Social Welfare
नीली अर्थव्यवस्था को नई गति
पीएमएमएसवाई के तहत भारत के मत्स्य क्षेत्र को सशक्त करते छह वर्ष
Posted On:
10 SEP 2026 12:15PM
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) ने भारत के मत्स्य क्षेत्र को सशक्त बनाया है। सरकार ने पीएमएमएसवाई के तहत बजट अनुमान 2026–27 में रिकॉर्ड ₹2,500 करोड़ आवंटित किए, जो इस क्षेत्र के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दोहराता है। मछली उत्पादन 2019-20 में रहे 141.64 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड 197.75 लाख टन पर पहुँच गया। मत्स्य निर्यात 2019–20 में रहे ₹46,663 करोड़ से बढ़कर 2025–26 में ₹73,890 करोड़ हो गया, जो क्षेत्र की मजबूत वृद्धि को दर्शाता है। इस योजना के तहत मत्स्य पालन और जलीय कृषि से संबंधित गतिविधियों में 58 लाख व्यक्तियों के लिए रोजगार के अवसर सृजित हुए। इसने कोल्ड-चेन और विपणन अवसंरचना के लिए ₹2,797 करोड़ मंज़ूर किए, जिससे फसलोत्तर प्रबंधन और बाजार संपर्क मजबूत हुआ। इसके अतिरिक्त, ₹544.86 करोड़ की परियोजनाओं के माध्यम से 2,195 एफएफपीओ को सहायता प्रदान की गई, जिससे सामूहिक सशक्तीकरण को मजबूती मिली।
भारत की नीली अर्थव्यवस्था को मज़बूत करना
भारत का मत्स्य क्षेत्र एक महत्वपूर्ण आर्थिक आधार है, जो विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले और तटीय समुदायों के लगभग तीन करोड़ लोगों की आजीविका का संधारण करता है। एक मान्यता प्राप्त उभरते क्षेत्र के रूप में, इसमें उत्पादन, निर्यात, अवसंरचना और प्रौद्योगिकी अपनाने को बढ़ावा देने वाली नीतियों के कारण निरंतर वृद्धि हुई है। इस क्षमता को और अधिक साकार करने के लिए, सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) शुरू की, जिसका उद्देश्य पूरे क्षेत्र में समावेशी और सतत् विकास को बढ़ावा देना है। 10 सितंबर 2026 को पीएमएमएसवाई के छह वर्ष पूरे होने के साथ, यह भारतीय मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण, स्थिरता और समृद्धि की ओर बदलाव में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में स्थापित हुई है। वर्ष 2020 में इसकी शुरुआत के बाद से ही इस योजना ने सुदृढ़ अवसंरचना का निर्माण किया है, नए अवसरों के द्वार खोले हैं और देशभर के मछुआरों तथा मत्स्य पालकों को निरंतर सहायता प्रदान की है। नीली क्रांति योजना के आधार पर, पीएमएमएसवाई की परिकल्पना मत्स्य क्षेत्र की मूल्य श्रृंखला में मौज़ूद निर्णायक अंतरालों को दूर करने के लिए की गई थी।

सरकार ₹20,750 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ वर्ष 2020–21 से पीएमएमएसवाई कार्यान्वित कर रही है। सरकार ने पीएमएमएसवाई के तहत बजट अनुमान 2026–27 में रिकॉर्ड ₹2,500 करोड़ आवंटित करके अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जिससे मत्स्य अवसंरचना और आजीविकाओं को मजबूती मिली है। इस योजना के तहत मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना में बड़े पैमाने पर निवेश को भी निरंतर समर्थन दिया गया है। 11 अगस्त 2026 तक, 2020–21 से 2025–26 की अवधि के दौरान, मत्स्य पालन विभाग ने ₹21,394.88 करोड़ की मत्स्य पालन और जलीय कृषि परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें ₹9,510.89 करोड़ का केंद्रीय हिस्सा शामिल है। राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर दी गई ये मंजूरियां देशभर में अवसंरचना के विकास और मत्स्य क्षेत्र की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने में सहायता कर रही हैं।
उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाकर, मूल्य श्रृंखला का आधुनिकीकरण करके, आजीविका के अवसर सृजित करके, आय में वृद्धि करके, निर्यात और सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) को बढ़ावा देकर, मछुआरों की सुरक्षा और कल्याण को मजबूत करके तथा मत्स्य प्रबंधन और विनियमन में सुधार करके पीएमएमएसवाई ने भारत के मत्स्य क्षेत्र को रूपांतरित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
सफलता की कहानी: आइस प्लांट से अधिक समृद्धि की ओर
पोरबंदर, गुजरात में श्री प्रवीणभाई बाबूलाल मसानी ने मछली पकड़ने का अपना व्यवसाय खड़ा करने में दो दशक से अधिक समय बिताया है। इस क्षेत्र में व्यापक अनुभव के साथ, वे समझते थे कि नए आइस प्लांट में निवेश करने से उनका व्यवसाय मजबूत हो सकता है। हालांकि, आइस प्लांट स्थापित करने की उच्च लागत उनकी वित्तीय क्षमता से परे थी। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) ने आइस प्लांट स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता के माध्यम से उन्हें यह अवसर प्रदान किया।
वर्ष 2021–22 में, श्री मसानी को पीएमएमएसवाई के तहत सफलतापूर्वक ₹48 लाख की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस सहायता से उन्होंने प्रतिदिन 30 मीट्रिक टन क्षमता वाला आइस प्लांट स्थापित किया, जिससे वे मछली पकड़ने वाली नौकाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाली बर्फ की सिल्लियों का उत्पादन करने में सक्षम हुए। नई सुविधा से मछली पकड़ने वाली नौकाओं को मछली को ताजा रखने और मछली पकड़ने के दौरान खराब होने से बचाने के लिए पर्याप्त मात्रा में बर्फ ले जाने में मदद मिलती है। इससे श्री मसानी का मछली पकड़ने का व्यवसाय मजबूत हुआ है, उनकी आय में सुधार हुआ है और उनके परिवार की आजीविका बेहतर हुई है। उनकी यात्रा दर्शाती है कि पीएमएमएसवाई के तहत लक्षित सहायता किस प्रकार मछुआरों को आवश्यक अवसंरचना में निवेश करने, अपने व्यवसाय को मजबूत करने और मत्स्य क्षेत्र के विकास में योगदान देने में मदद कर सकती है।
पीएमएमएसवाई के माध्यम से भारत के मत्स्य क्षेत्र का रूपांतरण
पीएमएमएसवाई एक ऐसी छत्रक योजना है, जिसमें केंद्रीय क्षेत्र (सीएस) और केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) के घटक शामिल हैं।
केंद्रीय क्षेत्र (सीएस): इसका पूर्ण वित्तपोषण और कार्यान्वयन केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है। केंद्रीय क्षेत्र घटक आनुवंशिक सुधार, नवाचार, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, प्रशिक्षण, जलीय संगरोध, मत्स्य बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, रोग निगरानी और मत्स्य आंकड़ा प्रणालियों को सहायता प्रदान करता है। यह राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) और मत्स्य संस्थानों, मछुआरों की सुरक्षा, एफएफपीओ, सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को भी मजबूत करता है तथा प्रमाणन, अनुरेखणीयता, प्रत्यायन और लेबलिंग को बढ़ावा देता है। प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) केंद्रीय क्षेत्र की एक उप-योजना है। यह पीएमएमएसवाई के व्यापक दायरे के अंतर्गत संचालित होती है। यह योजना पीएमएमएसवाई के व्यापक उद्देश्यों की पूरक और उन्हें सुदृढ़ करने वाली है। इसका विशिष्ट उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र के विकास को मजबूत करना है।
प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई)
प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) पीएमएमएसवाई के तहत लागू की जाने वाली केंद्रीय क्षेत्र की एक उप-योजना है। वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक चार वर्षों के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित इस योजना का अनुमानित वित्तीय परिव्यय ₹6,000 करोड़ है।
यह योजना औपचारिकीकरण को आगे बढ़ाकर, बीमा कवरेज का विस्तार करके, संस्थागत वित्त तक पहुंच को मजबूत करके तथा मत्स्य क्षेत्र की मूल्य श्रृंखला में गुणवत्ता आश्वासन और अनुरेखणीयता को बढ़ावा देकर मत्स्य क्षेत्र के संरचनात्मक रूपांतरण को सुगम बनाती है। इसका उद्देश्य मछुआरों, जलीय कृषि किसानों और संबद्ध हितधारकों के लिए वित्तीय सुदृढ़ता, जोखिम न्यूनीकरण और बाजार एकीकरण को बढ़ाना है, जिससे अधिक संगठित, पारदर्शी और सतत् मत्स्य क्षेत्र को बढ़ावा मिल सके।
केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस): केंद्र सरकार द्वारा आंशिक रूप से वित्तपोषित और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कार्यान्वित। सीएसएस के अंतर्गत गतिविधियों में शामिल हैं:
- मछली उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि: प्रौद्योगिकी के समावेशन और बेहतर मत्स्य पालन पद्धतियों के माध्यम से मछली उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करता है। इसमें अंतर्देशीय मत्स्य पालन, समुद्री मत्स्य पालन, समुद्री कृषि, समुद्री शैवाल की खेती, हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मत्स्य पालन का विकास तथा सजावटी मत्स्य पालन शामिल हैं।
- अवसंरचना और फसलोत्तर प्रबंधन: मछली पकड़ने के बंदरगाहों, मछली उतारने के केंद्रों और फसलोत्तर सुविधाओं के माध्यम से मत्स्य अवसंरचना को मजबूत करता है। यह कोल्ड-चेन अवसंरचना, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने, एकीकृत आधुनिक तटीय मछली पकड़ने वाले गांवों, बाजारों और विपणन अवसंरचना को भी सहायता प्रदान करता है।
- मत्स्य प्रबंधन और विनियामक ढांचा: निगरानी, नियंत्रण और सर्वेक्षण, मछली पकड़ने वाली नौकाओं और मछुआरों के लिए बीमा तथा मत्स्य विस्तार और सहायता सेवाओं को बढ़ावा देता है। यह समुद्र में मछुआरों की सुरक्षा और संरक्षा को भी मजबूत करता है तथा मछुआरों की आजीविका और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करता है।
उत्पादन, अवसंरचना और आजीविकाओं को सुदृढ़ बनाती, पीएमएमएसवाई
पीएमएमएसवाई ने पिछले छह वर्षों के दौरान मछली उत्पादन बढ़ाने, मत्स्य निर्यात को बढ़ावा देने तथा आजीविका और रोजगार के अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
- मछली उत्पादन 2019-20 में 141.64 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड 197.75 लाख टन हो गया।
- इस योजना ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि से संबंधित गतिविधियों में 58 लाख व्यक्तियों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित किए हैं।
- मत्स्य निर्यात 2019-20 में रहे ₹46,663 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹73,890 करोड़ हो गया।

आधुनिक जलीय कृषि और मत्स्य अवसंरचना का विस्तार
- पीएमएमएसवाई के तहत, कुल ₹713.80 करोड़ की लागत से 12 एकीकृत एक्वापार्क को मंजूरी दी गई है।
- पिछले 5 वर्षों (2020-25) के दौरान, समुद्री शैवाल की खेती और उससे संबंधित गतिविधियों के लिए ₹198.17 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
- अंतर्देशीय जलीय कृषि के लिए 52,058 जलाशय पिंजरों और 23,285.06 हेक्टेयर तालाब क्षेत्र को मंजूरी दी गई है। इस योजना ने 12,081 पुनर्चक्रणीय जलीय कृषि प्रणालियों (आरएएस) और 4,205 बायो-फ्लोक इकाइयों को भी सहायता प्रदान की है।
- पीएमएमएसवाई के तहत 2,672 सजावटी मछली पालन और एकीकृत सजावटी मछली इकाइयों को सहायता प्रदान की गई है।
मत्स्य अवसंरचना और मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ बनाना
सरकार पीएमएमएसवाई के तहत मत्स्य अवसंरचना को मजबूत कर रही है, जिसमें मछली पकड़ने के बंदरगाहों, मछली उतारने के केंद्रों, कोल्ड-चेन, परिवहन और विपणन सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों के दौरान, मत्स्य पालन विभाग ने 28 मछली पकड़ने के बंदरगाहों की विकास/आधुनिकीकरण परियोजनाओं, 25 मछली उतारने के केंद्रों की परियोजनाओं और 23 ड्रेजिंग परियोजनाओं के लिए ₹3,741.89 करोड़ की मंजूरी दी है।
इसके अतिरिक्त, कोल्ड-चेन और विपणन अवसंरचना के विकास के लिए ₹2,797 करोड़ की मंजूरी दी गई है। 11 अगस्त 2026 तक, स्वीकृत परियोजनाओं में शामिल हैं:
- 28,489 मछली परिवहन इकाइयाँ
- 1,394 जीवित मछली बिक्री इकाइयाँ, 6,018 मछली कियोस्क, 117 खुदरा मछली बाजार
- 775 कोल्ड स्टोरेज और आइस प्लांट तथा 24 थोक मछली बाजार
इन पहलों के ज़रिए फसलोत्तर प्रबंधन, कोल्ड-चेन, परिवहन और अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच को मजबूत किया जा रहा है।

सामूहिक कार्रवाई, सुदृढ़ता और प्रौद्योगिकी के माध्यम से समुदायों का सशक्तीकरण
पीएमएमएसवाई अवसंरचना विकास, सामुदायिक सशक्तीकरण, जलवायु सुदृढ़ता और प्रौद्योगिकी के अंगीकरण के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र को मजबूत कर रही है।
एफएफपीओ के माध्यम से सामूहिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देना
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) मछुआरों और मत्स्य पालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा उनकी सौदेबाजी की क्षमता बढ़ाने के लिए मछुआरा किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) की स्थापना हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करती है। वित्तीय वर्ष 2021–22 से वित्तीय वर्ष 2025–26 तक, मत्स्य पालन विभाग ने देशभर में 2,195 एफएफपीओ की स्थापना के लिए ₹544.86 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिसमें इन्क्यूबेशन, प्रबंधन लागत और इक्विटी अनुदान के लिए सहायता शामिल है।
जलवायु-सुदृढ़ तटीय समुदायों का निर्माण
पीएमएमएसवाई के तहत, मत्स्य पालन विभाग ने जलवायु सुदृढ़ता को मजबूत करने और तटीय मछुआरा गांवों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 100 तटीय मछुआरा गांवों की पहचान जलवायु-सुदृढ़ तटीय मछुआरा गांवों (सीआरसीएफवी) के रूप में की है। यह पहल पीएमएमएसवाई के केंद्रीय क्षेत्र घटक के अंतर्गत लागू की जा रही है, जिसमें प्रति गांव ₹200 लाख की इकाई लागत है, जिसका पूर्ण वित्तपोषण सरकार द्वारा किया जाता है। इसके अंतर्गत तटीय मछुआरा समुदायों के लिए सुदृढ़ अवसंरचना, आजीविका और फसलोत्तर सुविधाओं हेतु सहायता प्रदान की जाती है।
प्रौद्योगिकी-संचालित जलीय कृषि
यह योजना प्रौद्योगिकी-संचालित जलीय कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देती है, जो भूमि और जल के उपयोग को अनुकूलित करते हुए उत्पादकता में वृद्धि करती हैं। यह पुनर्चक्रणीय जलीय कृषि प्रणालियों (आरएएस) और बायो-फ्लोक प्रौद्योगिकी जैसे उच्च-घनत्व, जल-कुशल मॉडलों को सहायता प्रदान करती है, जिससे उत्पादन, जल की गुणवत्ता, संसाधन दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता में सुधार होता है।
- पुनर्चक्रणीय जलीय कृषि प्रणाली (आरएएस): आरएएस जल को छानकर उसका पुनर्चक्रण करती है, जिससे अपशिष्ट और अशुद्धियां दूर होती हैं तथा कम से कम भूमि और जल के उपयोग के साथ गहन मछली पालन संभव होता है।
- बायो-फ्लोक प्रौद्योगिकी: यह एक सतत् जलीय कृषि पद्धति है, जिसमें लाभकारी सूक्ष्मजीवों का उपयोग करके जल में पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण किया जाता है। ये सूक्ष्मजीव बायो-फ्लोक नामक गुच्छे बनाते हैं, जो प्राकृतिक आहार के रूप में काम करते हैं और जल को स्वच्छ रखने में भी मदद करते हैं। इस पद्धति में जल का बहुत कम या बिल्कुल भी विनिमय नहीं करना पड़ता, जिससे यह न्यूनतम संसाधनों के साथ उच्च-घनत्व वाले मछली पालन के लिए आदर्श बन जाती है। यह पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ उत्पादकता बढ़ाती है, इसलिए जलीय कृषि क्षेत्र में इसे “ग्रीन सूप” या हेटरोट्रॉफिक तालाबों के नाम से भी जाना जाता है।
मत्स्य क्षेत्र का डिजिटल रूपांतरण
उत्पादन प्रणालियों के आधुनिकीकरण के अलावा, पीएमएमएसवाई मत्स्य क्षेत्र के डिजिटल रूपांतरण को भी गति दे रही है। पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत सितंबर 2024 में राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) शुरू किया गया। इसका उद्देश्य मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में डिजिटल शासन और औपचारिकीकरण को आगे बढ़ाना है। एनएफडीपी क्षेत्र को एक औपचारिक रूप देने के लिए कार्य-आधारित डिजिटल पहचान और हितधारकों का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करता है। परिचालन स्तर पर, यह एकल-खिड़की डिजिटल प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जिससे लाभार्थी संस्थागत ऋण, जलीय कृषि बीमा, अनुरेखणीयता (ट्रेसेबिलिटी) तंत्र और प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहनों तक पहुंच प्राप्त कर सकते हैं। यह प्लेटफॉर्म मत्स्य सहकारी समितियों, प्रशिक्षण और क्षमता विकास संबंधी पहलों को भी सहायता प्रदान करता है। 8 सितंबर 2026 तक, एनएफडीपी प्लेटफॉर्म पर 37.01 लाख से अधिक व्यक्तिगत पंजीकरण दर्ज किए गए हैं, जबकि कुल पंजीकरण 37.23 लाख को पार कर गए हैं।
एसडीजी 14: जल के नीचे जीवन में योगदान
पीएमएमएसवाई सतत् और जिम्मेदार मत्स्य पालन तथा जलीय कृषि को बढ़ावा देती है और जलीय संसाधनों के सतत् उपयोग में सहायता करती है। यह योजना बायो-फ्लोक, आरएएस, केज कल्चर और समुद्री कृषि सहित, सतत् मछली उत्पादन विधियों और आधुनिक जलीय कृषि पद्धतियों को भी बढ़ावा देती है। ये पहलें मत्स्य पालन और जलीय कृषि के सतत् प्रबंधन में सहायता करके तथा जलीय संसाधनों के संरक्षण को मजबूत करके एसडीजी 14 (जल के नीचे जीवन) में योगदान देती हैं।
सतत् मत्स्य पालन और नीली अर्थव्यवस्था के विकास की ओर
मत्स्य क्षेत्र भारत की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है तथा आजीविका, खाद्य सुरक्षा, रोजगार और निर्यात में योगदान देता है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) उत्पादन, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी, आजीविका और स्थिरता को मजबूत करके भारत के मत्स्य क्षेत्र के रूपांतरण को गति दे रही है। आधुनिक अवसंरचना, कोल्ड-चेन सुविधाओं, प्रौद्योगिकी-संचालित जलीय कृषि और डिजिटल प्लेटफॉर्म में इसके निवेश से मत्स्य क्षेत्र की मूल्य श्रृंखला मजबूत हो रही है। मछुआरों, मत्स्य पालकों और तटीय समुदायों को निरंतर सहायता प्रदान करने से अधिक आय और बेहतर बाजार पहुंच के अवसर सृजित हो सकते हैं। ये प्रयास जलीय संसाधनों के सतत् उपयोग और संरक्षण को बढ़ावा देकर सतत् विकास लक्ष्य 14 (जल के नीचे जीवन) में भी योगदान देते हैं। निरंतर निवेश के साथ, पीएमएमएसवाई ने एक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और सतत् मत्स्य क्षेत्र की नींव रखी है। भारत अपनी नीली अर्थव्यवस्था के विज़न को आगे बढ़ा रहा है, ऐसे में पीएमएमएसवाई आजीविका बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने, निर्यात को बढ़ावा देने और जलीय संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।
संदर्भ
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पीआईबी बैकग्राउंडर्स
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