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Social Welfare

भारतीय न्यायपालिका का डिजिटल रूपांतरण

इलेक्ट्रॉनिक न्यायालय मिशन जनित परियोजना

Posted On: 07 AUG 2026 12:38PM

 - न्यायालय मिशन मोड परियोजना ने भारत की कागज़-आधारित न्यायपालिका को डिजिटल-सक्षम और ट्रैक योग्य न्याय वितरण प्रणाली में बदल दिया है। 2014 से अब तक, मामले दायर करने और निपटाने की संख्या लगभग तीन गुना बढ़ गई है, और हर वर्ष न्यायालय लगातार दायर मामलों की तुलना में अधिक मामले निपटाते रहे हैं। 753 करोड़ से अधिक पृष्ठों के न्यायालयी अभिलेख डिजिटाइज़ किए जा चुके हैं, जबकि हजारों e-Sewa केंद्र डिजिटल भेदभाव को पाटने और न्यायिक सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। ये सुधार मिलकर न्याय प्रणाली को तेज़, अधिक पारदर्शी और सभी के लिए सुलभ बना रहे हैं।

 

भारतीय न्यायपालिका का डिजिटलीकरण

भारत की न्यायपालिका, जो एक अरब से अधिक लोगों को सेवा देती है, लंबे समय तक कागज़ी रिकॉर्ड और भौतिक अवसंरचना पर निर्भर रही है। कई नागरिकों को अपने मामलों और दस्तावेजों के लिए अदालतों और अन्य कार्यालयों का दौरा करने में अधिक यात्रा और अन्य खर्च उठाने पड़ते थे। यह पुराना तरीका लोगों के लिए न्याय की प्रक्रिया को धीमा, जटिल और महंगा बनाता था।

सरकार ने 2007 में इन चुनौतियों से निपटने के लिए ई - न्यायालय मिशन मोड परियोजना शुरू की। इस मिशन का उद्देश्य विभिन्न न्यायालयी कार्यवाहियों और अभिलेखों को डिजिटाइज़ करके कार्यवाही तेज़ करना है। यह वकीलों, न्यायाधीशों और क्लर्कों सहित सभी संबंधितों के लिए न्यायिक प्रक्रिया को सस्ती, सुलभ और पारदर्शी बना रहा है। अब यह मिशन अपने तीसरे चरण में है और तकनीक के माध्यम से न्यायिक प्रणाली में परिवर्तन कर चुका है I

चरण I (2011–2015) ने इस मिशन की नींव रखी, जब 14,000 से अधिक अदालतों का कम्प्यूटरीकरण और आवश्यक नेटवर्क अवसंरचना विकसित की गई, जिससे टेक्नोलॉजी-सक्षम न्यायिक सेवाओं का समर्थन संभव हुआ।

चरण II (2015–2023) ने नागरिक-केंद्रित सेवाओं के साथ इसे आगे बढ़ाया, जिसमें नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG), -फाइलिंग और eSewa केंद्र (एक भौतिक हेल्प डेस्क जो डिजिटल न्यायिक सेवाएँ प्रदान करता है) शामिल हैं इस चरण में वीडियो कॉन्फरेंसिंग अवसंरचना को पांच गुना से अधिक बढ़ाया गया, जिससे न्यायिक कार्यवाहियों तक आभासी पहुँच काफी बेहतर हुई।

 

परियोजना वर्तमान में अपने तीसरे चरण (2023–2027) में है।

यह चरण रिकॉर्ड्स के बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण, वर्चुअल सुनवाइयों के व्यापक इस्तेमाल, न्याय संस्थानों के बीच गहरी इंटरऑपरेबिलिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एनालिटिक्स व ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) जैसे उभरते तकनीकों के अपनाने के माध्यम से डिजिटल, पेपरलेस और अधिक बुद्धिमान अदालतों की ओर संक्रमण का दृष्टिकोण रखता है।

इस चरण की प्रमुख उपलब्धियाँ:

क्र स.

संयोजन के नाम

उपलब्धि

  1.  

  पूरी तरह क्रियाशील: e Sewa केंद्र

1,806 केंद्र न्यायालय परिसरों में स्थापित

  1.  

पेपरलेस अदालतों के लिए आवश्यक अवसंरचना की स्थापना:

474 अदालतें सभी जरूरी उपकरणों से सुसज्जित

  1.  

वर्चुअल कोर्ट्स के विस्तार के लिए डिजिटल अवसंरचना:

538 अदालतें सुसज्जित

  1.  

ई-फाइलिंग कार्यान्वयन

4,519 अदालतें

  1.  

वीडियो कॉन्फरेंसिंग (VC) अवसंरचना का उन्नयन:

7,553 संस्थान (अदालतें, जेलें और अस्पताल सहित)

  1.  

ICT अवसंरचना के निर्बाध उपलब्धता के लिए सौर सुविधाएँ:

1,626 अदालत परिसरों में स्थापित

  1.  

नेशनल सर्विस एंड ट्रैकिंग ऑफ इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेसेस (NSTEP) सुविधा:

6,895 अदालतों में उपलब्ध

  1.  

सभी उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालय वेबसाइटों का S3WAAS प्लेटफ़ॉर्म पर माइग्रेशन:

734 कोर्ट साइटें माइग्रेट हुईं

  1.  

चरण II में अतिरिक्त हार्डवेयर वितरण:

18,380 अदालतों को प्रदान किया गया

  1.  
इंटेरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के साथ एकीकरण:  ताकि अदालतों, पुलिस, जेलों और फोरेंसिक लैब जैसे अलग-अलग विभागों के बीच डेटा और जानकारी का आसानी से आदान-प्रदान हो सके।

सभी उच्च न्यायालयों ने ICJS लागू कियाI

  1.  

सभी हितधारकों का प्रशिक्षण:

2,372 प्रशिक्षण सत्र आयोजित

  1.  

ज्ञान प्रबंधन :

आईआईटी मद्रास लर्निंग मैनेजमेंट(LMS)

  1.  

कनेक्टिविटी:

174 साइट्स सॉफ्टवेयर  डिफाइंड वाइड एरिया नेटवर्क प्रौद्योगिकी (SDWAN) से जुड़े

 

न्यायालय डिजिटलीकरण के लाभ

वर्चुअल कोर्ट, वीडियो कॉन्फरेंसिंग सुविधाएँ, केस ट्रैकर और पेंडिंग व निपटाए गए मामलों के डैशबोर्ड सहित अन्य डिजिटल साधनों ने कार्यवाहियों को व्यवस्थित और तेज़ किया है। ये सुधार सभी हितधारकों के लिए लाभदायक हैं।

 

नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के जरिए पेंडिंग व निपटान में पारदर्शिता

चरण II के तहत लॉन्च किया गया NJDG एक ऑनलाइन सार्वजनिक डैशबोर्ड है जो न्यायालय के आदेश, फैसले और मामलों का विवरण रीयल‑टाइम में ट्रैक करता है। इसमें सभी स्तरों पर लंबित मामले शामिल हैं।

NJDG में सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों के लिए समर्पित तीन डैशबोर्ड हैं। ये मिलकर देश भर में न्यायालयों के कार्य करने के तरीके पर अंतर्दृष्टि देते हैं और निम्नलिखित का ट्रैक करते हैं:

  • उच्च न्यायालयों और अवहेलना (subordinate) न्यायालयों में लंबित व निपटाए गए मामलों की संख्या
  • मामलों का प्रकार और कार्यवाही के चरण (जैसे एडमिशन, सुनवाई, निर्णय और निपटान) के अनुसार वितरण
  • मामलों में देरी के कारण — पक्षों की अनुपस्थिति, लंबित दस्तावेज, कोर्ट स्टे और अन्य प्रक्रियात्मक कारण — और ऐसी देरी की अवधि

NJDG का उद्देश्य सार्वजनिक रूप से लंबित मामलों का डेटा उपलब्ध कराकर प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। इससे उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, जिला जजों और उच्च न्यायालय रजिस्ट्री द्वारा न्यायिक योजना, मॉनिटरिंग और दूरस्थ प्रशासन में भी सहायता मिली है।

-फाइलिंग के माध्यम से प्रक्रियाओं में गति

पूर्व में, नागरिकों और वकीलों को शिकायतें, लिखित हलफनामा, जवाब और अन्य आवेदन व्यक्तिगत रूप से दायर करने पड़ते थे। ई-फाइलिंग प्रणाली अब यह आवश्यकता समाप्त कर देती है और किसी भी स्थान से दस्तावेज ऑनलाइन दायर करने की अनुमति देती है। न्याय अधिक समावेशी बनाने के लिए यह प्रणाली अंग्रेजी के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं को भी सपोर्ट करती है, और जिला न्यायालयों, उच्च न्यायालयों तथा सुप्रीम कोर्ट में काम करती है।

-फाइलिंग प्रणाली निम्न सुविधाएँ प्रदान करती/समर्थित करती है:

  • ऑनलाइन भुगतानों,
  • वकालतनामा (Vakalatnama) का ऑनलाइन जमा ,
  • -हस्ताक्षर (e-sign) के माध्यम से दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर,
  • शपथों की ऑनलाइन वीडियो रिकॉर्डिंग,
  • आवेदन पत्रों का दायर करना,
  • वकीलों और पक्षकारों के लिए पोर्टफोलियो प्रबंधन,
  • सहयोगियों/जूनियरों को साझेदार के रूप में जोड़कर मामलों का सामूहिक प्रबंधन,
  • पूर्ण/लंबित मामलों की स्थिति ट्रैक करने वाले डैशबोर्ड,
  • सामान्य दायर pleadings के लिए तैयार टेम्पलेट।

आरंभ से 30 जून 2026 तक:

  • फाइलिंग प्लेटफ़ॉर्म पर 1.25 करोड़ से अधिक मामले दायर किए जा चुके हैं।
  • पेमेंट्स सिस्टम ने अदालत शुल्क के रूप में 1,404 करोड़ और जुर्माने के रूप में 75 करोड़ के लेनदेनों को संसाधित किया है।

 

न्यायालयों के पुरालेखों (लेगेसी रिकॉर्ड) का डिजिटलीकरण तेज़ पुनर्प्राप्ति और भंडारण

चरण III के तहत करोड़ों पुराने न्यायालय अभिलेख डिजिटाइज़ किए जा रहे हैं। इससे मौलिक अभिलेखों को भौतिक क्षति से बचाने में मदद मिलती है और खोज तथा शोध तेज़ और कुशल बनते हैं।   

 

दूरस्थ सुनवाई के माध्यम से न्याय की किफायती पहुँच

वादकर्ता, वकील, गवाह और अन्य संबंधित पक्ष अब वीडियो कॉन्फरेंसिंग के माध्यम से दूरस्थ रूप से सुनवाई में भाग ले सकते हैं। इससे यात्रा की आवश्यकता समाप्त हुई है, शहरों और राज्यों के पार अदालतों तक पहुंच आसान हुई है और न्याय तक पहुंच बेहतर हुई है।

 

.

 

  • वीडियो कॉन्फरेंसिंग सुविधाएँ 7,553 संस्थानों में विस्तारित की जा चुकी हैं (अदालतें, जेलें और अस्पताल सहित)
  • अब तक 4.18 करोड़ से अधिक दूरस्थ सुनवाइयाँ इन माध्यमों से संपन्न हो चुकी हैं।
  • 11 उच्च न्यायालयों में कोर्ट कार्यवाहियों का लाइव स्ट्रीमिंग चालू है।
  • 31 वर्चुअल कोर्टें ट्रैफ़िक चालानोंसम्बन्धी ऑनलाइन निर्णय के लिए स्थापित की गईंवर्चुअल कोर्टों ने 11.33 करोड़ चालान स्वीकार किए जिनकी राशि ₹1,135.79 करोड़ है।
  • न्याय श्रुति (2024 में ICJS के तहत लॉन्च) अभियुक्त, गवाह, पुलिस अधिकारी, अभियोजक, वैज्ञानिक विशेषज्ञ और कैदी को वीडियो कॉन्फरेंसिंग के जरिए आभासी रूप से उपस्थित होने गवाही देने में सक्षम बनाता हैजिससे समय संसाधन बचते हैं और मुकदमों के निपटान में तेजी आती है।

 

पुलिस, न्यायालय, जेलें और प्रयोगशालाओं का कनेक्शन

डिजिटलीकरण अब केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं है; यह पूरे आपराधिक न्याय शृंखला को जोड़ता है।

मुख्य प्रणालियाँ और उनके कार्य:

  • ICJS (इंटेरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम) — पुलिस, न्यायालय, जेल और फोरेंसिक के बीच FIR, चार्ज‑शीट, आदेश और रिपोर्टों का इलेक्ट्रॉनिक आदान‑प्रदान संभव बनाता है।
  • CCTNS (Crime & Criminal Tracking Network and System) — FIR से चार्ज‑शीट तक पुलिस प्रक्रियाओं का कम्प्यूटरीकरण करता है, साथ में न्याय संहिता संबद्ध समय‑सीमाएं जांच अधिकारियों को देता है।
  • ITSSO (Investigation Tracking System for Sexual Offences) — महिलाओं/बाल यौन अपराध मामलों की जांचों को चार्ज‑शीट समय‑सीमाओं के विरुद्ध ट्रैक करने वाला डैशबोर्ड।
  • e‑Sakshya — डिजिटल साक्ष्य संग्रह और प्रबंधन के लिए सुरक्षित ऐप, संग्रह से लेकर न्यायालय तक प्रामाणिकता बनाए रखता है।
  • e‑Summons — समन का इलेक्ट्रॉनिक निर्माण, प्रेषण और निष्पादन।
  • MedLEaPR (Medico Legal Examination and Postmortem Reporting) — अस्पतालों के लिए नायतकीय/पोस्टमार्टम रिपोर्टों की ऑनलाइन प्रणाली।
  • Nyaya Shruti — अभियुक्त, गवाह, पुलिस, अभियोजक और फोरेंसिक विशेषज्ञों की आभासी गवाही के लिए वीडियो कॉन्फरेंसिंग प्लेटफ़ॉर्म।
  • e‑Forensic — फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में केस हैंडलिंग की अंक‑क्रमिक डिजिटल प्रक्रिया।
  • e‑Prison — जेल व कैदी प्रबंधन के लिए क्लाउड‑आधारित राष्ट्रीय नेटवर्क।
  • e‑Prosecution — पुलिस और अभियोजन के बीच डिजिटल वर्कफ़्लो जिससे समयबद्ध वैधानिक राय संभव हो।
  • NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System)

 — रीयल‑टाइम फिंगरप्रिंट मिलान के लिए केंद्रीकृत बायोमेट्रिक डेटाबेस।

डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से न्यायिक कारोबार का सुगम ट्रैकिं

वकील, पक्षकार, न्यायाधीश और अन्य  ऐप्स,अब बहुभाषी eCourts सर्विसेज पोर्टल, मेल और SMS के जरिए मामले की स्थिति व अपडेट ट्रैक कर सकते हैं। इन सेवाओं ने ट्रैकिंग व पारदर्शिता बढ़ाई है, अदालतों के भौतिक दौरे की आवश्यकता घटाई है और न्यायिक सेवा वितरण को आसान बनाया है।

•           प्रतिदिन 4 लाख से अधिक SMS और 6 लाख ईमेल भेजे जाते हैं।

•           बहुभाषी eCourts सर्विसेज पोर्टल पर लगभग 35 लाख हिट्स प्रतिदिन होते हैं।

•           eCourts सर्विसेज मोबाइल ऐप (3.84 करोड़ डाउनलोड) वकीलों व पक्षकारों को मामला स्थिति, कारणसूची आदि की जानकारी देता है।

•           JustIS ऐप (22,594 डाउनलोड) न्यायाधीशों के लिए एक प्रबंधन उपकरण है, जो उन्हें अपने न्यायिक कार्य का आयोजन व निगरानी करने में मदद करता है।

•           नेशनल सर्विस एंड ट्रैकिंग ऑफ इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेसेस (NSTEP) — GPSट्रैकिंग के साथ समन/नोटिस की डिलिवरी:

  • बैलिफ़ (bailiffs) NSTEP का उपयोग समन और नोटिसों को इलेक्ट्रॉनिक व वास्तविकसमय में सर्व करने के लिए करते हैं। NSTEP पुराने धीमे कागज़ी तरीके की जगह पारदर्शी, ट्रैकयोग्य डिजिटल प्रणाली लाता है, जिससे जिलों और राज्यों में सर्व तेज़ होता है।

eSEWA केंद्रों के माध्यम से न्याय प्रक्रिया की समझ में सुधार

न्यायालय परिसरों में स्थापित ई सेवा (e‑Sewa) केंद्र नागरिकमैत्रीपूर्ण सहायता केंद्र के रूप में कार्य करते हैं। यहाँ लोग विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं और कार्यवाहियों के बारे में मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते

  • मामले की स्थिति, अगली सुनवाई की तारीख और संबंधित मामलों की जानकारी देने के प्रश्नों का उत्तर।
  • प्रमाणित प्रतियों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रियाएँ।
  • पिटिशन की ईफाइलिंग हार्ड कॉपी का स्कैन, सिग्नेचर जोड़ना, CIS में अपलोड करना और फाइलिंग नंबर जनरेट करना।
  • स्टाम्प पेपर की ऑनलाइन खरीद व ईभुगतान में सहायता।
  • उपभोक्ताओं को आधारआधारित डिजिटल हस्ताक्षर प्राप्त करने में सहायता।
  • eCourts मोबाइल ऐप (Android/iOS) डाउनलोड करने और उपयोग करने के लिए प्रचार मदद।
  • जेल में मिलने (eMulakat) के लिए अपॉइंटमेंट बुक करना।
  • न्यायाधीशों की छुट्टियों के शेड्यूल के बारे में जानकारी।
  • जिला, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज/कमेटियों के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता की दिशा में मार्गदर्शन।
  • वर्चुअल कोर्टों के जरिए ट्रैफिक चालान निपटाने सहित चालान सेवाओं में सहायता।
  • वीडियोकांफ्रेंसिंग सुनवाई सेटअप और उसमें जुड़ने का तरीका बताना।
  • मेल, व्हाट्सऐप या अन्य डिजिटल चैनलों के माध्यम से फैसलें/आदेश की प्रतियाँ साझा करना।
  • 30 जून 2026 तक, सभी उच्च न्यायालयों में 49 eSewa केंद्र क्रियाशील हैं और जिला न्यायालयों में 2,535 eSewa केंद्र स्थापित किए गए हैं।

AI और मशीन लर्निंग के माध्यम से डिजिटल न्याय का संवर्द्धन

फेज़ III (2023–2027) के तहत उच्च न्यायालयों में AI और मशीन लर्निंग लागू करने का अगला कदम है। कुल परियोजना आवंटन 7,210 करोड़ में से 53.57 करोड़ को इस विकास हेतु आरक्षित किया गया है। इन प्रौद्योगिकियों के समाकलन से कानूनी शोध, केस प्रबंधन, ट्रांसक्रिप्शन, अनुवाद और न्यायिक निर्णयसहायता में सुधार होगा।

प्रमुख पहलें जो पायलट परीक्षण के अंतर्गत हैं:

  • AI/ML उपकरण संवैधानिक पीठ मामलों में मौखिक बहसों को ट्रांसक्राइब करते हैं, और ट्रांसक्रिप्ट सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर प्रकाशित होते हैं।
  • LegRAA (Legal Research and Analysis Assistant) न्यायाधीशों के लिए कानूनी शोध और दस्तावेज़ विश्लेषण में मदद करता है।
  • Digital Courts 2.1 न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को एक पेपरलेस प्रारूप में मामलों का प्रबंधन करने के लिए सिंगलविंडो देता है, जिससे सभी मामलेसंबंधी सूचना कार्य हों।
  • इसमें वॉइसटूटेक्स्ट (ASR‑SHRUTI) और अनुवाद (PANINI) उपकरण आदेश/फैसले के डिक्टेशन में सहायक हैं।
  • eSCR पोर्टल के माध्यम से 18 भारतीय भाषाओं में निर्णयों का अनुवाद किया जा रहा है; नेशनल इन्फ़ोर्मेटिक्स सेंटर के साथ मिलकर अब तक 83,000 से अधिक अनुवाद किए जा चुके हैं, जिनमें से 36,344 हिन्दी में (मार्च 2025 तक)
  • IIT मद्रास द्वारा विकसित एक AI टूल स्वचालित रूप से फाइल्ड पिटिशनों में त्रुटियों (defects) को फ्लैग करता है और केस डेटा/मेटाडेटा निकालता है; इसका प्रोटोटाइप 200 एडवोकेटऑनरिकार्ड को दिया गया है और इसे फाइलिंग सिस्टम कोर्ट के केस मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर (ICMIS) में एकीकृत करने का कार्य चल रहा है।

न्यायिक व्यवस्था का नया स्वरूप

eCourts मिशन ने भारत की न्यायपालिका को आधुनिक और डिजिटलीकृत किया है। यह लंबे और थकाऊ प्रक्रियाओं व्यक्तिगत अदालत यात्राओं और कागज़ी कार्यों की जगह एक कहीं अधिक आसान, ट्रैकयोग्य और कुशल प्रणाली ले आया है। नए AI उपकरण विभिन्न हितधारकों को अधिक प्रभावी ढंग से काम करने में मदद कर रहे हैं। इन हस्तक्षेपों के माध्यम से अब कोई भी कहीं से भी न्यायिक सेवाओं तक पहुँच सकता है। न्याय वितरण अब अधिक पारदर्शी, तेज़ और जनहितैषी तरीके से उपलब्ध हो रहा है।

एक अधिक सुलभ, पारदर्शी और कुशल न्यायपालिका

ई न्यायालय (eCourts) मिशन ने पारंपरिक रूप से कागज़आधारित, प्रक्रियात्मक और अपारदर्शी न्यायपालिका को एक अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रौद्योगिकीसक्षम ऑनलाइन प्रणाली में बदल दिया है। नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड ने पहली बार लंबित मामलों को सार्वजनिक रूप से दिखाई जाने योग्य बनाया है। 753 करोड़ से अधिक पृष्ठ पुरालेख डिजिटाइज़ कर खोज योग्य  बनाया गया है।

इन नए उपकरणों और तकनीकों के साथ, न्याय व्यवस्था बढ़ते केसलोड को अधिक कुशलता से संभाल सकती है। जैसेजैसे चरण III 2027 तक आगे बढ़ेगा, यह सभी के लिए, उनकी स्थिति या स्थान की परवाह किए बिना, काम करने वाली न्याय प्रणाली के विजन को और साकार करेगा।

 

संदर्भ:

पत्र सूचना ब्यूरो:

 

विधि और न्याय मंत्रालय और अन्य :

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पीआईबी शोध

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