गृह मंत्रालय

राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन ‘एसडीआरएफएस 2017 का क्षमता निर्माण’ का उद्घाटन श्री राजनाथ सिंह ने किया

राजनाथ सिंह ने कहा कि एसडीआरएफ के फंड आवंटन में 82 फीसदी की बढ़ोतरी की गयी

प्रविष्टि तिथि: 06 JUN 2017 9:42AM by PIB Delhi

गृह मंत्री ने कहा कि 2014-15 के एनडीआरएफ फंड 3,461 करोड़ से बढ़ाकर 2016-17 में 11,441 करोड़ कर दिया गया है

डॉपी.के मिश्रा ने कहा कि आपदाओं से निपटने के लिए तैयारी जरूरी है

 केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर सम्मेलन ‘एसडीआरएफएस 2017 का क्षमता निर्माण‘ का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) ने किया। इस कांफ्रेंस का उद्देश्य राष्ट्रीय आपदा राहत बल और राज्य आपदा राहत बल (एसडीआरएफ) के बीच तालमेल और एसडीआरएफ की क्षमताओं को बढ़ाना है।

इस अवसर पर श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आपदा की कोई भौगोलिक या प्राकृतिक सीमाएं नहीं होती है। हमें उन सीमाओं से आगे बढ़कर आपदाओं के लिए प्रभावी प्रबंधन करने के बारे में सोचना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो क्षेत्र अभी तक सुरक्षित है, जहां ज्यादा जनसंख्या बढ़ रही है और शहरीकरण हो रहा है वहां आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि आपदाओं से निपटने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों की है इसलिए राज्यों को आपदाओं के खतरों से पहले से ही तैयार रहना चाहिए और जरूरी कदम उठाने चाहिए। एसडीआरएफएस को विशेष प्रशिक्षण और नये गैजेट तथा उपकरण देकर उसकी क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। आपदा के समय एक राज्य दूसरे राज्य की मदद करें। इस संबंध में कुछ राज्यों ने अगले दस-पन्द्रह वर्षों का एक खाका तैयार किया है लेकिन सभी राज्यों को एक समान गति से प्रगति करने की जरूरत है, अगर भारत को एक आपदा मुक्त राष्ट्र बनाना है तो। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वह दूसरे राज्यों के मुकाबले आपदा से निपटने के लिए बेहतर प्रयास करें। उन्होंने यह भी कहा कि इससे विकास पर भी प्रभाव पड़ेगा।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारा फोकस आपदा प्रबंधन के बजाये आपदा टालने की तरफ परिवर्तित हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य आपदा राहत फंड (एसडीआरएफ) जो कि 2010-15 के दौरान 33,581 करोड़ रुपये था उसे बढ़ाकर 2015-20 के दौरान 61,220 करोड़ कर दिया गया है, जोकि 82 फीसदी की बढ़ोतरी है। उन्होंने यह भी कहा कि 2 अतिरिक्त एनडीआरएफ टुकड़ियों का वाराणसी और अरुणाचल प्रदेश में गठन किया गया। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ के तहत 2014-15 की 3,461 करोड़ को 2016-17 में बढ़ाकर 11,441 करोड़ कर दिया है, यदि एसडीआरएफ के तहत फंड अपर्याप्त हो। उन्होंने कहा कि नेशनल साइक्लोन रिस्क मिटिगेशन प्रोजेक्ट (एनसीआरएमपी) के तहत दूसरे चरण में जुलाई 2015 में छह राज्यों को अतिरिक्त 2,361 करोड़ की मदद दी गई।    

प्रधानमंत्री के अपर मुख्य सचिव डॉ. पी.के मिश्रा ने कहा कि पिछले कुछ सालों में पहली बार राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें ज्यादातर राज्यों ने भाग लिया।

एनडीआरएफ के महानिदेशक श्री आर. के. पंचनंदा ने कहा कि भारत एक बहुत बड़ा देश है। इस देश का 58.6 फीसदी क्षेत्र भूकंप संभावित, 12 फीसदी क्षेत्र बाढ़ और चक्रवात संभावित क्षेत्र है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य सचिव, श्री आर.के जैन,  सभी राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक, राहत आयुक्त एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, भारतीय राष्ट्रीय सामुद्रिक सूचना सेवा केन्द्र, भारत मौसम विभाग, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और राज्य आपदा राहत बल के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।          

वीके/एसके -1636 


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