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ईपीएफओ योगदान और भुगतान के वास्ते बहु-वैकल्पिक बैंकिंग प्रणाली के लिए ईपीएफओ और सार्वजनिक एवं निजी बैंकों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर के मौके पर श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री बंडारु दत्तात्रेय के दिए भाषण के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं।
श्री एच.एल. समरिया, अतिरिक्त सचिव, श्रम और रोजगार मंत्रालय,
डॉ. वी.पी. जॉय, केन्द्रीय भविष्य निधि आयुक्त, मंच पर मौजूद दिग्गज,
मीडिया के मित्रों, देवियों और सज्जनों।
मैं आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, एक्सिस, कोटक महिंद्रा और बैंक ऑफ बड़ौदा को ईपीएफओ का साझेदार बैंक बनाए जाने के इस ऐतिहासिक मौके पर अपनी उपस्थिति को लेकर काफी खुश हूं। मैं इस साझेदारी की समृद्धि के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं।
दोस्तों, केन्द्रीय भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) 12 लाख करोड़ रुपये के कोष के साथ सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा प्रदाताओं में से एक है। इसमें योगदान करने वाले सदस्यों की संख्या 4.5 करोड़ है और ईपीएफओ के जरिए लगभग 20 करोड़ खाते संचालित हो रहे है। ईपीएफओ कानून के अंतर्गत आने वाले प्रतिष्ठानों से सलाना 75 हजार करोड़ रुपये संग्रह करता है। ईपीएफओ एक वर्ष में लगभग 1.16 करोड़ दावों को सुलझाता है और सालाना लगभग 54,000 करोड़ रुपये का भुगतान करता है
अभी ईपीएफ के योगदान का संग्रह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (ऑनलाइन), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एग्रीगेटर), पंजाब नेशनल बैंक, इलाहाबाद बैंक, इंडियन बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के जरिए होता है। 30.03.2017 को आयोजित सीबीटी की 216वीं बैठक में निजी बैंकों को ईपीएफ के योगदानों का संग्रह करने में शामिल करने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया था।
मुझे इस बात की खुशी है कि यह फैसला आज लागू किया जा रहा है क्योंकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में हमारी सरकार ‘सबका साथ सबका विकास’ में विश्वास करती है। हमारी सरकारी न सिर्फ समेकित विकास में विश्वास करती है बल्कि हम अपने देश के विकास में सभी हितधारकों को साथ लेकर भी चलते है।
मुझे इस बात की भी खुशी है कि मंत्रालय और ईपीएफओ ने मिलकर नियोक्ताओं और कर्मचारियों के हक़ में कई पहल किए हैं। उदाहरण के लिए: -
(I) नियोक्ताओं के लिए शासनिक शुल्क घटाए,
(Ii) नियोक्ताओं का ऑनलाइन पंजीकरण,
(Iii) योगदान का ऑनलाइन भुगतान,
(Iv) छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के लिए ऑनलाइन रिटर्न दाखिल करना,
(V) ईपीएफ ग्राहकों के लिए 2 अप्रैल, 2017 को आवास योजना शुरू की गई, जिसके लिए हुडको के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं,
(Vi) लाभ का दावा करने के लिए स्व घोषणा,
(Vii) एनईएफटी के जरिए ऑनलाइन भुगतान,
(viii) सदस्यों को ऑनलाइन ई-पासबुक सुविधा और
(Ix) ईपीएफ सदस्यों को यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) उपलब्ध कराना, जिसे आईटी के सबसे अच्छे नवाचार के रूप में सम्मानित किया गया है।
मुझे आशा है कि अपने सम्मानित हितधारकों को विश्वस्तरीय सुविधा प्रदान करने के सरकार के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए ईपीएफओ और बैंकों के बीच यह साझेदारी काफी फायदेमंद रहेगी।
धन्यवाद,
जय हिन्द
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वीके/एके/डीके- 1970
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