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Economy

मेक इन इंडिया के 12 वर्ष

विनिर्माण राष्ट्र की दिशा में भारत की यात्रा

Posted On: 24 SEP 2026 5:31PM

जब मेक इन इंडिया बारह वर्ष की यात्रा पूर्ण कर रहा है, इस पहल ने उद्योगों में उत्पादन, निवेश और क्षमता का विस्तार कर विनिर्माण क्षेत्र के परिदृश्य में भारत का कायाकल्प किया है। इस अवधि के दौरान, इलेक्ट्रॉनिकी, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, स्टील, रेलवे और रक्षा के क्षेत्र में उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। भारत ने कलपुर्जों, मशीनरी, रणनीतिक सामग्री और एडवांस टेक्नोलॉजी के विनिर्माण की क्षमता में भी विकास किया है। एनएसडब्ल्यूएस, पीएलआई, पीएम गतिशक्ति और इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक जैसी पहलों ने निवेश और उत्पादन में सहयोग किया है। नई योजनाएं सेमीकंडक्टर, मोबाइल फोन, औद्योगिक पार्क, विशेष स्टील और रेयर अर्थ मैग्नेट पर केंद्रित हैं, जो कि घरेलू विनिर्माण को सुदृढ़ कर रही हैं।

 

भारत के विनिर्माण के लिए नई दिशा

 

बारह वर्ष पूर्व, 25 सितंबर 2014 को, विनिर्माण, डिजाइन और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनने की आकांक्षा के साथ 'मेक इन इंडिया' का शुभारंभ किया गया था।

 

इस पहल ने निवेश की व्यवस्था करने, नवाचार सुदृढ़ करने और वैश्विक स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण करने पर ध्यान केंद्रित किया। 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम प्रशासन' को आधार बनाकर, इसने प्रक्रियाओं और नीतियों को आधुनिक बनाने का भी प्रयास किया है।

 

बीते वर्षों में, मेक इन इंडिया ने भारत की विनिर्माण यात्रा में प्रतिभाग करने हेतु व्यवसायों और निवेशकों के लिए नए अवसर खोले हैं। इस पहल को मेक इन इंडिया 2.0 के अंतर्गत विस्तारित किया गया। इस पहल का ध्यान अब 27 सेक्टर पर केंद्रित है, जिसमें 15 विनिर्माण और 12 सेवाओं के अंतर्गत आते हैं।

बड़े स्तर पर भारत का विनिर्माण

 

विनिर्माण क्षेत्र ने समय के साथ बड़ी प्रगति दर्ज की है। हालिया संकेतक भी विनिर्माण क्षेत्र में लगातार बढ़ोतरी की ओर इशारा करते हैं।

 

संशोधित राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला के अनुसार, स्थिर कीमतों पर विनिर्माण सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) की 2022-23 और 2025-26 के बीच 10.88% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की गई।

 

औद्योगिक उत्पादन हालिया वृद्धि का एक और संकेत प्रदान करता है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का विनिर्माण हिस्सा अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान 2025 की इसी अवधि की तुलना में 7.0% बढ़ा।

 

प्रमुख विनिर्माण उद्योगों में उत्पादन की बढ़ोतरी

 

उत्पादन और क्षमता में दर्शनीय वृद्धि के साथ, विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार कई उद्योगों में भी स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है।

इलेक्ट्रॉनिकी

  • इलेक्ट्रॉनिकी उत्पादन में लगभग सात गुना की बढ़ोतरी हुई, जो 2014-15 में ~₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ~₹13.11 लाख करोड़ हो गया।
  • इस कुल उत्पादन के अंतर्गत, मोबाइल फोन का उत्पादन इसी अवधि में लगभग 32 गुना बढ़कर ~₹18,900 करोड़ से ~₹6.3 लाख करोड़ हो गया। मात्रा के हिसाब से भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है।
  • कुल मिलाकर इलेक्ट्रॉनिकी उत्पादन में भी 2025-26 में बीते वर्ष के मुकाबले 15.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

 

ऑटोमोबाइल

  • 2024-25 में वाहनों का उत्पादन 31.03 मिलियन यूनिट तक पहुंच गया, जो 2014-15 के मुकाबले लगभग 33% बढ़ा है।
  • वाहनों की कई श्रेणियों में 2024-25 में 2020-21 की तुलना में उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई:
    • यात्री और कमर्शियल, दोनों वाहनों के उत्पादन में 65% की बढ़ोतरी हुई।
    • तिपहिया वाहनों के उत्पादन में 71% की बढ़ोतरी हुई।
    • दुपहिया वाहनों के उत्पादन में 30% की बढ़ोतरी हुई।

फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण

  • भारत का दवा उद्योग वैश्विक स्तर पर मात्रा के आधार पर तीसरे और कीमत के आधार पर 11वें पायदान पर है।
  • वर्ष 2025-26 में वार्षिक कारोबार ₹5,08,630 करोड़ तक पहुंच गया, जो बीते पांच वर्ष में औसतन 9.2% की वृद्धि दर से बढ़ा है। वर्ष 2025-26 के दौरान कुल दवा निर्यात ₹2,62,697 करोड़ रहा।
  • चिकित्सा उपकरणों के घरेलू उत्पादन में ~48.2% की बढ़ोतरी हुई है, जो 2019-20 में ~₹28,000 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹41,500 करोड़ हो गया।

स्टील

  • कच्चे स्टील का उत्पादन 2014-15 में 81.7 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 170.0 मिलियन टन हो गया।

रेलवे

  • भारतीय रेलवे ने 2014-24 के दौरान 54,809 कोच का निर्माण किया। रेलवे कोच का औसतन सालाना उत्पादन 2004-14 के दौरान 3,300 से भी कम से बढ़कर 2014-24 के दौरान 5,481 हो गया।
  • घरेलू उत्पादन में लोकोमोटिव और आधुनिक यात्री कोच भी शामिल हैं। 2025-26 में, भारतीय रेलवे ने 1,674 लोकोमोटिव का उत्पादन किया।
  • 2025-26 में 6,677 लिंके हॉफमैन बुश (एलएचबी) कोच का निर्माण किया गया। हल्के, सुरक्षित और अधिक आराम वाले ये कोच झटके रहित यात्रा हेतु तैयार किए गए हैं।

रक्षा

  • स्वदेशी रक्षा उत्पादन 2014-15 में ₹46,429 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ हो गया। यह ~283% की बढ़ोतरी को दर्शाता है, जिससे उत्पादन 2014-15 के स्तर से लगभग चार गुना हो गया।

 

घरेलू विनिर्माण क्षमता का सुदृढ़ीकरण

 

अंतिम-उत्पाद निर्माण में बढ़ोतरी भारत की विनिर्माण यात्रा का केवल एक हिस्सा है। औद्योगिक मूल्य श्रृंखलाओं में इस्तेमाल होने वाले अवयव, घटक, व्यवस्था और मशीनरी तक की घरेलू क्षमता तेजी से फैल रही है।

एडवांस उत्पाद और रणनीतिक सामग्री

 

एडवांस और जटिल औषधीय उत्पाद

  • भारत अब जटिल और एडवांस औषधीय उत्पादों का निर्माण करता है। इनमें ट्रैस्टुजुमाब एम्टानसिन भी शामिल है, जो स्तन कैंसर के लिए दुनिया का पहला बायोसिमिलर एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट है।
  • भारत डोकाराविमाब-मिरोमाविमाब का भी निर्माण करता है, जो दुनिया का पहला एंटी-रेबीज मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉम्बिनेशन है।
  • मिक्नाफ, बैक्टीरिया वाले निमोनिया के लिए भारत की ओर से बीते तीन दशक में विकसित पहली मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक है।
  • गुर्दे के रोगियों में एनीमिया के इलाज के लिए एक नया रसायन, डेसिडुस्टैट, नवाचारी दवा में विकास में भारत की क्षमता को प्रतिबिंबित करता है।

 

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट

  • मार्च 2026 में हैदराबाद स्थित अंतरराष्ट्रीय उन्नत अनुसंधान केंद्र फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मटेरियल्स (एआरसीआई) में एनडी-एफई-बी (नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन) रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के लिए एक पायलट संयंत्र स्थापित किया गया। ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिकी और एडवांस विनिर्माण प्रौद्योगिकियों के लिए जरूरी हैं।
  • यह सुविधा प्रौद्योगिकी सत्यापन, प्रक्रिया अनुकूलन और उद्योग सहयोग को प्रोत्साहन देगी। साथ ही, यह स्वदेशी नवाचारों को वाणिज्यिक उत्पादन की ओर ले जाने में मदद करेगी और डीप-टेक स्टार्टअप्स और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करेगी।

 

घटक, प्रणालियां और संयोजन

 

अब विनिर्माण क्षमताएं जटिल अंतिम उत्पादों में प्रयुक्त मध्यवर्ती घटकों, एकीकृत प्रणालियों और संरचनात्मक संयोजनों को भी तेजी से कवर कर रही हैं।

 

कवर किए गए सेक्टर

प्रमुख उपलब्धियां

अंतरिक्ष में अनुप्रयोगों के लिए सेमीकंडक्टर

इसरो और एससीएल ने अंतरिक्ष में अनुप्रयोगों के लिए विक्रम3201 और कल्पना3201 माइक्रोप्रोसेसर तैयार किए हैं।

 

विक्रम3201 पहला पूरी तरह भारत में निर्मित माइक्रोप्रोसेसर है, जो लॉन्च व्हीकल की कठोर परिस्थितियों के लिए प्रमाणित है और इसका निर्माण एससीएल फैसिलिटी में किया गया है।

 

कल्पना3201 एक ऐसा माइक्रोप्रोसेसर है जिसे ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर टूल्स के साथ काम करने के लिए तैयार किया गया है और इसका परीक्षण फ्लाइट सॉफ्टवेयर के साथ किया गया है।

सोलर सेल और मॉड्यूल

मॉड्यूल निर्माण क्षमता 2014 में 2.3 गीगावॉट से बढ़कर जून 2026 तक 192 गीगावॉट हो गई।

 

सौर सेल क्षमता 2014 में 1.2 गीगावॉट से बढ़कर जून 2026 तक ~30 गीगावॉट हो गई।

इलेक्ट्रिक-वाहन प्रौद्योगिकी

मोटर और इन्वर्टर को मिलाकर तैयार की गई एक स्वदेशी 30 किलोवॉट ड्राइव प्रणाली को मार्च 2026 में लॉन्च किया गया था। इसे डिजाइन, निर्मित और मान्य किया जा चुका है और यह व्यावसायीकरण के लिए पूरी तरह तैयार है।

एयरक्राफ्ट विनिर्माण

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने अक्टूबर 2025 में अपने तीसरे हल्के कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस एमके1ए के लिए उत्पादन एसेंबली लाइन का शुभारंभ किया, जिससे सालाना उत्पादन क्षमता बढ़कर 24 विमान हो गई।

 

इसके साथ ही, कंपनी ने एचटीटी-40 ट्रेनर विमान की दूसरी उत्पादन लाइन का भी उद्घाटन किया, जिसमें हवाई जहाज का ढांचा, पंख और नियंत्रण सतहों जैसी प्रमुख संरचनाओं का निर्माण शामिल है।

रेलवे के कलपुर्जे

2025-26 में, रेल व्हील फैक्ट्री ने 2,10,026 पहिए, 1,22,000 धुरियां और 1,20,100 व्हीलसेट का उत्पादन किया। बीते वर्ष के मुकाबले इनमें क्रमशः 4%, 30% और 22% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

नाभिकीय कलपुर्जे

सितंबर 2025 में, न्यूक्लियर फ्यूल कॉम्प्लेक्स (एनएफसी) ने आगामी 700 मेगावॉट के भारतीय परमाणु रिएक्टरों के लिए स्टीम-जनरेटर ट्यूबों का अपना आठवां सेट भेजा। इन ट्यूबों का निर्माण, परीक्षण और निरीक्षण भारत में ही किया गया था।

 

पूंजीगत वस्तुएं: विनिर्माण के पीछे की मशीनरी

 

घरेलू विनिर्माण क्षमता में वस्तुओं के उत्पादन, प्रसंस्करण और संयोजन में प्रयुक्त मशीनरी भी शामिल है। भारी इंजीनियरिंग उपकरण और विभिन्न पूंजीगत वस्तु उप-क्षेत्रों में उत्पादन 2019-20 में ₹2,87,233 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹5,69,900 करोड़ हो गया। यह इस अवधि में लगभग दोगुना बढ़ोतरी है।

 

विभिन्न पूंजीगत वस्तु क्षेत्रों और भारी इंजीनियरिंग उपकरणों का उत्पादन (मूल्य ₹ करोड़ में)

श्रेणी

2019-20

2024-25

% बढ़ोतरी

मिट्टी हटाने और खनन के लिए मशीनरी

31,028

80,750

160.30%

प्रिंटिंग मशीनरी

12,678

29,716

134.40%

मशीन उपकरण

6,152

14,286

132.20%

प्लास्टिक-प्रोसेसिंग मशीनरी

2,350

4,827

105.40%

भारी विद्युत अभियांत्रिकी उपकरण

1,79,199

3,64,706

103.50%

खाद्य प्रसंस्करण मशीनरी

7,547

15,249

102.10%

वस्त्र मशीनरी

5,355

10,461

95.40%

डाई, मोल्ड और प्रेस उपकरण

13,682

18,400

34.50%

प्रसंस्करण संयंत्र उपकरण

29,250

31,505

7.70%

स्रोत: भारी उद्योग मंत्रालय

 

मेक इन इंडिया के अंतर्गत सुधारों की यात्रा

 

मेक इन इंडिया की सुधार यात्रा में घरेलू उत्पादन को सहयोग देने के साथ-साथ निवेश और व्यावसायिक प्रक्रियाओं को आसान बनाना शामिल है। हाल में अपनाई गई पहलें इन्हीं तरीकों को आगे बढ़ाती हैं, जिनमें घटकों, रणनीतिक सामग्रियों और विशिष्ट प्रौद्योगिकियों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

 

मेक इन इंडिया के अंतर्गत प्रमुख पहल

 

  • भारत की निवेशक-अनुकूल नीति कुछ रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में स्वचालित मार्ग से 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति देती है। 2014-15 से 2025-26 के दौरान कुल एफडीआई 843 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो बीते बारह वर्षों की अवधि में 169% की बढ़ोतरी को दर्शाता है।
  • राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (एनएसडब्ल्यूएस) कारोबार को जरूरी स्वीकृतियों की पहचान करने और एक साझा डिजिटल मंच के माध्यम से आवेदन करने में मदद करती है। वर्तमान में यह 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 327 से अधिक केंद्रीय स्वीकृतियों और 3452 राज्य स्वीकृतियों तक पहुंच प्रदान करती है।
    • 21 सितंबर 2026 तक, यह मंच औसतन 3.06 लाख से अधिक आवेदनों को सालाना संभालता है। इसने 5.69 लाख से अधिक व्यावसायिक संस्थाओं को भी अपने साथ जोड़ा है, जिनमें प्रोप्राइटरशिप, कंपनियां, एलएलपी और विदेशी संस्थाएं शामिल हैं।
  • इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक (आईआईएलबी) एक केंद्रीकृत जीआईएस-योग्यता वाला प्लेटफॉर्म है, जो पूरे भारत में औद्योगिक भूमि पर नवीनतम स्थानिक और गैर-स्थानिक जानकारी प्रदान करता है। मई 2026 तक, प्लेटफॉर्म ने ~6.98 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए 4,220 औद्योगिक पार्कों का मानचित्रण किया था।
  • अक्टूबर 2021 में शुरू की गई पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, केंद्रीय मंत्रालयों/ विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना बनाने और समन्वित कार्यान्वयन को सक्षम बनाती है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर सूचित निर्णय लेने में सहायता के लिए भू-स्थानिक डेटा, सैटेलाइट इमेजरी और एपीआई एकीकरण का इस्तेमाल करती है।
    • इस फ्रेमवर्क के अंतर्गत, नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी) योजना चरण में प्रमुख केंद्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का मूल्यांकन करता है। यह समन्वय, परिवहन के विभिन्न साधनों में कनेक्टिविटी, अंतिम-बिंदु तक संपर्क और परियोजना स्थलों के आस-पास की प्रगति पर ध्यान केंद्रित करता है।
    • 11 अगस्त 2026 तक, एनपीजी ने ~₹18.66 लाख करोड़ की 396 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया। इनमें से 256 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से 198 कार्यान्वयन में हैं।

 

  • उत्पादन संबंधी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) इलेक्ट्रॉनिकी, फार्मास्यूटिकल, ऑटोमोबाइल, सोलर पीवी मॉड्यूल, विशेष इस्पात और वस्त्र सहित 14 क्षेत्रों में उत्पादन और बिक्री में बढ़ोतरी को प्रोत्साहित करती है।
  • जून 2026 तक, इन योजनाओं ने ₹2.6 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित किया और ₹23.8 लाख करोड़ का उत्पादन और बिक्री की। इन्होंने ₹15.5 लाख करोड़ से अधिक के निर्यात को भी प्रोत्साहन दिया और 14.6 लाख रोजगार निर्मित किए।
  • जनवरी 2016 में शुरू की गई स्टार्टअप इंडिया पहल का उद्देश्य भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में नवाचार को प्रोत्साहन देना, स्टार्टअप्स को सहयोग देना और निवेश को प्रोत्साहित करना है। सितंबर 2026 तक, इस पहल के तहत ~2.54 लाख संस्थाओं को स्टार्टअप के रूप में मान्यता दी जा चुकी है।

 

हालिया पहलों के माध्यम से विनिर्माण का सुदृढ़ीकरण

 

योजना का नाम

मुख्य विशेषताएं

विशेष इस्पात के लिए उत्पादन संबंधी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई 1.2)

(तीसरा चरण नवंबर 2025 में शुरू हुआ)

तीसरे दौर में एडवांस और उभरती स्टील श्रेणियों को शामिल किया गया है। इसमें सुपर मिश्रधातु, सीआरजीओ इस्पात, स्टेनलेस स्टील के लंबे और सपाट उत्पाद, टाइटेनियम मिश्रधातु और कोटेड स्टील शामिल हैं।

सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए योजना

(दिसंबर 2025 में अधिसूचित)

सिंटर्ड एनडीएफईबी-प्रकार के रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के लिए 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की एकीकृत विनिर्माण क्षमता स्थापित करने के लिए ₹7,280 करोड़ आवंटित किए गए।

भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य)

(मार्च 2026 में स्वीकृत)

एकीकृत औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर से युक्त 100 निवेश-योग्य, विश्व स्तरीय औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए ₹33,660 करोड़ आवंटित किए गए।

मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस)

(जुलाई 2026 में स्वीकृत)

वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक मोबाइल फोन उत्पादन बढ़ाने और घरेलू मूल्यवर्धन बढ़ाने के लिए ₹62,500 करोड़ आवंटित किए गए। इसका उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को मजबूत करना और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना भी है।

सेमीकॉन 2.0

(जुलाई 2026 में स्वीकृत)

भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को लगातार दीर्घकालिक सहयोग प्रदान करने के लिए ₹1,27,500 करोड़ आवंटित किए गए। यह सहयोग डिजाइन, विनिर्माण, एडवांस पैकेजिंग, सामग्री, उपकरण, अनुसंधान और प्रतिभा विकास को कवर करता है।

भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन)

(24 जुलाई 2026 को स्वीकृत)

भारत में तीन विशेष रासायनिक पार्कों की स्थापना को सुगम बनाने के लिए ₹3,030 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

 

निष्कर्ष

 

'मेक इन इंडिया' पहल के बारह वर्ष पूरे होने पर, यह भारत को विनिर्माण और निवेश के लिए एक प्रमुख गंतव्य के तौर पर और अधिक सशक्त बना रही है।

 

यह पहल अब केवल अधिक वस्तुओं के उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में ही वस्तुओं के निर्माण के लिए आवश्यक कौशल, प्रौद्योगिकी और क्षमता के विकास पर केंद्रित है। जैसे-जैसे ये आधारभूत संरचनाएं मजबूत होती जाएंगी, भारतीय विनिर्माण क्षेत्र घरेलू स्तर पर अधिक मूल्य सृजित करने और वैश्विक बाजारों में आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार होगा।

 

संदर्भ:

 

मंत्रिमंडल:

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2288863&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2284789&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2284784&reg=48&lang=2

रक्षा मंत्रालय:

https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2180339&reg=48&lang=2

 

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय:

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2246085&reg=48&lang=2

https://www.makeinindia.com/about

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2101785&reg=48&lang=2

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https://www.nsws.gov.in/portal/approvalsandregistrations

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2271031&lang=2&reg=48

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https://www.startupindia.gov.in

 

इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय:

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2291171&lang=2&reg=48

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2234574&lang=2&reg=3

 

भारी उद्योग मंत्रालय:

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2224549&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2199441&lang=1&reg=3

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इस्पात मंत्रालय:

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2186218&reg=48&lang=2

 

रेल मंत्रालय:

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2118452&reg=48&lang=2

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https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2282449&lang=1&reg=20

 

 

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय:

https://pharma-dept.gov.in/sites/default/files/Annual%20Report%202025-26.pdf

 

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय:

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2298236&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2304222&lang=2&reg=48

 

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय:

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2243033&lang=1&reg=3

 

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय:

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2116602&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2250039&lang=1&reg=3

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2271289&lang=1&reg=3

 

परमाणु ऊर्जा विभाग:

https://www.nfc.gov.in/news-and-events.html

 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो):

https://www.isro.gov.in/vikram3201.html

 

पीआईबी अभिलेखागार:

https://www.pib.gov.in/FactsheetDetails.aspx?Id=150923&lang=1&reg=20

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2286949&lang=1&reg=48

https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?ModuleId=3&NoteId=158442&lang=9&reg=1

https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?ModuleId=3&NoteId=154717&lang=1&reg=20https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?ModuleId=3&NoteId=156676&lang=2&reg=3

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2270740&lang=1&reg=3

https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=160099&ModuleId=3&reg=48&lang=1

 

 

पीआईबी शोध

मेक इन इंडिया के 12 वर्ष

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