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भारतीय नौसेना द्वारा लांच किया गया हरित अभियान विश्व पर्यावरण दिवस- 5 जून, 2017 को 3 वर्ष पूरा हो रहा है। पिछले 3 वर्षों में भारतीय नौसेना द्वारा हर स्तर पर हरित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एकीकृत प्रयास किया गया है। ऊर्जा के अधिकतम उपयोग के उपायों में संचालन, अवसंरचना और रखरखाव संपूर्ण रूप से आता है। ऊर्जा (बिजली एवं ईंधन दोनों) उपयोग को कम करने के लिए स्व-प्रेरित उपाय किए गए हैं।
नौसेना स्टेशनों में स्मार्ट एलईडी स्ट्रीट लाइटिंग के अतिरिक्त परिचालन प्लेटफॉर्मों पर परंपरागत प्रकाश व्यवस्था को तेजी से एलईडी लाइटिंग में बदला जा रहा है। जहाजों पर ईंधन के अधिकतम उपयोग के उपाय संचालन व्यवस्था में किसी तरह के उकसान के बिना लागू किया गया है।
नवाचार प्रेरित सैन्य प्रौद्योगिकी के साथ जहाजों पर नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग की दिशा में प्रयास किया गया है। जहाज पर बैट्री चार्ज करने के लिए बिजली की जरूरत पूरी करने के उद्देश्य से जहाज के हेलो हेंगर के शीर्ष पर सौर पैनल लगाए गए हैं।
ऊर्जा संरक्षण, ऊर्जा पूर्ति विविधिकरण तथा पर्यावरण प्रभाव को कम करना ऊर्जा में आयात निर्भरता में कमी लाने के राष्ट्रीय मिशन के अनुरूप है और जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों के रूप में अपेक्षित राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (आईएनडीसी) के सिद्धांत के अनुरूप है। 2022 तक 100 गीगावाट क्षमता की सौर पीवी स्थापना के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेगावाट से गीगावाट के राष्ट्रीय मिशन के अनुरूप भारतीय नौसेना भी 3 चरणों में 2018 तक 19 मेगावाट सौर पीवी के लक्ष्य में योगदान दे रही है। इसके अतिरिक्त भारतीय नौसेना ने नवीकरणीयऊर्जा उत्पादन के लिए अपने कार्य बजट का 1.5 प्रतिशत देने का संकल्प व्यक्त किया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत सौर पीवी परियोजनाएं नौसेना के सभी कमानों के नौसैनिक स्टेशनों में लागू की जा रही है। जमीन की कमी को देखते हुए छतों पर सौर पीवी पैनल लगाए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के अनुरूप नौसेना के विभिन्न प्रतिष्ठानों में शुरू की गई पहलों के नतीजे मिलने लगे हैं। 5600 किलोग्राम खाद्य, 450 किलोग्राम बायोगैस (मिथेन) का इस्तेमाल, एलपीजी की जगह पर किया जा रहा है। इनका उत्पादन नष्ट होने योग्य अपशिष्टों से किया जा रहा है। और बायोगैस संयंत्र जैविक अपशिष्ट कनवर्टर का इस्तेमाल कर रहे हैं। वन रोपण के सार्थक प्रभाव पर विचार करते हुए पिछले तीन वर्षों 14000 पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों की नर्सरी का काम नौसेना कर्मियों द्वारा किया जाता है और इससे अनुमानित 284 टन कार्बन डाइऑक्साइड नष्ट होगा।
अपने बंदरगाहों और समुद्र में न्यूनतम प्रदूषण सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए जहरीले अपशिष्टों के रिसाव से पहले उनके प्रभावों को कम करने के लिए शोधन संयंत्र, तेल झरनी का उपयोग, बहते कचरों का संग्रहण/कूड़ा-कचरा निष्पादन तथा आईएमओ मानकों वाले उपकरण सुनिश्चित किए जा रहे हैं।
विश्व पर्यावरण 2017 की थीम ‘’लोगों को प्रकृति से जोड़ने’’ से सभी को पर्यावरण देखभाल में हाथ बटाने का अवसर मिलता है।


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वीके/जीवाई/एजी/एसकेपी-1614
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