कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) पदोन्‍नति से भरे जाने वाले रिक्‍त पदों को भरने की हर संभव प्रयास कर रहा है—डॉ. जितेन्‍द्र सिंह

प्रविष्टि तिथि: 11 DEC 2017 11:29AM by PIB Delhi

केन्‍द्रीय उत्‍तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्‍यमंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष मंत्री डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा है कि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) खाली पड़े पदों को भरने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है जिनकी संख्‍या साल-दर-साल बढ़ती जा रही है। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व वाली सरकार भ्रष्‍ट और नाकारा अधिकारियों को कतई बरदाश्‍त न करने की नीति पर चल रही है और इसके साथ ही वह अच्‍छा कार्य करनेवाले निष्‍ठावान अधिकारियों को पूरा संरक्षण भी दे रही है।

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह आज यहां उनसे मुलाकात के लिए आए केन्‍द्रीय सचिवालय के कर्मचारियों के एक शिष्‍टमंडल के साथ बातचीत कर रहे थे। इस शिष्‍टमंडल ने कनिष्‍ठ श्रेणी के कर्मचारियों को समय पर पदोन्‍नति न मिल पानेके मामलों में हस्‍तक्षेप करने का आग्रह किया। उन्‍होंने केन्‍द्रीय सचिवालय एमटीएस एसोसिएशन की ओर से एक ज्ञापन डॉक्‍टर जितेन्‍द्र सिंह को सौंपा जिसमें कहा गया था कि भारत सरकार के निम्‍नतम स्‍तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को अपनी समूची सेवा अवधि के दौरान एक भी पदोन्‍नति नहीं मिल पाती।

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि प्रशासनिक सुविधा और पैनलबद्ध करने में निष्‍पक्षता को ध्‍यान में रखते हुए सरकार ने पिछले तीन साल में प्रक्रियाओं को आसान बनाया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पदोन्‍नति किसी व्‍यक्तिविशेष की मर्जी से न हों। उन्‍होंने बताया कि इस संबंध में परिष्‍कृत टेक्‍नोलाजी की मदद से प्रक्रियाओं को हाई-टेक बना दिया गया है ताकि मानवीय हस्‍तक्षेप की कम से कम गुंजाइश बची रहे।

उन्‍होंने कहा कि अतीत में हर सरकार इस बात का श्रेय लेती रही है कि उसने नये नियम या कानून बनाए हैं, मगर इस सरकार ने ऐसे करीब 1500 नियमों को हटा दिया जो या तो पुराने पड़ चुके थे या समय बीतने के साथ-साथ उनकी उपयोगिता नहीं रह गयी थी। उन्‍होंने कहा कि इस समूची कार्रवाई का उद्देश्‍य सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि जनता को कारगर तरीके से और समय पर अच्‍छे नतीजे मिलें और साथ ही कर्मचारियों को भी अपनी क्षमता के अनुसार बेहतरीन कार्य निष्‍पादन का अवसर प्राप्‍त हो।

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि प्रशासन के सबसे निचले स्‍तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को उनके समूचे 30-35 साल के सेवाकाल में एक भी पदोन्‍नति न मिलने का कोई मामला जब कभी उनके सामने आता है वे विचलित हो जाते हैं। उन्‍होंने कहा कि इस बारे में मंत्रालय के सभी वरिष्‍ठ अधिकारियों के साथ उन्‍होंने चर्चा की है और प्रशासन के निचले तथा बीच के स्‍तर पर ठहराव को रोकने के लिए कई नये उपाय किये जा रहे हैं।

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कर्मचारियों अदालती कार्रवाई की वजह से बड़ी संख्‍या में कर्मचारियों को पदोन्‍नति न मिल पाने पर भी खेद व्‍यक्‍त किया और कहा कि हालांकि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग अदालत में अपना पक्ष प्रस्‍तुत करने में कोई कसर नहीं छोड़ता मगर मुकदमेबाज़ी से देरी होना स्‍वाभाविक है।

 

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वीके/एएम/आरयू/एसके-5813


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