पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

भारत जलवायु परिवर्तन को मानवता के लिए गंभीर खतरा मानता है और इसका सामना करने के लिए सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाना चाहता है – डॉ. हर्षवर्धन 

प्रविष्टि तिथि: 06 NOV 2017 4:41PM by PIB Delhi

 

कॉप-23 में भारतीय पैवेलियन के उद्घाटन के अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि भारत जलवायु परिवर्तन को मानवता के लिए गंभीर खतरा मानता है और इसका सामना करने के लिए सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभाना चाहता है। जर्मनी के बॉन में आयोजित कॉप-23 में भारतीय पैवेलियन के उद्घाटन के अवसर पर मंत्री महोदय ने कहा कि जलवायु परिवर्तन गरीबों और हाशिए की आबादी पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्य, जलवायु परिवर्तन की गंभीरता और विलंब से प्रारंभ की गई कार्यवाही के कुपरिणामों को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और जीवन जीने लायक जलवायु अपरिहार्य मानव अधिकार हैं। इस संकट का समाधान सिर्फ राजनीति नहीं है, बल्कि यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। 

उन्होंने आगे कहा कि भारत का प्रतिव्यक्ति उत्सर्जन विश्व औसत का मात्र एक तिहाई है और पूरी दुनिया के कार्बन-डाई-आक्साइड उत्सर्जन में इसका योगदान केवल तीन प्रतिशत है। फिर भी भारत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कई अत्यंत महत्वपूर्ण योजनाएं लागू कर रहा है। 

मंत्री महोदय ने कहा कि भारतीय पैवेलियन हमारी विरासत, हमारी प्रगति, हमारी परंपराएं व स्वदेशी प्रौद्योगिकी, आकाक्षाएं और उपलब्धियों की झलक प्रस्तुत करता है। 

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि समावेशी विकास वैश्विक लक्ष्यों में से एक है। जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को पीछे नहीं छोड़ा जाता। गरीबी उन्मूलन एक मौलिक लक्ष्य है और इसके लिए हम सबों को साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि नागरिकों का योगदान, सतत जीवन पद्धति और जलवायु के साथ न्याय ऐसे वैकल्पिक उपाय हैं जिनसे जलवायु परिवर्तन का सामना किया जा सकता है। 
 

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