वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय

ग्‍लोबल इनोवेशन इंडेक्‍स (जीआईआई) का कल नई दिल्‍ली में शुभारंभ

प्रविष्टि तिथि: 23 JUL 2019 3:55PM by PIB Delhi

केन्‍द्रीय वाणिज्‍य, उद्योग और रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल कल नई दिल्‍ली में ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (जीआईआई) का शुभारंभ करेंगे। ऐसा पहली बार हो रहा है कि यह इंडेक्‍स उभरती हुई अर्थव्‍यवस्‍था में शुरू किया जा रहा है। वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय का उद्योग और आंतरिक व्‍यापार संवर्धन विभाग, विश्‍व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्‍ल्‍यूआईपीओ) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) इस आयोजन की सह-मेजबानी कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान नवाचार भारत सरकार की आर्थिक नीति का केन्‍द्र बन गया है। यह अब जीआईआई में भारत के बढ़ते हुए प्रदर्शन का मुख्‍य बिन्‍दु बन गया है। पिछले चार वर्षों में भारत ने जीआईआई में 24 पायदान की छलांग लगाई है। यह ग्‍लोबल इनोवेशन इंडेक्‍स में वर्ष 2018 में 57वें पायदान पर है, जबकि 2015 में यह 81वें पायदान पर था। भारत के प्रयास इस बात को दर्शातें हैं कि नीतिगत प्रयास किस प्रकार नवाचार को बढ़ावा दे सकते हैं। भारत को मध्‍य और दक्षिणी एशिया क्षेत्र में 2011 से ही सबसे नवाचारी देश का दर्जा हासिल है। यह लगातार सकल घरेलू उत्‍पाद प्रति व्‍यक्ति में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

भारत अपने वैज्ञानिक प्रकाशनों, विश्‍वविद्यालयों और पेटेंट परिवारों में नवाचार की गुणवत्‍ता के आधार पर विश्‍व में दूसरी मध्‍यम आय वाली अर्थव्‍यवस्‍था में शामिल है। भारत विश्‍व में नवाचार मानदंडों के क्षेत्र में शीर्ष स्‍थान पर कायम है। यह विश्‍व के शीर्ष वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी क्‍लस्‍टरों में जीआईआई रैंकिंग में भी शीर्ष पर है। बैंगलुरु, मुंबई और नई दिल्‍ली विश्‍व के शीर्ष 100 क्‍लस्‍टरों में शामिल हैं। 2016 में औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग ने जीआईआई मैट्रिक्‍स के आधार पर भारत की नवाचार प्रणाली में सुधार लाने के लिए एक उच्‍चस्‍तरीय कार्यबल बनाया था। 2017 में पहला अंतर्राष्‍ट्रीय परामर्श अभ्‍यास आयोजित किया गया था। नीतिगत स्‍तर पर भारत का मेक इन इंडिया, स्‍टार्ट-अप इंडिया, नवाचार भारत और डिजिटल इंडिया पहल भारत के नवाचार प्रदर्शन को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में शुरू किए गए थे। डीपीआईआईटी ने व्‍यापक राष्‍ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति (आईपीआर) 2016 में तैयार की थी, जो न केवल विभिन्‍न क्षेत्रो में नवाचार और रचनात्‍मकता को बढ़ावा देती है, बल्कि आईपीआर मुद्दों के संबंध में भी एक स्‍पष्‍ट दृष्टिकोण उपलब्‍ध कराती है। डीपीआईआईटी ने उद्योग संघों की भागीदारी में विभिन्‍न राज्‍यों, स्‍कूलों, विश्‍वविद्यालयों और उद्योगोंमें आईपीआर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। डीपीआईआईटी ने फिक्‍की के साथ मिलकर पुलिस के लिए तैयार किए गए टूल किट से जालसाजी और पायरेसी में आईपी अपराधों से निपटने में मदद मिली है। आईपी परास्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने में और विवादों को सुलझाने में न्‍यायपालिका महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है। डीपीआईआईटी ने जजों के लिए अनेक संवेदनशील कार्यक्रम आयोजित किए। डीपीआईआईटी ने मौजूदा 130 पेटेंट परीक्षकों के अलावा 458 नये तकनीकी रूप से सक्षम पेटेंट परीक्षकों की प्रौद्योगिकी के विभिन्‍न क्षेत्रों में भर्ती की है। ट्रेडमार्क कार्यालयों में कर्मचारियों की संख्‍या बढ़ाई गई है। पेटेंट और ट्रेडमार्क नियमों में संशोधन किया गया है, इसे सरल बनाया गया है और सुव्‍यवस्थित किया गया है, ताकि प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके और बकाया पेटेंट आवेदनों की संख्‍या में कमी लाई जा सके।      

 

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आर.के.मीणा/आरएनएम/एएम/आईपीएस/वाईबी

 


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