गृह मंत्रालय
प्रधानमंत्री के भाषण की केन्द्रीय गृह मंत्री द्वारा व्याख्या
प्रविष्टि तिथि:
16 AUG 2017 5:43PM by PIB Delhi
नीचे प्रस्तुत है गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह का लेख ‘‘प्रधानमंत्री के भाषण की व्याख्या’’:
‘‘हमने आजादी के बाद 70 साल साल का सफर पूरा कर लिया है और अब हम एक ऐसे युग में पहुंच गये हैं, जो हर तरह से साफ तौर पर भिन्न नज़र आता है, यह भिन्नता चाहे नवोन्मेश की दृष्टि से हो, प्रेरणा की दृष्टि से हो या देश की प्रगति की दिशा की दृष्टि से हो। स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर लाल किले से प्रधानमंत्री के भाषण में भारत के अनोखेपन की झलक दिखनी ही चाहिए और वाकई यह इस साल के भाषण में दिखाई भी दी। आखिर यह भाषण आम स्वतंत्रता दिवस भाषणों से किन मायनों में अलग था?
इसमें हमारी आजादी की समूची जंग को आज के संदर्भ में पूरी संपूर्णता के साथ रूपायित किया गया था। चम्पारण सत्याग्रह की शताब्दी और साबरमती आश्रम की स्थापना के 125 साल पूरे होने का जिक्र करके उन्होंने 1942 के महान राजनीतिक जनांदोलन को प्रेरित करने वाले सभी प्रमुख बिंदुओं को अपने भाषण में समाहित किया।
जब उन्होंने ‘चक्रधारी’ से ‘चर्खाधारी’ तक की राष्ट्र की यात्रा का जिक्र किया तो यह अनजान युगों से आधुनिक युग तक के हमारे देश के प्रेरणास्पद मूल्यों का निरूपण था। इस तरह उन्होंने यह बात स्पष्ट कर दी कि हम अनंत काल से विद्यमान शाश्वत राष्ट्र हैं।
एक सहयोगी के तौर पर मैं महसूस करता हूं कि प्रधानमंत्री के भाषण से उभर कर सामने आये कुछ विलक्षण और विशिष्ट रुझान बड़े सराहनीय हैं, जो शासन संचालन के बारे में उनकी समूची अवधारणा में सूत्र की तरह प्रतिविम्बित होते हैं। मोटे तौर पर भाषण में कई अंतर्निहित विषय हैं और उनके हर तर्क का जोर इन्हीं पर हैं।
शुरुआत में ही प्रधानमंत्री ने हमारे स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के योगदान और वलिदान का स्मरण किया ताकि हम निर्भय और स्वतंत्र जीवन बिता सकें। प्रधानमंत्री द्वारा उनका जिक्र किया जाना देश के योद्धाओं, स्वतंत्रता सेनानियों और उन तमाम लोगों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है, जो अपने कर्तव्य को पूरा करते हुए शहादत हासिल करते हैं। उन्होंने गोरखपुर त्रासदी और देश के कई भागों में बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों के प्रति भी संवेदना व्यक्त की। लाल किले की प्राचीर से पीडि़तों को इस बात का आश्वासन था कि उत्सव के मौके पर भी राष्ट्र उनके प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और जो लोग तकलीफें झेल रहे हैं तथा खुशियां मनाने में असमर्थ हैं उन्हें भूला नहीं है।
प्रधानमंत्री की यह बात दिल को छू जाती है कि कश्मीर का पेचीदा मुद्दा ‘‘न गोली, न गाली’’ से सुलझ सकता है और यह कह कर उन्होंने इस बारे में अपनी सरकार के दृष्टिकोण को स्पष्ट कर दिया। इसके विपरीत इसे आम कश्मीरी को गले लगाकर सुलझाया जा सकता है। केन्द्र अपने इस विश्वास पर दृढ़ है कि आम कश्मीरी शांति प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भागीदारी चाहता है। कुछ निहित स्वार्थों वाले लोगों ने जो कश्मीर घाटी में शांति नहीं चाहते आम कश्मीरियों को बलि का बकरा बनाया हुआ है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में हिंसा का रास्ता अपनाने वालों से अपील की कि वे हिंसा को छोड़ दें और उनका आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने सरोकारों और तकलीफों को व्यक्त करने के लिए लोकतांत्रिक तरीकों का सहारा लें।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने लोगों से हर तरह की हिंसा का रास्ता छोड़ने की अपील की चाहे यह साम्प्रदायिक हिंसा हो, जातीय हिंसा हो या सड़क पर गाड़ी चलाते हुए होने वाली ‘रोड रेज’ की तकरार वाली हिंसा हो। उन्होंने उन महिलाओं के प्रति भी एकजुटता जताई जो तीन तलाक की कुरीति के खिलाफ जोरदार लड़ाई लड़ रही हैं। प्रधानमंत्री ने उन महिलाओं के साहस की सराहना की जो अपने अधिकारों के लिए उठ खड़ी हुई हैं। इस तरह एक बड़ा बदलाव यह भी दिखाई दे रहा है कि जहां 1980 के दशक में सरकारें और प्रधानमंत्री महिलाओं की दुर्दशा और अधिकारों के लिए उनके संघर्ष की चर्चा तक नहीं करना चाहते थे वहीं प्रधानमंत्री ने इसका स्पष्ट शब्दों में उल्लेख किया।
हमारी सरकार महिलाओं के कल्याण से संबंधित मुद्दों और उनके कल्याण के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। मातृत्व लाभ संबंधी नियमों और कानूनों में जो संशोधन किये गये हैं, उनसे भारत गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की माताओं के प्रति दुनिया का सबसे अधिक संवेदनशील देश हो गया है।
गरीबों और समाज के दुर्बल वर्गों के प्रति सरकार का सरोकार किसी से छिपा नहीं है। हमारे प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार को गरीबों की सेवा के प्रति समर्पित किया है। उन्होंने अपनी वचनबद्धता को लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में एक बार फिर से दोहराया। परियोजनाओं को पूरा करने में हुए दशकों के विलंब की आलोचना करते हुए उन्होंने राष्ट्र को बताया कि इस तरह की देरी का खामियाजा गरीबों को सबसे ज्यादा उठाना पड़ता है इसलिए इन्हें तेजी से पूरा करने के प्रयास किये जा रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि बचाया गया हर एक रुपया कमाई के बराबर है और इसका इस्तेमाल उपेक्षितों की भलाई के लिए किया जाता है। एलईडील बल्बों के वितरण को बढ़ावा देना इसका एक उदाहरण है।
21वीं शताब्दी में जन्म लेने वाले देश के लाखों बच्चों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि वे ही युवा राष्ट्र के असली ‘’भाग्यविधाता’’ हैं, क्योंकि वे भारत के भावी विकास के संवाहक बनेंगे। इस देश के युवाओं की पहचान ‘डिमोक्रेटिक डिविडेंड’ के रूप में किये जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने युवाओं को राष्ट्रनिर्माण के कार्य में लगाने के लिए एक कार्य योजना बनायी है।
प्रधानमंत्री ने इस बात का भी जिक्र किया कि किस तरह उनकी सरकार के लिए शुरू में ही मानदंड ऊंचे कर दिये गये थे जब कैबिनेट ने अपने पहले ही निर्णय में काले धन के बारे में एक विशेष जांच दल का गठन किया था। तब से भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत के संघर्ष को तेज करने के लिए कई कारगर कदम उठाये गये हैं।
विमुद्रीकरण, बेनामी कानून की अधिसूचना जारी किया जाना और इसे लागू कर 800 करोड़ की संपत्ति जब्त किया जाना, शैल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई और विमु्द्रीकरण के बाद डेटा माइनिंग के जरिए संदिग्ध खातों का पता लगाने के प्रयासों ने प्रधानमंत्री की निष्ठा, सरकार के दृढ़ संकल्प और निर्णायक फैसले करने की क्षमता को उजागर कर दिया है।
अपनी सरकार के निर्णायक कदमों के परिणामों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 1। 25 लाख करोड़ रुपये लागत के काले धन का पता लगाया गया है। इसमें से 1। 75 लाख करोड़ रुपये की जांच चल रही है। इसके अलावा काले धन के रूप में 3 लाख करोड़ रुपये ऐसे हैं, जो सामान्य वित्तीय प्रणाली में कभी नहीं आ पाते, अगर विमुद्रीकरण नहीं किया गया होता। फर्जीवाड़े वाली 3,00,000 कंपनियों की पहचान की गयी, उनका पता लगाया गया और उनमें से 1,75,000 को सदा के लिए बंद कर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने ईमानदार नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि उनकी ईमानदारी की कद्र की जाती है और उसे मूल्यवान माना जाता है—यह एक ऐसी टिप्पणी है, जो शायद ही सुनाई देती है, क्योंकि ज्यादातर सरकारें सदा मौन रहने वाले ईमानदार लागरिकों को जो बहुमत में हैं, भुलाती ही आयी हैं। उन्होंने नागरिकों को यह भी भरोसा दिलाया कि जिन्होंने राष्ट्र को लूटा है उन्हें शांति से नहीं रहने दिया जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
सुरक्षा के मोर्चे पर प्रधानमंत्री ने सरकार और सशस्त्र सेनाओं, दोनों के निर्णायक कदमों पर प्रकाश डाला। देश के सुरक्षा परिदृश्य में 2014 के बाद कुल मिलाकर काफी सुधार हुआ है। अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में उन्होंने एक रैंक-एक पेंशन योजना का भी जिक्र किया जिसे कई दशकों से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ही एक रैंक, एक पेंशन के वादे को पूरा किया और हमारे पूर्वसैनिकों को उनका हक दिलाया।
हमारी सशस्त्र सेनाओं ने अनगिनत वलिदान किये हैं और राष्ट्र को दुश्मनों से बचाने में आगे बढ़कर अपना योगदान किया है। देश की रक्षा में असाधारण कदम उठाने का सबसे अच्छा उदाहरण सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक का वह अभिया, है जब भारतीय सेना के जवानों ने सीमा पार कर सीमा के पास आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों को तबाह कर दिया। सशस्त्र सेनाओं के वीरता के इसी तरह के कार्यों को प्रदर्शित करने की आवश्यकता को देखते हुए मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि प्रधानमंत्री ने एक अनोखा वेबसाइट शुरू करने का एलान किया। इसमें भारतीय सशस्त्र सेनाओं में कार्य करने वाली महिलाओं और पुरुषों के बहादुरी के कारनामों को प्रदर्शित किया जाएगा, जिन्होंने वीरता पुरस्कार प्राप्त किये हैं।
भारत के किसानों का सशक्तीकरण भी इस सरकार के बुनियादी सरोकारों का एक हिस्सा है। अपने भाषण में उन्होंने किसानों की मदद की बीज से बाजार तक योजना, सिंचाई क्षमता बढ़ाने, करोड़ों मृदा कार्ड जारी करने, पहले के मुकाबले करीब दुगने किसानों को बीमा के दायरे में लाने, बाजार तक बेहतर पहुंच, सरकार द्वारा दलहनों की अभूतपूर्व मात्रा में खरीद तथा खाद्य प्रसंस्करण में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के जरिए भंडारण सप्लाई चेन में सुधार सुनिश्चित करने जैसे कदमों से 2022 तक खेती से होने वाली आय को दुगना करने के मोदी सरकार के ऊंचे लक्ष्य का पता चलता है।
इसी सिलसिले में एक अन्य उल्लेखनीय जोर देश के कम विकसित पूर्वी भाग पर दिया जो अपनी समृद्धि और मेहनती लोगों के बावजूद पिछड़ा क्षेत्र बना हुआ है। प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र को प्राथमिकता के आधार पर अधिकार संपन्न बनाने का जिक्र किया ताकि इसकी पूरी क्षमता का उपयोग सुनिश्चित हो सके।
प्रधानमंत्री ने एक ऐसे भारत का आह्वान किया जहां लोकतंत्र मतदान केन्द्र पर समाप्त नहीं हो जाता, बल्कि वहां से तो इसकी शुरुआत होती है और यह सहभागितापूर्ण लोकतंत्र का आधार बनता है। शासन व्यवस्था में जनता की भागीदारी पर उन्होंने जो बल दिया वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में ‘लोक’ को ‘तंत्र’ का संचालन करना चाहिए, न कि सरकार कोई ऐसा तंत्र बनाए जिससे लोक को संचालित कर सके।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विमुद्रीकरण को जनता का समर्थन, जीएसटी का सुचारु रूप से चालू होना, स्वच्छ भारत अभियान की कमान का नागरिकों द्वारा संभाला जाना और लोगों का स्वैच्छा से एलपीजी सब्सिडी छोड़कर गरीबों को रसोई गैस कनेक्शन देने के लिए आगे आना ऐसे उदाहरण हैं जो टीम इंडिया की जनभागीदारी की भावना को प्रतिविम्बित करते हैं। गरीबों को रसोई गैस कनेक्शन हासिल करने में मदद के लिए एलपीजी पर सब्सिडी छोड़ने की ‘गिव इट अप’ योजना समेत कई अभियानों में जनता की भागीदारी बड़ी शानदार रही। इससे एक नयी संस्कृति की शुरुआत हुई है जिसके तहत जनता और सरकार साथ मिलकर एक ऐसा कार्य कर रहे हैं जैसे ‘भरोसे की कमी’ के पुराने जमाने में कभी सुना नहीं गया।
71वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधान मंत्री के भाषण से जन भागीदारी की इसी भावना का संदेश स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आता है। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि वे छोटे से छोटा कार्य भी राष्ट्र निर्माण की भावना से करें। रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों से उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के आह्वान पर किस तरह सामान्य गोपाल गोवर्धन पर्वत को उठाने को उद्यत हो गये थे और समुद्र पर पुल बनाने में तो गिलहरी ने भी श्री राम की मदद करनी चाही थी।
प्रधानमंत्री ने नये भारत की अपनी परिकल्पना पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि यह एक ऐसा भारत होगा जो भ्रष्टचार, गरीबी, आतंकवाद, जातिवाद और सम्प्रदायवाद से मुक्त होगा। इसे जनता की भागीदारी की ताकत से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह का भारत तभी संभव होगा जब 125 करोड़ भारतीय 2011 तक ‘सिद्धि’ प्राप्त करने का ‘सामूहिक संकल्प’ लेंगे। उन्होंने 2017 से 2022 तक के 5 वर्षों की तुलना 1942 से 1947 के पांच साल से करते हुए कहा कि यह भारत छोड़ो से स्वतंत्र भारत के बीच का अंतराल था। उन्होंने लोगों से कहा कि वे राष्ट्र निर्माण का उसी तरह तरह का जज्बा अपने में पैदा करें।
हमारे शास्त्रों से प्रेरणा ग्रहण करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि नये भारत के निर्माण का सही समय आ गया है और हमें यह अवसर नहीं गंवाना चाहिए। ‘आज के भारत’ से ‘नये भारत’ तक का सफर पहले ही प्रारंभ हो चुका है। इस सरकार के कार्यकाल के तीन वर्षों में इसने जोर पकड़ा है। अब इसे जन आंदोलन में बदलने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने भारतवासियों का आह्वान किया कि वे इस ‘नये भारत’ के आंदोलन में शामिल हो जाएं। उन्होंने कहा कि यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है और इसके जरिए हम विश्व के राष्ट्रों में ‘जगद गुरु’ का पद प्राप्त करने का अपना लक्ष्य भी प्राप्त कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने भविष्य के बारे में अपनी परिकल्पना को यह कह कर अभिव्यक्त किया कि हमने ‘स्वराज’ 70 वर्ष पूर्व प्राप्त किया, अब हमें इसे ‘सुराज’ में बदलना है। यह लक्ष्य किसा तरह हासिल होगाॽ यह हासिल होगा ‘भारत जोड़ो’ से, जिसके जरिए सभी भारतीय मजबूती से एकदूसरे से जुड़ जाएंगे। 21वीं सदी में यही हमारा आगे का मार्ग होगा।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हमें व्यापक रूप से फैले अकर्मण्यता वाले ‘चलता है’ के रवैये के स्थान पर ‘बदल सकता है’ वाले दृष्टिकोण को आत्मसात करना होगा। उन्होंने कहा कि क्यों की बजाय हमें यह पूछना चाहिए कि कोई काम क्यों नहीं हो सकता। बदला है, बदल रहा है, बदल सकता है, …. हम इस विश्वास और संसकल्प के साथ आगे बढ़ें।
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वीके/आरयू/पी- 3434
(रिलीज़ आईडी: 1499938)
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