उप राष्ट्रपति सचिवालय
असमानता सबसे बड़ा खतरा: उपराष्ट्रपति
तीन दिवसीय सम्मेखलन ‘हडल’ के पहले संस्करण को संबोधित किया
प्रविष्टि तिथि:
11 FEB 2017 4:47PM by PIB Delhi
उपराष्ट्रपति श्री एम. हामिद अंसारी ने कहा है कि असमानता सबसे बड़ा खतरा है क्योंकि यह लोकलुभावनवाद में बढ़ोतरी से जुड़ा है तथा देशों के सामंजस्य को खतरे में डालता है। वह आज यहां द हिन्दु समाचार पत्र द्वारा आयोजित एक तीन दिवसीय सम्मेलन ‘हडल’ के पहले संस्करण के दौरान उद्घाटन भाषण दे रहे थे। इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल श्री वजुभाई वाला एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
उपराष्ट्रपति महोदय ने कहा कि कुछ चीजों की ‘आजादी’ का आनंद उठाने के लिए आवश्यक है कि कुछ चीजों से आजादी प्राप्त की जाए। उन्होंने कहा कि गौरव के साथ जीने के लिए मनुष्यों को ‘इच्छा से आजादी’ तथा ‘दर्द से आजादी’ की जरूरत है।
उपराष्ट्रपति महोदय ने कहा कि खंडों में बेहतर जीवन स्तर ने शायद पिछले 30 वर्षों के दौरान आय एवं संपत्ति के नाटकीय संग्रहण पर एक आवरण डाल दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के सबसे धनी 1 प्रतिशत लोगों के पास देश की कुल संपत्ति का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा है जबकि शीर्ष 20 प्रतिशत के पास 80 प्रतिशत हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत 50 प्रतिशत गरीब भारतीयों के पास सामूहिक रूप से राष्ट्रीय संपत्ति का केवल 2 प्रतिशत हिस्सा है।
उपराष्ट्रपति महोदय ने कहा कि बढ़ती असमानता सामाजिक एवं राष्ट्रीय दोनों ही स्तरों पर संघर्ष के बढ़ते खतरे को जन्म दे सकती है, और वाम उग्रवाद, जिसे बार-बार देश के लिए सबसे गंभीर सुरक्षा खतरे के रूप में स्वीकार किया गया है, की जड़ें आर्थिक अभाव एवं संसाधनों तक पहुंच में असमानता में निहित है। उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि परिणामों और अवसरों पर वर्तमान बहसों से आगे चलकर असमानता के विकास संभाषणों की तरफ कदम बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि न्याय और निष्पक्षता की अवधारणाएं विकास में समानता के विचार से बंधी हुई है।
उपराष्ट्रपति महोदय ने कहा कि भारत के सुनहरे भविष्य की गाथा में बढ़ती असमानता को केवल एक असहज सच्चाई के रूप में देखना गलत होगा और बिना समानता के कोई भविष्य ही नहीं हो सकता, सुनहरे भविष्य की बात तो दूर रही। निष्कर्ष के रूप में, उपराष्ट्रपति महोदय ने असमानता, निचले तबके की तरफ प्रगति का लाभ पहुंचने की अवधारणा की विफलता, पर्यावरण नुकसान, संघर्ष, असहिष्णुता और सार्वजनिक वस्तुओं में निवेश में बढ़ोतरी को लेकर कुछ असहज सवाल उठाए।
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वीके/एसकेजे/एनआर-377
(रिलीज़ आईडी: 1482508)
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