प्रविष्टि तिथि:
12 OCT 2017 11:32AM by PIB Delhi
‘राज्यों में उच्च शिक्षा’ और ‘कौशल विकास एवं उद्यमिता - युवाओं को रोजगार योग्य बनाने’ की थीम पर प्रस्तुतियों और परिचर्चा के साथ आज (12 अक्टूबर, 2017) राष्ट्रपति भवन में राज्यपालों/उपराज्यपालों के 48वें सम्मेलन के पहले दिन का समापन हुआ। मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने एजेंडे में शामिल मुद्दों को सुलझाने से संबंधित विजन और रोडमैप को कवर करने वाली प्रस्तुतियां दीं। राज्यपालों ने भी अपनी राय दी एवं विचार व्यक्त किए और इसके साथ ही अपने-अपने राज्यों के अनुभवों का उल्लेख किया।
‘न्यू इंडिया-2022’ के विजन को साकार करने से जुड़े व्यापक राष्ट्रीय मिशन ने इस सम्मेलन के एजेंडे को ठोस स्वरूप प्रदान किया है। भारत वर्ष 2022 में अपनी आजादी के 75 साल पूरे करेगा। केंद्र सरकार ने ‘न्यू इंडिया-2022’ के लिए एक विजन विकसित किया है जिसके लिए शिक्षा एवं कौशल निर्माण, नागरिकों की शैक्षणिक, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता क्षमताएं बढ़ाने और बुनियादी ढांचागत सुविधाओं को उन्नत करने के क्षेत्र में ठोस पहल करने की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही सार्वजनिक सेवाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने और इन सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने की भी परिकल्पना की गई है।
राज्यों के 27 राज्यपाल और केंद्र शासित प्रदेशों के तीन उपराज्यपाल इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। केंद्र शासित प्रदेशों यथा दादर एवं नागर हवेली और दमन एवं दीव के साथ-साथ लक्षद्वीप के प्रशासक भी इस सम्मेलन में विशेष रूप से आमंत्रितगण हैं। सम्मेलन में आज उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने भी भाग लिया।
आज दिन में इससे पहले सम्मेलन में अपने उद्घाटन भाषण में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से युवाओं को जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्यों के स्तर पर उच्च शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने नागरिकों पर भरोसा करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने अब व्यक्तियों द्वारा दस्तावेजों का स्वयं सत्यापन किए जाने एवं पासपोर्ट प्राप्त करने की मौजूदा आसान व्यवस्था के उदाहरण देते हुए नागरिकों पर भरोसा करने के इस दर्शन को आगे ले जाने का आग्रह राज्यों से किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश के प्रत्येक भाग के विकास के संदर्भ में संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची में शामिल जनजातीय एवं आदिवासी स्वदेशी समुदायों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करना अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब हर राज्य का विकास होगा।
राष्ट्रपति के संबोधन के बाद सम्मेलन में मौजूद वरिष्ठतम राज्यपाल यथा आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना के राज्यपाल श्री ई.एस.एल. नरसिम्हन ने ऊर्जा एवं प्रौद्योगिकी से लेकर स्वास्थ्य एवं सतत विकास तक से जुड़ी विकासात्मक चुनौतियों के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित किया।
प्रथम सत्र को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संबोधित किया। वर्ष 2022 तक न्यू इंडिया यानी नए भारत का निर्माण करने के मिशन की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने विशेष जोर देकर कहा कि इसे केवल व्यापक जन सहभागिता की बदौलत ही पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि न केवल नई तकनीक हासिल करने, बल्कि दीर्घकालिक समस्याओं का समाधान खोजने के लिए भी नवाचार को प्रोत्साहित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने राज्यपालों को विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ विस्तार से बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को नवाचार का केंद्र होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यपाल अपने-अपने राज्यों और विशेष रूप से युवाओं एवं विश्वविद्यालय नेटवर्क को किसी एक ऐसे खेल (क्रिकेट के अलावा) को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं जिसमें संबंधित राज्य उत्कृष्टता हासिल करने की विशेष क्षमता रखता है और इसके साथ ही इस दिशा में सतत रूप से प्रयासरत भी है।
इस सम्मेलन में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने ‘न्यू इंडिया-2022’ के मुख्य आधारों या तत्वों पर एक प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि गवर्नेंस, अधिक पारदर्शिता और उच्च जवाबदेही के नए मानकों के साथ स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित भारत के निर्माण पर फोकस किया जाएगा।
लंच से पहले के सत्र में दो अलग-अलग समूहों में चर्चाएं आयोजित की गईं। पहले समूह ने ‘न्यू इंडिया-2022 के लिए बुनियादी ढांचा’ विषय पर विचार-विमर्श किया, जिसमें निम्नलिखित प्रतिभागी शामिल थे:
राज्यों के राज्यपाल
· श्री ई.एस.एल. नरसिम्हन, आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना के राज्यपाल
· श्री एस.सी. जमीर, ओडिशा के राज्यपाल
· डॉ. के.के. पॉल, उत्तराखंड के राज्यपाल
· श्री श्रीनिवास दादासाहेब पाटिल, सिक्किम के राज्यपाल
· श्री केशरी नाथ त्रिपाठी, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल
· श्री बलरामजी दास टंडन, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल
· श्री कल्याण सिंह, राजस्थान के राज्यपाल
· श्री तथागत राय, त्रिपुरा के राज्यपाल
· डॉ. नजमा ए. हेपतुल्ला, मणिपुर के राज्यपाल
· श्री बनवारीलाल पुरोहित, तमिलनाडु के राज्यपाल
· श्री वी. पी. सिंह बडनोर, पंजाब के राज्यपाल एवं केन्द्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक
· श्री सत्य पाल मलिक, बिहार के राज्यपाल
· प्रो. जगदीश मुखी, असम के राज्यपाल
केंद्रीय मंत्री
श्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री
श्री नितिन जयराम गडकरी, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री; शिपिंग मंत्री; जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री
श्री पीयूष गोयल, रेल मंत्री और कोयला मंत्री
डॉ. जितेंद्र सिंह, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री; कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री; परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्री; और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री
श्री हरदीप सिंह पुरी, आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
नीति आयोग
डॉ. राजीव कुमार, उपाध्यक्ष, नीति आयोग
केन्द्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल
श्री अनिल बैजल, दिल्ली के उपराज्यपाल
एडमिरल (सेवानिवृत्त) देवेंद्र कुमार जोशी, पीवीएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एनएम, वीएसएम, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल
केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक (विशेष रूप से आमंत्रित)
श्री प्रफुल्ल पटेल, केंद्र शासित प्रदेश दादर एवं नागर हवेली और दमन एवं दीव के प्रशासक
दूसरे समूह ने ‘न्यू इंडिया-2022 के लिए सार्वजनिक सेवाएं’ विषय पर विचार-विमर्श किया, जिनमें निम्नलिखित प्रतिभागी शामिल थे :
राज्यों के राज्यपाल
श्री एन. एन. वोहरा, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) निर्भय शर्मा, मिजोरम के राज्यपाल
श्री ओम प्रकाश कोहली, मध्य प्रदेश के अतिरिक्त प्रभार के साथ गुजरात के राज्यपाल
श्री पद्मनाभ बालकृष्ण आचार्य, नगालैंड के राज्यपाल
श्री राम नाईक, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल
श्री कप्तान सिंह सोलंकी, हरियाणा के राज्यपाल
श्री चेननामानेनी विद्यासागर राव, महाराष्ट्र के राज्यपाल
श्रीमती मृदुला सिन्हा, गोवा की राज्यपाल
श्री वजुभाई रुदाभाई वाला, कर्नाटक के राज्यपाल
श्री न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) पालानीसामी सदाशिवम, केरल के राज्यपाल
श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, झारखंड की राज्यपाल
आचार्य देवव्रत, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल
ब्रिगेडियर (डॉ.) बी.डी. मिश्रा (सेवानिवृत्त), अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल
श्री गंगा प्रसाद, मेघालय के राज्यपाल
केंद्रीय मंत्री
श्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री
श्री रवि शंकर प्रसाद, विधि एवं न्याय मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री
श्री जगत प्रकाश नड्डा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री
श्री राधा मोहन सिंह, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री
श्री प्रकाश जावड़ेकर, मानव संसाधन विकास मंत्री
श्री धर्मेंद्र प्रधान, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री
नीति आयोग
श्री अमिताभ कांत, सीईओ, नीति आयोग
केन्द्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल
डॉ. किरण बेदी, पुडुचेरी की उपराज्यपाल
केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक (विशेष रूप से आमंत्रित)
श्री फारूक खान, केन्द्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के प्रशासक
कल (13 अक्टूबर, 2017) सम्मेलन के तीसरे सत्र में राज्यपाल अपने-अपने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित मुद्दों पर संक्षिप्त चर्चा करेंगे। समापन सत्र में सम्मेलन के दौरान होने वाले विचार-विमर्श पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट संबंधित संयोजकों द्वारा प्रस्तुत की जाएगी।
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वीके/आरआरएस/एसएस – 5049