संस्कृति मंत्रालय
डॉ. महेश शर्मा ने ‘भारत छोड़ो’ और ‘आजाद हिन्द फौज’ की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया
प्रविष्टि तिथि:
09 AUG 2017 8:31PM by PIB Delhi
संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा ने ‘भारत छोड़ो’ और ‘आजाद हिन्द फौज’ की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आज राष्ट्रीय अभिलेखागार भारत, जनपथ, नई दिल्ली में ‘‘भारत छोड़ो’ और ‘आजाद हिन्द फौज’ - 75वीं वर्षगांठ (1942-2017)’’ प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉ. शर्मा ने कहा कि –‘भारत छोड़ो आंदोलन’ भारत के स्वाधीनता संग्राम का महत्वपूर्ण पड़ाव था, जिसने समूचे राष्ट्र को ब्रिटेन के शासन से मुक्ति पाने के लिए संकल्पबद्ध कर दिया। लाखों भारतीय गांधी जी के आह्वान और ‘करो या मरो’ के नारे को सुनकर उठ खड़े हुए। गांधी जी और स्वाधीनता संग्राम के प्रमुख नेताओं को 9 अगस्त, 1942 को गिरफ्तार कर लिया गया। डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 30 जुलाई, 2017को अपने ‘मन की बात’ में कहा, हमारी युवा पीढ़ी को इस बात की अवश्य जानकारी होनी चाहिए कि 9 अगस्त, 1942 को क्या हुआ था। यह प्रदर्शनी उसी दिशा में हमारा एक प्रयास है।
यह प्रदर्शनी 01 सितम्बर, 2017 तक जारी रहेगी। यह प्रदर्शनी सार्वजनिक रिकॉर्ड, निजी पत्रों, फोटोग्राफ, समाचारपत्रों की रिपोर्टों और ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबंधित किये गये साहित्य पर आधारित है, जो स्वाधीनता संग्राम के अंतिम चरण के दौरान सामने आया। इस प्रदर्शनी में कुछ मौलिक पत्रों को भी प्रदर्शित किया गया है।
इस प्रदर्शनी में बड़े पैमाने पर डिजिटल सामग्री प्रदर्शित है, जिसे इंटरैक्टिव मोड के जरिये देखा जा सकता है। ‘भारत छोड़ो प्रस्ताव’ के पारित होने, ‘स्वाधीनता संग्राम से जुड़े नेताओं की गिरफ्तारी’, आईएनए और सुभाष चंद्र बोस की भूमिका दर्शाने वाली फिल्म भी यहां प्रदर्शित की गई है।
इस प्रदर्शनी में चार खंड हैं यथा :
- भारत छोड़ो आंदोलन का आरंभ
- वास्तविक आंदोलन
- आंदोलन का प्रभाव
- इंडियन नेशनल आर्मी और आजाद हिन्द फौज
- भारत छोड़ो आंदोलन का आरंभ : इस खंड में भारत में क्रिप्स मिशन का आगमन और उसकी नाकामी, गांधी जी द्वारा मिशन को ‘पोस्ट–डेटेड चैक’ के रूप में प्रस्तुत करने संबंधी विवरण को दर्शाने वाले दस्तावेज/रिपोर्ट प्रदर्शित किये गये हैं। इस खंड में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का 14 जुलाई 1942 का वर्धा का प्रस्ताव और मुम्बई में 08 अगस्त, 1942 को उसको स्वीकार किये जाने से संबंधित दस्तावेज भी प्रदर्शित किये गये हैं।
- वास्तविक आंदोलन : इस खंड में ‘भारत छोड़ो’ तथा यूसुफ मेहर अली द्वारा ‘करो या मरो’ का नारा दिये जाने से संबंधित दस्तावेज हैं। इनके अलावा गांधी जी का संदेश उनके अपने शब्दों में ‘करेंगे या मरेंगे-मत पूछो क्यों’ भी प्रदर्शित किया गया है। यह खंड सरोजनी नायडू, सुचेता कृपलानी, अरूणा आसफ अली, राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, जे.बी. कृपलानी और ऊषा मेहता जैसी हस्तियों की भूमिका पर भी प्रकाश डालता है।
- आंदोलन का प्रभाव : इस खंड में 9 अगस्त, 1942 को प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बाद देशभर में फैली अशांति को प्रदर्शित किया गया है।
- इंडियन नेशनल आर्मी और आजाद हिन्द फौज : इस खंड में भारतीय स्वाधीनता लीग, टोक्यो 1942, रास बिहारी बोस का संदेश 1942, आजाद हिन्द फौज से संबंधित पोस्टरों और बैनरों सहित प्रचार सामग्री आदि प्रदर्शित की गई है। इस प्रदर्शनी में इस दौरान गठित की गई समानांतर सरकारों से संबंधित सामग्री भी प्रदर्शित की गई ।
प्रदर्शनी का आखिरी हिस्सा प्रधानमंत्री के संदेश के लिए निर्धारित किया गया है, जिसमें वे 30 जून, 2017 को ‘मन की बात’ के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित करते हुए देशवासियों और महिलाओं को एकजुट होकर एक नये भारत छोड़ो आंदोलन की शुरूआत करने का आह्वान कर रहे हैं :
- गंदगी – भारत छोड़ो;
- गरीबी – भारत छोड़ो;
- भ्रष्टाचार – भारत छोड़ो;
- आतंकवाद – भारत छोड़ो;
- जातिवाद – भारत छोड़ो;
- सम्प्रदायवाद – भारत छोड़ो
आज ‘करेंगे या मरेंगे’ की जगह ‘’संकल्प लो, एकजुट हों, डटे रहो और नये भारत के निर्माण के लिए अनथक कार्य करो’’ के नारे की जरूरत है।




वीके/आरके/जीआरएस-3332
(रिलीज़ आईडी: 1499090)
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