श्रम और रोजगार मंत्रालय

विशेषज्ञों ने भारत में रोजगार सृजन की रणनीतियों पर चर्चा की 

प्रविष्टि तिथि: 08 NOV 2017 6:13PM by PIB Delhi

‘हमारे देश में युवा जनसंख्‍या पूरी दुनिया में सबसे अधिक है और प्रत्‍येक युवा रोजगार चाहता है। आने वाली पीढि़यां हमे माफ नहीं करेंगी यदि रोजगार सृजन के लिए हम अविलंब कदम नहीं उठाते हैं।’ उक्‍त विचार केन्‍द्रीय श्रम व रोजगार राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री संतोष मोहन गंगवार ने रोजगार सृजन की रणनीतियों पर चर्चा के लिए आयोजित बैठक में व्‍यक्‍त किए। इस बैठक का आयोजन वीवी गिरी नेशनल लेबर इंस्‍टीटयूट (वीवीजीएनएलआई) द्वारा नोएडा में किया गया था। उन्‍होंने कहा कि हमारा मंत्रालय प्रत्‍यक्ष रूप से रोजगारों का सृजन नहीं करता है, परंतु रोजगार प्रदान करने वालों और रोजगार के इच्‍छुक लोगों के लिए एक उपयुक्‍त वातावरण की सुविधा उपलब्‍ध कराता है। उन्‍होंने आगे कहा कि सरकार और उनका मंत्रालय कौशल विकास और रोजगार सृजन के लिए सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्‍होंने ऐतिहासिक निर्णय, विमुद्रीकरण का उल्‍लेख करते हुए कहा कि इसके पिछले एक वर्ष में सुखद परिणाम सामने आये हैं। पिछले एक वर्ष में ईपीएफओ और ईएसआईसी के लाभान्वितों की संख्‍या 1 करोड़ से अधिक हो गई है। इस अवसर पर श्री गंगवार ने वीवीजीएनएलआई द्वारा प्रकाशित 4 पुस्तिकाओं को जारी किया और संस्‍थान के पुनर्निर्मित सेमिनार ब्‍लॉक का भी उद्घाटन किया।

 

श्रम और रोजगार मंत्रालय की सचिव श्रीमती साथियावती ने कहा कि रोजगार ढूंढने वाले युवाओं में प्रतिवर्ष 10 मीलियन युवा जुड जाते हैं। दुर्भाग्‍य से अनेक युवाओं में कौशल की कमी है। उन्‍होंने आगे कहा कि सरकार इस अंतर को समाप्‍त करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। हाल के वर्षों में 1.17 करोड़ युवाओं को विभिन्‍न कौशल विकास हेतु प्रशिक्षण दिया गया है और उद्योग जगत व संस्‍थानों में नौकरी प्राप्‍त करने के लिए 920 जॉब फेयर आयोजित किये गये हैं। गर्भवती महिलाओं को 26 सप्‍ताओं का मातृत्‍व अवकाश संबंधी अधिनियम का जिक्र करते हुए उन्‍होंने कहा कि अनेक रोजगार प्रदाता वेतन के साथ 26 सप्‍ताह का अवकाश देने के इच्‍छुक नहीं हैं। विशेषज्ञों को इस संबंध में सुझाव देना चाहिए।

वीवीजीएनएलआई के महानिदेशक डॉ. एच श्रीनिवास ने आईएलओ, नीति आयोग, दिल्‍ली विश्‍वविदयालय, मानव विकास संस्‍थान, कृषि मंत्रालय, डब्‍ल्‍यूसीडी और अन्‍य संस्‍थानों से आये विशेषज्ञों का स्‍वागत करते हुए कहा कि इस प्रयास से कुछ व्‍याव‍हारिक और फलदायक सुझाव सामने आयेंगे और इसे विचार करने व लागू करने के लिए श्रम व रोजगार मंत्रालय के समक्ष रखा जाएगा।

 

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वीके/जेके/सीएस – 5371

 


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