गृह मंत्रालय
अभी हाल ही में हुई सुकमा घटना पर मीडिया रिपोर्टों के बारे में स्पष्टीकरण
प्रविष्टि तिथि:
26 APR 2017 3:22PM by PIB Delhi
अभी हाल में हुई सुकमा घटना के बारे में मीडिया के एक वर्ग में आई रिपोर्टों के बारे में स्पष्टीकरण दिए जाने की जरूरत है। गृह मंत्रालय ने इन रिपोर्टों के बारे में इस प्रकार स्पष्टीकरण दिया है:
यह तथ्य वास्तविक रूप से सही नहीं है कि वामपंथी अतिवाद के खिलाफ लड़ाई में पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों के बहुमूल्य जीवन की हानि का एक कारण वित्तीय संसाधनों की कमी है। सुरक्षा संबंधित व्यय योजनाओं के लिए 2011-12, 2012-2013, 2013-2014 में 575 करोड़ रूपये की राशि जारी की गई थी जिसे 2014-15, 2015-2016, 2016-2017 में बढ़ाकर 675 करोड़ रूपये कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी इस तथ्य के बाद की गई है कि राज्यों को अब केंद्र के कर संसाधनों का बड़ा हिस्सा (42%) मिल रहा है जो इससे पहले केवल 32% ही था।
यह कहना गलत है कि छत्तीसगढ़ की पुलिस खराब हालत में है। 20,000 से अधिक राज्य पुलिस कर्मियों के अलावा केंद्रीय बलों के 45,000 जवानों को बस्तर क्षेत्र में तैनात किया गया है। जवानों की भर्ती चल रही है और यह सतत प्रक्रिया है। 70,000 के पुलिस बल में से हर साल लगभग 3,000 पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो जाते हैं। 6,000 पुलिसकर्मियों की भर्ती की प्रक्रिया हमेशा चालू रहती है।
छत्तीसगढ़ पुलिस बल अच्छी तरह से सुसज्जित हैं और पुलिस के लिए बस्तर पैकेज 2015 के अंत में शुरू किया गया था। केंद्र और राज्य बलों में पूरी तरह तालमेल है। वामपंथी अतिवाद की रोकथाम में 2016 सबसे सफल वर्ष रहा है। जहां प्रतिवर्ष औसतन 30 नक्सली मारे जाते हैं वहीं 2016 में 135 नक्सली मारे गए थे। यह संख्या मारे गए पुलिसकर्मियों की संख्या से तीन गुना हैं। यहां तक कि 2017 में अब तक 32 नक्सली मारे जा चुके हैं जो 2015 से पहले होने वाली नक्सलियों की औसत वार्षिक मृत संख्या से कहीं अधिक हैं। यह कहना गलत है कि 72 सीआरपीएफ जवानों ने अपने जीवन का 2017 बलिदान दिया है। वास्तव में 2017 छत्तीसगढ़ में 38 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए हैं। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि नक्सल-विरोधी अभियान सफलता अर्जित कर रहे हैं।
भारत सरकार की नीति बहुत मददगार रही है और राज्य में हिंसा के आंकड़ों को काफी संख्या में नीचे लाने में सफलता मिली हैं। वर्ष 2013 के बाद से हिंसा की कुल घटनाओं में 7% की गिरावट दर्ज की गई है। एलडब्ल्यूई काडर वास्तव में हताशा में ऐसे हमलों का सहारा ले रहा है।
स्थानीय आदिवासियों में से लगभग 750 जवानों की भर्ती करके एक बस्तर बटालियन बनाने की अभी हाल में की मंजूरी दी गई है। इसी प्रकार वामपंथी अतिवासद से ग्रस्त क्षेत्रों में 10 भारतीय रिजर्व बटालियन (एसआईआरबी) और 56 भारतीय रिजर्व बटालियन का गठन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में सीएपीएफ के पास 58 खान संरक्षित वाहन (एमपीवी) उपलब्ध हैं और ऐसे 30 वाहनों की ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) के माध्यम से खरीदाने की प्रक्रिया चल रही है। 42 बुलेट प्रूफ वाहन भी उपलब्ध हैं और ऐसे 210 बुलेट प्रोटेक्टेड वाहनों (बीपीवी) की खरीदने की प्रक्रिया चल रही है।
विकास के मोर्चे पर अभी हाल में कई पहल शुरू की गई हैं जैसे - 11,725 करोड़ रूपये की लागत से 5,412 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना को मंजूरी, वामपंथी अतिवाद से बुरी तरह प्रभावित सभी 35 जिलों को कौशल विकास कार्यक्रम में शामिल करना और इन जिलों में नवोदय और केन्द्रीय विद्यालय, बैंक, एटीएम और डाकघरों की सुविधा उपलब्ध कराना शामिल हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा निरंतर आधार पर फ्लैगशिप एनएचआरएम कार्यक्रम का अनुपालन किया जा रहा है और जगदलपुर में जदगलपुर मेडिकल कॉलेज का उन्नयन करके अभी हाल में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की अनुमति प्रदान की गई है। शहीदों के परिजनों को वर्तमान में करीब 84 लाख रुपये की सहायता मिलती
टीवी चैनलों पर मारे गए जवानों की शोक संतप्त विधवाओं को न दिखाने के संबंध में गृह मंत्रालय ने कोई निर्देश नहीं दिया गया था। यह एक मौखिक सुझाव था जिसे शोक संतप्त परिवारों की संवेदनशीलता और इन परिवारों की निजता की मौलिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए दिया गया था।
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वीके/आईपीएस/एसके-1173
(रिलीज़ आईडी: 1488762)
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