गृह मंत्रालय
गृह राज्यमंत्री श्री हंसराज अहीर ने दिल्ली पुलिस के "बाइसिकल पेट्रोल" को झंडी दिखाकर रवाना किया
प्रविष्टि तिथि:
30 MAY 2017 12:02PM by PIB Delhi
गृह राज्यमंत्री श्री हंसराज गंगाराम अहीर ने दिल्ली पुलिस द्वारा प्रारंभ की गई "बायसिकल पेट्रोल" को एक कार्यक्रम में आज यहां झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्य अतिथि ने दिल्ली पुलिस की पूर्वी रेंज को आवंटित 65 साइकिलों के पहले बैच को विशिष्ट अतिथि, सांसद श्री मनोज तिवारी, दिल्ली के पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक एवं पूर्वी रेंज के तीन ज़िलों के पुलिस मित्रों समेत बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और नागरिकों की उपस्थिति में झंडी दिखाकर रवाना किया।
पार्कों, भीड़भाड़ भरी गलियों और संकरी गलियों, कोऑपरेटिव सोसाइटियों आदि में पेट्रोलिंग की एक 'हरित' पहल के तौर पर दिल्ली पुलिस ने मौजूदा मोटरसाइकिल एवं पीसीआर गश्ती दलों के बतौर पूरक साइकिल पर गश्त की शुरुआत की है। मौजूदा मोटरसाइकिल एवं पीसीआर गश्ती दल दिल्ली की मुख्य मार्गों पर मुख्यतः अपराध नियंत्रण पर ज़ोर देते हैं।
साइकिल गश्त वहां भी जा सकते हैं जहां परंपरागत गश्ती वाहन नहीं जा सकते। बाइसिकल गश्त संकरी एवं भारी भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भी जा सकते हैं जहाँ यांत्रिक वाहनों को पहुंचने एवं सतत उपस्थिति बनाए रखने में दिक्कत पेश आती है। उनका उपयोग विषम काल में भी होगा जब नागरिक आराम कर रहे होते हैं, क्योंकि यह कम परेशानी खड़ी करते हैं।
इन बाइसिकल पेट्रोल के प्रमुख कार्यक्षेत्रों में से एक पार्क होंगे जहां महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों समेत अन्य लोग सुबह और शाम घूमने के लिए जाते हैं। बाइसिकल पेट्रोल को विश्वविद्यालय परिसरों, महाविद्यालयों और स्कूलों के निकट भी शुरू किया जाएगा जहां पुलिसकर्मी छात्र समुदाय से एक दोस्ताना सम्बन्ध रख सकते हैं।
चलाने वालों के लिए अतिरिक्त स्वास्थ्य संबंधी फायदों और पर्यावरण संबंधी नुकसान से परे बाइसिकल गश्ती दल इन तीन ज़िलों के कई क्षेत्रों में रहने वाली अधिकतर अप्रवासी और कामकाजी जनता के निकट नागरिक समाज की भागीदारी से पुलिस गतिविधियाँ भी शुरू करेगी। पुलिसिया कामकाज की विश्वसनीयता और वैधता अधिकतर समाज के सहयोग, साथ ही पुलिस के कामकाज की पारदर्शिता, कामकाज/ सेवाओं के दौरान अपनाई जाने वाली सत्यनिष्ठा और जवाबदेही पर निर्भर करती है। बाइसिकल पेट्रोल अधिकारियों द्वारा विकसित दोस्ताना ताल्लुक दिल्ली पुलिस द्वारा इस्तेमाल सुदृढ़ समाज- आधारित पुलिस-गतिविधियों को और मज़बूत बनाएगी।
अधिकतर बाइसिकल गश्त दोस्ताना जोड़ों में होंगे और सामान्यतया प्रति गश्त 2 से 5 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। गश्ती अधिकारी "हैंड्सफ्री मोड" से कम करने वाले मानक पुलिस संचार उपकरणों से लैस होंगे और स्थानीय पुलिस स्टेशन में कार्यरत मोबाइल पुलिस पोस्ट की तरह कार्य करेंगे। हर साइकिल को सेलफोन एवं अन्य उपकरणों को रखने के हिसाब से तैयार किया गया है।
'समाज की भागीदारी से पुलिसिया कार्य' के नमूने पर ध्यान देने के साथ, कानून का पालन करने वाले नागरिकों अपनी मित्रवत एवं रक्षात्मक उपस्थिति के प्रति आश्वस्त करते हुए, बाइसिकल गश्ती दल कानून तोड़ने वालों में भय पैदा कर क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित करने की भूमिका निभाएंगे।
कम गति में चलने के कारण बाइसिकल गश्ती दलों के प्रेक्षण का दायरा अनाधिकृत गतिविधियों एवं गश्ती क्षेत्र में अपराधियों की संदेहास्पद मौजूदगी के बारे में गुणात्मक रूप से अधिक अर्थपूर्ण हो पाएगा। अधिकारियों को उनके आसपास घट रही घटनाओं को साझा करने और उनकी पुष्टि करने हेतु नोट करने का विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
शुरुआत 64 हाई एण्ड साइकिलों से की गई है- उत्तर पूर्व ज़िले के लिए 30, पूर्वी ज़िले के लिए 20 और 15 साइकिलें शाहदरा ज़िले के लिए। इस योजना को उचित समय पर दिल्ली के अन्य क्षेत्रों में भी विस्तारित किया जाएगा।
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जीवाई/एबी/वाईबी-1585
(रिलीज़ आईडी: 1491604)
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