वित्त मंत्रालय
केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली ने विभिन्न ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ आज दिल्ली में बजट पूर्व दूसरी परामर्श बैठक की
श्री जेटली ने श्रमिकों विशेष रूप से एमएसएमई और असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले कामगारों के हितों की रक्षा के लिए वर्तमान सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया
प्रविष्टि तिथि:
05 DEC 2017 5:12PM by PIB Delhi
केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्री अरूण जेटली ने कहा कि वर्तमान सरकार श्रमिकों विशेष रूप से एमएसएमई और असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले कामगारों के हितों की रक्षा के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। वित्त मंत्री ने कहा कि कामगारों को कानून में निर्दिष्ट न्यूनतम वेतन पाने का हक है और उन्होंने सभी संबंधित उद्योगों से बिना कोताही बरते सख्ती से इस नियम का पालन करने को कहा। वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली आज यहां विभिन्न श्रमिक संगठनों (ट्रेड यूनियन) के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व परामर्श समिति की दूसरी बैठक में बोल रहे थे।
इस बजट पूर्व परामर्श बैठक में वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली, ट्रेड यूनियन समूहों के प्रतिनिधि, वित्त राज्य मंत्री श्री शिव प्रताप शुक्ला, सचिव, व्यय श्री ए एन झा, सचिव (आर्थिक मामले) श्री सुभाष चन्द्र गर्ग, श्रम और रोजगार मंत्रालय में सचिव, श्रीमती एम सत्यवती, सीबीईसी की अध्यक्ष सुश्री वंजा एन सरना, मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) डॉ. अरविन्द सुब्रमण्यन, श्रम और रोजगार मंत्रालय में अपर सचिव श्री अरूण गोयल, वीवी गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान के श्री मनीष कुमार गुप्ता और श्रम ब्यूरो के महानिदेशक श्री प्रीतम सिंह तथा अन्य व्यक्ति उपस्थित थे।
उपरोक्त बैठक में विभिन्न ट्रेड समूह के प्रतिनिधियों में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के श्री के लक्ष्मण रेड्डी, नेशनल, इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आईएनटीयूसी) के श्री के.के. नायर, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) के श्री सुकुमार दामले, हिंद मजदूर सभा (एचएमएस) के श्री हरभजन सिंह सिद्दू, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स की डॉक्टर हेमलता, ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर के श्री शंकर शाह, ट्रेड यूनियन कॉर्डिनेशन सेंटर के श्री एस पी तिवारी, सेल्फ एम्प्लाइड वूमन्स एसोसिएशन की सुश्री ज्योति मकवान और मनाली शाह, ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन के श्री संतोष रॉय, लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपलएफ) के श्री एम शनमुगम, यूनाइटेड ट्रेड यूनियन के श्री अशोक कुमार घोष, नेशनल फ्रंट ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स के श्री दीपक जायसवाल शामिल थे।
विभिन्न ट्रेड यूनियन समूहों के प्रतिनिधियों से कई सुझाव प्राप्त हुए। ट्रेड यूनियनों में से 9 यूनियनों ने अपने कामगारों की ओर से संयुक्त आम ज्ञापन दिया। उनके ज्ञापन में 12 मांगे थी। मुख्य मांगों में स्थास्थ्य और पर्यटन सुरक्षा सहित सामाजिक क्षेत्र में बजटीय आबंटन बढाने की मांग शामिल थी। इसके अलावा भुगतान करने की क्षमता रखने वाले अमीर लोगों पर कर लगाकर आवश्यक वित्तीय संसाधन जुटाना, जान बूझकर कर और ऋण का भुगतान न करने वालों के खिलाफ प्रभावी उपाय, सामाजिक सुरक्षा के आवश्यक अंग के रूप में सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन और इसे 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के आधार पर तय किया जाएगा तथा यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जुड़ा होगा, सरकारी कर्मचारियों की 7वें वेतन आयोग से संबंधित मांगों का निपटान, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों की बढ़ोत्तरी को कम करने के उपाय, स्पेक्यूलेटिव फॉरवर्ड ट्रेडिंग पर प्रतिबंध, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के विनिवेश और सामरिक बिक्री पर रोक, रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए बुनियादी ढांचा, सामाजिक क्षेत्रों और कृषि क्षेत्र में भारी निवेश, पूंजीगत वस्तुओं को विनियमित करने और डंपिंग को रोकने के लिए औद्योगिक वस्तुओं का आयात बढ़ाना, सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को कवर करने के लिए मनरेगा पर व्यय बढ़ाना, स्थायी नौकरी पर कोई अनुबंध/आकस्मिक श्रमिकों को तैनात नहीं करना, स्थायी कर्मियों के समान कार्य करने वाले अनुबंध/आकस्मिक श्रमिकों को 'समान काम के लिए समान वेतन' के सिद्धांत के अनुरूप नियमित श्रमिकों के समान मजदूरी और लाभों का भुगतान करना, रक्षा उत्पादन, रेलवे, खुदरा व्यापार और वित्तीय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति नहीं देना, रक्षा क्षेत्र के निजीकरण को रोकना, भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं में तैनात श्रमिकों को नियमित करना, सरकार को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के प्रस्ताव 189 में संशोधन करना चाहिए और केंद्रीय कानून बनाना तथा घरेलू कामगारों के लिए सहायता प्रणाली विकसित करना, श्रम कानूनों में सुधार करना, सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए गैर-संगठित क्षेत्र के कर्मियों के लिए राष्ट्रीय कोष बनाना, सभी के लिए 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन और नई पेंशन योजना (एनपीएस) वापस ली जाए, गरीबों के लिए अधिक प्रभावी, सुलभ और किफायती परिवहन के लिए रेलवे को संसाधनों का पर्याप्त आवंटन और ग्रैच्युटी को 20 लाख रुपए तक बढ़ाना तथा अन्य सेवाओं में पूरे वर्ष में 30 दिन की मजदूरी देना शामिल है।
अन्य मांगों में वेतनभोगी वर्ग के व्यक्तियों और पेंशनरों के लिए आयकर की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख प्रतिवर्ष तक करना तथा वरिष्ठ नागरिकों के मामले में 8 लाख करना शामिल है। अन्य सुझावों में अमीर और गरीबों के बीच के आय के अंतर को कम करने के लिए भुगतान करने योग्य अमीर लोगों से कर वसूलना, असंगठित क्षेत्र के कामगारों को ईपीएफ का लाभ देना तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र में सुधार करना शामिल है।
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वीके/एएम/एमके/एस–5742
(रिलीज़ आईडी: 1511969)
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