Infrastructure
भारत में जहाज रीसाइक्लिंग: नियामकीय रूपातंरण और वैश्विक नेतृत्व
Posted On:
11 AUG 2026 1:41PM
|
भारत का जहाज रीसाइक्लिंग सेक्टर आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयोजित उद्योग के रूप में विकसित हुआ है। 2025 में, भारत विश्व का अग्रणी जहाज रीसाइक्लिंग राष्ट्र बन गया। वैश्विक बाजार में इसकी भागीदारी 2024 के 30.1 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 35.4प्रतिशत हो गई। जहाज रीसाइक्लिंग की मात्रा भी 1.86 मिलियन सकल टन से बढ़कर 2.99 मिलियन सकल टन हो गई। यह रीसाइक्लिंग मात्रा में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। अलंग-सोसिया क्लस्टर भारत की रीसाइक्लिंग क्षमता की रीढ़ बना हुआ है। व्यापक कानून, हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय समझौते के साथ संयोजन और यार्ड आधुनिकीकरण ने सुरक्षा, अनुपालन और प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ किया है।
|
उभरता समुद्री औद्योगिक परिदृश्य
एक मजबूत समुद्री इकोसिस्टम जहाज निर्माण और बंदरगाह प्रचालन से आगे तक विस्तारित है। इसके लिए उनकी सेवा के अंत में जहाजों के जिम्मेदार प्रबंधन की भी आवश्यकता होती है। जहाज रीसाइक्लिंग समुद्री जीवनचक्र का एक अभिन्न अंग है। यह जहाजों को उनके परिचालन जीवन के अंत में सुरक्षित, पर्यावरण की दृष्टि से मजबूत और संसाधन-कुशल विनष्टीकरण में सक्षम बनाती है। जब यह एक मजबूत नियामकीय ढांचे के तहत की जाती है, तो यह स्टील और अन्य पुन: प्रयोज्य सामग्रियों की रिकवरी के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था के उद्देश्यों में सहायता करती है। यह श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए पर्यावरण की भी रक्षा करती है।
मजबूत कानून और बढ़ी हुई संस्थागत निगरानी ने पारंपरिक विनष्टीकरण कार्यप्रणालियों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयोजित उद्योग में परिवर्तन के लिए प्रेरित किया है। अनुपालन, स्थिरता और श्रमिक सुरक्षा अब इसके प्रचालन के केंद्र में हैं। इन सुधारों ने भारत की वैश्विक स्थिति को सुदृढ़ किया है। आज, भारत पर्यावरण की दृष्टि से मजबूत जहाज रीसाइक्लिंग के लिए एक अग्रणी गंतव्य के रूप में उभरा है।
जहाज रीसाइक्लिंग क्यों मायने रखती है?
जहाज की रीसाइक्लिंग भारत की संसाधन सुरक्षा, आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
पर्यावरणीय महत्व
- विनियमित जहाज रीसाइक्लिंग जीवन के अंत वाले जहाजों के असुरक्षित निपटान को रोकती है। यह समुद्री और तटीय प्रदूषण के जोखिम को कम करती है।
- उचित रीसाइक्लिंग प्रथाएं सख्त नियामकीय पर्यवेक्षण के तहत खतरनाक सामग्रियों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करती हैं।
संसाधन महत्व
- जहाज रीसाइक्लिंग घरेलू इस्पात उद्योग के लिए लौह स्क्रैप का एक महत्वपूर्ण स्रोत प्रदान करती है। यह आयातित कच्चे माल पर निर्भरता को कम करती है और आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत करती है।
- इस्पात की पुनर्प्राप्ति और पुन: उपयोग कुशल संसाधन उपयोग में सहायता करती है और एक चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देती है।
- पुनर्नवीकृत स्टील को प्राथमिक इस्पात उत्पादन की तुलना में बहुत कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसके परिणामस्वरूप ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन भी कम होता है, जो भारत की स्थिरता और डीकार्बोनाइजेशन उद्देश्यों में सहायता करता है।
आर्थिक और औद्योगिक महत्व
- जहाज रीसाइक्लिंग सेक्टर व्यापक स्तर पर रोजगार सृजित करती है। यह विनष्टीकरण, प्रसंस्करण और सामग्री पुनर्प्राप्ति कार्यकलापों में शामिल श्रमिकों की आजीविका में सहायता करती है।
- यह संबद्ध उद्योगों के एक विस्तृत नेटवर्क को बनाए रखती है। इनमें परिवहन, री-रोलिंग मिल, उपकरण आपूर्तिकर्ता और अपशिष्ट प्रबंधन सेवाएं शामिल हैं।
- रिकवर किया गया स्टील और पुन: प्रयोज्य कम्पोनेंट घरेलू विनिर्माण और औद्योगिक उत्पादन में सहायता करते हैं। यह मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप है।
भारत के जहाज रीसाइक्लिंग सेक्टर में हाल के वर्षों में निरंतर वृद्धि देखी गई है। व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2025 में जहाज रीसाइक्लिंग में विश्व स्तर पर पहले स्थान पर रहा। वैश्विक जहाज रीसाइक्लिंग में भारत की हिस्सेदारी 2024 में 30.1 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 35.4 प्रतिशत हो गई। यह देश के समुद्री और औद्योगिक विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
भारत में जहाज रीसाइक्लिंग की मात्रा भी 2024 में 1.86 मिलियन सकल टन (जीटी) से बढ़कर 2025 में 2.99 मिलियन जीटी हो गई। यह रीसाइक्लिंग वॉल्यूम में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह वृद्धि भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है और वैश्विक बाजार में भारतीय जहाज रीसाइक्लिंग यार्ड की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता को इंगित करती है। मैरीटाइम इंडिया विजन (एमआईवी) 2030 के तहत दुनिया का अग्रणी जहाज रीसाइक्लिंग राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच साल पहले अर्जित कर लिया गया है।
अलंग-सोसिया: भारत के जहाज रीसाइक्लिंग सेक्टर को शक्ति प्रदान करना
गुजरात में अलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग क्लस्टर भारत की रीसाइक्लिंग क्षमता की रीढ़ है। इसे दुनिया के सबसे बड़े जहाज रीसाइक्लिंग हब के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह क्लस्टर भारत की जहाज रीसाइक्लिंग गतिविधि का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा है। इसकी वार्षिक रीसाइक्लिंग क्षमता लगभग 6 मिलियन जीटी है। अलंग में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किए बिना प्रति वर्ष लगभग 3.50 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) इस्पात का उत्पादन किया जाता है। यह अधिकृत जहाज रीसाइक्लिंग यार्ड, डाउनस्ट्रीम स्टील री-रोलिंग मिलों और अपशिष्ट प्रबंधन बुनियादी ढांचे द्वारा समर्थित है। पिछले कुछ वर्षों में, क्लस्टर का व्यापक आधुनिकीकरण हुआ है और यह वैश्विक जहाज रीसाइक्लिंग बाजार के साथ भारत के प्राथमिक इंटरफेस का प्रतिनिधित्व करता है।
भारत का लक्ष्य अपनी जहाज रीसाइक्लिंग क्षमता को लगभग दोगुना करके लगभग 9 मिलियन लाइट डिस्प्लेसमेंट टन (एलडीटी) करना है। यह विस्तार अलंग शिप रीसाइक्लिंग यार्ड के नियोजित विकास के माध्यम से प्राप्त किया जाएगा। भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया गया है। यह योजना बुनियादी ढांचे में सुधार और जहाज रीसाइक्लिंग बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने पर केंद्रित है।
अलंग-सोसिया शिप रीसाइक्लिंग यार्ड में सुरक्षा प्रशिक्षण और श्रम कल्याण संस्थान ने कुल मिलाकर 1.5 लाख से अधिक श्रमिकों को प्रशिक्षित किया है। प्रशिक्षण में व्यावसायिक सुरक्षा, खतरनाक सामग्री प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया शामिल है। इसके अलावा, भारत के पास कोलकाता में अमर लौह उद्योग में और केरल में स्टील इंडस्ट्रियल्स केरल लिमिटेड (सिल्क) में एक और जहाज रीसाइक्लिंग यार्ड है।
अलंग-सोसिया जहाज रीसाइक्लिंग यार्ड
हाल के वर्षों में भारतीय जहाज रीसाइक्लिंग यार्डों का बड़ा उन्नयन किया गया है। वे अब निम्नलिखित सुविधाओं और व्यवस्थाओं के साथ काम करते हैं:
- इंजीनियर्ड और सीमांकित रीसाइक्लिंग भूखंड।
- अभेद्य कामकाजी सतहें और जल निकासी प्रणाली।
- मशीनीकृत सामग्री हैंडलिंग और लिफ्टिंग उपकरण।
- अलग खतरनाक अपशिष्ट भंडारण क्षेत्र।
- अधिकृत डाउनस्ट्रीम अपशिष्ट उपचार और निपटान लिंकेज।
- संरचित सुरक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था।
इन सुधारों ने भारतीय जहाज रीसाइक्लिंग यार्ड की सुरक्षा, पर्यावरण अनुपालन और परिचालन दक्षता को सुदृढ़ किया है।
नियामकीय और अनुपालन ढांचा
भारत ने जहाज रीसाइक्लिंग कार्यकलापों के लिए एक व्यापक वैधानिक और नियामक ढांचा स्थापित किया है। यह ढांचा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और मान्यता प्राप्त वैश्विक सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों के साथ जुड़ा हुआ है। यह पूरे जहाज रीसाइक्लिंग जीवनचक्र को नियंत्रित करता है। इसमें जहाज की तैयारी, प्रमाणन, यार्ड प्राधिकरण, प्रचालन और अनुपालन निगरानी शामिल है।
कानूनी और संस्थागत वास्तुकला
- जहाज रीसाइक्लिंग अधिनियम, 2019: यह अधिनियम भारत में जहाज रीसाइक्लिंग को विनियमित करने के लिए प्राथमिक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। यह अंतरराष्ट्रीय मानकों को घरेलू प्रभाव देता है। यह शिपिंग महानिदेशालय को राष्ट्रीय प्राधिकरण के रूप में भी नामित करता है। अधिनियम प्राधिकरण, प्रमाणन, निरीक्षण और प्रवर्तन तंत्र को अधिदेशित करता है।
- जहाज रीसाइक्लिंग नियमावली, 2021: नियमावली प्रक्रियात्मक और तकनीकी आवश्यकताओं को अनुशंसित कर अधिनियम का संचालन करती है। इनमें सुविधा प्राधिकरण, जहाज रीसाइक्लिंग योजनाएं, खतरनाक सामग्री प्रबंधन, श्रमिक सुरक्षा, प्रशिक्षण और रिपोर्टिंग दायित्व शामिल हैं।
- जहाज रीसाइक्लिंग विनियम, 2026: विनियमन विस्तृत परिचालन, सुरक्षा और पर्यावरण मानकों के माध्यम से कार्यान्वयन को सुदृढ़ करते हैं। वे जहाज रीसाइक्लिंग सुविधाओं में समान अनुपालन और प्रभावी निगरानी का समर्थन करते हैं।
एक साथ मिलकर, अधिनियम, नियम और विनियमन भारत में जहाज रीसाइक्लिंग के लिए एक संरचित और लागू करने योग्य नियामक ढांचा स्थापित करते हैं। यह ढांचा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानकों के साथ घरेलू प्रथाओं को भी संयोजित करता है।
हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (एचकेसी) के साथ संयोजन
जहाजों के सुरक्षित और पर्यावरण की दृष्टि से अनुकूल रीसाइक्लिंग के लिए हांगकांग अंतर्राष्ट्रीय समझौता जहाज रीसाइक्लिंग को नियंत्रित करने वाला प्रमुख अंतरराष्ट्रीय माध्यम है। यह जहाजों और रीसाइक्लिंग सुविधाओं के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी आवश्यकताओं को निर्धारित करता है। यह समझौता 26 जून, 2025 को लागू हुआ। इस तिथि से, अनुपालन अनिवार्य हो गया। भारत ने शिप रीसाइक्लिंग अधिनियम, नियमों और विनियमों के माध्यम से अपने घरेलू ढांचे को संयोजित किया है। जहाज रीसाइक्लिंग यार्ड के आधुनिकीकरण के लिए 53.5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इस समर्थन ने 115 सुविधा केन्द्रों को हांगकांग समझौते के अनुपालन को प्राप्त करने में मदद की है।
अलंग, गुजरात में 35 जहाज रीसाइक्लिंग यार्डों ने यूरोपीय संघ ग्रीन-लिस्टिंग के लिए आवेदन किया है और यूरोपीय संघ की ओर से भारतीय यार्डों की निरीक्षण प्रक्रिया शुरू कर दी है। श्री राम वेसल स्क्रैप और वाई.एस. इन्वेस्टमेंट्स को शिप रीसाइक्लिंग सुविधाओं की 16वीं यूरोपीय सूची के मसौदे में शामिल किया गया है।
आईएचएम के माध्यम से सुरक्षित रीसाइक्लिंग सुनिश्चित करना
खतरनाक सामग्रियों की इन्वेंट्री (आईएचएम) सुरक्षित जहाज रीसाइक्लिंग का एक प्रमुख तत्व है। यह जहाजों पर विद्यमान खतरनाक पदार्थों की पहचान करती है और उन्हें उनके प्रचालनगत जीवन में और रीसाइक्लिंग से पहले रिकॉर्ड करती है। भारत एक जीवनचक्र-आधारित अनुपालन दृष्टिकोण का पालन करता है। यह जहाजों को अधिकृत रीसाइक्लिंग सुविधा केन्द्रों में प्रवेश करने से पहले पारदर्शिता, पता लगाने की क्षमता और प्रभावी जोखिम शमन सुनिश्चित करता है।
शिप-ब्रेकिंग क्रेडिट नोट स्कीम
शिप बिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम (एसबीएफए) 2.0 के तहत शुरू की गई शिप-ब्रेकिंग क्रेडिट नोट स्कीम, जहाज मालिकों को अनुपालन करने वाले भारतीय शिप रीसाइक्लिंग यार्ड में जहाजों को रीसायकल करने के लिए प्रोत्साहित करती है। यह भारतीय शिपयार्ड में नए जहाजों के निर्माण को भी बढ़ावा देती है। यह योजना पुनर्नवीनीकरण जहाज के स्क्रैप मूल्य के 40 प्रतिशत के बराबर क्रेडिट नोट जारी करके जहाज स्क्रैपिंग को प्रोत्साहित करती है। इसका उपयोग भारतीय शिपयार्ड में निर्मित नए जहाज के मूल्य के 5 प्रतिशत तक के भुगतान के लिए किया जा सकता है। यह योजना टिकाऊ जहाज रीसाइक्लिंग और भारत के जहाज निर्माण उद्योग के विकास दोनों में सहायता करती है।
|
एक्स आईएनएस विराट - भारत की जिम्मेदार जहाज रीसाइक्लिंग क्षमताओं का प्रदर्शन

गुजरात के अलंग में एक्स-आईएनएस विराट की रीसाइक्लिंग भारत की सबसे महत्वपूर्ण जहाज रीसाइक्लिंग परियोजनाओं में से एक है। 30 साल तक भारतीय नौसेना और 27 साल तक रॉयल नेवी की सेवा करने के बाद, विमानवाहक पोत को मार्च 2017 में सेवामुक्त कर दिया गया था। यह सितंबर 2020 में रीसाइक्लिंग के लिए अलंग पहुंचा। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा दुनिया के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले युद्धपोतों में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त, पूर्व-आईएनएस विराट दशकों की प्रतिष्ठित नौसेना सेवा का प्रतीक है। इसकी अंतिम यात्रा ने पर्यावरण की दृष्टि से जिम्मेदार जहाज रीसाइक्लिंग में भारत की बढ़ती क्षमताओं को प्रदर्शित किया।
जहाज ने अपनी सेवा के दौरान 22,622 से अधिक उड़ान घंटे दर्ज किए। इसने समुद्र में 2,252 दिन बिताए और 5.88 लाख समुद्री मील (10.94 लाख किलोमीटर) से अधिक की यात्रा की। इतने बड़े और जटिल जहाज की रीसाइक्लिंग मूल्यवान सामग्रियों को सुरक्षित रूप से पुनर्प्राप्त करने की भारत की क्षमता को उजागर करती है। यह देश के विकसित पर्यावरण और व्यवसायगत सुरक्षा मानकों को भी दर्शाता है, जो रोजगार और आर्थिक कार्यकलापों में सहायता करती है।
|
एक उत्तरदायी रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम का सुदृढ़ीकरण
भारत में जहाज रीसाइक्लिंग सेक्टर एक आधुनिक, विनियमित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयोजित उद्योग के रूप में विकसित हुआ है। यह सेक्टर संसाधन सुरक्षा, आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान देता है। निरंतर बुनियादी ढांचे के उन्नयन और सुधारों के माध्यम से, भारत ने अपने जहाज रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम की सुरक्षा और प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ किया है। 2025 में विश्व के अग्रणी जहाज रीसाइक्लिंग राष्ट्र के रूप में भारत का उदय इन प्रयासों की सफलता को दर्शाता है। बाजार हिस्सेदारी और रीसाइक्लिंग की मात्रा में वृद्धि भारतीय जहाज रीसाइक्लिंग यार्ड की बढ़ती क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाती है। यह उपलब्धि मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 के तहत किए गए नीतिगत उपायों की प्रभावशीलता को भी रेखांकित करती है। जैसे-जैसे जहाज रीसाइक्लिंग का विकास जारी है, भारत जहाज रीसाइक्लिंग के लिए एक विश्वसनीय गंतव्य बने रहने के लिए अच्छी स्थिति में है।
पत्तन,पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
https://dgma.gov.in/engineering-wing/ew-ship-recycling-in-india
https://shipmin.gov.in/en/content/nodal-responsibility-entire-shipbuilding-and-ship-repair-industry-vests-ministry-shipping
https://shipmin.gov.in/sites/default/files/Modified%20Guidelines%20for%20implementation%20of%20Shipbuilding%20Financial%20Assistance%20Scheme%20%28SBFAS%29_0.pdf
https://shipmin.gov.in/sites/default/files/Annual%20Report%202024-25%20-%20English.pdf
https://shipmin.gov.in/sites/default/files/Annual%20Report%202025-26%20english.pdf
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2098573®=48&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2280098®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2276739®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1659960&lang=2
रक्षा मंत्रालय
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1483700&lang=2
Click here to see pdf
****
पीआईबी शोध
पीके/केसी/एसकेजे/एमपी
(Explainer ID: 159516)
आगंतुक पटल : 224
Provide suggestions / comments