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जीवन की सुगमता: भारत की समावेशी प्रगति की यात्रा

Posted On: 15 JUN 2026 4:05PM

  

2014 से 2026 के बीच सुशासन की एक निर्णायक यात्रा ने भारतीय नागरिकों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बदल दिया। उन्हें सुरक्षित घर, साफ़ ईंधन, पीने का सुरक्षित पानी और बेहतर साफ़-सफ़ाई जैसी सुविधाओं के ज़रिए नए अवसर मिले। भरोसेमंद बिजली, सस्ती रौशनी और बेहतर परिवहन नेटवर्क ने लाखों लोगों को आराम और कनेक्टिविटी दी। सड़कें, बेहतर रेलवे, मेट्रो सिस्टम और क्षेत्रीय हवाई मार्गों ने यात्रा की थकान कम की और अलग-अलग इलाकों के बीच आवाजाही को आसान बनाया। 'जन धन' और 'मुद्रा' जैसी योजनाओं के ज़रिए वित्तीय समावेशन ने उन नागरिकों के लिए बैंकिंग और ऋण के रास्ते खोले जो अब तक इससे दूर थे। 'अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन' (अमृत) के ज़रिए शहरी अवसंरचना में सुधार हुआ। डिजिटल सुधारों और 'माईगव' जैसे भागीदारी वाले प्लेटफ़ॉर्म ने जवाबदेही और नागरिकों की भागीदारी को मज़बूत किया। इन सभी पहलकदमियों ने मिलकर देश भर के परिवारों के लिए मज़बूती, सम्मान और नए अवसर पैदा किए। भारत की यह 12 साल की यात्रा समावेशी प्रगति को दिखाता है, जिसमें सुशासन ने रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बदला और लाखों लोगों के लिए विकास की नींव को मज़बूत किया।

 

परिवर्तन के बारह वर्ष: भारत में 'जीवन की सुगमता' की कहानी

2014 के बाद से भारत की यात्रा सम्मान, अवसर और समावेशी प्रगति की दिशा में एक अहम बदलाव को दिखाती है। पिछले 12 वर्षों में महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों और सुधारों के ज़रिए शासन में एक उद्देश्य के साथ बदलाव आया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सुरक्षित घर, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के ज़रिए साफ़ ईंधन और जल जीवन मिशन के तहत पीने का साफ़ पानी मिलने से लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी बदल गई है। स्वच्छ भारत मिशन से पूरे देश में साफ़-सफ़ाई बेहतर हुई, जबकि सौभाग्य योजना से लाखों घरों तक भरोसेमंद बिजली पहुंची। नए राजमार्गों, सुरंगों, पुलों, मेट्रो नेटवर्क और क्षेत्रीय हवाई मार्गों के साथ परिवहन और कनेक्टिविटी का ऐतिहासिक तेज़ी से विस्तार हुआ।

प्रधानमंत्री जन धन योजना और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के ज़रिए वित्तीय समावेशन ने नागरिकों को बैंकिंग, ऋण और सुरक्षा के मामले में सशक्त बनाया। अटल मिशन फ़ॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफ़ॉर्मेशन (अमृत) के तहत शहरी बदलाव ने हज़ारों कस्बों में अवसंरचना और सेवाओं को मज़बूत किया। डिजिटल सुधारों और माईगव जैसे नागरिक प्लेटफ़ॉर्म ने सुशासन में लोगों की भागीदारी, जवाबदेही और भरोसे को बढ़ायाइन सभी पहलों ने मिलकर आराम, सुरक्षा और अवसर का एक नया माहौल बनाया है।

 

आवास और मूलभूत सुविधाएं

एक सुरक्षित और पक्के (स्थायी) घर तक पहुंच सम्मानजनक जीवन की नींव है। 2014 से पहले, शहरी और ग्रामीण भारत, दोनों ही जगहों पर सरकारी आवास उपलब्ध कराने का दायरा और गति ज़रूरत के हिसाब से बहुत कम थी। शहरी इलाकों के लिए 2015 में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) शुरू की गई थी। 2016 में पीएमएवाई-ग्रामीण के तहत इसे ग्रामीण इलाकों तक बढ़ाया गया, जिससे किफायती आवास के लक्ष्य और उसे उपलब्ध कराने के तरीके में बुनियादी बदलाव आया।

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी (पीएमएवाई-यू)

2015 में शुरू पीएमएवाई-यू योजना, शहर में रहने वाले हर पात्र परिवार को पक्का घर देती है। यह योजना भारत के सभी शहरी इलाकों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडबल्यूएस), कम आय वाले वर्ग (एलआईजी) और मध्यम आय वाले वर्ग (एमआईजी) के लोगों के लिए है।

2024 में शुरू की गई पीएमएवाई-यू 2.0 योजना के तहत, 'लाभार्थी नेतृत्व वाली निर्माण प्रक्रिया' (बीएलसी) श्रेणी में पात्र परिवारों को 2.5 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाती है। इस योजना के लिए ज़रूरी है कि परिवार की कोई महिला सदस्य मालकिन या सह-मालकिन हो।

शुरू होने के बाद से, पीएमएवाई-यू के तहत 1.25 करोड़ से ज़्यादा घरों को मंज़ूरी दी गई है। इनमें से 98 लाख से ज़्यादा घर बनकर तैयार हो चुके हैं। 2005-14 के बीच, पुरानी योजनाओं के तहत सिर्फ़ 8 लाख शहरी घर ही बन पाए थे।

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (पीएमएवाई-जी)

2016 में शुरू की गई पीएमएवाई-जी योजना के तहत, मैदानी इलाकों में प्रति घर 1.20 लाख रुपये और पहाड़ी दुर्गम क्षेत्रों में प्रति घर 1.30 लाख रुपये दिए जाते हैं। 2016 से 2026 के बीच, कुल 3.98 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से 3.91 करोड़ घरों को मंज़ूरी दी गई और 3.05 करोड़ घर बनकर तैयार हो गए हैं। मंज़ूरी मिले घरों में से 75 प्रतिशत घर महिलाओं के नाम पर हैं या उनका संयुक्त मालिकाना हक हैं। सभी घरों में शौचालय, पीने का पानी और बिजली कनेक्शन जैसी सुविधाओं के लिए सरकारी कार्यक्रमों का पालन किया गया है।

अटल मिशन फ़ॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफ़ॉर्मेशन (अमृत)

2015 में शुरू किए गए 'अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन' (अमृत) ने कई शहरी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करने का काम किया। अमृत के पहले चरण में 500 शहरों को शामिल किया गया, जिसमें पानी की सप्लाई, सीवरेज, हरित क्षेत्र और परिवहन पर ध्यान दिया गया। अक्टूबर 2021 में, अमृत 2.0 के तहत 2.99 लाख करोड़ रुपये के बजट के साथ सभी 4,800 सांविधिक नगरों को शामिल किया गया। यह बजट मूल मिशन के मुकाबले लगभग तीन गुना ज़्यादा था। अमृत और अमृत 2.0 के तहत 2.79 लाख करोड़ रुपये की योजनाओं को मंज़ूरी दी गई, जबकि 2015 से पहले जेएनएनयूआरएम के तहत 62,983 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंज़ूरी दी गयी थी।

 

ज़रूरी चीज़ों तक सबकी पहुंच

2014 से पहले, बड़ी संख्या में नागरिकों के पास सम्मानजनक जीवन जीने के लिए ज़रूरी सुविधाएं नहीं थीं। खासकर ग्रामीण महिलाओं को खाना पकाने के लिए साफ़ ईंधन, सुरक्षित पेयजल और साफ़-सफ़ाई की सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। देश भर में इन कमियों को बड़े पैमाने पर और व्यवस्थित ढंग से दूर करने के लिए खास मिशन शुरू किए गए। इनके नतीजे परिवर्तनकारी रहे और हर इलाके में करोड़ों लोगों को इनका फ़ायदा मिला है। ये पहल स्वतंत्र भारत में रोज़मर्रा के जीवन स्तर में हुए सबसे अहम सुधारों में से एक हैं।

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (पीएमयूवाई)

मई 2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) ने साफ़ एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराकर ग्रामीण इलाकों में खाना पकाने के तरीकों को बदल दिया। इस योजना का पूरे देश में विस्तार हुआ और सितंबर 2019 तक इसने 8 करोड़ कनेक्शन का शुरुआती लक्ष्य हासिल कर लिया। बाकी बचे घरों तक पहुंचने के लिए, अगस्त 2021 में उज्ज्वला 2.0 शुरू की गई, जिसका लक्ष्य 1 करोड़ और कनेक्शन देना था। यह लक्ष्य जनवरी 2022 तक पूरा हो गया। सरकार ने 60 लाख और कनेक्शन को मंज़ूरी दी, जिससे दिसंबर 2022 तक इनकी संख्या 1.60 करोड़ हो गई। जुलाई 2024 में, 75 लाख और कनेक्शन पूरे किए गए। इसके बाद वित्त वर्ष 2025–26 में 25 लाख और कनेक्शन को मंज़ूरी दी गई, जिससे एलपीजी की पहुंच हर घर तक सुनिश्चित हो गई। 10.57 करोड़ से ज़्यादा साफ़ कुकिंग गैस कनेक्शन दिए गए हैं, जिससे बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुँच और सम्मान बढ़ा है।

देश में एलपीजी की पहुंच 55.9 प्रतिशत (अप्रैल 2014) से बढ़कर 107.2 प्रतिशत (अप्रैल 2026) हो गई, जो इसकी व्यापक पहुँच को दिखाता है। उपभोक्ताओं की संख्या 14.51 करोड़ (अप्रैल 2014) से बढ़कर 33.39 करोड़ (अप्रैल 2026) हो गई और खपत दोगुनी हो गई। मार्च 2026 तक डिस्ट्रीब्यूटरशिप और बॉटलिंग अवसंरचना के विस्तार से ग्रामीण इलाकों में इसकी पहुँच बेहतर हुई।

जल जीवन मिशन (जेजेएम)

'हर घर जल' के लक्ष्य वाले जल जीवन मिशन (जेजेएम) ने पाइप से पानी की सुविधा पहुंचाने के काम में तेज़ी से विस्तार किया है। अगस्त 2019 में जेजेएम के शुरू होने से पहले, सिर्फ़ 3.23 करोड़ (16.72 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों के पास नल से पानी का कनेक्शन था। जून 2026 में, 15.86 करोड़ (81.94 प्रतिशत) से ज़्यादा परिवारों को साफ़ पाइप वाला पानी मिलने लगा। सिर्फ़ छह वर्षों में, 2.08 लाख करोड़ रुपये के निवेश से 12 करोड़ नए कनेक्शन जोड़े गए।

जल जीवन मिशन ने पूरे ग्रामीण भारत में बड़े बदलाव लाने वाले नतीजे दिए हैं। 9 करोड़ से ज़्यादा महिलाएं पानी लाने की मेहनत से आज़ाद हुई हैं, जिससे उनका समय बचा है और सेहत में सुधार हुआ है। ग्राम सभाओं ने 1.81 लाख गांवों को 'हर घर जल' का प्रमाण दिया है, जिससे सभी तक पानी की पहुंच सुनिश्चित हुई है।  इसके अलावा, 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने सभी ग्रामीण घरों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जो पानी की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

इस मिशन में पानी की गुणवत्ता को भी बराबर प्राथमिकता दी गई है। वित्त वर्ष 2025-26 तक, 2,843 प्रयोगशालाओं ने 38.78 लाख नमूनों की जांच की। 24.80 लाख से ज़्यादा महिलाओं को फ़ील्ड टेस्टिंग किट इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी गई, जिससे गांव के स्तर पर लोगों में अपनापन और भरोसा बढ़ा।

मार्च 2026 में, जेजेएम 2.0 के तहत इस मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया। इस बेहतर फ़्रेमवर्क में 8.69 लाख करोड़ रुपये का बड़ा बजट रखा गया है, जिसमें 3.59 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है।

 

स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम)

2014 में शुरू 'स्वच्छ भारत मिशनग्रामीण' ने सभी ग्रामीण घरों में शौचालय उपलब्ध कराए, जिससे गांवों में सम्मान और स्वच्छता सुनिश्चित हुई। स्वच्छता कवरेज 2014 में 39 प्रतिशत से तेजी से बढ़कर 2019 में 100 प्रतिशत हो गया, जो देशव्यापी बदलाव का प्रतीक है।

एसबीएम-ग्रामीण की उपलब्धियां उल्लेखनीय रही हैं। जून 2026 तक, कुल मिलाकर 12.14 करोड़ से अधिक घरेलू शौचालय और 2.76 लाख सामुदायिक स्वच्छता परिसर बनाए जा चुके हैं। 5.69 लाख से अधिक गांवों को ओडीएफ प्लस घोषित किया गया है। 5.34 लाख गांवों में ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था है, जबकि 5.55 लाख गांवों में तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था है।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी: 2014 में शुरू  इस मिशन ने शहरों और कस्बों में स्वच्छता व्यवस्था को बदल दिया। 2014-2026 के बीच 63 लाख से अधिक घरेलू शौचालय और छह लाख सामुदायिक शौचालय बनाए गए। शहरी कचरा प्रसंस्करण 2014 में 16 प्रतिशत की तुलना में 2026 में बढ़कर 82 प्रतिशत हो गया। घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करने की सुविधा 2014 में 43 प्रतिशत की तुलना में 2026 में 98 प्रतिशत तक पहुंच गई।

स्वच्छ भारत मिशन का कुल प्रभाव मापने योग्य है। सभी 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) ने अक्टूबर 2019 में खुद को ओडीएफ घोषित किया। डबल्यूएचओ का अनुमान है कि 2014 की तुलना में 2019 में दस्त (डायरिया) से होने वाली मौतों में 3,00,000 की कमी आई।

 

सभी के लिए बिजली: भरोसेमंद, किफायती और स्वच्छ ऊर्जा

भरोसेमंद बिजली आरामदायक रोज़मर्रा की ज़िंदगी के पीछे की एक मौन शक्ति है। पिछले बारह वर्षों में, भारत ने बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और आखिरी छोर तक बिजली पहुंचाने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। इसका नतीजा यह है कि हर घर में ज़्यादा रोशनी, ज़्यादा आराम और ज़्यादा सम्मान मिला है।

उत्पादन क्षमता एवं एक भरोसेमंद, स्वच्छ ग्रिड

पिछले 12 सालों में कुल स्थापित विद्युत क्षमता  दोगुनी से ज़्यादा हो गई है। यह वित्त वर्ष 2014 में 248 गीगावाट से बढ़कर मार्च 2026 तक 532 गीगावाट से ज़्यादा हो गई।

अब इस क्षमता का आधे से ज़्यादा हिस्सा नवीकरणीय स्रोत से आता है। नवीकरणीय ऊर्जा  क्षमता  मार्च 2026 में 274.69 गीगावाट तक पहुंच गई, जबकि 2014 में यह 76.38 गीगावाट थी। भारत के पास अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी स्वच्छ उर्जा क्षमता है। सौर ऊर्जा का योगदान अब 150.26 गीगावाट है, जबकि 2014 में यह 2.82 गीगावाट था। पवन ऊर्जा क्षमता 2.66 गुना बढ़कर 21.04 गीगावाट  (मार्च 2014) से 56.09 गीगावाट (मार्च 2026) हो गई। परमाणु ऊर्जा में 84 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 4.78 गीगावाट (मार्च 2014) से बढ़कर 8.78 गीगावाट (मार्च 2026) हो गई। पनबिजली क्षमता 51.4 गीगावाट (मार्च 2026) है, जबकि दूसरे स्रोत (बायोमास वगैरह) का योगदान 11.74 गीगावाट (मार्च 2026) है।

नागरिकों के लिए अब लगभग चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध है। गांवों में औसत बिजली सप्लाई 2014 में 12.5 घंटे से बढ़कर 22.6 घंटे हो गई है। शहरी इलाकों में अब हर दिन 23.4 घंटे तक बिजली आपूर्ति होती है। देश में बिजली की कमी तेज़ी से 4.2 प्रतिशत (2013-14)  से घटकर सिर्फ़ 0.03 प्रतिशत (2025-26) रह गई है। प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 957 किलोवाट (2013-14) से बढ़कर 1,460 किलोवाट (2024-25) हो गई है।

ट्रांसमिशन लाइनों (220 केवी और उससे ज़्यादा) का नेटवर्क जनवरी 2026 तक 5 लाख सर्किट किलोमीटर से ज़्यादा हो गया। ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी 1,407 जीवीए (220 केवी और उससे ज़्यादा) तक पहुंच गई और रीजनल ट्रांसफर कैपेसिटी जनवरी 2026 में 120 गीगावाट से ज़्यादा हो गई। भारत अब एक ही फ़्रीक्वेंसी पर दुनिया के सबसे बड़े सिंक्रोनाइज़्ड नेशनल ग्रिड के तौर पर काम करता है।

 

रिकॉर्ड क्षमता से बिजली की भारी मांग पूरी हुई

भारत ने 25 अप्रैल 2026 को बिजली की अब तक की सबसे ज़्यादा पीक डिमांड (सबसे ज़्यादा मांग) 256.1 गीगावाट दर्ज की। पड़ोसी देशों को बिजली का निर्यात जारी रखते हुए भी इस मांग को बिना किसी कमी के पूरा किया गया। यह उपलब्धि मई 2024 में दर्ज 250 गीगावाट की पिछली पीक डिमांड से ज़्यादा थी। मांग में बढ़ोतरी गर्मियों के मौसम के हिसाब से थी, जिसमें अप्रैल 2026 में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 65 गीगावाट की रिकॉर्ड क्षमता जोड़ने से भविष्य की मांग के लिए तैयारी मज़बूत हुई। सौर ऊर्जा, पनबिजली, परमाणु और तापीय ऊर्जा जैसे बिजली उत्पादन के अलग-अलग स्रोतों ने भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित की।

 

सौभाग्य: हर घर तक बिजली पहुंचाना

2017 में शुरू की गई 'प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना' (सौभाग्य) के तहत, बिना बिजली वाले ग्रामीण और शहरी घरों को मुफ़्त बिजली कनेक्शन दिए गए। मार्च 2022 तक, लगभग 2.86 करोड़ घरों को बिजली कनेक्शन मिल चुका था। सभी लक्ष्य पूरे होने के साथ ही यह योजना समाप्त हो गई।

पीएम सूर्य घर  :  घरों को बिजली उत्पादक बनाना

फरवरी 2024 में शुरू 'पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना' परिवारों को अच्छी-खासी केन्द्रीय सब्सिडी के साथ रूफटॉप सोलर पैनल लगाने में मदद करती है। हर पात्र घर को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ़्त बिजली मिल सकती है। सब्सिडी की रकम 78,000 रुपये तक हो सकती है, जो सीधे लाभार्थी के खाते में जमा की जाती है। मई 2026 तक, 40 लाख से ज़्यादा घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके थे। इस योजना का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 तक एक करोड़ घरों तक पहुंचना है, जिसके लिए 75,021 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। अब परिवार अपने बिजली बिल कम कर सकते हैं और अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई भी कर सकते हैं।

 उन्नत ज्योति बाय अफोर्डेबल एलईडी फॉर ऑल (उजाला): किफायती और उर्जा-सक्षम प्रकाश व्यवस्था

उजाला योजना के तहत पिछले बारह वर्षों में 37 करोड़ एलईडी बल्ब वितरित किए गए, जिससे परिवारों को प्रतिवर्ष 19,153 करोड़ रुपये की बचत हुई।

अब भरोसेमंद बिजली ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में शिक्षा, उद्योग और घरों में आराम-सुविधा को बढ़ावा दे रही है। साफ़ ऊर्जा के स्रोतों का तेज़ी से विस्तार हुआ है, जिससे स्थिरता बढ़ी है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हुई है।

 

 वित्तीय समावेशन और सशक्तिकरण

2014 से, भारत ने आपस में जुड़ी हुई वित्तीय समावेशन योजनाएं शुरू की हैं, जिन्होंने बचत, ऋण, बीमा और पेंशन को शामिल करते हुए एक व्यापक इकोसिस्टम तैयार किया है। इन पहलों ने अवसरों का विस्तार किया, सुरक्षा को सुदृढ़ किया और लाखों लोगों को आधुनिक वित्तीय प्रणालियों में आत्मविश्वास के साथ भाग लेने में सक्षम बनाया।

प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई)

जन धन, आधार और मोबाइल की 'जैम तिकड़ी' भारत में कल्याणकारी योजनाओं के लाभ पहुंचाने का मुख्य आधार बन गई। प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) इसका पहला स्तंभ थी, जिसने बैंकिंग सेवाओं से दूर रहे करोड़ों नागरिकों के लिए बैंकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई। इसने बिना किसी लीकेज के सीधे पैसे ट्रांसफर करने की नींव रखी, जिससे लोगों तक लाभ पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से पहुंचे।

अगस्त 2014 में शुरू हुई पीएमजेडीवाई, दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल है। इसके तहत खातों की संख्या 2015 में 14.72 करोड़ से बढ़कर जून 2026 तक 58 करोड़ से अधिक हो गई। जून 2026 तक जमा राशि 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई, जो लोगों के भरोसे और सक्रिय इस्तेमाल को दर्शाती है।

पीएमजेडीवाई खाते अभूतपूर्व स्तर पर कल्याणकारी लाभ पहुंचाने का माध्यम बन गए। अकेले वित्त वर्ष 2024–25 में, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) योजनाओं के तहत 6.9 लाख करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफर किए गए। डीबीटी में 327 योजनाएं शामिल हैं, जिससे शासन व्यवस्था समावेशी, जवाबदेह और देश भर के हर लाभार्थी की ज़रूरतों के प्रति संवेदनशील बनी है।जून 2026 में दुर्घटना बीमा कवर के साथ 40.60 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड जारी किए गए।

इससे बैंकिंग से हाल ही में जुड़े लाखों नागरिकों को वित्तीय सुरक्षा मिली, जिससे उनके रोज़मर्रा के जीवन में सुधार हुआ और उनकी मुश्किलें कम हुईं।

 प्रधानमंत्री मुद्रा योजना  (पीएमएमवाई)

वर्षों तक, लघु और सूक्ष्म उद्यमियों की औपचारिक ऋण तक पहुंच सीमित थी। वे ऐसे अनौपचारिक ऋणदाताओं पर निर्भर थे जो बहुत ज़्यादा ब्याज दरें वसूलते थे। 2015 में शुरू पीएमएमवाई योजना ने सूक्ष्म उद्यमों को विकास का इंजन माना और बिना किसी गारंटी (कोलेटरल-फ्री) के संस्थागत लोन की सुविधा दी।

शुरू होने के बाद से, पीएमएमवाई के तहत 40 लाख करोड़ रुपये के 57.7 करोड़ लोन मंज़ूर किए गए। मुद्रा योजना के अंतर्गत 66% ऋण महिलाओं को स्वीकृत किए गए, जिनकी कुल राशि 16.88 लाख करोड़ रुपये है। लगभग आधे लाभार्थी एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों से थे, जिससे ऋण तक पहुंच के साथ-साथ सामाजिक समानता भी सुनिश्चित हुई।

वित्त वर्ष 2024–25 में 'तरुण प्लस' कैटेगरी शुरू होने से लोन की अधिकतम सीमा बढ़कर 20 लाख रुपये हो गई। यह श्रेणी उन उद्यमियों के लिए मददगार साबित हुई जिन्होंने पहले लिए गए ऋण चुका दिए थे। श्रण ब्यूरो के अध्ययन से पता चला कि पीएमएमवाई ऋण की वजह से 2015 और 2018 के बीच 1.12 करोड़ नौकरियां पैदा हुईं।

 

 परिवहन एवं कनेक्टिविटी

कनेक्टिविटी विकास की ताकत है, जो देश भर में नए मौके बनाती है और लोगों के जीवन को आसान बनाती है। 2014 में, भारत के परिवहन अवसंरचना की स्थिति ऐसी थी कि राजमार्ग का निर्माण धीमा था, मेट्रो नेटवर्क सीमित था और क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी भी कम थी। शहरों के बीच इंटरसिटी  रेल सेवाएं नहीं थीं, जिससे आम यात्रियों के पास परिवहन के सीमित और कम अपर्याप्त विकल्प ही थे। 2014 और 2026 के बीच, भारत ने सड़क, रेल, हवाई और शहरी ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में तेज़ी से बदलाव किए।

सड़कें और राष्ट्रीय राजमार्ग

2014 और 2026 के बीच भारत का सड़क नेटवर्क काफी बढ़ा, जिससे कनेक्टिविटी और रोज़ाना की आवाजाही में बड़ा बदलाव आया। 63.73 लाख किलोमीटर के साथ, यह अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है। राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई में लगभग 61 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जो वित्त वर्ष 2014 में 91,287 किलोमीटर से बढ़कर मार्च 2026 में 1,46,572 किलोमीटर हो गई। चार-लेन और उससे ज़्यादा लेन वाले राजमार्ग 2014 में 18,371 किलोमीटर से बढ़कर 45,516 किलोमीटर हो गए। देश भर में कुल 3,644 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड तीव्र गति वाले गलियारे/एक्सप्रेसवे अब चालू हैं, जिनसे यात्रा का समय और ट्रैफिक जाम कम हुआ है। मार्च 2026 तक, भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत 22,590 किलोमीटर सड़कें बनकर तैयार हो गई थीं।

बेमिसाल कनेक्टिविटी के 12 साल:

  • जेड मोड़/सोनमर्ग सुरंग (2025) लद्दाख तक पहुंच को बेहतर बनाती है, जिससे पर्यटन और स्थानीय लोगों की आजीविका को बढ़ावा मिलता है।
  • सुदर्शन सेतु (2024) ओखा को बेत द्वारका से जोड़ता है, जिससे तीर्थयात्रा और तटीय गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
  • मैत्री सेतु (2021) त्रिपुरा को बांग्लादेश से जोड़ता है, जिससे व्यापार और यात्रियों की आवाजाही बढ़ती है।
  • अटल सुरंग (2020) मनाली और लाहौल-स्पीति के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी देती है और दूरी को 46 किलोमीटर कम करती है।
  • डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग (जिसे पहले चेनानी-नाशरी सुरंग के नाम से जाना जाता था, 2017) जम्मू-श्रीनगर यात्रा के समय को दो घंटे कम करती है।
  • धोला-सदिया पुल (2017) असम और अरुणाचल प्रदेश को जोड़ता है, जिससे पूर्वोत्तर तक पहुंच बेहतर होती है।

हाल की परियोजनाओं ने शहरी और क्षेत्रीय आवागमन को बेहतर बनाया है:

  • दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा ने (2026) यात्रा के समय को छह घंटे से घटाकर 2.5 घंटे कर दिया है और इसमें एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वन्यजीव गलियारा है।
  • अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेसवे (2026) परिवहन व्यवस्था को मजबूत करेगा और यात्रा का समय कम करेगा।
  • बिहार में गंगा नदी पर NH-31 पर बना पुल (2025) भारी वाहनों के मार्ग को 100 किलोमीटर से अधिक कम करता है।
  • अर्बन एक्सटेंशन रोड II (2025) दिल्ली की तीसरी रिंग रोड की तरह है, जिससे माल की आवाजाही तेज़ हुई है
  • द्वारका एक्सप्रेसवे (2025) ने दिल्ली और NCR में ट्रैफिक जाम की समस्या को कम किया है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई): यह योजना गांवों को हर मौसम में चलने लायक मज़बूत सड़कों से जोड़ने के लिए शुरू की गई थी। इसने गांवों को बाज़ारों, स्कूलों और अस्पतालों से जोड़ा, जिससे यात्रा आसान हुई और रोज़मर्रा की ज़िंदगी बेहतर बनी। इसके लिए बजट सहायता 2014–15 में 386 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026–27 में 19,000 करोड़ रुपये हो गई। 2026 तक, 99.6 प्रतिशत पात्र बस्तियां इससे जुड़ गईं।  कुल सड़कों की लंबाई 4.11 लाख किलोमीटर और पुलों की संख्या 10,293 तक पहुंच गई, जिससे गांवों का अलगाव कम हुआ और ग्रामीण विकास को मज़बूती मिली।

2014 और 2026 के बीच सड़क परिवहन और राजमार्गों के लिए बजट आवंटन लगभग दस गुना बढ़ गया। राजमार्गों के विस्तार से कई क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था, पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय विकास में तेज़ी आई।

 

रेलवे

भारतीय रेलवे देश की जीवन रेखा बनी हुई है। यह रोज़ाना करोड़ों यात्रियों और लाखों टन माल को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाती है। 2014 से, गति, आराम, सुरक्षा और क्षमता पर खास ध्यान दिया गया है। रेल नेटवर्क के विद्युतीकरण में तेज़ी आई है जिससे यह 2014 से पहले के 20 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2026 तक 99.6 प्रतिशत हो गया है। इसका विस्तार 69,873 रूट किलोमीटर के दायरे में है, जिससे काम करने की क्षमता बढ़ी है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हुई है। 'कवच' - भारत का अपना स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है जो ट्रेनों की आवाजाही पर नज़र रखता है और टक्कर रोकने के लिए ब्रेक लगाता है। इसे 3,103 रूट किलोमीटर पर लगाया गया है और 24,427 किलोमीटर पर लगाने का काम चल रहा है। साथ ही, इसे 4,277 लोकोमोटिव इंजन पर लगाया जा चुका है और 8,979 और इंजनों पर लगाने का काम जारी है। नतीजतन, ट्रेन दुर्घटनाओं में भारी कमी आई है - 2014-15 में ये 135 थीं, जो 2025-26 में घटकर सिर्फ़ 16 रह गईं।

इस इरादे का असर बजट में भी साफ़ दिखता है। इस दौरान रेलवे के लिए कुल बजट आवंटन में लगभग नौ गुना बढ़ोतरी हुई है। यह 2014 में 32,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में लगभग 2.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है। लगातार किए गए इस निवेश का नतीजा यह हुआ है कि रोज़मर्रा के सफ़र में आसानी हुई है।

  • वंदे भारत

पहली वंदे भारत एक्सप्रेस 15 फरवरी 2019 को भारत में ही तैयार की गई सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन के तौर पर शुरू की गई थी। मार्च 2026 तक, पूरे देश में 162 सेवाएं चल रही थीं, जो भारतीय रेलवे में तेज़ी से हो रहे विस्तार को दिखाती हैं। वित्त वर्ष 2025–26 में, इन ट्रेनों में 3.98 करोड़ यात्रियों ने सफ़र किया, जो पिछले साल के मुकाबले 34 प्रतिशत ज़्यादा है। शुरू होने के बाद से, लगभग एक लाख ट्रिप में 9.1 करोड़ से ज़्यादा यात्रियों ने सफ़र किया है, जो लोगों के बीच इसकी ज़बरदस्त लोकप्रियता को दिखाता है। जनवरी 2026 में भविष्य की तकनीक वाली वंदे भारत स्लीपर सर्विस शुरू की गई, जो हावड़ा और गुवाहाटी को जोड़ती है। शुरू होने के पहले तीन महीनों में ही, इस स्लीपर ट्रेन ने 119 ट्रिप में 1.21 लाख यात्रियों को पहुँचाया।

  • अमृत भारत ट्रेन

अमृत ​​भारत एक्सप्रेस ट्रेनों ने लंबे मार्गों पर किफायती और आरामदायक यात्रा की सुविधा दी है। अभी चल रही 60 पूरी तरह से बिना-एसी अमृत भारत ट्रेन सेवाएँ टियर-2 और टियर-3 शहरों के यात्रियों को सेवा देती हैं। ये ट्रेनें आधुनिक सीटिंग और सुरक्षा सुविधाओं के साथ किफायती, बिना-एसी और ज़्यादा क्षमता वाली यात्रा की सुविधा देती हैं। ये कमज़ोर और निम्न-मध्यम वर्ग के लोगों के लिए किफायती और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करती हैं, जिससे सभी के लिए लंबी दूरी की यात्रा आसान हो जाती है।

 

  • अमृत भारत स्टेशन योजना

2023 में शुरू की गई 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत लंबे समय के लिए फिर से विकसित करने के लिए 1,338 स्टेशनों की पहचान की गई। इनमें से 157 स्टेशन आकांक्षी जिलों में हैं, ताकि सभी के लिए समावेशी अवसंरचना का विकास सुनिश्चित हो सके। 1 अप्रैल 2026 तक, 208 स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं और यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया गया। इन अपग्रेड में पार्किंग, वेटिंग लाउंज, लिफ्ट, एस्केलेटर, बेहतर शौचालय और रियल-टाइम जानकारी देने वाले सिस्टम शामिल हैं। वित्त वर्ष 2025–26 में, फिर से विकसित किए गए 119 स्टेशनों का उद्घाटन किया गया, जो एक बड़ी प्रगति है।

  • तीव्र-गति रेल गलियार

अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का काम चल रहा है और इसके सूरत-बिलिमोरा सेक्शन पर 2027 में ऑपरेशन शुरू हो जाएगा। 508 किलोमीटर लंबे इस गलियारे को 320 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ़्तार से चलने के लिए डिज़ाइन किया गया है। केंद्रीय बजट 2026-27 में बड़े शहरों को हाई-स्पीड रेल से तेज़ी और बेहतर ढंग से जोड़ने के लिए सात और बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की घोषणा की गई थी। इन रूटों में शामिल हैं:

  • मुंबई-पुणे
  • पुणे-हैदराबाद
  • हैदराबाद-बेंगलुरु
  • हैदराबाद-चेन्नई
  • चेन्नई-बेंगलुरु
  • दिल्ली-वाराणसी
  • वाराणसी-सिलीगुड़ी

ये घोषणाएं भारत की वृद्धि, एकीकरण और स्थाई विकास में तीव्र-गति रेल की रणनीतिक भूमिका को रेखांकित करती हैं।

नागरिक उड्डयनउड़ान

2014 में सिर्फ़ 74 हवाईअड्डे चालू थे, जिससे छोटे शहरों में हवाई कनेक्टिविटी नहीं थी। अक्टूबर 2016 में शुरू क्षेत्रीय कनेक्टिविटी स्कीम, 'उड़े देश का आम नागरिक' (उड़ान) ने इस स्थिति को बदल दिया। उड़ान के तहत 95 एयरपोर्ट, हेलीपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम पर 665 रूट चालू किए गए। इसके परिणामस्वरूप, अप्रैल 2026 तक भारत में कुल हवाईअड्डों की संख्या बढ़कर 165 हो गई। इस विस्तार को बनाए रखने के लिए, सरकार ने 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (वीजीएफ) सहायता दी, जिससे एयरलाइंस नए रूटों पर प्रभावी ढंग से काम कर सकीं। इस मदद से किफायती किराया सुनिश्चित हुआ और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत हुई, जिससे लाखों नागरिकों के लिए हवाई यात्रा सुलभ हो गई।

शुरू होने के बाद से, उड़ान ने 3.45 लाख उड़ानों में 1.64 करोड़ से ज़्यादा यात्रियों को यात्रा कराई है। पूर्वोत्तर, पहाड़ी राज्यों और द्वीप वाले क्षेत्रों जैसे दूर-दराज के इलाकों को पहली बार राष्ट्रीय एविएशन ग्रिड से जोड़ा गया। 4,800 करोड़ रुपये से ज़्यादा के निवेश ने उन हवाईअड्डों को फिर से चालू किया जहां सेवाएं नहीं थीं, जबकि 2014 के बाद 25 ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को मंज़ूरी दी गई, जिनमें नवी मुंबई, नोएडा, मोपा, कन्नूर और होलोंगी शामिल हैं।

 

मार्च 2026 में, संशोधित उड़ान योजना को मंज़ूरी दी गई, जिसका लक्ष्य 120 नई जगहों तक सेवा पहुंचाना और चार करोड़ अतिरिक्त यात्रियों को सुविधा देना था। योजनाओं में 100 हवाईअड्डे, 200 आधुनिक हेलीपैड और आकांक्षी ज़िलों में छोटी हवाई पट्टियाँ शामिल हैं

दिसंबर 2022 में शुरू की गई 'डिजी यात्रा' जैसी पहलों से यात्रियों की सुविधा भी बेहतर हुई है, जिससे बिना किसी रुकावट और कागज़ात के यात्रा करना संभव हुआ है। मई 2026 तक, 38 एयरपोर्ट पर 9.3 करोड़ से ज़्यादा यात्रियों ने इस सुविधा का लाभ उठाया। 2024 में शुरू उड़ान यात्री कैफ़े और शिकायतों के समाधान की प्रणालियों ने यात्रियों के आराम को और बढ़ाया है। इन सभी उपायों ने हवाई यात्रा को सुलभ, सस्ता और भरोसेमंद बनाया है, जिससे लाखों नागरिकों के लिए यात्रा का अनुभव बदल गया है।

मेट्रो रेल

मेट्रो रेल बड़े पैमाने पर लोगों के आने-जाने के लिए सबसे सक्षम समाधान बनकर उभरी है और इसने पूरे देश में शहरी परिवहन को बदल दिया है। 2014 में, मेट्रो रेल सिर्फ़ पांच शहरों में 248 किलोमीटर के नेटवर्क के साथ चलती थी। मार्च 2026 तक भारत में 26 शहरों में 1,155 किलोमीटर लंबा मेट्रो नेटवर्क परिचालन में था। इस विस्तार ने भारत को विश्व के तीसरे सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्क के रूप में स्थापित किया।

रोज़ाना यात्रियों की संख्या 2013–14 में 28 लाख से बढ़कर 2026 में 1.15 करोड़ से ज़्यादा हो गई। मेट्रो लाइनें शुरू करने की रफ़्तार नौ गुना बढ़ गई - 2014 से पहले हर महीने 0.68 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 6 किलोमीटर प्रति महीना हो गई। बजट से मिलने वाली मदद भी तेज़ी से बढ़ी - 2013–14 में 5,798 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025–26 में 29,550 करोड़ रुपये हो गई।

भारत के मेट्रो विस्तार ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। कोलकाता ने 2024 में हुगली नदी के नीचे देश की पहली अंडरवाटर मेट्रो टनल का उद्घाटन किया। कोच्चि जल मेट्रो सेवा शुरू करने वाला पहला शहर बना, जिसने इलेक्ट्रिक हाइब्रिड नावों के ज़रिए 10 द्वीपों को जोड़ा। जनवरी 2026 में, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने 'भारत में अवसंरचना विकास का स्वर्णिम दशक' नाम से एक रिपोर्ट जारी की। इस अध्ययन में पाया गया कि मेट्रो रेल की सुविधा मिलने से परिवारों में ऋण चुकाने का अनुशासन बेहतर होता है और आर्थिक तनाव कम होता है। ये उपलब्धियां दिखाती हैं कि कैसे मेट्रो रेल ने शहरी आवाजाही को नया रूप दिया है और यात्रा की थकान को कम किया है, जिससे लाखों नागरिकों को आधुनिक परिवहन की सुविधा मिली है।

 

नमो भारत - रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस)

दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस पर नमो भारत ट्रेन 2023 में शुरू हुई और फरवरी 2026 में पूरी तरह से चालू हो गई। यह 160 किलोमीटर/घंटा की रफ़्तार से चलती है और इसकी डिज़ाइन स्पीड 180 किलोमीटर/घंटा है, जिससे यात्रा तेज़ होती है। इस सिस्टम में दुनिया का पहला 'यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ईटीसीएस) लेवल II' है, जिसमें एलटीई रेडियो बैकबोन का इस्तेमाल करके 'हाइब्रिड लेवल III' सिग्नलिंग की सुविधा दी गई है। दुनिया में पहली बार, इस कॉरिडोर में एलटीई बैकबोन पर 'हाइब्रिड लेवल III' रेडियो-बेस्ड सिग्नलिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह आधुनिक तकनीकी ट्रेन के परिचालन को स्मार्ट और सुरक्षित बनाती है, जिससे यात्रियों का भरोसा बढ़ता है और पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

शासन सुधार

शासन में सुधारों ने नागरिकों और संस्थाओं के बीच बातचीत के तरीके को बदल दिया है। इन सुधारों का मुख्य मकसद नियमों का पालन करने के बोझ को कम करना, जवाबदेही को मज़बूत करना और सेवाओं को ज़्यादा पारदर्शी बनाना रहा है। कानूनी बदलावों और नागरिकों के लिए बने प्लेटफ़ॉर्म ने रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए तेज़, निष्पक्ष और पहले से अनुमान लगाने योग्य सिस्टम बनाए हैं।

कानूनों को आसान बनाना: जन विश्वास अधिनियम

जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2023, नियमों के पालन के बोझ को कम करने की दिशा में एक अहम मोड़ साबित हुआ। इसने कई केंद्रीय कानूनों के प्रावधानों में बदलाव किए और छोटी-मोटी गलतियों के लिए आपराधिक सज़ा की जगह दीवानी कार्रवाई का प्रावधान किया। अब नागरिकों और उद्यमों को छोटी-मोटी गलतियों के लिए जेल नहीं जाना पड़ता, जिससे डर कम हुआ है और लोग स्वेच्छा से नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित हुए हैं।

जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2026 ने इसके दायरे को काफ़ी बढ़ा दिया है। इसमें 79 केंद्रीय अधिनियमों के 784 प्रावधान शामिल हैं, 717 प्रावधानों को अपराधमुक्त किया गया है तथा नागरिकों को सीधे प्रभावित करने वाले 67 प्रावधानों में संशोधन किया गया है।

  • छोटी-मोटी प्रक्रियागत गलतियों के लिए जेल की सज़ा की जगह अब जुर्माना या चेतावनी का प्रावधान किया गया है, जिससे चिंता कम हुई है।
  • पहली बार नियम तोड़ने पर सलाहकारी नोटिस दिए जाते हैं, ताकि सज़ा देने से पहले निष्पक्षता बनी रहे।
  • जुर्माने को अपराध के हिसाब से तय किया गया है, जिससे नियमों का पालन संतुलित और अनुमानित तरीके से हो सके।
  • अनुपालन मामलों में त्वरित समाधान सुनिश्चित करने और विलंब को कम करने के लिए अधिनिर्णायक अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।
  • समयबद्ध निवारण प्रदान करने और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए अपीलीय प्राधिकरणों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।
  • जुर्माने और दंड की समय-समय पर समीक्षा की जाती है, ताकि नियमों का पालन प्रासंगिक और प्रभावी बना रहे।

नागरिकों के लिए प्लेटफॉर्म

नागरिक-केंद्रित प्लेटफ़ॉर्म जवाबदेह शासन-व्यवस्था का मुख्य आधार बन गए हैं, जो शिकायतों के तेज़ी से समाधान और भागीदारी के माध्यम उपलब्ध कराते हैं।

  • केन्द्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस): मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नागरिकों की शिकायत निवारण के संबंध में संतुष्टि की निगरानी हेतु एक समर्पित फीडबैक पोर्टल उपलब्ध है। जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच लगभग 6 लाख शिकायतों का निवारण किया गया, जिनमें से 69.8% को शिकायतकर्ताओं द्वारा संतोषजनक के रूप में रेट किया गया। इससे जवाबदेह सेवा देने की दिशा में एक बुनियादी बदलाव देखने को मिला।
  • माईगव (MyGov): 2014 में शुरू किया गया माईगव, शासन में नागरिकों की भागीदारी को मज़बूत करता है। इस प्लेटफ़ॉर्म ने संवादात्मक लोकतंत्र का एक नया दौर शुरू किया और नीति-निर्माण में जनता की आवाज़ को बुलंद किया। 6 करोड़ से ज़्यादा पंजीकृत उपयोगकर्ताओं के साथ, यह नागरिकों और सरकार के बीच एक सक्रिय पुल का काम करता है। माईगव ने 28 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में भी अपने राज्य-स्तरीय संस्करण शुरू किए हैं, जिससे देश भर में लोगों की भागीदारी बढ़ी है। ये संस्करण खास तौर पर अलग-अलग राज्यों के लिए बनाए गए हैं। माईगव सलाह-मशविरे, नीति के बारे में जानकारी और योजनाओं की जानकारी देने में मदद करता है, ताकि शासन में सामूहिक समझ की झलक मिले।

इन प्लेटफ़ॉर्म्स ने नागरिकों को अपनी बात सीधे रखने और शिकायतों का तेज़ी से समाधान पाने का ज़रिया दिया, जिससे संस्थाओं में भरोसा बढ़ा।

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान

2021 में शुरू पीएम गतिशक्ति योजना में एकीकृत योजना तैयार करने के लिए 58 मंत्रालयों और विभागों को शामिल किया गया है। उनके डेटा परतों को नेशनल मास्टर प्लान पर एक साथ लाया गया है, जिससे अलग-अलग क्षेत्र में तालमेल के साथ अवसंरचना का विकास हो पा रहा है। जीआईएस-आधारित पोर्टल पर केंद्रीय मंत्रालयों और राज्यों के 3,204 डेटा परतों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह प्लेटफॉर्म पारंपरिक अवसंरचना से आगे बढ़कर, समावेशी विकास के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा जैसे सामाजिक क्षेत्र को भी कवर करता है। पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान में ज़्यादा लोगों की भागीदारी के लिए सरकारी और निजी इकाइयों को भी शामिल होने का मौका दिया गया है।

इन सुधारों और प्लेटफॉर्म्स ने नियमों के पालन का बोझ कम किया, पारदर्शिता बढ़ाई और रोज़मर्रा के कामकाज को बेहतर बनाया। नागरिकों को तेज़ी से सेवाएं मिलीं, नियमों का पालन ज़्यादा निष्पक्ष तरीके से हुआ और फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ी। रोज़मर्रा की प्रक्रियाएं कम तनावपूर्ण, ज़्यादा अनुमान लगाने योग्य और ज़्यादा सशक्त बनाने वाली हो गईं, जो भरोसे और आसानी की दिशा में एक निर्णायक बदलाव को दिखाती हैं।

 

विकसित भारत की नींव है जीवन की सुगमता

2014 से 2026 तक भारत की शासन यात्रा लोगों के जीवन को अधिक सम्मानजनक और सशक्त बनाने की कहानी है। पीएम आवास योजना के तहत मिले हर घर ने परिवारों को असुरक्षा से मुक्त किया, जबकि नल से पानी के हर कनेक्शन ने मेहनत-मशक्कत में लगने वाले घंटों को बचाया। खासकर महिलाओं को शिक्षा और आजीविका के लिए समय मिला। हर जन धन खाते ने परिवारों को वित्तीय मुख्यधारा से जोड़ा, जिससे उन्हें बचत और ऋण की सुविधा मिली। सड़कों, मेट्रो और हवाई अड्डों ने समुदायों को अवसरों से जोड़ा, जिससे अलगाव कम हुआ और विकास के रास्ते खुले। ये उपलब्धियां केवल आंकड़े नहीं हैं बल्कि ये गांवों, कस्बों और शहरों में रोजमर्रा की जिंदगी में आए साफ और वास्तविक बदलावों को दर्शाती हैं।

जैसे-जैसे भारत 2047 तक 'विकसित भारत' की ओर बढ़ रहा है, यह आधार राष्ट्रीय प्रगति के लिए अहम बना हुआ है। समावेशी विकास, स्थिरता और हर नागरिक के लिए सम्मान - ये सभी एक-दूसरे के पूरक लक्ष्य हैं, कि आपस में टकराने वाली प्राथमिकताएं। 2014 से 2026 के बारह वर्षों ने साबित कर दिया कि नागरिक-केंद्रित, मिशन-आधारित और तकनीक-सक्षम शासन बड़े पैमाने पर नतीजे दे सकती है। इन नतीजों ने तेजी और गहराई के साथ लोगों के जीवन को बदला है और बदलाव के ऐसे सबक दिए हैं जिनसे दुनिया सीख सकती है।

 

संदर्भ:

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प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ)

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वित्त मंत्रालय

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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2246226&reg=3&lang=1

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय

https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/187/AU6033_XP4G1y.pdf?source=pqals

मायगव (MyGov)

https://www.mygov.in/overview

नागरिक उड्डयन मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1657813&reg=48&lang=2

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय

https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/187/AU3352_6sijmI.pdf?source=pqals

https://www.facebook.com/PetroleumMinIndia/videos/iea-applauds-india-for-pm-ujjwala-yojanadr-fatih-birol-executive-director-of-iea/378453946154485/

एशियाई विकास बैंक

https://www.adb.org/publications/energy-resilience-social-protection-india

 

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पीआईबी शोध

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