प्रधानमंत्री कार्यालय

टेक्सटाइल इंडिया 2017 के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ 

प्रविष्टि तिथि: 30 JUN 2017 5:40PM by PIB Delhi

 

टेक्सटाइल इंडिया 2017 में आप सभी का स्वागत है। टेक्सटाइल सेक्टर में ये अब तक का देश का सबसे बड़ा कार्यक्रम है जिसमें दुनिया के 100 से ज्यादा देशों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। मैं टेक्सटाइल मिनिस्ट्री, इस कार्यक्रम के आयोजकों, इसमें हिस्सा लेने आए उद्यमियों, कारीगरों को शुभकामनाएं देता हूं, बधाई देता हूं।


मुझे खुशी है कि पहली बार केंद्र और देश की अलग-अलग राज्य सरकारें, टेक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़े लोग एकजुट हुए हैं और इस मेगा इंटरनेशनल इवेंट के जरिए पूरी दुनिया को भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री की संभावना दिखा रहे हैं।      


टेक्सटाइल एक ऐसा क्षेत्र है जो एग्रीकल्चर और इंडस्‍ट्री के बीच एक अद्भुत bridge की तरह काम करता है। कपास की खेती हो, सिल्क का उत्पादन हो, इनका end product बहुत कुछ टेक्सटाइल सेक्टर पर निर्भर करता है। किसानों की मेहनत से उपजे raw material को बाजार मुहैया कराने का काम टेक्सटाइल सेक्टर करता है। यानि एक तरह से टेक्सटाइल agro और industry दोनों का ही part है।


भारत के इतिहास में अगर किसी एक इंडस्ट्री का हमेशा महत्व रहा है, तो वो टेक्सटाइल इंडस्ट्री ही है। हजारों वर्ष पूर्व के भारतीय शास्त्रों में वस्त्रों की महिमा का जिक्र होता रहा है। सैकड़ों वर्ष पहले से ये इंडस्ट्री दूसरे देशों के साथ व्यापार का मुख्य आधार रही है। जिन रास्तों से कपड़ों और धागों को दूसरे देश ले जाया जाता था, उन रास्तों के नाम भी किसी ना किसी धागे के नाम पर प्रचलित हो गए थे। इन रास्तों से कितने ही विदेशी दार्शनिक भारत को समझने के लिए यहां आए और भारतीय संस्कृति की महानता का दर्शन करके लौटे। अपने साहित्य में भी उन्होंने भारतीय वस्त्रों और टेक्सटाइल इंडस्ट्री की ताकत को प्रमुखता से जगह दी।


अलग-अलग Time period में हमारे देश के साहित्य में भी इसकी छाप नजर आती रही है। करीब डेढ़ साल पहले चेन्नई में जब पहली बार नेशनल हैंडलूम डे का समारोह हुआ था, उस समय मुझे बनारस के एक बुनकर भाई ने एक Stole दिया था। इसमें कबीरदास जी का एक प्रसिद्ध दोहा हाथ से काढ़ा हुआ था। उस दोहे की कुछ पंक्तियां हैं-

 

झीनी झीनी बिनी चदरिया 
काहे के ताना काहे के भरनीकौन तार से बिनी चदरिया।

 

कबीर जो खुद सूत कातते थे, कपड़ा बुनते थे, कपड़ा रंगते भी थे। उन्होंने अपने न केवल काम में जीवन की सच्चाई को तलाशा और उसी से शब्द लेकर अपने दोहों में व्यक्त भी किया। 

साथियों, वस्त्र हमारे देश की सांस्कृतिक विविधता से भी जुड़े रहे हैं। या कह सकते हैं कि वस्त्र हमारे देश की सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक रहे हैं। कितने ही शहरों और क्षेत्रों की पहचान वहां की टेक्सटाइल इंडस्ट्री से ही है। कांचीपुरम, बनारस या असम का सिल्क हो, कश्मीर का पश्मीना और जामावर का काम हो, बंगाल की मुस्लिन हो, लखनऊ में चिकन का काम हो, ओढिशा और तेलंगाना में हाथ से बुना हुआ इक्कत हो, गुजरात में पटोला हो, ये सैकड़ों वर्षों से अपने-अपने इलाके को पहचान देते रहे हैं। ऐसी विविधता आपको दुनिया में किसी और देश में नहीं मिलेगी।


देवियों और सज्‍जनों,

 

वैश्विक अर्थव्‍यव्‍स्‍था में भारत का उल्‍लेख आज एक bright spot के रूप में किया जाता है। यह एक अति आकर्षक वैश्विक निवेश destinations के रूप में उभर कर आया है। यह अनेक स्‍थायी पहलों से संभव हुआ है।

 

व्‍यापार में सहजता प्रदान करने हेतु सात हजार से भी अधिक सुधारों को कार्यान्वित किया गया। प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। सरकार ने बारह सौ से अधिक के पुराने कानूनों को समाप्‍त किया है। ये तो कुछ ही उदाहरण हैं।

 

परिणामस्‍वरूप, विश्‍व आर्थिक मंच के वैश्विक प्रतिस्‍पर्धात्‍मक सूचकांक में भारत ने ऊपरी छलांग लगाते हुए पिछले दो वर्षों में बत्‍तीस देशों का पीछे छोड़ दिया है। इस प्रकार की छलांग किसी देश ने नहीं लगाई है। भारत ने विश्‍व बैंक लॉजिस्‍टक निष्‍पादन सूचकांक 2016 में उन्‍नीस देशों को पीछे कर दिया है। हम वर्ष 2016 में वर्ल्‍ड इंटेक्‍च्‍वेल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइजेशन में भी सोलह देशों से आगे निकले हैं। व्‍यापार और विकास पर संयुक्‍त राष्‍ट्र सम्‍मेलन द्वारा सूचीबद्ध किए गए दस शीर्ष एफडीआई राष्‍ट्रों में, हम तीसरे नंबर पर हैं।  

 

“मेक इन इंडिया” पहल के आधार पर, हमने रोजगार, उत्‍पादन और निर्यातों को बढ़ाने के लिए ‘स्क्लि, स्‍केल, स्‍पीड’ और ‘जीरो डिफेक्‍ट’, जीरो-इफेक्‍ट के मंत्र फूके हैं।  

 

हमारे पास कपड़ा और परिधान सेक्‍टर में विदेशी निवेश के लिए अति उदारवादी निवेश नीतियां हैं।

 

हमने टेक्‍सटाइल और अपेरल सेक्‍टर में आटोमटिक रूट के जरिए 100 प्रतिशत एफडीआई की मंजूरी दी है।

 

देवियों और सज्‍जनों,

 

कपड़ा उद्योग ने भारतीय अर्थव्‍यव्‍था में एक अहम भूमिका निभाई है । मूल्‍य श्रृंखला के मामले में यह मजबूत और प्रतिस्‍पर्धात्‍मक है। भारत कच्‍ची सामग्री, जैसे कि कपास, ऊन, रेशम, जूट तथा मानव-निर्मित फाइबर की पर्याप्‍त मात्रा में आपूर्ति करता है। वास्‍तव में, कपास और जूट के मामले में भारत विश्‍व का सबसे बड़ा उत्‍पादक देश है, और रेशम एवं मानव-निर्मित फाइबर में मामले में दूसरा सबसे बड़ा उत्‍पादक देश है। इससे हमें बैकवर्ड इंटिग्रेशन का विशेष लाभ मिलता है, जो कि शायद अन्‍य देशों के पास नहीं है। इसके अलावा, भारत के पास spinning, weaving, knitting और apparel की मजबूत मैन्‍युफैक्‍चरिंग क्षमताएं हैं। हमारे पास किफायती लागत पर युवा श्रमिक उपलब्‍ध हैं।

 

उच्‍च आर्थिक वृद्धि से हमारी आय और उसे खर्च करने की क्षमता बढ़ी है। इसके परिणामस्‍वरूप, कपड़ा उत्‍पादों की घरेलू बाजार में ऊंची मांग होती है। हमारा देश युवाओं की आंकाक्षाओं का देश है, जो कपड़ा, परिधान और हस्‍त निर्मित लाइफस्‍टाइल उत्‍पादों पर बेहिचक खर्च करते हैं। अपेरल और लाइफस्‍टाइल उत्‍पादों के लिए घरेलू बाजार का वर्तमान आकलन 85 बिलियन US Dollars किया गया है, जिसकी वर्ष 2025 तक बढ़कर 160 बिलियन US Dollars होने का अनुमान है। इस मांग का आधार हमारा बढ़ता मध्‍यम वर्ग होगा।

 

देश में विनिर्मित textiles और apparel के लिए वैश्विक मांग भी काफी है। भारत textiles का निर्यात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है, और भारत का वैश्विक अंश लगभग 5 प्रतिशत है। पारंपरिक हथकर्घा और हथकर्घा उत्‍पादों सहित भारतीय textiles का निर्यात 100 से भी अधिक देशों को किया जाता है। कभी-कभी भारतीय पर्यटक यह महसूस कराने के लिए कि चूंकि textiles भारत में विनिर्मित किए गए हैं, इसलिए वे विदेश में भी भारतीय textiles खरीदते हैं।

 

Textiles सेक्‍टर रोजगार के काफी अवसर मुहैया कराता है। कृषि के बाद आज यह हमारा दूसरा सबसे बड़ा employer है। 45 मिलियन से अधिक लोग सीधे इस सेक्‍टर में employed हैं और 60 मिलियन से अधिक लोग इससे जुड़े कार्यों में employed हैं।   

इसी को ध्यान में रखते हुए इस सरकार में टेक्सटाइल सेक्टर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पिछले वर्ष एक टेक्सटाइल Package दिया गया है। जिसके तहत apparel और made-up sector को मजबूती दी जा रही है।


सरकार ने तय किया है कि Apparel और Made-up सेक्टर में जो भी कंपनी या कारोबारी नए श्रमिकों को रोजगार देते हैं उन्हें आर्थिक मदद दी जाएगी। लेकिन आर्थिक मदद का तरीका ये होगा कि वो जिस भी कर्मचारी को रखेंगे, उनके Employee Provident Fund में कंपनी की तरफ से जो 12 प्रतिशत राशि दी जाती है, उसे सरकार खुद वहन करेगी। इसका फायदा ये होगा कि ज्यादा से ज्यादा श्रमिक formal सेक्टर में शामिल होंगे।


इसके अलावा सरकार ने Apparel सेक्टर में fixed term employment का भी रास्ता खोला है। यानि ये श्रमिक एक specific time period के लिए नियुक्त होंगे लेकिन इस दौरान उन्हें वही सुविधाएं मिलेंगी तो किसी परमानेंट कर्मचारी को मिलती हैं। इससे भी श्रमिकों की स्थिति में सुधार आएगा।


इनकम टैक्स एक्ट के तहत भी इस सेक्टर की कंपनियों को छूट दी गई है। ऐसी मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स जहां कम से कम 100 श्रमिक हैं, वो किसी नए श्रमिक को 150 दिन तक रोजगार देती हैं तो भी उन्हें टैक्स में राहत दी जा रही है।

 

देवियों और सज्‍जनों,

 

कौशलयुक्‍त मानवशक्ति में बड़े अंतराल को भरने के लिए industry-oriented प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए एक इंटिग्रेटेड स्किल डिवलपमेंट स्‍कीम का भी कार्यान्‍वयन किया जा रहा है।  

 

मैन्‍युफैक्‍चरिंग और एक्‍सपोर्ट में हमारी मजबूती का आधार हमारी विश्‍व स्‍तरीय प्रशिक्षण और अनुसंधानिक संस्‍थानों को विकसित करने की सक्षमता है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टेक्‍नोलॉजी के नेटवर्क में professionally managed 16 कैम्‍पस हैं। फैशन एजुकेशन, रिसर्च और डिवलपमेंट, प्रशिक्षण तथा कंसल्‍टेंसी के क्षेत्रों में परफॉर्मेंस और प्रोसेस की बैंचमार्किंग में यह संस्‍थान अहम भूमिका निभा रहा है। 

 

पिछले कुछ वर्षों में हमने देश के अपने-अपने संबंधित राज्‍यों के बीच निवेश और उद्योगों को आकर्षित करने हेतु एक healthy competition देखा है।  इसके परिणामस्‍वरूप, राज्‍यों द्वारा कुछ बड़े सुधार किए गए हैं। अपने-अपने स्‍तर पर प्रत्‍येक राज्‍य ने textiles सहित नए उद्योग स्‍थापित करने में सुविधा प्रदान करने का प्रयास किया है। मैरे विचार में, textile का बड़े पैमाने पर निर्यात करने की दिशा में और अधिक ज्‍यादा ध्‍यान दिए जाने का वक्‍त आ गया है।  

 

भारत में अलग-अलग संस्‍कृति, फैशन और परंपराएं हैं। हमारी यह विविधता विभिन्‍न क्षेत्रों में उपलब्‍ध कपड़ों में साफ-साफ दिखाई पड़ती है। हमें अपनी clothing diversity को catalogue और map करना चाहिए तथा राज्‍य या क्षेत्र की strengths और specialties को स्‍पष्‍ट रूप से earmark करना चाहिए। प्रत्‍येक राज्‍य को कुछ जाने-माने उत्‍पादों के लिए समर्पित नोडल अधिकारी नियुक्‍त करने चाहिए, जो पूर्ण वैल्‍यू चेन में उत्‍पादकों और व्‍यापारियों को सहायता प्रदान करेंगे। यह पहल garments के उत्‍पादन से लेकर निर्यात तक की जानी चाहिए। घरेलू बाजार तथा एक्‍सपोर्ट मार्किटों की विशेष मांगों की पूर्ति की सुनिश्चिता की जानी चाहिए।

 

बड़े वैश्विक बाजारों में लोगों की जरूरतों का अध्‍ययन और मैपिंग करने के लिए हमें एक कार्य योजना बनानी चाहिए और रियल टाइम बेसिस के आधार पर इन क्षेत्रों में फैशन और textiles में new trends पर भी नज़र रखनी चाहिए। सरकारी परिषदों और उद्योग निकायों को इस कार्य में आगे आना होगा, जो उद्योग को सहयोग करेंगे। इससे हमें उपरोक्‍त जरूरतों को पूरा करने में तथा एक्‍सपोर्ट को और अधिक बढ़ाने में हमारी ऊर्जा को चेनेलाइज करने में सहायता मिलेगी।

 

मित्रों, 

 

ग्रोथ और वेल्‍थ जनरेट करने के लिए इनोवेशन और रिसर्च नए मंत्र हैं। कपड़ा उद्ययोग को ग्रोथ हासिल करने तथा नए बाजारों तक पहुंचने के लिए लगातार इनोवेशन और रिसर्च करना होगा।  उदाहरण के लिए, विश्‍व के कुछ भागों में physiques अधिक होगा। इसके लिए हमारे देश में उपयोग किए जा रहे सामान्‍य आकार की कपड़ा चौड़ाई की तुलना में, ज्‍यादा चौड़ाई की आवश्‍यकता महसूस हो सकती है। इसलिए, आपको loom की चौड़ाई बढ़ानी होगी। बांकी जगहों में आवश्‍यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं। एक्‍सपोर्ट मार्किटों में लीडरशिप हासिल करने हेतु इस प्रकार की गहन attention जरूरी है।  

 

आज, जीरो कार्बन फूटप्रिंट वाले उत्‍पादों की भारी मांग है। होलिस्‍टक लाइफस्‍टाइल की गूंज हर जगह सुनाई पड़ती है। आर्गनिक डाइ, कपड़ों और फैब्रिक का बाजार बढ़ता जा रहा है।  हमारे प्रयास आर्गेनिक उत्‍पादों में इनोवेट करने की दिशा में होने चाहिए।  

 

कपास और जूट के अलावा, देश में केले और बांस फाइबर से बने फैब्रिक्‍स पहले से विनिर्मित किए जाते रहे हैं। ऐसे उत्‍पादों के लिए एक niche market है। अत:, अन्‍य संसाधनों से फैब्रिक्‍स विकसित करने हेतु हमारी संस्‍थाओं, जैसे कि नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फैशन टेक्‍नोलॉजी और सांइटिफिक एंड इंडिस्‍ट्रयल रिसर्च इंस्टिट्यूट्स द्वारा और अधिक रिसर्च किए जाने की जरूरत है।

 

देवियों और सज्‍जनों, 

 

हमारे इंटिग्रेटेड textile clusters वैश्विक पर्यावरण और स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा मानदंडों का पालन करते हैं। कपड़ा क्षेत्र में निवेशों के लिए अपेक्षित बुनियादी ढांचा उपलब्‍ध कराए जाने हेतु कपड़ा उत्‍पादक राज्‍यों के पास pro-industry नीतियां मौजूद हैं।

 

मैं मानता हूं कि अगले दो दिनों में आपको कुछ राज्‍य सरकारों के साथ बातचीत करने का अवसर मिलेगाI मंत्रिमंडल के मेरे कुछ साथी भी आपसे बातचीत करेंगे। मुझे विश्‍वास है कि आपको ये सत्र काफी पसंद और सूचनाप्रद लगेंगे।  

 

मुझे उम्‍मीद है कि इस event से वैश्विक और भारतीय लीडरों को इस सेक्‍टर से जुड़ी भारत की उदारवादी नीति, strengths था सेक्‍टर में अपार अवसरों से रूबरू होने में सहायता मिलेगी। इससे भारत को उन देशों के साथ, जो भारत में sourcing और investment अवसरों की तलाश में हैं, valued partner बनने में सहायता मिलेगी। मुझे विश्‍वास है कि इस इवेंट से भारत की  inherent potential को साकार करने में काफी सहायता मिलेगी जिससे भारत textile और apparel सोर्सिंग और निवेश का एक व्‍यापक destination बन सकता है। 

 

देवियों और सज्‍जनों,

 

गांधीनगर में तीन दिनों के सफल और उपयोगी सफर के लिए अपनी शुभकामना देते हुए मैं अपनी बात संपन्‍न करता हूं।

 

मैं आपको भारत में आने, निवेश करने तथा Textiles बनाने के लिए आमंत्रित करता हूं।

 

धन्‍यवाद

 

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AKT/AK/GBP

 


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