जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय

देश के 91 प्रमुख जलाशयों के जलस्तर में दो प्रतिशत की कमी आई

प्रविष्टि तिथि: 10 MAR 2017 6:05PM by PIB Delhi

 09 मार्च, 2017 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 60.906 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 39 प्रतिशत है। 02 मार्च, 2017 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान यह 41 प्रतिशत था। 9 मार्च, 2017 को यह स्तर पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 132 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 101 प्रतिशत है।

 

इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम हैजो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं।

 

क्षेत्रवार संग्रहण स्थिति

 

उत्तरी क्षेत्र

उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेशपंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैंजो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 4.70 बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 26 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 28 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 34 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है। 

 

पूर्वी क्षेत्र

पूर्वी क्षेत्र में झारखंडओडिशापश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्धक संग्रहण 11.51 बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 61 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 44 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 49  प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

 

पश्चिमी क्षेत्र

पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 13.61 बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 50 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 26 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 47 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

 

मध्य क्षेत्र

मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेशउत्तराखंडमध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 21.72 बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 51 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 36 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 36 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

 

दक्षिणी क्षेत्र

दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश (एपी)तेलंगाना (टीजी)एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं)कर्नाटककेरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 9.37 बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 20 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 20 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 33 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से कम है और  यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से कम है।

 

पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें पंजाबराजस्थानझारखंडओडिशापश्चिम बंगालगुजरातमहाराष्ट्रउत्तर प्रदेश,  मध्य प्रदेशउत्तराखंड, छत्तीसगढ़एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं) और तेलंगाना शामिल हैं। इसी अवधि के लिए पिछले साल की तुलना में कम भंडारण होने वाले राज्य हैं - हिमाचल प्रदेशत्रिपुराआंध्र प्रदेशकर्नाटक, केरल और तमिलनाडु।

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वीके/केजे/वाईबी 676


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