उप राष्ट्रपति सचिवालय
उपराष्ट्रपति ने सुब्रमण्य भारती के जयंती समारोह को किया
संबोधित, कहा- सुब्रमण्य भारती भारत में संकीर्ण अंदरूनी भेदों को समाप्त करना चाहते थे
प्रविष्टि तिथि:
10 DEC 2017 12:25PM by PIB Delhi
उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि गुरु देव रवींद्रनाथ टैगोर की तरह सुब्रमण्य भारती, भी भारत से संकीर्ण अंदरूनी भेदों को खत्म करना चाहते थे। श्री एम वेंकैया नायडू आज चेन्नई में महान राष्ट्रीय कवि सुब्रमण्य भारती के जयंती समारोह में एक सभा को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल, श्री बनवारलाल पुरोहित और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें भारती और महाकवि 'का शीर्षक दिया गया था। दोनों ही उनकी कविता और उनके भाषणों के माध्यम से पत्रों की दुनिया में उनके असाधारण योगदान को दर्शाते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि सही मायने में ज्ञान की देवी आशीर्वाद प्राप्त था।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनकी 'स्वतंत्रता' का सपना व्यापक अर्थों में था। वह न केवल वह स्वतंत्रता संग्राम में शामिल रहे बल्कि निरंतर विदेशी शासन के खिलाफ लड़ते रहे। वह चाहते थे कि भारत भूख, लिंग भेदभाव, अस्पृश्यता, अशुद्ध वातावरण, संकीर्ण भाषाई और धार्मिक धर्मान्धता से मुक्त हो।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारतीयों को उनकी समृद्ध विरासत और भाषा पर गर्व होना चाहिए और साहित्य इस विरासत का एक अभिन्न अंग है। उन्होंने भारत की विविधता को सराहा और सभी भाषाओं से प्रेम किया और तेलुगू को 'सुंदर तेलुगु' के रूप में वर्णित किया।
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वीके/एसएस/आरके- 5798
(रिलीज़ आईडी: 1512174)
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