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भारतीय दिवाला एवं दिवालियापन बोर्ड (आईबीबीआई) ने दिवाला एवं दिवालियापन संहिता, 2016 के तहत अपनी व्यापक वाणिज्यिक आकलन रूपरेखा को सुदृढ़ किया 

प्रविष्टि तिथि: 07 NOV 2017 8:12PM by PIB Delhi

 भारतीय दिवाला एवं दिवालियापन बोर्ड (आईबीबीआई) ने अपनी कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया से जुड़े नियमों में संशोधन किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी प्रस्तावित योजना को मंजूरी देने से पहले व्यापक वाणिज्यिक आकलन के तहत प्रमोटरों सहित संबंधित आवेदक के पिछले रिकॉर्ड, ऋण पात्रता और विश्वसनीयता को ऋणदाताओं की समिति द्वारा अवश्य ही ध्यान में रखा जाए।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया से कोई विश्वसनीय एवं लाभप्रद प्रस्तावित योजना उभर कर सामने आए, भारतीय दिवाला एवं दिवालियापन बोर्ड ने  आईबीबीआई (कॉरपोरेट व्यक्तियों के लिए दिवाला समाधान प्रक्रिया) समाधान प्रक्रिया, 2016 (सीआईआरपी नियम) में संशोधन किए हैं।

संशोधित नियमों के तहत प्रस्ताव संबंधी प्रोफेशनलों के लिए यह सुनिश्चित कर दिया गया है कि ऋणदाताओं की समिति को पेश की गई प्रस्तावित योजना में प्रस्ताव के आवेदकों की विश्वसनीयता के आकलन के लिए प्रासंगिक ब्यौरा अवश्य होना चाहिए। इस संबंध में जो ब्यौरा देना होगा उसमें दोष साबित होने, अयोग्य करार दिए जाने, आपराधिक कार्यवाही, आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जानबूझकर डिफॉल्ट करने वाले के रूप में श्रेणीबद्ध किए जाने, सेबी द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने तथा पिछले दो वर्षों में कॉरपोरेट कर्जदार के साथ कोई लेन-देन करने संबंधी जानकारियां शामिल हैं।

उपर्युक्त संशोधन www.mca.gov.in और www.ibbi.gov.in पर उपलब्ध हैं, जिनसे अवगत होने के लिए अंग्रेजी के इन अनुलग्नकों को क्लिक करें

    

 

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वीके/आरआरएस/डीके–5374


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