वित्‍त मंत्रालय

वर्तमान कानूनों के अंतर्गत दिवालियापन से जुड़े मामलों को पणधारी ऋण वसूली न्‍यायाधिकरण के बजाय उपयुक्‍त प्राधिकार/अदालत के पास ले जा सकते हैं 

प्रविष्टि तिथि: 29 AUG 2017 3:38PM by PIB Delhi
 
मंत्रालय के ध्‍यान में यह बात आई है कि कुछ उच्‍च न्‍यायालयों के समक्ष दायर रिट याचिकाओं में कहा गया है कि ‘प्रेजीडेंसी टाउन दिवाला अधिनियम, 1909’ और ‘प्रांतीय दिवाला अधिनियम, 1920’ (कानूनों) को दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 (संहिता) कानून के मद्देनजर रद्द कर दिया गया है। इसके आधार पर वादी दावा कर रहे हैं कि व्‍यक्तिगत दिवाला और दिवालियापन से जुड़े मामलों से अब संहिता के प्रावधानों के अंतर्गत निपटा जा सकता है।

इस सम्‍बन्‍ध में यह स्‍पष्‍ट किया जाता है कि संहिता का अनुच्‍छेद 243 जिसमें इन कानूनों को रद्द करने की व्‍यवस्‍था है, उसे अभी तक अनुसूचित नहीं किया गया है। किसी एक व्‍यक्ति और पणधारियों के लिए दिवाला और दिवालियापन से जुड़े प्रावधान जो संहिता के भाग III में शामिल हैं उन्‍हें अधिसूचित किया जाना बाकी है। अत: यह सलाह दी जाती है कि ऐसे पणधारी जो दिवाले से जुड़े अपने मामलों को आगे जारी रखना चाहते हैं वे वर्तमान कानूनों के अंतर्गत ऋण वसूली न्‍यायाधिकरण में जाने के बजाय उपयुक्‍त प्राधिकार/ अदालत में जा सकते हैं। 
 

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वीके/केपी/वीके-3564

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