ही, इन्हें न्यूनतम भूमि की आवश्यकता होती है और ये भारी एवं बड़े आकार वाले कार्गो को सुरक्षित रूप से ढो सकते हैं और संचालन में उच्च सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं। भारत में अंतर्देशीय जलमार्ग व्यस्त सड़कों और रेलमार्गों पर दबाव कम करने में भी मदद करते हैं तथा रोल-ऑन/रोल-ऑफ (रो-रो) फेरी के माध्यम से वाहन परिवहन और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करता है, रखरखाव लागत कम रखता है और उन उद्योगों उपभोक्ताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो एक विश्वसनीय जलमार्ग नेटवर्क पर निर्भर हैं।

इस क्षमता को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बजट 2026–27 में अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को संचालन में लाने की घोषणा की गई है। साथ ही, कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य सड़क और रेल से जल परिवहन की ओर माल ढुलाई को स्थानांतरित करना है। इस नीति का लक्ष्य 2047 तक अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय शिपिंग की संयुक्त हिस्सेदारी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करना है। इसी दिशा में, ओडिशा में राष्ट्रीय जलमार्ग-5 (एनडबल्यू-5) को विकसित किया जाएगा, जो तालचर और अंगुल जैसे खनिज-समृद्ध क्षेत्रों को कलिंगनगर जैसे औद्योगिक केंद्रों और पारादीप तथा धामरा बंदरगाहों से जोड़ेगा। एनडबल्यू-5 के मार्ग पर क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को कौशल विकास के अवसर मिलेंगे। इसके अतिरिक्त, वाराणसी और पटना में अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए एक समर्पित जहाज मरम्मत इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा।

भारत में अंतर्देशीय जलमार्ग और उसके नेटवर्क का विवरण

अंतर्देशीय जलमार्ग की समझ

अंतर्देशीय जलमार्ग वे नौवहन योग्य जल मार्ग होते हैं, जो किसी देश के भीतर स्थित होते हैं और समुद्र का हिस्सा नहीं होते। इनमें नदियां, नहरें, झीलें, लैगून और कुछ नदी मुहाने शामिल हैं। ये मार्ग प्राकृतिक या मानव-निर्मित विशेषताओं के कारण नौवहन के लिए उपयुक्त होते हैं और सामान्य परिस्थितियों में कम से कम 50 टन भार वहन करने वाले जहाजों के संचालन की अनुमति देते हैं। किसी नदी या झील को नौवहन योग्य तब माना जाता है, जब उसका उपयोग वाणिज्यिक परिवहन के लिए किया जा सके। ये मार्ग प्राकृतिक रूप से उपयुक्त हो सकते हैं या नहरों और अन्य सुधारों के माध्यम से विकसित किए जा सकते हैं।

कुछ समुद्री प्रकृति के जलमार्ग और वे मार्ग, जिनका उपयोग मुख्यतः समुद्री जहाजों द्वारा किया जाता है, वे भी अंतर्देशीय जलमार्गों में शामिल किए जा सकते हैं। नदियों और नहरों की लंबाई मध्य प्रवाह (मिड-चैनल) के साथ मापी जाती है, जबकि झीलों और लैगून की लंबाई उस सबसे छोटे नौवहन योग्य मार्ग के आधार पर मापी जाती है, जिसका उपयोग परिवहन के लिए किया जाता है। नदी मुहानों को अंतर्देशीय जलमार्ग तब तक माना जाता है, जब तक समुद्र के निकटतम बिंदु पर नदी की चौड़ाई निम्न ज्वार  पर तीन किमी से कम और उच्च ज्वार पर पांच  किमी से कम हो।

ये जलमार्ग वाणिज्यिक परिवहन को सहायता करते हैं-जो प्राकृतिक नदी मार्गों से लेकर पूर्णतः इंजीनियर्ड चैनलों तक फैले होते हैंऔर इन्हें सामान्यतः तीन मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:

ओपन रिवर जलमार्ग  वे प्राकृतिक नदियां होती हैं, जहां जहाज़ अपेक्षाकृत स्वतंत्र रूप से बहने वाले चैनल में संचालित होते हैं। इनमें केवल सीमित सुधार किए जाते हैं, ताकि नौवहन के लिए पर्याप्त गहराई बनी रहे।

कैनालाइज़्ड जलमार्ग वे नदियां हैं, जिन्हें अवरोधकों और बांध जैसी संरचनाओं के माध्यम से तैयार किया गया है। इससे नदी को शांत हिस्सों में विभाजित किया जाता है और जल स्तर अधिक स्थिर एवं विश्वसनीय बनाया जाता है, जिससे परिवहन सुगम होता है।

नहरें  पूर्णतः मानव-निर्मित जलमार्ग होते हैं, जिन्हें विशेष रूप से नौवहन के लिए बनाया जाता है। ये प्राकृतिक बाधाओं को पार करने या विभिन्न नदियों और झीलों को जोड़ने के लिए उपयोग किए जाते हैं और इनमें अंतर्देशीय जल परिवहन के लिए पूरी तरह नियंत्रित परिस्थितियाँ होती हैं।

यदि कोई अंतर्देशीय जलमार्ग दो देशों की सीमा पर होता है, तो उसे दोनों देशों का साझा माना जाता है। विश्व बैंक के अनुसार, जलमार्ग कई अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाएँ भी निभाते हैं। ये मनोरंजन युक्त नौकायन, अवकाशकालीन गतिविधियों और मत्स्य पालन के जरिये पर्यटन को बढ़ावा देते हैं। ये बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, औद्योगिक उपयोग और घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति में मदद करके जल प्रबंधन में भी सहायक होते हैं। साथ ही, ये वन्यजीव आवासों को बनाए रख कर और प्रकृति संरक्षण की सहायता करके इकोसिस्टम्स की रक्षा करते हैं। इसके अतिरिक्त, जलमार्ग रियल एस्टेट की संभावनाओं को बढ़ाते हैं, हाउसबोट्स के लिए स्थान उपलब्ध कराते हैं और नदी द्वीपों के विकास को भी प्रोत्साहित करते हैं।

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अंतर्देशीय जलमार्गों के जरिये परिवहन

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) इस बात पर जोर देता है कि अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से परिवहन अधिक टिकाऊ होता है क्योंकि इसमें ऊर्जा की खपत सड़क परिवहन की तुलना में लगभग तीन से छह गुना कम और रेल परिवहन की तुलना में लगभग दो गुना तक कम होती है। साथ ही, यह कम शोर उत्पन्न करता है और उत्सर्जन भी कम करता है। एक मानक अंतर्देशीय पोत जिसकी वहन क्षमता लगभग 2,000 टन होती है, लगभग 16 टन क्षमता वाले 125 ट्रकों के बराबर माल ढो सकता है। यह बड़े पैमाने पर माल परिवहन में इसकी दक्षता को दर्शाता है। आर्थिक दृष्टि से भी अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडबल्यूटी) लाभकारी है, क्योंकि यह प्राकृतिक मार्गों का उपयोग करता है और इसके लिए अपेक्षाकृत कम बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। इसके संचालन की लागत भी सड़क और रेल परिवहन की तुलना में कम होती है, और यह मुख्यतः इन्हीं दोनों के साथ प्रतिस्पर्धा करता है। यद्यपि यात्री परिवहन में इसकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम होती है, लेकिन माल परिवहन में इसकी भूमिका कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। इसके अलावा विश्व बैंक के अनुसार, अंतर्देशीय जलमार्गों के सुचारु संचालन के लिए कुछ आवश्यक सुविधाएँ जरूरी होती हैं। इनमें बंदरगाह और टर्मिनल, सड़क या रेल संपर्क, नौवहन सहायक उपकरण और पर्याप्त गहराई बनाए रखने के लिए गाद निकालने की नियमित कार्यवाही शामिल है। जहां अन्य परिवहन साधन अक्सर यातायात और सीमित स्थान की समस्याओं से जूझते हैं, वहीं अंतर्देशीय जलमार्ग अधिक विश्वसनीय विकल्प प्रदान करते हैं। इनमें यात्रा समय का पूर्वानुमान बेहतर तरीके सो हो सकता है और इनके विस्तार की संभावनाएं भी अधिक हैं, क्योंकि अभी कई मार्ग पूरी तरह उपयोग में नहीं आए हैं।

अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडबल्यूटी) अवसंरचना का विकास

भारत सरकार अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडबल्यूटी) क्षेत्र के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। जलमार्गों के प्रभावी विकास के लिए तीन प्रमुख अवसंरचना संबंधी घटक आवश्यक हैं:

i. पर्याप्त चौड़ाई और गहराई वाला नौवहन योग्य मार्ग, जिससे जहाज़ों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित हो सके।

ii. जहाज़ों के ठहराव, माल की लोडिंग-अनलोडिंग तथा सड़क और रेल से कनेक्टिविटी के लिए आवश्यक सुविधाआों वाला टर्मिनल।

iii. जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही के लिए नौपरिवहन संबंधी संकेत और तकनीकी सहायता।

 

अन्य परिवहन साधनों की तुलना में अंतर्देशीय जलमार्ग अतिरिक्त अवसंरचना और पूरक वहन क्षमता उपलब्ध कराता है जबकि इसमें कम सामाजिक लागत लगती है।

देश में अंतर्देशीय जलमार्गों और कुछ तटीय मार्गों पर परिवहन सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए एक कानूनी ढांचा भी स्थापित किया गया है। यह ढांचा समन्वित योजना के माध्यम से इन मार्गों पर परिवहन सेवाओं के विकास और इनके सुचारु संचालन के लिए आवश्यक अवसंरचना निर्माण का मार्गदर्शन करता है। सभी विकास कार्य अंतरराष्ट्रीय मानकों और प्रदर्शन मानदंडों के अनुरूप किए जाते हैं।

इसके अतिरिक्त, भारत ने अंतर्देशीय जल परिवहन की मोडल हिस्सेदारी को दो प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, कार्गो परिवहन को 2030 तक 200 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक और 2047 तक 500 मिलियन मीट्रिक टन तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जैसा कि मैरिटाइम अमृत काल विजन में परिकल्पित है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, उन राजमार्ग परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जो बंदरगाहों, अंतर्देशीय जल परिवहन टर्मिनलों और औद्योगिक कॉरिडोर को जोड़ती हैं, ताकि समग्र लॉजिस्टिक्स लागत को कम किया जा सके।

भारत में अंतर्देशीय जलमार्ग

राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के तहत देशभर में 111 अंतर्देशीय जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग’ (एनडबल्यूएस) घोषित किया गया है, ताकि नौपरिवहन और शिपिंग को प्रोत्साहन दिया जा सके। इन जलमार्गों की कुल लंबाई 20,187 किमी है और ये 23 राज्यों तथा चार केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं। मार्च 2026 तक, देश में 32 राष्ट्रीय जलमार्ग संचालन में हैं, जिनकी कुल लंबाई 5,155 किमी है और इनका उपयोग माल एवं यात्री परिवहन के लिए किया जा रहा है। अगले पांच वर्षों में इनकी संख्या बढ़ाकर 52 करने का प्रस्ताव है। संचालन में लगे जलमार्ग वे होते हैं, जहां सुरक्षित और नियमित नौवहन के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इनमें पर्याप्त गहराई और चौड़ाई वाला नौवहन मार्ग, कार्यशील टर्मिनल, जो जहाज़ों के संचालन और माल प्रबंधन को सक्षम बनाते हैं और  विश्वसनीय नौवहन सहायक शामिल होते हैं। जब ये सभी सुविधाएं उपयोग योग्य स्तर तक विकसित हो जाते हैं, तब व्यवस्थित संचालन शुरू किया जा सकता है। इससे विभिन्न क्षमता वाले यांत्रिक जहाज़ों और अलग अलग क्षमताओं वाली पारंपरिक नौकाओं की आवाजाही संभव हो जाती है। इन मूलभूत सुविधाओं के उपलब्ध होने से जलमार्ग अंतर्देशीय जल परिवहन के लिए सक्षम बनता है और बाजार की मांग के अनुसार निजी निवेश को भी आकर्षित करता है। वर्तमान में राष्ट्रीय जलमार्गों पर चल रही परियोजनाएं लगातार नौवहन मार्गों, टर्मिनलों और नेविगेशन प्रणालियों के विकास और रखरखाव पर केंद्रित हैं, ताकि अधिक से अधिक जलमार्गों को संचालन योग्य बनाया जा सके।

भारत में कार्यरत एनडबल्यूएस (मार्च, 2026 तक)

क्र.सं.

राज्य

एनडबल्यू संख्या

एनडबल्यू

1

आंध्र प्रदेश

एनडबल्यू-4

कृष्णा-गोदावरी नदी प्रणाली

2

असम

एनडबल्यू-2

ब्रह्मपुत्र नदी (धुबरी-सदिया)

3

एनडबल्यू-16

बराक नदी

4

एनडबल्यू-31

धनसिरी / छठ

5

एनडबल्यू-57

कोपिली नदी

6

बिहार

एनडबल्यू -94

सोन नदी

7

गोवा

एनडबल्यू-68

मांडवी नदी

8

एनडबल्यू-27

कुंबरजुआ नदी

9

एनडबल्यू-111

ज़ुआरी नदी

10

गुजरात

एनडबल्यू-48

कच्छ नदी का जवाई-लूनी-रण

11

एनडबल्यू-73

नर्मदा नदी

12

एनडबल्यू-87

साबरमती नदी

13

एनडबल्यू-100

तापी नदी

14

केरल

एनडबल्यू-3

पश्चिमी तट नहर

15

एनडबल्यू-8

अलप्पुझा-चंगनास्सेरी नहर

16

एनडबल्यू-9

अलाप्पुझा-कोट्टायम-अथिरामपुझा नहर

17

महाराष्ट्र

एनडबल्यू-10

अंबा नदी

18

एनडबल्यू-53

कल्याण-ठाणे-मुंबई जलमार्ग, वसई क्रीक और उल्हास नदी

19

एनडबल्यू-83

राजपुरी क्रीक

20

एनडबल्यू-85

रेवडंडा क्रीक-कुंडालिका नदी प्रणाली

21

एनडबल्यू-91

शास्त्री नदी-जयगढ़ क्रीक प्रणाली

22

ओडिशा

एनडबल्यू-5

पूर्वी तट नहर और मताई नदी/ब्राह्मणी-खरसुआ-धामरा नदियां/महानदी डेल्टा नदियां

23

एनडबल्यू-14

बैतरणी नदी

24

एनडबल्यू-23

बुढ़ा बलंगा

25

एनडबल्यू-64

महानदी नदी

26

उत्तर प्रदेश

एनडबल्यू-110

गंगा नदी

27

एनडबल्यू-40

घाघरा नदी

28

उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल

एनडबल्यू-1

गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली (हल्दिया-इलाहाबाद)

29

     पश्चिम बंगाल

एनडबल्यू-44

इचामती नदी

30

एनडबल्यू-47

जलांगी नदी

31

एनडबल्यू-86

रूपनारायण नदी

32

एनडबल्यू-97

सुंदरबन जलमार्ग

 

भारत में अंतर्देशीय जलमार्गों और उनके नेटवर्क का एक अवलोकन

राष्ट्रीय जलमार्गों पर कार्गो की आवाजाही और राजस्व के नतीजे

जलमार्ग, उतनी ही मात्रा में ईंधन का इस्तेमाल करके चार गुना ज़्यादा माल ढो सकते हैं, जिससे वे व्यापार के लिए एक किफ़ायती विकल्प बन जाते हैं। वे कम ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं, कम शोर करते हैं, और कम कार्बन उत्सर्जन करते हैं, जिससे जल परिवहन सामान ढोने का एक ज़्यादा साफ़ और भरोसेमंद माध्यम बन जाता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, नवंबर 2025 तक, 29 राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल ढुलाई का काम चल रहा है, 15 राष्ट्रीय जलमार्गों पर क्रूज़ का काम चल रहा है, और 23 राष्ट्रीय जलमार्गों पर यात्री सेवाएं चल रही हैं। कुल 11 राष्ट्रीय जलमार्ग परिवहन के तीनों माध्यमों यानी माल ढुलाई, क्रूज़ और यात्री आवाजाही की सुविधा देते हैं, जो मज़बूत मल्टीमॉडल एकीकरण को दर्शाता है। यात्रियों की आवाजाही में भी काफ़ी बढ़ोतरी हुई है और इसकी संख्या 2023-24 में 1.61 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 7.6 करोड़ हो गई है। राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल ढुलाई वित्त वर्ष 2024-25 में 145.84 मिलियन मीट्रिक टन और वित्त वर्ष 2025-26 में 198 एमएमटी (फरवरी 2026 तक) तक पहुंच गई। बड़े बंदरगाहों की कुल माल संभालने की क्षमता वित्त वर्ष 2013-14 में 555 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 1,681 एमटीपीए हो गई। इसके अलावा, कंटेनर जहाज़ों के लिए टर्नअराउंड समय 2013-14 में 41.76 घंटे से घटकर 2024-25 में 28.5 घंटे रह गया। यह लगातार बढ़ोतरी दिखाती है कि अंतर्देशीय जलमार्ग पूरे भारत में सामान ढोने का एक तेज़ी से बढ़ता हुआ महत्वपूर्ण, कुशल और पर्यावरण के अनुकूल माध्यम बन रहा है।

प्रमुख पहल, योजनाएं और परियोजनाएं

सरकार ने देश में अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडबल्यूटी) को विकसित और सुदृढ़ करने के लिए कई विधायी, नीतिगत और कार्यक्रम-आधारित पहल की हैं। इन उपायों का मुख्य ज़ोर बुनियादी ढांचे के विकास, माल ढुलाई, स्थायित्व, पर्यटन को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय संपर्क पर है।

अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 1985

अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 1985 को 30 दिसंबर 1985 को लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य शिपिंग और नौवहन के लिए अंतर्देशीय जलमार्गों के विनियमन और विकास हेतु एक समर्पित प्राधिकरण की स्थापना करना था, साथ ही संबंधित गतिविधियों को भी समर्थन देना था। इस अधिनियम के तहत, केंद्र सरकार ने एक आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडबल्यूएआई) की स्थापना की। आईडबल्यूएआई का मुख्य कार्य राष्ट्रीय जलमार्गों पर अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडबल्यूटी) के लिए आवश्यक अवसंरचना का विकास और रखरखाव करना है।

राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 ने देश भर में 111 (5 पहले से मौजूद और 106 नए) जलमार्ग घोषित किए।

राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016

राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 को 25 मार्च 2016 को लागू किया गया। यह अधिनियम पहले से अलग-अलग कानूनों के तहत घोषित 5 राष्ट्रीय जलमार्गों को जारी रखने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है, साथ ही 106 अतिरिक्त जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित करता है। यह अधिनियम इन जलमार्गों के विनियमन, विकास और रखरखाव से संबंधित प्रावधानों को निर्धारित करता है, ताकि शिपिंग और नौवहन को सुचारु रूप से बढ़ावा दिया जा सके। इसके अतिरिक्त, यदि संसद किसी अन्य जलमार्ग को कानून के माध्यम से राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित करती है, तो उस घोषणा की तिथि से वह जलमार्ग राष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है। उसी तिथि से इस अधिनियम के प्रावधान आवश्यक संशोधनों के साथ उस जलमार्ग पर लागू हो जाते हैं।

जलवाहककार्गो प्रोत्साहन योजना, 2024

15 दिसंबर 2024 को शुरू की गई जलवाहक योजना का उद्देश्य अंतर्देशीय जलमार्गों की ओर कार्गो परिवहन को बढ़ावा देना है। इसके तहत पोत संचालकों को प्रोत्साहन दिया जाता है और राष्ट्रीय जलमार्ग-1, राष्ट्रीय जलमार्ग-2 और राष्ट्रीय जलमार्ग- 16 पर इंडो-बांग्लादेश प्रोटोकॉल (आईबीपी) मार्ग के माध्यम से निर्धारित कार्गो सेवाओं को सहायता दी जाती है।  इस योजना को केरल राज्य के जलमार्गों तक विस्तार देने का प्रस्ताव भी किया गया है, जिसकी घोषणा पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री द्वारा तीसरे आईडबल्यूडीसी सम्मेलन के दौरान की गई। इस योजना के तहत जलमार्ग से होने वाली यात्रा की वास्तविक परिचालन लागत का अधिकतम 35 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति  की जाती है, जिससे यह परिवहन माध्यम और अधिक किफायती बनता है। अनुमान है कि इस योजना के माध्यम से लगभग 800 मिलियन टन-किलोमीटर कार्गो अंतर्देशीय जलमार्गों की ओर स्थानांतरित होगा, जो वर्तमान में राष्ट्रीय जलमार्गों पर होने वाले कुल कार्गो परिवहन का लगभग 17 प्रतिशत है।

राष्ट्रीय जलमार्ग (जेट्टी/टर्मिनल निर्माण) विनियम, 2025

राष्ट्रीय जलमार्गों पर जेट्टी और टर्मिनलों के निर्माण को सुगम बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय जलमार्ग (जेट्टी/टर्मिनल निर्माण) विनियम, 2025 को ये विनियम लागू किए गए हैं। इनके तहत निजी कंपनियों, सरकारी संस्थाओं और संयुक्त उपक्रमों को देशभर के राष्ट्रीय जलमार्गों पर जेट्टी और टर्मिनल विकसित करने में सुविधा प्रदान की जाती है। ये विनियम राष्ट्रीय जलमार्गों पर अवसंरचना विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं, जिससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स की दक्षता में सुधार होता है।

अंतर्देशीय पोत अधिनियम, 2021

अंतर्देशीय पोत अधिनियम, 2021 को 11 अगस्त 2021 को अपनाया गया। यह अधिनियम अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से सुरक्षित और किफायती परिवहन तथा व्यापार को बढ़ावा देता है। यह देशभर में अंतर्देशीय जल परिवहन के लिए एक समान नियम लागू करता है। यह सुरक्षित नौवहन को सुनिश्चित करता है तथा मानव जीवन और माल  की सुरक्षा करता है। यह  अंतर्देशीय पोतों से होने वाले प्रदूषण को कम करता है। यह अधिनियम अंतर्देशीय जल परिवहन को लेकर  पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन को बढ़ावा देता है। यह अधिनियम पोतों के निर्माण, सर्वेक्षण, पंजीकरण, चालक दल और नौवहन से संबंधित नियमों को सुदृढ़ करता है, साथ ही अन्य संबंधित प्रक्रियाओं को भी व्यवस्थित करता है। इस अधिनियम के अंतर्गत केंद्र सरकार अपने अधिकारों का उपयोग अन्य प्राधिकरणों को सौंप सकती है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण इस अधिनियम के तहत शक्तियों और दायित्वों के निर्वहन के लिए सक्षम प्राधिकरण बना रहता है।

तटीय शिपिंग अधिनियम, 2025

तटीय नौवहन अधिनियम, 2025, जिसे 9 अगस्त 2025 को पेश किया गया था, यह कहता है कि केंद्र सरकार इस अधिनियम के लागू होने के दो साल के भीतर एक 'राष्ट्रीय तटीय और अंतर्देशीय नौवहन रणनीतिक योजना' प्रकाशित करेगी, और हर दो साल में इसे अपडेट करेगी। यह रणनीतिक योजना तटीय नौवहन मार्गों की पहचान करती है, जिनमें वे मार्ग भी शामिल हैं जो अंतर्देशीय जलमार्गों के साथ ओवरलैप करते हैं और माल यात्रियों के लिए तटीय समुद्री परिवहन को अधिक लागत-कुशल बनाने के लिए आवश्यक परिचालन सुधारों को निर्दिष्ट करते है्ं। इसमें तटीय नौवहन और अंतर्देशीय जलमार्ग नेटवर्क, दोनों के लिए दीर्घकालिक यातायात पूर्वानुमान शामिल हैं। साथ ही, यह उन सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों की भी पहचान करती है जो अंतर्देशीय जलमार्गों और परिवहन के अन्य साधनों के साथ बेहतर तालमेल के माध्यम से प्रदर्शन में सुधार लाते हैं। यह नए तटीय मार्गों की भी पहचान करती है और उन्हें मौजूदा मार्गों के साथ एकीकृत करती है।

हरित नौका अंतर्देशीय जलयान हरित परिवर्तन दिशानिर्देश

8 जनवरी, 2024 को जारी 'हरित नौका अंतर्देशीय जलयान हरित रुपांतरण दिशानिर्देश' भारत के 'राष्ट्रीय समुद्री विज़न' के अनुरूप, अंतर्देशीय जल परिवहन को अधिक स्वच्छ, कुशल और भविष्य के लिए तैयार बनाने हेतु एक रणनीतिक ढांचा प्रदान करते हैं।

हरित नौका-अंतर्देशीय जहाजों के लिए हरित रूपांतरण दिशानिर्देशों के मुख्य प्रावधान और लक्ष्य

फोकस क्षेत्र

प्रमुख प्रावधान/लक्ष्य

 हरित जहाज इकोसिस्टम

हरित अंतर्देशीय जहाजों को बढ़ावा देना, अवसंरचना का समर्थन करना और एक परिचालन योग्य इकोसिस्टम का विकास करना।

समुद्री इंडिया विजन 2030 के साथ संयोजन

राष्ट्रीय परिवहन प्रणाली में अंतर्देशीय जलमार्गों की अधिक हिस्सेदारी को बढ़ावा देकर और अधिक कार्गो आवाजाही को प्रोत्साहित करके समुद्री इंडिया विजन 2030 के उद्देश्यों का समर्थन करता है।

समुद्री अमृत काल विज़न 2047 के साथ संयोजन

समुद्री अमृत काल विजन 2047 के दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य हरित अंतर्देशीय जहाजों में पूर्ण परिवर्तन और अंतर्देशीय जलमार्ग कार्गो क्षमता का महत्वपूर्ण विस्तार करना है।

स्थिरता संबंधी पिछली पहलों के साथ जुड़ाव

यह पहल पूर्व की स्थिरता पहलों, जैसे हरित सागर दिशानिर्देश 2023 पर आधारित है और हरित प्रथाओं को बंदरगाहों से आगे बढ़ाकर अंतर्देशीय जहाजों तक विस्तारित करती है

पूरक कार्यक्रम

समुद्री और अंतर्देशीय जल परिवहन में डीकार्बोनाइजेशन के लिए एक सुसंगत दृष्टिकोण सुनिश्चित करते हुए, ग्रीन टग ट्रांज़िशन कार्यक्रम का पूरक है।

कार्बन तीव्रता लक्ष्य

2030 तक अंतर्देशीय जलमार्ग-आधारित यात्री परिवहन की कार्बन उत्सर्जन में 30 प्रतिशत की कमी और 2047 तक 70 प्रतिशत की कमी का लक्ष्य

राज्य-स्तरीय परिवर्तन रोडमैप

2033 तक 50 प्रतिशत यात्री बेड़े को हरित ईंधन में और 2045 तक 100 प्रतिशत स्थानांतरित करने के लिए राज्यों के लिए एक रोडमैप के रूप में कार्य करता है।

जहाज हरितीकरण लक्ष्य

अगले 10 वर्षों में कम से कम 1,000 अंतर्देशीय जहाजों को हरित करने और 2047 तक सभी भारतीय जल निकायों में 100 प्रतिशत हरित जहाजों का लक्ष्य हासिल करने का लक्ष्य है।

 

रिवर क्रूज़ टूरिज़्म रोडमैप, 2047

8 जनवरी 2024 को शुरू हुआ रिवर क्रूज़ टूरिज़्म रोडमैप 2047, भारत में रिवर क्रूज़ टूरिज़्म को बढ़ावा देने के लिए एक व्यवस्थित ढांचा प्रदान करता है। यह चार मुख्य स्तंभों पर केंद्रित है: बुनियादी ढांचे का विकास, एकीकरण, पहुंच और सहायक नीतिगत उपाय।

भारत का राष्ट्रीय जलमार्गों का विशाल नेटवर्क, जो प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीव और सांस्कृतिक विरासत के समृद्ध क्षेत्रों से होकर बहता है वहां क्रूज़-आधारित पर्यटन के लिए एक मजबूत संभावना है।

  • रिवर क्रूज़ यात्राएं: भारत में रिवर क्रूज़ टूरिज़्म में व्यापक वृद्धि देखी गई है, जिसमें राष्ट्रीय जलमार्गों पर रिवर क्रूज़ यात्राओं की संख्या 2023-24 में 371 से बढ़कर 2024-25 में 443 हो गई है। यह 19.4 प्रतिशत की वृद्धि देश के अंतर्देशीय जलमार्गों पर रिवर क्रूज़ की बढ़ती लोकप्रियता और बेहतर संचालन को दर्शाती है।
  • क्रूज़ जहाजों का विस्तार: क्रूज़ जहाजों की संख्या में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, जो 2013-14 में तीन जहाजों से बढ़कर 2024-25 में 25 जहाज हो गई है। ये जहाज नौ राज्यों में 13 राष्ट्रीय जलमार्गों पर 17 सर्किटों में संचालित होते हैं, और इन्हें 4,000 किमी लंबे वाराणसी-डिब्रूगढ़ कॉरिडोर से सहायता मिलती है, जो 129 टर्मिनलों से सुसज्जित है।
  • 2027 तक सिलघाट, बिश्वनाथ घाट, नेमाती और गुइजन में चार नए क्रूज़ टर्मिनल विकसित करने का प्रस्ताव है।
  • रिवर क्रूज़ टूरिज़्म को बढ़ावा देने के लिए 34 राष्ट्रीय जलमार्गों, साथ ही भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल (आईबीपी) मार्ग और दो राज्य जलमार्गों की पहचान की गई है।
  • वर्तमान में, भारत में रिवर क्रूज़ टूरिज़्म केवल कुछ ही अंतर्देशीय जलमार्गों पर संचालित होता है:

जलमार्ग

परिचालन क्षेत्र

क्रूज परिचालन की वर्तमान स्थिति

एनडबल्यू 1

वाराणसी से हल्दिया

इस खंड पर नदी क्रूज सेवाएं संचालित होती हैं; हालांकि, गहराई की सीमाओं और पंटून पुलों के कारण बड़े क्रूज़ जहाज आमतौर पर केवल पटना तक ही संचालित होते हैं।

एनडबल्यू 2

गुवाहाटी से नेमाटी

इस खंड पर नदी क्रूज परिचालन सक्रिय है।

एनडबल्यू 3

पूरे क्षेत्र में

यात्री नौका और हाउसबोट सेवाओं के लिए पूरी तरह से शुरू है।

एनडबल्यू 4

चयनित स्थान पर

यात्री नौका सेवाएं अलग अलग जगहों पर संचालित होती हैं।

एनडबल्यू 8

अलाप्पुझा से चंगनास्सेरी

यात्री नौका और हाउसबोट सेवाओं के लिए पूरी तरह से शुरू है।

एनडबल्यू 97

पूरे क्षेत्र में

नदी क्रूज आवाजाही के लिए पूरी तरह से चालू है।

भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग

सीमा पार मार्ग

तकनीकी रूप से किए जाने योग्य; पायलट क्रूज़ परिचालन किए गए हैं।

 

पूर्वोत्तर राज्यों में अंतर्देशीय जल परिवहन अवसंरचना को बेहतर बनाने की पहल

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडबल्यूटी) के विकास में लगातार हो रही प्रगति पर प्रकाश डाला गया है। इसमें बताया गया है कि राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (एनडबल्यू-2) और राष्ट्रीय जलमार्ग-16 (एनडबल्यू-16) पर आईडबल्यूटी परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा, नागालैंड और मिजोरम में परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को अंतिम रूप देने का काम चल रहा है। सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि त्रिपुरा भारत की गोमती नदी और बांग्लादेश की मेघना नदी के बीच कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए 24.53 करोड़ रुपये की एक परियोजना लागू कर रहा है। इन विकास कार्यों के साथ-साथ, कई अन्य सरकारी पहलें भी पूर्वोत्तर राज्यों में अंतर्देशीय जल परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर के लगातार विस्तार और उसे मज़बूत बनाने में योगदान दे रही हैं।

क्र. सं.

पहलें

मुख्य घटक/विवरण

1

एनडबल्यू-2 (ब्रह्मपुत्र नदी)

  • 2020-21 से 2024-25 के दौरान 498 करोड़ रुपये की लागत से व्यापक विकास किया गया है।
  • बोगीबील और जोगीघोपा में टर्मिनलों का निर्माण
  • बोगीबील और पांडु में पर्यटक घाटों का विकास।
  • नियमित फ़ेयरवे विकास कार्य शुरू किए गए हैं।
  • सुचारू शिपिंग संचालन में सहायता के लिए नेविगेशनल सहायता स्थापित की गई है

2

पांडु में जहाज मरम्मत सुविधा और कनेक्टिविटी

  • पांडु में जहाज मरम्मत सुविधा और राष्ट्रीय राजमार्ग-27 को पांडु बंदरगाह से जोड़ने वाली एक ऊंची सड़क और जहाज मरम्मत सुविधा विकसित की जा रही है।
  • परियोजना लागत 419 करोड़ रुपये।

3

एनडबल्यू-16 (बराक नदी) का विकास)

  • 2020-21 से 134.72 करोड़ रुपये की लागत से विकास किया गया।
  • प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:
  1. बदरपुर और करीमगंज में टर्मिनलों का उन्नयन।
  2. फ़ेयरवे विकास और नौवहन सहायता का रखरखाव।
  3. जल-थल ड्रेजर की खरीद।

4

एनडबल्यू-57

(कोपिली नदी)

  • चंद्रपुर (कामरूप) से हाटसिंगिमारी (दक्षिण सलमारा-मनकाचर) तक 300 मीट्रिक टन सीमेंट की सफल आवाजाही के साथ परिचालन शुरू किया गया।

5

एनईआर में आईडब्ल्यूटी के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजनाएं (सीएसएस)

  • पूर्वोत्तर राज्यों में अंतर्देशीय जल परिवहन के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत।
  • ये टर्मिनल और फ़ेयरवे विकास को कवर करते हैं।
  • छोटे यात्री जहाजों की खरीद.

6

नदी क्रूज पर्यटन संवर्धन

  • भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के माध्यम से बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा उत्तर पूर्वी क्षेत्र में नदी क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देना।
  • एनडबल्यू-2 पर समर्पित क्रूज़ टर्मिनलों का विकास।

7

क्रूज़ टर्मिनल विकास

  • नदी आधारित पर्यटन को समर्थन देने के लिए गुवाहाटी, नेमाटी, बिस्वनाथ घाट, सिलघाट और गुइजान में क्रूज टर्मिनल विकसित किए जा रहे हैं।

8

धार्मिक पर्यटन सर्किट

(एसपीवी के नेतृत्व वाली पहल)

 

  • सागरमाला फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड, आईडबल्यूएआई और असम सरकार को मिलाकर एक एसपीवी का गठन।
  • सात मंदिरों - लाचित घाट, असवंता मंदिर घाट, डौल गोविंदा मंदिर घाट, हनुमान मंदिर घाट (उज़ान बाज़ार), उमानंद घाट, पांडुनाथ घाट और कामाख्या मंदिर को जोड़ने वाले एक धार्मिक पर्यटन सर्किट का विकास।
  • हॉप-ऑन हॉप-ऑफ मॉडल के तहत उपयुक्त जहाजों के माध्यम से संचालन।

 

 

जल मार्ग विकास परियोजना

जल मार्ग विकास परियोजना, जल मार्ग विकास परियोजना-II (अर्थ गंगा) के साथ मिलकर, राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर नौवहन योग्यता में सुधार करने और गंगा नदी के तटों पर रहने वाले समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से कार्यान्वित की जा रही है।

जल मार्ग विकास परियोजना-एनडबल्यू-1 पर

जल मार्ग विकास परियोजना II (अर्थ गंगा)

  • इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य गंगा-भागीरथी-हुगली नदी सिस्टम के वाराणसी-हल्दिया हिस्से पर एनडबल्यू-1 की क्षमता बढ़ाना है।

 

  • इस प्रोजेक्ट को वर्ल्ड बैंक से तकनीकी और आर्थिक मदद मिल रही है।

 

  • इसका मकसद एनडबल्यू-1 पर जहाज़ों के चलने की सुविधा को बेहतर बनाना है। यह काम फेयरवे डेवलपमेंट के ज़रिए किया जा रहा है, ताकि साल में कम से कम 330 दिन पानी की गहराई 2.2 से 3.0 मीटर बनी रहे। इससे 1,500 से 2,000 डीडबल्यूटी क्षमता वाले बड़े जहाज़ों का आना-जाना मुमकिन हो पाता है।

 

  • इस प्रोजेक्ट में सहायक अवसंरचना का विकास भी शामिल है। इसमें मल्टीमॉडल टर्मिनल, जेट्टी, नेविगेशनल लॉक, बैराज, चैनल मार्किंग सिस्टम और दूसरी लॉजिस्टिक्स और संचार सुविधाएं शामिल हैं।

 

  • राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (एनडबल्यू-1) के लिए 5,061.15 करोड़ रुपये की एक परियोजना चल रही है, जो वाराणसी से हल्दिया तक 1,390 कि.मी. के हिस्से को कवर करती है, और इसे 30 जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

 

  • एनडबल्यू-1 पर माल ढुलाई में 220 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है; यह 2014-15 में 5.05 एमएमटी से बढ़कर 2024-25 में 16.38 एमएमटी हो गई है।

 

  • मुख्य अवसंरचना, जिसमें वाराणसी, साहिबगंज और हल्दिया के मल्टी-मॉडल टर्मिनल और कालूघाट का इंटर-मॉडल टर्मिनल शामिल हैं, अब चालू हो गए हैं।

 

  • क्विक पोंटून ओपनिंग मैकेनिज्म (क्यूपीओएम) शुरू किया गया है, जिससे जहाज़ सिर्फ़ पाँच मिनट में गुज़र सकते हैं; इससे पहले पुल को काटने और जोड़ने में होने वाली देरी अब खत्म हो गई है।
  • अर्थ गंगा (जेएमवीपी-II) की योजना बनाई गई है और इसे जल मार्ग विकास परियोजना (जेएमवीपी) के एक उप-घटक के रूप में लागू किया जा रहा है।

 

  • इसका उद्देश्य गंगा के किनारों पर सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

 

  • यह कार्यक्रम समावेशी विकास पर केंद्रित है और इसका लक्ष्य नदी के किनारे रहने वाले समुदायों की आजीविका में सुधार करना है।

 

  • यह लोगों की भागीदारी और आर्थिक गतिविधियों को गंगा के पुनरुद्धार से जोड़ने का प्रयास करता है।

 

  • जेएमवीपी-II के तहत, यह कार्यक्रम छोटे किसानों, मछली पालन इकाइयों, असंगठित उत्पादकों, बागवानी करने वालों, फूल विक्रेताओं और कारीगरों को आस-पास के बाजारों तक पहुंचने में मदद करने के लिए सरल लॉजिस्टिक्स समाधान मुहैया करता है।

 

  • इससे इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होने और रोज़गार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

 

  • अप्रैल 2026 तक, एनडबल्यू-1 के किनारे 66 सामुदायिक जेट्टी विकसित की जा चुकी हैं और वे चालू हैं, जो स्थानीय व्यापार को सुगम बनाती हैं और प्रतिदिन लगभग 1.22 लाख उपयोगकर्ताओं को सेवा प्रदान करती हैं।

 

 

प्रमुख डिजिटल पहलें

सरकार ने तकनीकी-आधारित शासन और रियल-टाइम सूचना प्रणालियों के ज़रिए अंतर्देशीय जल परिवहन को आधुनिक बनाने के लिए कई डिजिटल पहलें शुरू की हैं।

सीएआर-डी (कार्गो डेटा) एक वेब-आधारित पोर्टल है, जिसे भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडबल्यूएआई) ने राष्ट्रीय जलमार्गों पर कार्गो और क्रूज़ की आवाजाही से जुड़े डेटा को इकट्ठा करने, उसका विश्लेषण करने और उसे साझा करने के लिए विकसित किया है।

न्यूनतम उपलब्ध गहराई सूचना प्रणाली (एलएडीआईएस)

चुनिंदा राष्ट्रीय जलमार्गों पर नौवहन चैनलों में उपलब्ध न्यूनतम जल-गहराई के बारे में जानकारी साझा करने के लिए 'न्यूनतम उपलब्ध गहराई सूचना प्रणाली' शुरू की गई है। जलयानों की सुचारू आवाजाही के लिए जल की एक सुनिश्चित गहराई होना अनिवार्य है।

 

नदी सूचना सेवा(आरआईएस) एक एकीकृत डिजिटल प्रणाली है, जिसे अंतर्देशीय जलमार्गों पर सुरक्षा, कुशलता और यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

यह जहाज़ों की रियल-टाइम ट्रैकिंग को संभव बनाता है, जलमार्ग और नेविगेशन की स्थितियों पर नज़र रखता है और मौसम जल स्तर के बारे में अपडेट देता है। यह जहाज़ों और कंट्रोल सेंटरों के बीच संचार में भी सहायता करता है। इसके परिणामस्वरूप, आरआईएस नेविगेशन सुरक्षा को बेहतर बनाता है, देरी को कम करता है, यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद करता है और संबंधित पक्षों के बीच तालमेल को मज़बूत करता है। कुल मिलाकर, यह अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन की विश्वसनीयता और कुशलता को बढ़ाता है।

आईडबल्यूएआई वेसल ट्रैकर और पीएएनआई पोर्टल मिलकर अंतर्देशीय जलमार्गों पर -नेविगेशन के लिए एक डिजिटल समाधान मुहैया कराते हैं। ये एक वेब पोर्टल और एक मोबाइल एप्लिकेशन के रूप में उपलब्ध हैं। यह प्रणाली सुरक्षित और कुशल आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए अद्यतन नौवहन मार्गों, जल की गहराई से संबंधित जानकारी और वेसल की रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करती है।

 

जल समृद्धि पोर्टल को राष्ट्रीय जलमार्गों पर जेट्टी और टर्मिनल के विकास को आसान बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह निजी कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, सरकारी एजेंसियों और संयुक्त उद्यमों को राष्ट्रीय जलमार्गों पर जेट्टी/टर्मिनल के निर्माण के उद्देश्य से 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' (एनओसी) के लिए डिजिटल रूप से आवेदन करने की सुविधा प्रदान करता है। यह पूरी तरह से डिजिटल आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से पारदर्शिता और 'व्यापार करने में सुगमता' को बढ़ावा देता है।

जलयान और एनएवीआईसी पोर्टल भारत के अंतर्देशीय जल परिवहन क्षेत्र के विकास और विनियमन में सहायता करते हैं। यह जहाज़ों के संचालन, प्रशिक्षण, अवसंरचना और हितधारकों के सहयोग से जुड़ी प्रमुख सेवाओं को एक ही इंटरफ़ेस पर एक साथ लाता है।

निष्कर्ष

भारत के अंतर्देशीय जलमार्गों की यात्रा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश अब अपनी नदियों को किस नज़र से देखता है, केवल प्राकृतिक संपदा के तौर पर, बल्कि विकास, स्थिरता और समावेश के सक्रिय माध्यमों के रूप में।

'भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 1985' और 'राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016' जैसे सक्षम कानूनों के माध्यम से, देशव्यापी जलमार्ग नेटवर्क के लिए एक मज़बूत संस्थागत आधार तैयार किया गया है। इस रूपरेखा को 'जलवाहक कार्गो संवर्धन योजना', 'जल मार्ग विकास परियोजना' (जेएमवीपी) और 'अर्थ गंगा' (जेएमवीपी II) जैसे केंद्रित कार्यक्रमों के ज़रिए ज़मीनी स्तर पर उतारा जा रहा है, जो माल ढुलाई को मज़बूती देने के साथ-साथ नदी-तटीय समुदायों को बाज़ारों और आजीविका के साधनों से फिर से जोड़ रहे हैं।

भौतिक अवसंरचना के साथ-साथ, सरकार ने सीएआर-डी, पीएएनआई, जलयान और एनएवीआईसी, एलएडीआईएस, 'नदी सूचना सेवाएं' (आरआईएस) और 'जल समृद्धि पोर्टल' जैसी पहलों के माध्यम से डिजिटल शासन को भी बढ़ावा दिया है। इससे राष्ट्रीय जलमार्गों पर सुरक्षा, पारदर्शिता, वास्तविक समय में निर्णय लेने की क्षमता और व्यापार करने में सुगमता में सुधार हुआ है।

पूर्वोत्तर राज्यों में लक्षित निवेश, संतुलित क्षेत्रीय विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, वहीं, 'हरित नौका अंतर्देशीय पोत हरित संक्रमण दिशानिर्देश' अंतर्देशीय परिवहन के विकास के केंद्र में पर्यावरण संबंधी दायित्व को स्थापित करते हैं। इसके समानांतर, 'नदी क्रूज़ पर्यटन रोडमैप 2047' भारत की नदियों में निहित सांस्कृतिक, विरासत और पर्यटन की अपार संभावनाओं को उजागर करता है।

इस विस्तृत होते विकास परिदृश्य के अंतर्गत, 'केंद्रीय बजट 2026-27' में कई नए राष्ट्रीय जलमार्गों को परिचालन में लाने का प्रस्ताव है। इसके तहत विशिष्ट कौशल विकसित करने के लिए प्रशिक्षण संस्थानों को 'क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्रों' के रूप में स्थापित किया जाएगा  साथ ही, जहाज़ों की मरम्मत के लिए एक इकोसिस्टम  तैयार किया जाएगा और एक 'तटीय कार्गो संवर्धन योजना' शुरू की जाएगी, जिसका उद्देश्य अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय नौवहन की संयुक्त हिस्सेदारी को बढ़ाना है।

नीति, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और स्थायित्व के माध्यम से प्रवाहित होती ये पहलें मिलकर एक ऐसे भविष्य का निर्माण करती हैं, जहां भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग आर्थिक जीवंतता, इकोसिस्टम संबंधी संतुलन और साझा राष्ट्रीय प्रगति के प्रमुख मार्ग के रूप में उभरकर सामने आते हैं।

 

संदर्भ

 

भारतीय संसद

इंडिया कोडराष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), भारत सरकार

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW), भारत सरकार

https://shipmin.gov.in/en/division/iwt-1

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI), भारत सरकार

पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), भारत सरकार

ओपन गवर्नमेंट डेटा पोर्टलराष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), भारत सरकार

खाद्य और कृषि संगठन (FAO)

संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र एशिया और प्रशांत के लिए आर्थिक और सामाजिक आयोग (UNESCAP)

संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD)

यूरोपीय संघ

विश्व बैंक

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)

अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (IFC), विश्व बैंक समूह

राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA), अमेरिका वाणिज्य विभाग

पीडीएफ देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।

पीआईबी रिसर्च

 

पीके/केसी/डीवी

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