वित्त मंत्रालय
वित्त वर्ष 2017-18 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.2 प्रतिशत तय किया गया है और वर्ष 2018-19 में इसे जीडीपी के 3 प्रतिशत पर सीमित रखने के लिए वर्ष 2017-18 में कुल व्यय 21.47 लाख करोड़ रुपये रखा गया है
राज्यों और विधानसभा वाले केन्द्र शासित प्रदेशों को वर्ष 2016-17 के 3.60 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले वर्ष 2017-18 में 4.11 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं
पेंशन को छोड़ रक्षा व्यय के लिए 2,74,114 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है, जिसमें रक्षा संबंधी पूंजी के लिए 86,4
उच्च गुणवत्ता वाले व्यय के साथ-साथ विमुद्रीकरण के परिणामस्वरूप बड़ी मात्रा में नकदी जमा किए जाने से अधिक कर राशि की प्राप्ति पर अब ज्यादा ध्यान केन्द्रित
प्रविष्टि तिथि:
01 FEB 2017 1:52PM by PIB Delhi
केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली ने आज संसद में आम बजट 2017-18 पेश करते हुए कहा कि वर्ष 2017-18 के बजट में कुल व्यय 21.47 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। व्यय के योजनागत और गैर-योजनागत वर्गीकरण को समाप्त कर दिए जाने के बाद अब राजस्व एवं पूंजीगत व्यय पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। अगले तीन वर्षों के लिए राजकोषीय घाटे के रोडमैप के साथ-साथ निजी क्षेत्र के सुस्त निवेश और वैश्विक विकास की धीमी रफ्तार को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री श्री जेटली ने वित्त वर्ष 2017-18 के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 3.2 प्रतिशत तय किया है तथा इसके बाद के वर्ष अर्थात 2018-19 के लिए इसे और भी कम करके जीडीपी के 3 प्रतिशत पर सीमित रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली ने यह भी कहा कि सार्वजनिक निवेश की आवश्यकताओं से कोई भी समझौता किए बगैर राजकोषीय मजबूती के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पिछले वर्ष की तुलना में पूंजीगत व्यय के लिए आवंटन में 25.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। आज संसद में वर्ष 2017-18 के लिए अपना चौथा बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने कहा कि वर्ष 2017-18 में राज्यों और विधानसभा वाले केन्द्र शासित प्रदेशों को कुल मिलाकर 4.11 लाख करोड़ रुपये के संसाधन अंतरित किए जा रहे हैं, जबकि वर्ष 2016-17 के बजट अनुमान में यह राशि 3.60 लाख करोड़ रुपये थी।
श्री जेटली ने कहा कि विभिन्न बजट घोषणाओं के साथ-साथ वर्ष 2017-18 की अन्य नई योजनाओं पर अमल के लिए आर्थिक मामलों के विभाग के अधीन 3,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पेंशन को छोड़ रक्षा व्यय के लिए उन्होंने 2,74,114 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है, जिसमें रक्षा पूंजी के लिए 86,488 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। वित्त मंत्री ने वैज्ञानिक मंत्रालयों के लिए आवंटन को वर्ष 2017-18 में बढ़ाकर 37.435 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचा दिया है।
अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने कहा कि उन्होंने वापस खरीद (बायबैक) के बाद सरकार की शुद्ध बाजार उधारी को 3.48 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर सीमित रखने का पूरा ध्यान रखा है, जो पिछले साल के 4.25 लाख करोड़ रुपये से बहुत कम है। यही नहीं, वर्ष 2016-17 के बजट अनुमान में उल्लिखित 2.3 प्रतिशत के राजस्व घाटे को संशोधित अनुमानों में कम करके 2.1 प्रतिशत के स्तर पर ला दिया गया है। अगले वर्ष के लिए राजस्व घाटे को 1.9 प्रतिशत के स्तर पर निर्धारित किया गया है, जबकि एफआरबीएम अधिनियम में इसे 2 प्रतिशत पर रखा गया है। श्री जेटली ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले व्यय के साथ-साथ विमुद्रीकरण के परिणामस्वरूप बैंकों में बड़ी मात्रा में नकदी जमा किए जाने से अधिक कर राशि की प्राप्ति पर अब ज्यादा ध्यान केन्द्रित करते हुए सरकार अगले वर्ष के दौरान राजकोषीय स्थिति से जुड़े डेटा, विशेषकर राजकोषीय घाटे के आंकड़े को और भी बेहतर करेगी।
***
वि.लक्ष्मी/अमित/सुविधा/जितेन्द्र/मनीषा/राजीवरंजन/प्रवीन/इन्द्रपाल/सुनील/राजीव/सागर/महेश/हरेन्द्र/गीता/लोकेश-23
(रिलीज़ आईडी: 1485364)
आगंतुक पटल : 37