रक्षा मंत्रालय

प्रादेशिक सेना ने 68वां स्‍थापना दिवस मनाया

प्रविष्टि तिथि: 09 OCT 2017 7:16PM by PIB Delhi

प्रादेशिक सेना (टीए) ने आज यहां अपना 68वां स्‍थापना दिवस मनाया। टीए की परम्‍परा के अनुसार, एडीजी टीए मेजर जनरल डी.ए. चतुर्वेदी ने राष्‍ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद से मुलाकात की और सशस्‍त्र सेनाओं के सर्वोच्‍च कमांडर के प्रति सम्‍मान व्‍यक्‍त किया। स्‍थापना दिवस के अवसर पर देश भर में कई समारोहों का आयोजन किया गया। दिल्‍ली में टीए ने 02 अक्‍टूबर, 2017 को नागरिक सेना की सच्‍ची भावना के अनुरूप अर्द्ध मैराथन का आयोजन किया तथा स्‍वस्‍थ जीवनशैली को बढ़ावा दिया। इस समारोह में 5 किलोमीटर, 10 किलोमीटर एवं 21 किलोमीटर की स्‍पर्धाएं शामिल थीं तथा इसे डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. भट्ट एवं लेफ्टिनेंट कर्नल (मानद) कपिल देव द्वारा दिल्‍ली कैंट के आर्मी परेड ग्राउंड में झंडी दिखाकर रवाना किया। इस स्‍पर्धा में रक्षा से जुड़े 3000 जवानों तथा उनके परिवार जनों ने विभिन्‍न वर्गों में भाग लिया। टीए के सिमफोनी बैंड ने 08 अक्‍टूबर, 2017 को इंडिया गेट पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। इसने भारी संख्‍या में लोगों को आकर्षित किया, जो बैंड के शानदार संगीत से सम्‍मोहित हो गये और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत हो गए। टीए कार्यकर्ताओं की नागरिक सेना है, जिसमें देश की रक्षा के प्रति योगदान देने का जज्‍़बा है। प्रादेशिक सेना देश के युवाओं को उनके अतिरिक्‍त समय में सैन्‍य प्रशिक्षण प्राप्‍त करने तथा राष्‍ट्रीय आपातकालों और आंतरिक अराजकता की स्थिति में देश की सेवा करने का एक आदर्श अवसर प्रदान करती है।

    प्रादेशिक सेना निकोबार में एक पैदल सेना बटालियन (टीए) तथा महाराष्‍ट्र के मराठवाड़ा के सूखा प्रभावित क्षेत्र में एक पारिस्थितिकीय कार्यबल बटालियन के निर्माण के द्वारा अपनी उपस्थिति को विस्‍तारित करने की प्रक्रिया में है। इसके अतिरिक्‍त राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन के लिए एक अंगभूत पारिस्थितिकीय कार्यबल की स्‍थापना का मामला भी मंजूरी के अंतिम चरण में है। इस प्रकार की नई स्‍थापना और विशेष रूप से नमामि गंगा मिशन के लिए इकाई की स्‍थापना प्रादेशिक सेना को राष्‍ट्रीय ध्‍येय की दिशा में व्‍यापक रूप से योगदान देने में समर्थ बनाएगा। निकट भविष्‍य में प्रादेशिक सेना की अनूठी ताकत आपदा प्रबंधन के दौरान राष्‍ट्रीय प्रयासों की स्‍थापना के लिए एक आदर्श मंच साबित हो सकती है।

   प्रादेशिक सेना ने 1962,1965 एवं 1971 की पिछली लड़ाइयों के दौरान कई गौरवशाली कार्यों को अंजाम दिया तथा सराहनाएं बटोरीं। इसने ऑपरेशन पवन, विजय एवं पराक्रम में अपनी हिम्‍मत एवं साहस का परिचय दिया। विभिन्‍न ऑपरेशनों में अपने असाधारण प्रदर्शन के लिए टीए के जवानों को अनगिनत पुरस्‍कार प्रदान किये गये हैं। स्‍वतंत्रता दिवस 2017 के अवसर पर 164 पैदल सेना बटालियन (टीए) (एच एवं एच) नागा के मेजर डेविड मेनलुन को कीर्ति च्रक (मरणोपरांत) तथा टीए की तीन इकाइयों को प्रदान किये गये आर्मी कमांडर के यूनिट प्रशस्ति पत्र प्रादेशिक सेना की बहादुरी तथा निरंतर भावना के परिचायक हैं।

   1947 में स्‍वतंत्रता प्राप्ति के बाद प्रादेशिक सेना अधिनियम को संविधान सभा द्वारा 18 अगस्‍त, 1948 को कानून का रूप दिया गया, जिसका परिणाम वर्तमान प्रादेशिक सेना के गठन के रूप में सामने आया।

    प्रादेशिक सेना की विभागीय इकाइयों ने रेल संचार, तेल एवं प्राकृतिक गैस परिष्‍करण और आपूर्तियों के समर्थन में हमेशा कारगर भूमिका निभाई है। पारिस्थितिकीय कार्यबल अपने निर्धारित क्षेत्रों में युद्धस्‍तर पर पर्यावरण चिंताओं को दूर करने का प्रयास करते रहें हैं और सराहनीय परिणाम अर्जित किये हैं। पारिस्थितिकीय बल ने उत्‍तराखंड के मलारी क्षेत्र के सीमावर्ती गांव के लोगों की सहायता के लिए अखरोट एवं चिलगोजा के पौधा रोपण की अनूठी पहल की है, जिससे कि उन्‍हें उनके जीवन यापन में सहायता की जा सके तथा आर्थिक प्रवास से रोका जा सके।                 

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