वित्त मंत्रालय
भारतीय लेखा मानकों का अनुपालन करने वाली कंपनियों से संबंधित न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी) के कार्यान्वयन से उत्पन्न मामले
प्रविष्टि तिथि:
25 JUL 2017 12:52PM by PIB Delhi
वित्त अधिनियम, 2017 ने आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115 जेबी के प्रावधानों में संशोधन किया, ताकि भारतीय लेखा मानकों का अनुपालन करने वाली कंपनियों के मामलों में स्वीकरण वर्ष और उसके बाद न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी) वसूली के उद्देश्य से बही लाभ की गणना का प्रारूप उपलब्ध कराया जा सके। यह प्रारूप इस उद्देश्य के लिए गठित एमएटी-आईएनडी एएस समिति (समिति) की सिफारिशों के आधार पर निर्दिष्ट किया गया।
इसके बाद, कानून की संशोधित धारा 115 जेबी के कार्यान्वयन से उत्पन्न कुछ खास मामलों के बारे में विभिन्न हितधारकों की ओर से अभिवेदन प्राप्त हुए। ये अभिवेदन जांच के लिए समिति को अग्रेषित कर दिए गए। हितधारकों द्वारा उठाए गए कार्यान्वयन से संबंधित मामलों की विस्तृत पड़ताल के बाद समिति ने दिनांक 17 जून, 2017 की अपनी रिपोर्ट के माध्यम से कानून की धारा 115 जेबी के प्रावधानों में दिनांक 1 अप्रैल, 2017 (अर्थात आकलन वर्ष 2017-18) से कुछ संशोधन किए जाने की सिफारिश की है। इसी तिथि से वित्त विधेयक 2017 की धारा 115 जेबी में किए गए संशोधनों को लागू किया जाना था।
परिपत्र जारी करने के बारे में समिति की सिफारिशें एफएक्यू के स्वरूप में सरकार द्वारा स्वीकार कर ली गई हैं और एफएक्यू के स्वरूप में परिपत्र संख्या 24/2017 दिनांक 25 जुलाई, 2017 के द्वारा जारी किया जा चुका है।
समिति की रिपोर्ट का संबद्ध अंश विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in. पर अपलोड कर दिया गया है। हितधारकों से अनुरोध है कि वे अपनी टिप्पणियां/सुझाव 11 अगस्त, 2017 तक ई-मेल आईडी dirtpl2[at]nic[dot]in पर भेजें।
वीके/आरके/एसके -3141
(रिलीज़ आईडी: 1497159)
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