
वस्तु एवं सेवा कर – एक अवलोकन
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केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड
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वस्तु एवं सेवा कर (जीएटी)
लाभ:
1. जीएसटी समस्त देश के लिए लाभप्रद है। इससे सभी हितधारक यथा उद्योग जगत, सरकार एवं उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। इससे वस्तुओं एवं सेवाओं की लागत घट जायेगी, आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी और उत्पाद एवं सेवाएं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो जायेंगी। जीएसटी का लक्ष्य समान कर दरों एवं प्रक्रियाओं के साथ भारत को ‘एक समान बाजार’ में तब्दील करना और आर्थिक बाधाओं को हटाना है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत अर्थव्यवस्था का मार्ग प्रशस्त होगा। ज्यादातर केन्द्रीय एवं राज्य करों का विलय एकल कर में हो जाने तथा समस्त मूल्य श्रृंखला में लेन-देन के लिए पूर्व-चरण वाले करों के समायोजन की व्यवस्था होने से इसके तहत करों की बहुतायत की समस्या कम हो जायेगी, प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी और व्यवसाय में तरलता बेहतर होगी। जीएसटी गंतव्य आधारित कर है। इसमें बहु-चरण संग्रह व्यवस्था को अपनाया जाता है। इसमें कर का संग्रह प्रत्येक चरण में होता है और पिछले चरण में अदा किये गये टैक्स को क्रेडिट करने की व्यवस्था है जिससे लेन-देन के अगले चरण में इसका समायोजन हो जाता है। इससे करारोपण की व्यवस्था उपभोक्ता के और करीब आ जाती है तथा नकदी के बेहतर प्रवाह और कार्यशील पूंजी के बेहतर प्रबंधन से उद्योग जगत लाभान्वित होता है।
2. जीएसटी मुख्यत: प्रौद्योगिकी आधारित है। इसमें मानवीय संवाद की गुंजाइश काफी हद तक कम हो जायेगी और इसके फलस्वरूप त्वरित निर्णय लिये जा सकेंगे।
3. जीएसटी से भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को काफी बढ़ावा मिलेगा क्योंकि देश में उत्पादित वस्तुएं और सेवाएं राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी बन जायेंगी। यही नहीं, सभी आयातित वस्तुओं पर एकीकृत टैक्स (आईजीएसटी) लगेगा, जो केन्द्रीय जीएसटी और राज्य जीएसटी के समतुल्य है। इससे स्थानीय उत्पादों पर कराधान के साथ समानता सुनिश्चित होगी।
4. वर्तमान प्रणाली के विपरीत जीएसटी व्यवस्था के तहत निर्यात पूरी तरह से जीरो-रेटेड होगा जिससे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और ऐसे में भुगतान संतुलन की स्थिति बेहतर होगी। अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले निर्यातकों को सात दिनों के भीतर निर्यात से उत्पन्न उनके दावों के 90 प्रतिशत को तत्काल रिफंड करके पुरस्कृत किया जाएगा।
5. जीएसटी से सरकारी राजस्व में अच्छी-खासी बढ़ोतरी होने की आशा है क्योंकि कर आधार बढ़ जायेगा और करदाताओं द्वारा इसका अनुपालन भी बेहतर हो जायेगा। जीएसटी से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ सूचकांक में भारत की रैंकिंग बेहतर होने की आशा है। यही नहीं, इससे जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 1.5 से लेकर 2 प्रतिशत तक की वृद्धि होने का अनुमान है।
6. जीएसटी से अप्रत्यक्ष कर कानूनों में और ज्यादा पारदर्शिता आयेगी।
7. करदाताओं को अनेक करों जैसे कि सेवा कर, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, वैट, केन्द्रीय बिक्री कर, चुंगी, प्रवेश कर इत्यादि का रिकॉर्ड रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जीएसटी के लागू हो जाने पर उन्हें राज्य के भीतर होने वाली समस्त आपूर्तियों के लिए केवल केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम और राज्य (अथवा केन्द्र शासित प्रदेश) वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम का ही रिकॉर्ड रखना होगा, जो लगभग एक जैसे कानून हैं। वहीं, अंतर-राज्य आपूर्ति के मामले में करदाताओं को एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर का रिकॉर्ड रखना होगा।
आईटी संबंधी तैयारियां
जीएसटी को लागू करने के लिए सुदृढ़ आईटी नेटवर्क स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। जीएसटी से संबंधित जरूरतों को पूरा करने के लिए ‘जीएसटीएन’ नामक एक विशेष उद्देश्य वाहन (एसपीवी) स्थापित किया गया है। जीएसटी को लागू करने के उद्देश्य से जीएसटीएन केन्द्र एवं राज्य सरकारों, करदाताओं और अन्य हितधारकों को एक साझा आईटी बुनियादी ढांचा एवं संबंधित सेवाएं उपलब्ध करायेगा। जीएसटी को 1 जुलाई, 2017 से लागू करने का लक्ष्य है।
छोटे कारोबारियों को अपना लेखा-जोखा रखने के लिए जीएसटीएन उन्हें मानक सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध करायेगा। इसे जीएसटीएन की वेबसाइट पर कारोबारियों के मासिक रिटर्न के रूप में सीधे अपलोड किया जा सकेगा। अत: इससे छोटे कारोबारियों के लिए कर अनुपालन आसान हो जायेगा।
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वीके/आरआरएस/वीके-1143