स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय

श्री अश्विनी कुमार चौबे, केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण राज्‍य मंत्री के द्वारा मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारियों से उनके कार्यक्षेत्र के विषय में जानकारी प्राप्‍त की ।

प्रविष्टि तिथि: 05 SEP 2017 5:52PM by PIB Delhi

श्री अश्विनी कुमार चौबे, केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण राज्‍य मंत्री ने पदभार संभालने के दूसरे दिन स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारियों से मंत्रालय के कार्य कलापों के बारे में विस्‍तृत रूप से जानकारी ली ।

श्री लव अग्रवाल, संयुक्‍त सचिव ने मंत्री जी को अपने कार्यक्षेत्र के विषय में अवगत करवाया कि वे राष्‍ट्रीय मानसिक चिकित्‍सा स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम तथा मंत्रालय द्वारा संचालित राष्‍ट्रीय महत्‍व के स्‍वास्‍थ्‍य संस्‍थान जैसे- NIMHANS- Bengaluru, लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलई क्षेत्रीय इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्‍थ, तेजपुर; केन्‍द्रीय मनोवैज्ञानिक संस्‍थान, रांची से संबंधित दायित्‍व निभा रहे हैं । उसके अलावा उन्‍होंने बताया कि आपात कालीन मेडिकल रिलीफ, टीकाकरण संस्‍थान, टेलीमेडिसिन, राष्‍ट्रीय दृष्टि नियंत्रण अभियान और ई-गवर्नेंस मामलों को भी वे देख रहे हैं । तत्‍पश्‍चात श्री आर.पी. खण्‍डेलवाल, अध्‍यक्ष सह प्रबंध निदेशक, एचएलएल ने अपनी कम्‍पनी के बारे में जानकारी दी । उन्‍होंने बताया कि एचएलएल बहुत सारी किस्‍म की दवाईयां, चिकित्‍सकीय सुविधाएं व परिवार कल्‍याण नियंत्रण संबंधी सामाग्री की आपूर्ति करता है ।

श्री सुधीर कुमार, संयुक्‍त सचिव अपने कार्यक्षेत्र के बारे में मंत्री जी को अवगत कराया जिसमें ड्रग और कास्‍मेटिक अधिनियम तथा औषधि एवं खाद्य सामाग्री की गुणवत्‍ता को नियंत्रित रखना है । इसके अतिरिक्‍त उन्‍होंने बताया कि केन्‍द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संस्‍थान, भारतीय फार्मेसी आयोग, खाद्य सामाग्री मानक अधिनियम, भारतीय बायोलॉजिकल संस्‍थान, क्लिनिकल अधिनियम, मानवीय अंग प्रत्‍यारोपण अधिनियम इत्‍यादि मामले उनके दायित्‍व में आते हैं । तत्‍पश्‍चात् महानिदेशक (डॉ. जी.एन. सिंह), औषधि नियंत्रण महानिदेशक तथा उनके वरिष्‍ठ अधिकारियों ने औषधि की गुणवत्‍ता कैसे बनी रहे, उसके बारे में मंत्री जी को अवगत कराया । मानवीय अंग प्रत्‍यारोपण अधिनियम के क्रियान्‍वयन के बारे में बताते हुए संबंधित अधिकारियों ने बताया कि देश में औसतन 8000 किडनियां प्रत्‍यारोपित होती हैं जबकि जरूरत करीब 2 लाख प्रतिवर्ष होती है । इसके अलावा 1500 लीवर, 235 हृदय तथा 25000 कौर्मिया प्रत्‍यारोपित होती है जोकि बहुत अधिक हैं । अधिकारियों ने यह भी बताया कि अंग दान देने के लिए लोगों को प्रोत्‍साहित करने की अत्‍यन्‍त आवश्‍यकता है ताकि मांग के अनुरूप अंग प्रत्‍यारोपण की आपूर्ति यथा संभव हो सके ।

माननीय मंत्री जी ने चर्चा के दौरान कई सुझाव वरिष्‍ठ अधिकारियों को दिये जिस पर अधिकारियों ने मंत्री जी को आश्‍वस्‍त किया कि इन सुझावों का वे अध्‍ययन करेंगे और उचित दिशा-निर्देश प्राप्‍त करेंगे ।

 

*****

 

SK


(रिलीज़ आईडी: 1501829) आगंतुक पटल : 29