वित्‍त मंत्रालय

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा पिछले तीन वर्षों के दौरान उठाए गए अभिनव कदम 

प्रविष्टि तिथि: 15 MAY 2017 8:33PM by PIB Delhi

 

 

 

आम वित्‍तीय नियम 2017 जारी किए गए; केन्‍द्रीय क्षेत्र एवं केन्‍द्र प्रायोजित योजनाओं को युक्तिसंगत बनाया गया

 प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण (डीबीटी) के तहत विभिन्‍न सामाजिक क्षेत्र योजनाओं में लोक वित्‍तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के जरिए एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया गया  

 

भारत सरकार के वित्‍त मंत्रालय का व्‍यय विभाग केन्‍द्र सरकार एवं राज्‍यों के वित्‍तों से संबंधित मामलों में लोक वित्‍तीय प्रबंधन प्रणाली की निगरानी करता रहा है।

पिछले तीन वर्षों के दौरान विभाग द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों की रूपरेखा नीचे दी गई है।

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चित्र-1 वित्‍त मंत्रालय के वित्‍त विभाग के प्रमुख कदम

·         आम वित्‍तीय नियम (जीएफआर), 2017 केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा 07 मार्च, 2017 को जारी किए गए जिससे कि राजको‍षीय प्रबंधन को एक बेहतर, कारगर एवं दक्ष संरचना में सक्षम बनाया जा सके, साथ ही, सेवाओं की समयबद्ध आपूर्ति के लिए आवश्‍यक लचीलापन उपलब्‍ध कराया जा सके।

·         संबंध मंत्रालयों के परामर्श से केन्‍द्रीय क्षेत्र एवं केन्‍द्र प्रायोजित योजनाओं दोनों को युक्तिसंगत बनाया गया (नीचे देखें चित्र-2)। केन्‍द्र क्षेत्र योजनाओं (सीएसएस) को पहले की लगभग 1500 योजनाओं से घटाकर 300 पर लाया गया एवं केन्‍द्र प्रायोजित योजनाओं की संख्‍या पहले के 66 से घटाकर 28 पर लाई गई। इसे बजट भाषण 2016-17 के पैरा 113 में रेखांकित किया गया है। इसने हमें हमारे वर्तमान संसाधनों के बेहतर आबंटन एवं सरकारी कार्यक्रमों की दक्षता में सुधार लाने में समर्थ बनाया है।

 

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चित्र -2 केन्‍द्र क्षेत्र एवं केन्‍द्रीय प्रायोजित योजनाओं को विवेकपूर्ण बनाना।

 

·         आयोजना एवं गैर आयोजना व्‍यय अंतर समाप्‍त किया गया : आयोजना एवं गैर आयोजना व्‍यय के बीच के अंतर को समाप्‍त कर दिया गया है और इसके परिणाम स्‍वरूप गैर आयोजना व्‍यय (सीएनई) की समिति के द्वारा गैर आयोजना व्‍यय के मूल्‍यांकन को भी समाप्‍त कर दिया गया है।

·         प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण (डीबीटी) : संसाधनों के अधिक कारगर एवं पारदर्शी उपयोग के लिए सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों के संबंध में डीबीटी आरंभ किया। लोक वित्‍तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) विभिन्‍न सामाजिक क्षेत्र योजनाओं में डीबीटी भुगतान को  सुगम बना रही है। फरवरी, 2017 तक मनरेगा,एनएचएम एवं खाद्य सब्सिडी आदि जैसी सरकार की विभिन्‍न योजनाओं में पीएफएमएस का उपयोग करते हुए 1,02,786.77 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान किया गया है।

·         आउटकम बजट : सभी योजनाओं एवं परियोजनाओं के पास अब एक आउटकम संरचना है जिसका निर्माण कार्यान्‍वयनकारी मंत्रालयों/विभागों, नीति आयोग एवं व्‍यय विभाग के परामर्श के जरिए किया गया है। बजट दस्‍तावेजों के एक हिस्‍से के रूप में संसद में एक समेकित आउटकम बजट 2017-18 प्रस्‍तुत किया गया। प्रत्‍येक योजना के पास अब वित्‍त आयोग चक्र के साथ आरंभ एवं समाप्‍त होने वाली एक स्‍टार्ट एवं सनसेट को-टर्मिनेस है। सावधिक फीडबैक सुनिश्चित करने के लिए मूल्‍यांकन एवं मंजूरी संरचना में तृतीय पक्ष मूल्‍यांकन भी औपचारिक रूप से निर्मित किया गया है। परिणामों एवं संवर्धित विकास प्रदर्शन पर और अधिक सतत फोकस किया गया है।

·         राज्‍यों को विशेष सहायता : 2016-17 के दौरान,  राज्‍यों की महत्‍वपूर्ण विकास आवश्‍यकताओं,अतिरिक्‍त उत्‍तरदायित्‍वों एवं सामाजिक-आर्थिक कारकों आदि पर विचार करते हुए  2016-17 के लिए संशोधित अनुमान चरण में आम बजट में 11 हजार करोड़ रुपए की विशेष सहायता का प्रावधान किया गया था। केन्‍द्र सरकार ने 2015-16 के दौरान राज्‍यों को कुल 10890 करोड़ रुपए  की विशेष सहायता उपलब्‍ध कराई थी।

·         वर्ष 2016-17 के लिए 429353 करोड़ रुपए की राज्‍यों की शुद्ध उधारी अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है जिससे कि संबंधित राज्‍य जीएसडीपी के तीन प्रतिशत का राजकोषीय घाटा लक्ष्‍य अर्जित करने में सहायता प्रदान की जा सके जैसा कि 14वें वित्‍त आयोग (एफएफसी) द्वारा इसकी अवार्ड अवधि (2015-20) के लिए अनुशंसा की गई है।

·         14वें वित्‍त आयोग (एफएफसी) की अनुशंसा के अनुरूप 06.04.2016 को केन्‍द्र सरकार ने 2016-17 से 2019-20 की अवधि के लिए राज्‍यों को अतिरिक्‍त राजकोषीय घाटे के लिए वर्ष दर वर्ष के लचीलेपन को मंजूरी दी है। यह किसी भी वर्ष राज्‍यों के तीन प्रतिशत की सामान्‍य सीमा से अधिकतम 0.5 प्रतिशत  अधिक है और यह इससे पिछले वर्ष ऋण-जीएसडीपी अनुपात को 25 प्रतिशत के भीतर तथा ब्‍याज भुगतान- राजस्‍व प्राप्ति अनुपात को दस प्रतिशत के भीतर बरकरार रखे जाने का विषय है। बहरहाल, अतिरिक्‍त राजकोषीय घाटे का लाभ उठाने में लचीलापन राज्‍यों  को उपलब्‍ध रहेगा, अगर वर्ष के दौरान,जब उधारी सीमाएं निर्धारित की जानी है तथा उससे ठीक पिछले वर्ष के दौरान कोई राजस्‍व घाटा नहीं रहा है।

·         स्‍वच्‍छ भारत कोष (एसबीके): सितम्‍बर, 2014 से कंपनियों से लगभग 471.25 करोड़ रुपए तथा आम जनता से 27 लाख रुपए की स्‍वैच्छिक योगदान के रूप में प्राप्ति की गई है। सरकारी विद्यालयों में 2,46,307 शौचालयों के पुनरुद्धार के लिए 427.84 करोड़ रुपए के बराबर की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

·         सातवां केन्‍द्रीय वेतन आयोग (सीपीसी): सातवें सीपीसी में 19 नवम्‍बर, 2015 को केन्‍द्र सरकार के कर्मचारियों की परिलब्धियों, भत्‍तों, सेवा, शर्तों एवं सेवानिवृति लाभों की सरंचना पर अपनी रिपोर्ट सौंप दी। केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने 29.6.2016 को आयोजित की गई बैठक में वेतन, पेंशन एवं संबंधित मुद्दों पर सातवें सीपीसी की अनुशंसाओं के कार्यान्‍वयन के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी।

·         आपदा राहत : वर्ष 2014-15, 2015-16 एवं 2016-17 (27.02.2017 तक) के दौरान एनडीआरएफ से प्रभावित राज्‍यों को क्रमश: 3460.88 करोड़ रुपए, 12451.96 करोड़ रुपए एवं 8390.87 करोड़ रुपए की वित्‍तीय सहायता उपलब्‍ध कराई गई जिससे कि सूखे, ओलावृष्टि, बाढ़, भूकंप एवं तूफान आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों के लिए तत्‍काल राहत कार्यों का प्रबंधन किया जा सके।

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चित्र -3 एनडीआरएफ से प्रभावित राज्‍यों को आपदा राहत

 

·         जम्‍मू-कश्‍मीर पैकेज: जम्‍मू एवं कश्‍मीर के लिए प्रधानमंत्री की 80068 करोड़ रुपए की पुनर्सरंचना योजना, 2015 की घोषणा राज्‍य के विकास के लिए की गई। बाढ़ से प्रभावित/ध्‍वस्‍त मकानों के लिए 2015-16 के दौरान 1194.85 करोड़ रुपए की विशेष सहायता उपलब्‍ध कराई गई। 2016-17 के दौरान (जनवरी 2017 तक) जम्‍मू एवं कश्‍मीर पैकेज के तहत ध्‍वस्‍त अवसंरचना की स्‍थाई बहाली के लिए 1093.34 करोड़ रुपए तथा व्‍यापारियों/स्‍वरोजगार से जुड़े लोगों  की आजीविका की बहाली/व्‍यवसाय प्रतिष्‍ठान के लिए सहायता पर ब्‍याज छूट के लिए 800 करोड़ रुपए की सहायता उपलब्‍ध कराई गई।

·         त्‍वरित निर्णय निर्माण को सुगम बनाना : त्‍वरित निर्णय निर्माण प्रक्रिया सुगम बनाने के लिए सार्वजनिक रूप से वित्‍त पोषित योजनाओं एवं परियोजनाओं के शक्तियों के विनियोजन को कार्यों के आकलन तथा स्‍वीकृति के लिए 05.08.2016 को निम्‍नलिखित प्रकार से बढ़ा दिया गया है:

आकलन          

·         वित्‍तीय सलाहकार के सम्मिलन के साथ 25 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपए

·         प्रशासनिक मंत्रालय/विभाग के सचिव के अध्‍यक्षता में व्‍यय वित्‍त समिति ईएफसी द्वारा 100 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 500 करोड़ रुपए

मंजूरी         

·         सचिव के स्‍तर पर 25 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपए

·         प्रभारी मंत्री के स्‍तर पर 150 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 500 करोड़ रुपए

·         प्रभारी मंत्री एवं वित्‍त मंत्री के स्‍तर पर 300 करोड़ रुपए से बढ़ाकर हजार करोड़ रुपए

व्‍यय सचिव की अध्‍यक्षता में स्‍थापना व्‍यय पर समिति (सीईई) के एक नए तंत्र की शुरूआत की गई है जिससे कि नए निकायों के सृजन का मूल्‍यांकन किया जा सके। 

·         गैर कर प्राप्ति पोर्टल लांच करना (एनटीआरपी) प्रत्‍यक्ष एवं अप्रत्‍यक्ष कर प्राप्तियों के अतिरिक्‍त सरकारी राजस्‍व की तीव्र प्राप्ति के लिए एनटीआरपी का केन्‍द्रीय वित्‍त मंत्री द्वारा उद्घाटन किया गया जिससे कि नागरिकों, कंपनियों एवं अन्‍य उपयोगकर्ताओं को भारत सरकार को अदा किए जाने वाले गैर कर राजस्‍व का ऑन लाइन भुगतान करने के लिए एक वन स्‍टाप विंडो उपलब्‍ध कराया जा सके।

·         व्‍यय आधारित पेंशनर सेवा (डब्‍ल्‍यूआरपीएस) : वित्‍त मंत्रालय का केन्‍द्रीय पेंशन लेखा कार्यालय केन्‍द्रीय नागरिक पेंशनधारियों को सशक्‍त बनाने की दिशा में एक महत्‍वपूर्ण कदम है।

·         केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने 03.05.2017 को वेतन एवं पेंशन लाभों पर सातवें सीपीसी अनुशंसाओं में संशोधन को मंजूरी दी।       

 

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वीके/एसकेजे/एमबी/-1361


(रिलीज़ आईडी: 1489913) आगंतुक पटल : 26