राष्ट्रपति सचिवालय
अंतर्राष्ट्रीय सैन्य औषधि समिति की 42वीं विश्व कांग्रेस के समापन समारोह में माननीय राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द का संबोधन
प्रविष्टि तिथि:
24 NOV 2017 4:33PM by PIB Delhi
अंतर्राष्ट्रीय सैन्य. औषधि समिति (आईसीएमएम) की 42वीं विश्व कांग्रेस के समापन समारोह में माननीय राष्ट्र्पति श्री राम नाथ कोविन्द ने कहा कि मुझे आज समापन समारोह में उपस्थित होकर हर्ष का अनुभव हो रहा है। मुझे बताया गया कि सम्मेलन के दौरान 74 सदस्य देशों ने हिस्सा लिया। मैं सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए आईसीएमएम और भारतीय सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा को बधाई देता हूं।
राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि लगभग एक सदी से आईसीएमएम पूरी दुनिया में सैन्य औषधि के क्षेत्र में शानदार काम कर रहा है। अपने क्षेत्रीय और विश्व कांग्रेस के जरिये आईसीएमएम आदान-प्रदान और अर्थ पूर्ण सीख के लिए एक वैश्विक मंच उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि वर्दीधारी चिकित्सा सेवा प्रदाता अत्यंत कठिन हालात में भी शानदार काम कर रहे हैं।
राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि अपने क्षेत्रीय और विश्व कांग्रेस के जरिये आईसीएमएम आदान-प्रदान और अर्थ पूर्ण सीख के लिए एक वैश्विक मंच उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि आप लोग सैन्य औषधि, मानवीय सहायता, आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में बेहतरीन काम कर रहे है। सैन्य सेवा सेना के लिए एक महत्वपूर्ण स्तम्भ है। भारतीय सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा न केवल सशस्त्र सेनाओं को शानदार चिकित्सा सुविधा प्रदान करता है, बल्कि शांति और युद्ध काल में पूरे राष्ट्र की सेवा करता है। सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के कामों में लगा है तथा सेवारत सैनिकों और उनके परिजनों के साथ पूर्व सैनिकों को भी चिकित्सा सेवा प्रदान करता है।
श्री राम नाथ कोविन्द ने कहा कि मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि सम्मेलन में आपातकालीन औषधि, पर्यावरण संबंधी औषधि, जीवन शैली से संबंधित रोगों, महामारी फैलने की स्थिति का मुकाबला करने संबंधी विषयों पर चर्चा की गई। किसी भी देश का सैनिक उस देश का अत्यंत मूल्यवान और विशिष्ट नागरिक होता है। वह हर तरह के खतरे से देश को बचाने के लिए प्रतिबद्ध होता है। इसके लिए वह जान की बाजी लगाने से भी पीछे नहीं हटता। उन्होंने कहा कि मैं सशस्त्र बलों की बहादुर महिलाओं के हवाले से कहना चाहता हूं कि वर्दी में सुसज्जित महिलाएं हर तरह की भूमिका के लिए सशस्त्र बलों का महत्वपूर्ण अंग हैं। अब अधिक से अधिक देश महिलाओं को बड़ी से बड़ी जिम्मेदारियां देने के लिए आगे आ रहे हैं। भारत में भी महिलाएं सशस्त्र बलों में शामिल होकर देश की सेवा कर रही हैं।
राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि महिलाएं भारतीय सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा में मेडिकल, डेन्टल और नर्सिंग अधिकारियों के तौर पर स्वतंत्रता के बाद से ही हिस्सा लेती रही हैं। उन्होंने अत्यन्त कठिन परिस्थितियों में भी शानदार काम किया है।
अंत में मैं आईसीसीएम विश्व कांग्रेस को उसके भावी प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देता हूं और यह आश्वस्त करता हूं कि भारत इस दिशा में अपना पूरा सहयोग और समर्थन देता रहेगा। मैं इस सम्मेलन की मेज़बानी करने के लिए भारतीय सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा को एक बार फिर बधाई देता हूं।
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वीके/एकेपी/जीआरएस- 5588
(रिलीज़ आईडी: 1510789)
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