राष्ट्रपति सचिवालय
राष्ट्रपति ने ‘सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय’,’अनुसंधान’, ‘नवाचार’ के लिए आगंतुक पुरस्कार प्रदान किए
प्रविष्टि तिथि:
06 MAR 2017 12:47PM by PIB Delhi
राष्ट्रपति भवन में आयोजित नवाचार उत्सव के तीसरे दिन आज (6 मार्च, 2017) आयोजित समारोह में राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा वर्ष 2017 के लिए आगंतुक पुरस्कार प्रदान करने के साथ ही यह उत्सव संपन्न हो गया।
राष्ट्रपति ने ‘सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय’ का आगंतुक पुरस्कार नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को प्रदान किया। ‘नवाचार’ के लिए यह पुरस्कार प्लास्टिक के कचरे से कम पैमाने पर सीधे एलपीजी तैयार करने का रियेक्टर विकसित करने के लिए हिमाचल प्रदेश के केंद्रीय विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ अर्थ एंड एनवायरमेंट साइंसेज, पर्यावरण विभाग के डॉ. दीपक पंत को प्रदान किया गया। ‘अनुसंधान’ के लिए आगंतुक पुरस्कार संयुक्त रूप से बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान, चिकित्सा विभाग के डॉ. श्याम सुन्दर और तेजपुर विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. निरंजन करक को प्रदान किया गया। डॉ. श्याम सुन्दर को भारतीय कालाजार की जांच और इलाज के क्षेत्र में योगदान के लिए और प्रो. निरंजन करक को स्व-सफाई, स्व-चिकित्सा और जैव संगत स्मार्ट टिकाऊ सामग्री के रूप में जैव अवक्रमणीय हाइपर ब्रांच पोलिमर नैनो कम्पोजिट्स पर आधारित नवीकरणीय संसाधन विकसित करने के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
प्रत्येक श्रेणी के विजेताओं का चयन करने के लिए सभी विश्वविद्यालयों से ऑन लाइन आवेदन आमंत्रित किये गये थे। राष्ट्रपति सचिवालय में सचिव श्रीमती ओमिता पॉल की अध्यक्षता में गठित चयन समिति ने आवेदनों की जांच कर पुरस्कारों के लिए विजेताओं का चयन किया। इस समिति में उच्च शिक्षा विभाग तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष, राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन के उपाध्यक्ष तथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के महानिदेशक शामिल थे।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि अनुसंधान गतिविधियां हमारे देश की विकास संबंधी चुनौतियों के अनुरूप होनी चाहिए। हमारे देश के विश्वविद्यालयों के प्रतिभावान लोगों को स्वच्छता, शहरी परिवहन, अपशिष्ट निपटान, स्वच्छ नदी प्रणाली, स्वास्थ्य देखभाल और सूखा रोधी खेती जैसे क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करना चाहिए। उन्हें अपने ज्ञान का इस्तेमाल नवाचार के उत्पाद तैयार करने के लिए करना चाहिए, ताकि इसका सीधा लाभ आम जनता को हो।
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वीके/एमके/वाईबी-627
(रिलीज़ आईडी: 1483718)
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