सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
वर्षांत समीक्षा-2017 : सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
2017 महत्वाकांक्षी शुरूआतों और इंजीनियरिंग चमत्कार का वर्ष
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के कार्यों की विशेषताएं
प्रविष्टि तिथि:
04 JAN 2018 4:57PM by PIB Delhi
सूची
1. प्रस्तावना
2. राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण
3. सड़क सुरक्षा
4. हरित पहलें
5. ई-पहलें
6. अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियां
7. अन्य
1 प्रस्तावना
1.1 सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के लिए वर्ष 2017 प्रमुख वर्ष रहा है। जहां 2014 से 2016 तक की अवधि का उपयोग सुधार लाने और दिशा बदलने के उद्देश्य से किया गया था। वहीं 2017 में एकीकरण, समापन और राजमार्ग क्षेत्र के लिए नए रोड़ मैप शुरू किये गए थे। क्षेत्र के तेजी से होते विकास को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2016-17 में राजमार्ग ढांचागत विकास क्षेत्र की सराहना करते हुए कहा कि इसके लागत और समय में 1.5 बिलियन रूपये की कमी आई है और प्रतिदिन अतिरिक्त सड़क निर्माण सहित राजमार्ग परियोजनाओं के आवंटन और निर्माण कार्य सबसे अधिक हुआ है। इसमें बताया गया है कि मूल्य और संख्या की दृष्टि से लंबित परियोजनाएं कम हुई हैं। 16 नवंबर, 2017 को भारत की संप्रभु (साव्रिन) रेटिंग बीएए3 सकारात्मक से ऊपर बीएए2 स्थिर करने के बाद रेटिंग जारी करने वाली मूडीज निवेशक सेवा ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की रेटिंग में सुधार कर इसे बीएए3 सकारात्मक से बीएए2 स्थिर स्तर की श्रेणी रखा।
1.2 2017 में कई प्रमुख कार्य हुए। यह वर्ष इंजीनियरिंग चमत्कार का रहा और असम में धोला सादिया पुल और जम्मू-कश्मीर में चेनानी नाशरी टनल दूरदराज के क्षेत्रों को जोड़ने के लिए खोले गए जिससे उस क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस वर्ष में ही महत्वपूर्ण ढांचागत कमियों को दूर कर देशभर में सड़क परिवहन की दक्षता बढ़ाने के लिए देश के सबसे बड़े राजमार्ग विकास कार्यक्रम भारतमाला परियोजना का शुभारंभ हुआ। सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी हमने पाया कि सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आई।
1.3 बहु-आयामी परिवहन विकास के क्षेत्र में प्रगति के कारण वर्ष 2017 को देश की परिवहन योजनाओं के लिए क्रांतिकारी समय के रूप में देखा जा सकता है। केंद्रीय बजट 2017-18 में संपूर्ण परिवहन क्षेत्र के लिये व्यापक बजट के वास्ते आधार तय किया गया था। मंत्रालय ने मई 2017 में भारत एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स सम्मेलन आयोजित कर इस विचार को और आगे बढ़ाया तथा रेलवे, सड़क, जलमार्ग और नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में निवेश में अधिक तालमेल के साथ बहुआयामी परिवहन योजना को सक्रियता से बढ़ावा दिया।
1.4 2017 में मंत्रालय और इसके परियोजना कार्यान्वित करने वाले संगठनों ने पिछले वर्ष के अच्छे कार्यों को ओर आगे बढ़ाते हुए देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों के नेटवर्क को फैलाया, इन राजमार्गों को यात्रियों के लिये सुरक्षित बनाने के लिये कई कदम उठाये और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के प्रयास किए गए। इस वर्ष के दौरान मंत्रालय द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित हैं:
2 राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण
2.1 आवंटन/निर्माण आंकड़े
मांग, भूमि की उपलब्धता और अनुबंधों के प्रबंधन का परिणाम पर आवंटन और निर्माण गतिविधि निर्भर होती है। मार्च 2017 में सबसे अधिक 15948 किलोमीटर के सड़क निर्माण के लिए आवंटन और 8231 किलोमीटर निर्माण किया गया। इस वर्ष के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की विस्तृत जानकारी निम्नलिखित तालिका में दी गई हैं: -
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वर्ष
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आवंटन (किलोमीटर)
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निर्माण (किलोमीटर)
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2014-15
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7972
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4410
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2015-16
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10098
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6061
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2016-17
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15948
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8231
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टिप्पणी: 2017-18 का कार्य प्रगति पर है और भारतमाला परियोजना और उसके स्वरूपों के संपन्न होने के साथ ही आवंटन और निर्माण गतिविधियां समन्वित दिशा में केंद्रित है।
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2.2 नए कार्यक्रम, परियोजनाएं और संरचनाएं
i. भारतमाला परियोजना:पहला चरण
यह राजमार्ग क्षेत्र के लिए नया महत्वपूर्ण कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण ढांचागत कमियों को दूर कर देशभर में सड़क परिवहन यातायात की दक्षता को बढ़ाना है। इस कार्यक्रम के तहत विशेष ध्यान आर्थिक गतिविधि के क्षेत्रों, धार्मिक और पर्यटक स्थलों के हित, सीमा क्षेत्रों, पिछड़े तथा जनजातीय क्षेत्रों, तटीय इलाकों और पड़ोसी देशों के साथ व्यापारिक मार्गों को जोड़ने की आवश्यकता को पूरा करने पर दिया गया है। बहुआयामी समेकन इस कार्यक्रम का महत्वपूर्ण केंद्रबिंदु है। राष्ट्रीय गलियारा की क्षमता बढ़ाने के लिए कुल लगभग 53,000 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्गों को चिन्हित किया गया है जिसमें से 24,800 किलोमीटर का कार्य पहले चरण में किया जाएगा। यह कार्य 5 वर्ष की अवधि में यानि 2017-18 से 2021-22 तक चरणबद्ध तरीके से कार्यान्वित किया जाएगा। इनमें 5000 किलोमीटर के राष्ट्रीय गलियारे, 9000 किलोमीटर के आर्थिक गलियारे, 6000 किलोमीटर के फीडर कॉरीडोर और इंटर कॉरीडोर, 2000 किलोमीटर की सीमा सड़क, 2000 किलोमीटर की तटीय सड़क और बंदरगाह संपर्क सड़क और 800 किलोमीटर के ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे शामिल हैं। भारतमाला के पहले चरण के लिए कुल लगभग 5,35000 करोड़ रूपये के कोष का प्रावधान है। भारतमाला परियोजना देश के आर्थिक विकास के लिए प्रमुख संचालक है। अनुमान है कि इस कार्यक्रम के पहले चरण के तहत कार्यदिवस में 35 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।
ii चेनानी नाशरी सुरंग
जम्मू और कश्मीर में उधमपुर तथा रामबन के बीच दो ट्यूब वाली सभी मौसम के अनुकूल 9 किलोमीटर लंबी सुरंग सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्किल इंडिया’ पहल का आदर्श उदाहरण है। यह सुरंग न केवल देश की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग है बल्कि एशिया की सबसे लंबी दोनों दिशाओं में परिवहन की राजमार्ग सुरंग है। हिमालय के सबसे कठिन क्षेत्रों में 1200 मीटर की ऊंचाई पर बनी इस सुरंग के 41 किलोमीटर लंबी सड़क के बाईपास होने से जम्मू और श्रीनगर के बीच की यात्रा का समय 2 घंटे कम हो गया है। इस मार्ग पर किसी भी मौसम में यात्रा की जा सकती है,जहां पहले अक्सर भूस्खलन, बर्फ, संकरे मोड़ और वाहनों के खराब होने तथा दुर्घटना के कारण ट्रेफिक जाम की समस्या रहती थी। इस सुरंग का निर्माण लगभग 3,720 करोड़ रूपये की लागत से किया गया है और यह जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के चार लेन की 286 किलोमीटर लंबी परियोजना का हिस्सा है।
iii धोला सादिया पुल
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 26 मई, 2017 को असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर देश के सबसे लंबे 9.15 किलोमीटर धोला सादिया पुल का उद्घाटन किया था। इस पुल से ऊपरी असम और अरूणाचल प्रदेश के उत्तरी भाग के बीच 24 घंटे सातों दिन संपर्क सुनिश्चित हुआ है। इससे पहले यहां नौकाओं के जरिए ही केवल दिन में ही यात्रा की जाती थी और यह मार्ग भी बाढ़ के दौरान बंद हो जाता था। इससे दोनों राज्यों के बीच दूरी और यात्रा का समय काफी कम हो गया है। असम में एनएच-37 पर रूपाई से अरूणाचल प्रदेश में एनएच-52 पर मेका/रोइंग के बीच की दूरी 165 किलोमीटर कम हुई है। दोनों स्थानों के बीच की यात्रा का समय 6 घंटे के स्थान पर 1 घंटे का हो गया है यानि कुल 5 घंटे का समय बचता है।
iv भरूच में नर्मदा नदी पर एक्स्ट्रा-डोज्ड ब्रिज
9 मार्च, 2017 को प्रधानमंत्री द्वारा भरूच में नर्मदा नदी पर चार लेन के नए एक्स्ट्रा-डोज्ड ब्रिज का उद्घाटन किया गया था। इससे एनएच-8 के वडोदरा, सूरत खंड पर यात्रा करने वाले लोगों को काफी राहत मिली है। 1.4 किलोमीटर के ‘एक्स्ट्रा-डोज्ड’ केबल पर आधारित यह पुल देश में सबसे लंबा और हुगली में निवेदिता सेतु के बाद देश का दूसरा ऐसा पुल है।
v कोटा में चंबल नदी पर पुल
29 अगस्त, 2017 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कोटा में चंबल नदी पर 6 लेन के केबल आधारित पुल का उद्घाटन किया था। 2778 करोड़ रूपये की लागत से बने इस पुल से पूर्व-पश्चिम कॉरीडोर का निर्माण कार्य संपन्न हो गया है।
2.3 कार्यान्वित किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों/परियोजनाओं की स्थिति/प्रगति
i चारधाम महामार्ग विकास परियोजना
इस परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड के प्रमुख चारधामों यानि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ तक सुगम पहुंच विकसित करना। ये चारों धाम प्रमुख धार्मिक केंद्र है। इस परियोजना के तहत अनुमानित लगभग 1200 करोड़ रूपये की लागत से दो लेन की 889 किलोमीटर की सड़क का निर्माण किया जाएगा। अब तक 24 कार्य दिवसों के लिए 395 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए आवंटन किया गया है। 340 किलोमीटर के सड़क निर्माण के लिए 22 कार्य दिवस का आवंटित किया गया है। इस परियोजना को मार्च 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
ii ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे-वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे
एनएच-1 (कुंडली के नजदीक) से शुरू होकर एनएच-2 (पलवल के नजदीक) समाप्त होने वाले ईस्टर्न पेरीफेरल (पूर्वी परिधीय) एक्सप्रेसवे (ईपीई) और वेस्टर्न पेरीफेरल (पश्चिमी परिधीय) एक्सप्रेसवे (डब्ल्यूपीई) की दिल्ली के आसपास की पेरीफेरल एक्सप्रेसवे परियोजना का उद्देश्य दिल्ली को बाईपास कर यहां की भीड़भाड़ को कम करना और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण के स्तर को कम करना है। ईपीई भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा जबकि डब्ल्यूपीई हरियाणा सरकार द्वारा विकसित किया जा रहा है। इनमें से प्रत्येक एक्सप्रेसवे 135 किलोमीटर लंबा है और ये दिल्ली के लिए 270 किलोमीटर के बाहरी मुद्रिका सड़क से मिलती हैं। ये पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पहुंच नियंत्रित 6 लेन की सड़कें होंगी। 6 पैकेज में किया जा रहा कार्य मार्च 2018 से पहले संपन्न हो जाएगा।
iii दिल्ली मेरठ एक्स्प्रेसवे
दिल्ली मेरठ एक्स्प्रेसवे (डीएमई) का उद्देश्य दोनों शहरों के बीच त्वरित संपर्क उपलब्ध कराना है। डीएमई दिल्ली के निजामुद्दीन पुल से शुरू होकर मौजूदा एनएच-24 से होकर डासना तक है। डीएमई का एक भाग एनएच-24 पर डासना से हापुड़ तक जायेगा जबकि डासना से मेरठ तक हरित पट्टी की योजना है। 14 लेन के 8.7 किलोमीटर का निर्माण कार्य इसकी निर्धारित समापन अवधी 30 महीने की तुलना में लगभग 15 महीने के रिकॉर्ड समय में ही पूरा किया जा रहा है। निजामुद्दीन पुल से उत्तर प्रदेश सीमा तक की दूरी में 14 लेन के प्रावधान के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के कई उपाय किये गये हैं। इनमें राजमार्ग के दोनों ओर 2.5 मीटर चौड़ा साइकिल ट्रैक, यमुना के पुल पर बगीचा, सौर बिजली प्रणाली और ड्रीप सिंचाई के जरिये पौधों को पानी देना शामिल हैं।
iv वडोदरा-मुंबई एक्स्प्रेसवे
473किलोमीटर का वडोदरा-मुंबई एक्स्प्रेसवे अहमदाबाद-वडोदरा एक्स्प्रेसवे को मुंबई-पुणे एक्स्प्रेसवे से जोड़ेगा और इससे लगभग 650 किलोमीटर तक अहमदाबाद और पुणे के बीच एक्स्प्रेसवे संपर्क उपलब्ध होगा। यह परियोजना तीन चरणों में पूरी की जायेगी। पहले और दूसरे चरण के लिये भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण संबंधी मंजूरी आदि ली जा चुकी हैं। प्रथम चरण के पहले पैकेज के लिये निविदा बोलियां भी आमंत्रित की गई हैं।
v बंगलोर-चेन्नई एक्स्प्रेसवे (262 किलोमीटर)
बंगलोर-चेन्नई एक्स्प्रेसवे हरित पट्टी सड़क मार्ग है जो बंद टोल प्रणाली द्वारा संचालित होगा। बंगलोर-चेन्नई को जोड़ती हुई दो सड़कें हैं, जिनमें से एक होसकोट (बंगलोर)- आंध्र प्रदेश से होकर चेन्नई और दूसरी इलेक्ट्रॉनिक शहर (बंगलोर) से होकर होसूर (तमिलनाडु) और फिर चेन्नई तक है। भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण और निर्माण पूर्व अन्य गतिविधियों पर कार्य चल रहा है।
vi बायेट द्वारका –ओखा पुल
मंत्रालय ने ओखा के मैदान क्षेत्र को गुजरात के तटीय बायेट-द्वारका द्वीप से जोड़ने के लिए चार लेन के महत्वपूर्ण पुल का निर्माण शुरू किया है। इस पुल की लंबाई 2.32 किलोमीटर होगी। यह परियोजना 1 जनवरी, 2018 को 689.47 करेाड़ रूपये की लागत से आवंटित की गई थी। यह 500 मीटर का देश का सबसे लंबा केबल आधारित पुल होगा। यह परियोजना 3 महीनों में पूरी की जाएगी।
2.4 भारतमाला परियोजना के पहले चरण के तहत नए एक्सप्रेसवे की योजना
(i) दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे
(ii) दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे
(iii) वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे
(iv) हैदराबाद- विजयवाड़ा- अमरावती (एचवीए) एक्सप्रेसवे
(v) नागपुर-हैदराबाद-बैंगलोर (एनबीएच) एक्सप्रेसवे
(vi) कानपुर लखनऊ (केएल) एक्सप्रेसवे
(vii) अमरावती में रिंग रोड/एक्सप्रेसवे
2.5 भारतीय पुल प्रबंधन प्रणाली (आईबीएमएस)
मंत्रालय ने पुलों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने निर्माण जैसी बनी सभी संरचनाओं की सुविधा के लिए भारतीय पुल प्रबंधन प्रणाली (आईबीएमएस) की नई पहल की है। सलाहकारों ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है और राष्ट्रीय राजमार्गों के मौजूदा पुलों की स्थ्िाति का आकंलन भी कर लिया गया है। कुल 147 पुलों के तुरंत जीर्णोंद्धार या नए बनाने के लिए चिन्हित किया गया है।
2.6 सेतु भारतम
सुरक्षित और सुविधाजनक यातायात सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय ने सेतु भारतम योजना के तहत आरओबी/ आरयूबी द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों की लेवल क्रॉसिंग को बदलने की योजना बनाई है। इस कार्यक्रम के तहत एनएचडीपी जैसे अन्य कार्यक्रमों के बाहर के लेवल क्रॉसिंग पर 20800 करोड़ रूपये अनुमानित लागत से 208 आरओबी/आरयूबी का निर्माण किया जाएगा।
2.7 राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए वित्तीय मॉडल और अन्य नीतियां
I. लंबित पड़ी परियोजनाओं को शुरू करने के उपाय
मंत्रालय ने आवंटन और नई परियोजनाओं के साथ चल रही परियोजनाओं को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया है। 1,00000 करोड़ रूपये के अनुमानित निवेश की कुल 73 परियोजनाओं (8187 किलोमीटर) को बंद पड़ी या लंबित परियोजनाओं के रूप में चिन्हित किया गया है। देरी के कारणों का पता लगाया गया है और इसके निराकरण के लिए नीति बनाई गई है। इनमें (क) एक बार कोष देने की योजना (ओटीएफआईएस) जिसमें एनएचएआई द्वारा ठेकेदार//रियायत पाने वाले को कार्यकारी पूंजी ऋण के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, (ख) तर्कसंगत मुआवजा जिसमें बीओटी (वार्षिकी) परियोजनाओं में रियायत पाने वाले को देरी की वजह से होने वाले वार्षिक भत्ते के बराबर एक बार मुआवजा देना (ग) रियायत अवधि का विस्तार शामिल हैं।
ii टोल संचालित हस्तांतरण (टीओटी)
मंत्रालय टोल संचालित हस्तांतरण (टीओटी) योजना के जरिए सार्वजनिक कोष से अपनी सड़क संपत्तियों का निर्माण कर रहा है। इस योजना के तहत 30 वर्ष की रियायती अवधि के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए बोलियां लगाई जा रही है। 9 राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए पहली बोली आमंत्रित की गई है जिसे 9 जनवरी, 2018 तक प्राप्त की जाएगी।
iii मसाला बांड्स
एनएचएआई ने कोष बढ़ाने के लिए मई 2017 में लंदन स्टॉक एक्सचेंज में मसाला बांड्स जारी किए। काफी निवेशकों ने इन बांडों के प्रति रूचि प्रदर्शित की। एनएचएआई के मसाला बांड को वर्ष 2017 के सर्वोत्तम बांड के रूप में दर्ज किया गया है।
iv बहुआयामी परिवहन प्रणाली की योजना
3 से 5 मई, 2017 तक नई दिल्ली में भारत एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स सम्मेलन का आयोजना किया गया था। इसमें भारत और विदेश के लगभग 3000 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था जिनमें केंद्र और राज्य सरकारों के संगठन तथा विश्व बैंक और एशिया विकास बैंक (एडीबी) जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन शामिल थे। सम्मेलन के अंत में लगभग 2,00000 करोड़ रूपये के 34 एमओयू किए गए।
v विकेंद्रीयकरण और प्रशासनिक उपाय
(क) एनएचएआई बोर्ड को परियोजनाओं विशेष रूप से ईसीपी और सभी पीपीपी (बीओटी) परियोजनाओं के लिए मंजूरी देने के अधिकार बढ़ाये गए। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
(ख) विभिन्न प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से राज्य पीडब्ल्यूडी और मंत्रालय के कुछ फील्ड अधिकारियों के जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों की परियोजनाओं की कार्यान्वयन की मंजूरी और आवंटन के अधिकार देना।
3. सड़क सुरक्षा
3.1 सड़क दुर्घटनाओं व मृतकों की संख्या में कमी:
मंत्रालय सड़क हादसों में कमी लाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए बहु-आयामी प्रयास की आवश्यकता है जैसे वाहन सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करना, सड़क संरचना को बेहतर बनाना, जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना, कार्यान्वयन को मजबूत करना तथा आकस्मिक आघात देखभाल कार्यक्रम को सुसंगत बनाना। मंत्रालय के ठोस प्रयासों से सड़क हादसों की संख्या में कमी आई है। भारत में सड़क दुर्घटनाएं- 2016 रिपोर्ट के अनुसार 2016 में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में 4.1 प्रतिशत की कमी आई है। सितंबर, 2017 तक सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में 5.2 प्रतिशत तथा मृतकों की संख्या में 4.4 प्रतिशत की कमी आई है। असम, बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त सभी राज्यों में सड़क दुर्घटनाओं में 2 से 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
3.2 दुर्घटना रिपोर्ट का नया प्रारूप:
एक मजबूत सड़क सुरक्षा कार्रवाई योजना के लिए एक विश्वसनीय डेटाबेस की आवश्यकता है। इसलिए रिपोर्ट करने के वर्तमान स्वरूप को विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर संशोधित किया गया है। इस विशेषज्ञ समिति में आईआईटी दिल्ली, आईआईटी खड़गपुर, विश्व स्वास्थ्य संगठन, पुलिस और परिवहन विभागों तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। दुर्घटना रिपोर्ट के नये प्रारूप को सभी राज्यों ने अपनाया है। नया प्रारूप आने वाले वर्षों में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण जोखिम वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा।
3.3 ब्लैक स्पॉटों का सुधार
मंत्रालय ने अब तक 789 दुर्घटना जोखिम वाले ब्लैक स्पॉटों की पहचान की है। इनमें से 189 ब्लैक स्पॉट का सुधार किया जा चुका है और 256 ब्लैक स्पॉटों के सुधार के लिए निविदा प्रक्रिया विभिन्न चरणों में है।
3.4 वाहन चालकों का प्रशिक्षण
मंत्रालय राज्यों, वाहन निर्माताओं और स्वयंसेवी संगठनों के साथ वाहन चालकों के प्रशिक्षण के लिए कार्य कर रहा है। विभिन्न राज्यों में वाहन चालन प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थानों की स्थापना की गई है जो मॉडल केन्द्र के रूप में कार्य करेंगे। मंत्रालय की योजना देश के सभी जिलों में वाहन चालक प्रशिक्षण केन्द्र खोलने की है।
3.5 वाहनों की योग्यता जांच के लिए मॉडल स्वचालित केन्द्र
मंत्रालय ने व्यावसायिक वाहनों की जांच तथा प्रमाणन के लिए 20 केन्द्रों की मंजूरी दी है। यह केन्द्र स्वचालित प्रक्रिया के तहत कार्य करेंगे। ऐसे 6 केन्द्र अभी संचालन में हैं।
3.6 वाहनों की सुरक्षा के लिए नए कदम
i. दुपहिया वाहन : दुर्घटनाओं के बड़े हिस्से का कारण दुपहिया वाहन है। इसकी मुख्य वजह दुपहिया वाहनों का फिसलना है। दुपहिया चालकों के अमूल्य जीवन को सुरक्षित रखने के लिए 1 अप्रैल 2019 से सभी दुपहिया वाहनों में एंटी लॉक ब्रेकिंग प्रणाली (एबीएस) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे दुपहिया चालकों की सुरक्षा बेहतर होगी।
ii. कार : सभी यात्री कारों में सुरक्षा और स्थिरता बेहतर करने के लिए एबीएस लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। कार निर्माताओं को कार में अतिरिक्त सुरक्षा प्रणाली लगाना अनिवार्य कर दिया गया है जो 1 जुलाई 2019 से प्रभावी होगी। इसके अंतर्गत एयर बैग, गति चेतावनी (ऑडियो अलर्ट), सीट बैल्ट (ऑडियो अलर्ट) शामिल हैं।
3.7 निशुल्क नेत्र जांच शिविर
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और एनएचएआई ने पूरे देश में नेत्र जांच शिविरों का आयोजन किया है। 2 अक्टूबर 2017 को नागपुर बाईपास के पंजरी टोल प्लाजा में ट्रक चालकों, क्लिनरों और सहायकों के बीच चश्मों का वितरण किया गया। राष्ट्रीय राजगार्मों पर 50 नेत्र जांच शिविर लगाये गये। 5000 से अधिक वाहन चालकों ने नेत्र जांच के लिए पंजीकरण कराया और 3000 से अधिक चश्मे वितरित किये गये।
3.8 यात्री की सुरक्षा और संरक्षा
यात्रियों विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा व संरक्षा के लिए सभी व्यावसायिक बसों और टेक्सियों में जीपीएस उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
3.9 मोटर वाहन संशोधन बिल 2017
मंत्रालय ने सड़क हादसों की संख्या में कमी लाने के लिए मंत्रियों के एक समूह का गठन किया था। मंत्रीसमूह की सिफारिशों के आधार पर मंत्रालय ने 9 अगस्त 2016 को लोक सभा में मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2016 प्रस्तुत किया। अधिनियम में अधिक जुर्माने, लाइसेंस और योग्यता प्रमाण पत्र को बेहतर बनाने, मदद करने वालों को सुरक्षा प्रदान करने आदि का प्रावधान है। अधिनियम में दुर्घटना के पहले 1 घंटे (गोल्डन ऑवर) के दौरान दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति के इलाज का प्रावधान है, जो अमूल्य जीवन को बचाने में मदद करेगा।
4. हरित पहलें
4.1 एनएचएआई में हरित राजमार्ग विभाग
राष्ट्रीय राजमार्गों को हरित, स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एनएचएआई ने एक हरित राजमार्ग विभाग का गठन किया है। पिछले वर्ष राजमार्गों के किनारे 2.5 लाख पेड लगाये गये।
4.2 राजमार्गों के निर्माण और सूखा प्रभावित इलाकों में जलाशयों के निर्माण को परस्पर जोड़ना
राजमार्गों के निर्माण के लिए मिट्टी का क्रय जमीन मालिकों से किया जाता है। देश के कई इलाके सूखा प्रभावित क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं। इन क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए जलाशयों, चैक डैमों, तालाबों आदि का निर्माण एक पारंपरिक पद्धति है। मंत्रालय ने राजमार्ग निर्माण में लगी एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे सूखा प्रभावित इलाकों की पहचान करें और संबंधित जिला अधिकारी / जलसंरक्षण विभाग से ऐसे गांवों की सूची प्राप्त करें जहां तालाब, जलाशय, चैक डैम का निर्माण किया जाना है। इसमें पुराने जलाशयों से गाद निकालने का काम भी शामिल है। इस व्यवस्था से जलाशयों के निर्माण / पुनरूद्धार में मदद मिलेगी और एजेंसियों को निशुल्क मिट्टी प्राप्त होगी।
4.3 पुल सह बैराज
मंत्रालय ने राजमार्गों पर पुल सह बैराज बनाने के लिए राज्य लोक निर्माण विभागों से प्रस्ताव आमंत्रित किये हैं। इससे दो लाभ होंगे, पहला जलाशय को पार करने के लिए मार्ग का निर्माण होगा और दूसरा ऊपरी / निम्न जलप्रवाह पर बैराज बनने से यह जलाशय के रूप में कार्य करेगा। इससे विभिन्न उदेश्यों के लिए जल का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
4.4 स्वच्छता पखवाडा
स्वच्छ भारत मिशन के तहत 16 से 31 जुलाई 2017 तक स्वच्छता पखवाडा मनाया गया। इसके अंतर्गत शौचालयों का निर्माण किया गया, राष्ट्रीय राजमार्गों पर अस्थायी शौचालय और पेय जल व्यवस्था की गई और 371 टॉल प्लाजा पर कूडेदान लगाये गये।
4.5 वाहन प्रदूषण को कम करने के लिए उठाये गये कदम
i. वाहन प्रदूषण को कम करने के लिए ट्रेक्टरों और विनिर्माण मशीन वाहनों में सल्फर की कम मात्रा वाले ईंधन के इस्तेमाल के लिए उत्सर्जन नियम बनाये गये हैं जो 1 अक्टूबर 2020 से प्रभावी होंगे।
ii. मंत्रालय ने वाहनों में वैकल्पिक ईंधन के प्रयोग की पहल की है। बिजली से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। बसों, टैक्सियों और ई-रिक्शा के लिए नागपुर में विद्युत वाहन परियोजना लॉच की गई है।
iii. पैरों से चलाये जाने वाले रिक्शे के स्थान पर ई-रिक्शा का उपयोग बेहतर है क्योंकि यह सस्ता व पर्यावरण अनुकूल है। इसे परमिट लेने की आवश्यकता से छूट दी गई है। मैट्रो यात्रियों को अंतिम सिरे तक कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए हरियाणा के गुरू ग्राम में 1000 ई-रिक्शा लॉच किये गये।
5 ई- पहलें
5.1 परियोजना निगरानी सूचना प्रणाली (पीएमआईएस)
सभी परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति की जानकारी लेने, रिपोर्ट बनाने और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपलोड करने के लिए एक प्रभावी परियोजना निगरानी सूचना प्रणाली (पीएमआईएस) लागू की गई है।
5.2 इनाम – प्रो + लॉच किया गया
इनाम प्रो का उन्नत रूप इनाम – प्रो + 1 जून 2017 को लॉच किया गया। पिछले 2 वर्षों में 700 विनिर्माण कंपनियां इसमें पंजीकृत हुई हैं। 37 सीमेंट कंपनियां पंजीकृत हैं। इससे मूल्य की तुलना करना, माल की उपलब्धता आदि की जानकारी प्राप्त करना सुविधाजनक हो गया है। इनाम – प्रो + की सहायता से प्रस्तावों की तैयारी करने में समय और श्रम की बचत होगी तथा कार्य कुशलता तथा पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। इस पोर्टल के माध्यम से एक उपयोगकर्ता क्रय आदेश दे सकता है तथा मूल्यों की जांच और निगरानी कर सकता है।
5.2 भूमि राशि, भूमि अधिग्रहण के लिए वेब यूटीलिटी
संपूर्ण ई-गवर्नेंस और विलम्ब खत्म करने के लिए मंत्रालय ने गजट अधिसूचना सहित जमीन अधिग्रहण से संबंधित प्रक्रियाओं के लिए एक वेब यूटीलिटी विकसित किया है। इस वेब यूटीलिटी को जमीन अधिग्रहण से संबंधित गजट अधिसूचना के ई-प्रकाशन के लिए शहरी विकास मंत्रालय के ई-गजट प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। प्रभावित और रूचि रखने वाले पक्षों को सिस्टम एक्सेस करने लायक बनाया जाएगा ताकि प्रभावित और रूचि व्यक्त करने वाले पक्ष अधिग्रहित जमीन की स्थिति देख सके। विभिन्न राज्यों में सीएएलए को प्रभावित/रूचि व्यक्त करने वालों के खातों में मुआवजे की रकम जमा करने के लिए सहमत किया जा रहा है।
5.3 ई-टोलिंग
(i) हाईब्रिड ईटीसी प्रणाली लागू करना
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का अग्रणी कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ईटीसी) प्रणाली संपूर्ण भारत में लागू की गई है ताकि बाधाएं दूर की जा सके और निर्बाध आवाजाही तथा पैसिव रेडियो फिक्वेंसी आइडेटिफिकेशन (आरएफआईडी) टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए अधिसूचित दूरों के अनुसार यूजर फीस सुनिश्चित किया जा सके। कंपनी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत इंडियन हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (आईएचएमसीएल) ईटीसी लागू करने की एजेंसी के रूप में बनाई गई है। राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) केन्द्रीय क्लियरिंग हाऊस (सीसीएच) के रूप में काम कर रहा है। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों सहित 11 बैंकों को उपायोगकर्ताओं को फास्ट टैग जारी करने के काम में लगाया गया है। चालकों को फास्ट टैग के उपयोग के बारे में संवेदी बनाने के लिए वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 7.5 प्रतिशत का कैशबैक ऑफर दिया जा रहा है। यूजर फीस भुगतान के लिए अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपाए किए गए हैं। इनमें पीओएस मशीनें शामिल हैं ताकि क्रेडिट/डेबिट कार्ड के जरिए और प्रीपेड पेमेंट इंस्टुमेंट से यूजर फीस संग्रह किया जा सके।
1-12-2017 तक चालकों द्वारा कुल 7.7 लाख फास्ट टैग इकाइयों का उपयोग किया गया है। फास्ट टैग से वसूली गई यूजर फीस में काफी वृद्धि हुई है। जनवरी 2017 में 11.2 प्रतिशत गहराई के साथ 179.1 करोड़ से बढ़कर गहराई 2017 में 18.5 प्रतिशत गहराई के साथ 285.3 करोड़ रुपये हो गई।
(ii) अन्य पहलें
(a) फास्ट टैग उपयोगकर्ताओं को दी जा रही सेवाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए फीस प्लाजा की सभी लेनों को हाईब्रिड लेनों में बदला जा रहा है और दोनों तरफ फास्ट टैग उपयोगकर्ताओं के लिए विशेष रूप से समर्पित लेन होगी। यह काम 31-3-2018 तक पूरा होगा।
(b) 1 दिसम्बर 2017 के बाद से बिके एम और एन श्रेणी के सभी नए वाहनों पर वाहन निर्माता या अधिकृत डीलर द्वारा फास्ट टैग चिपकाया जाएगा ताकि इसकी गहराई बढ़ाई जा सके और चालकों में फास्ट टैग का उपयोग बढ़े।
5.4 परिवहन एमएमपी : एक सफल और महत्वाकांक्षी ई-गवर्नेंस परियोजना
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा चलाई गई परिवहन मिशन मोड परियोजना ने सफलतापूर्वक आरटीओ कार्यों को स्वचालित कर दिया है, एक राष्ट्र व्यापी परिवाहन बेस बनाया है तथा नागरिक और व्यापार केन्द्रित अनेक एप्लीकेशन लांच किए हैं। इससे डिजिटल भारत कार्यक्रम के अंतर्गत ई-गवर्नेंस कार्यक्रम में योगदान होगा। इस परियोजना की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
v परिवहन मिशन मोड परियोजना के अंतर्गत दो अग्रणी एप्लीकेशन- वाहन तथा सारथी बनाए गए हैं। वाहन एप्लीकेशन वाहनों के पंजीकरण, टैक्सेशन, परमिट, फिटनेस और संबंधित सेवाओं के लिए है जबकि सारथी एप्लीकेशन ड्राइविंग लाइसेंस, लर्नर लाइसेंस, ड्राइविंग स्कूलों तथा संबंधित गतिविधियों के लिए है।
v राज्य विशेष नियमों, टैक्स ढांचे के साथ 33 राज्यों में 1000 से अधिक आरटीओ में लागू।
v प्रमुख यूजर-आरटीओ, सरकार, पुलिस, बैंक, बीमा, नागरिक, वाहन निर्माता, डीलर।
v राष्ट्रीय रजिस्टर में 19 करोड़ से अधिक वाहन और 10 करोड़ ड्राइविंग लाइसेंस का रिकॉर्ड।
v सरकारी ऐजेंसियों, सुरक्षा बलों, बैंकों तथा बीमा को पोर्टल/एपीआई आधारित डाटा एक्सेस प्रदान करना।
v पोर्टल/एसएमएस/मोबाइल एप के जरिए नागरिकों को वाहन और लाइसेंस खोज विकल्प।
v राष्ट्रीय और राज्य स्तरों पर अनेक जी-बी तथा जी-सी एप्लीकेशन लागू।
v ऑनलाइन राष्ट्रीय परमिट पोर्टल के माध्यम से सामान ढोने वाले वाहनों को 50 लाख से अधिक राष्ट्रीय परमिट जारी।
v निर्माताओं के लिए आदर्श प्रमाणीकरण और इंवेंट्री प्रबंधन के लिए होमोलोगेशन (स्वीकृति) पोर्टल।
v राज्यों द्वारा ऑनलाइन 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स संग्रह।
5.5 नई पहलें
v वर्तमान वितरण की जगह केन्द्रीयकृत सारथी संस्करण 4 (ऑनलाइन सेवाओं से पूरी तरह एकीकृत) लांच।
v एनआईसी क्लाउड के अंतर्गत बहु तैनाती, उच्च सुरक्षा, उपलब्धता तथा डाटा अखण्डता।
v नागरिक सुविधाओं की गुणवत्ता बढ़ाना, आरटीओ आने-जाने में कमी/समाप्ति, पारदर्शिता बढ़ाना।
v 15 राज्यों में 600 से अधिक आरटीओ नई प्रणाली के अंतर्गत। शेष राज्य के आरटीओ शीघ्र ही नई प्रणाली अपनाएंगे।
v विविध पेमेंट गेटवे से एकीकृत, आईआरडीए, एनसीआरबी, सीएससी, एसएमएस, ओपन एपीआई।
v बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण तथा ईकेवाईसी के लिए आधार के साथ एकीकृत। डिजि लॉकर के साथ एकीकरण।
v डैशबोर्ड, स्मार्ट कार्ड, डाक्यूमेंट अपलोड, ऑनलाइन शेड्यूलिंग, कनफिगूरेबल वर्कफ्लो जैसी विशेषताएं।
v वाहन निर्माता की इंवेंट्री से जुड़ा ऑनलाइन डीलर प्वाइंट एप्लीकेशन।
v ई-नीलामी तथा ई-निविदा के साथ ऑनलाइन फैंसी नंबर आवेदन।
v लाइसेसिंग, टैक्स भुगतान, लेन-देन से संबंधित सम्पूर्ण ऑलाइन सेवाएं।
v अग्रिम सुरक्षा विकल्प के साथ लर्नर लाइसेंस के लिए प्रणाली आधारित बहुभाषी ज्ञान परीक्षा।
v मोबाइल एप, ई-चालान तथा एम-परिवहन व्यापक प्रत्यावर्तन समाधान के लिए विकसित।
v नवीनतम विशेषताओं तथा राज्य विशेष विकल्पों के साथ सहज लागत प्रभावी तथा व्यावहारिक समाधान।
v परिवहन तथा ट्रैफिक पुलिस द्वारा विविध राज्यों में ई-चालान लांच किया जा रहा है।
v एम परिवहन एप नागरिकों की सूचना और व्यापक सेवाओं के लिए।
v प्रमुख विशेषताओं में ड्राइविंग लाइसेंस, पंजीकरण प्रमाण पत्र, परमिट जैसे वर्चुअल दस्तावेज अधिकृत सॉफ्ट कॉपी के रूप में।
v साधारण दस्तावेज/कॉर्ड के स्थान पर वर्चुअल डीएल/आरसी जिस पर प्रमाणीकरण के लिए क्यूआर कोड दर्ज।
v नागरिकों की सुविधा के लिए परिवहन क्षेत्र में परिवर्तनकारी सुधार का विजन।
6. अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी
6.1 भारत और नेपाल के बीच समझौता ज्ञापन
भारत और नेपाल का बीच अगस्त 2017 में 1,58.65 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। इसके तहत भारत-नेपाल सीमा पर मेची नदी के ऊपर एक नए पुल के निर्माण के खर्चे, कार्यक्रम और सुरक्षा मुद्दों पर एक कार्यान्वयन व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति बनी । एशियाई विकास बैंक से ऋण के माध्यम से भारत सरकार इसे वित्त पोषित करेगी। 1500 मीटर लंबा नया पुल राष्ट्रीय राजमार्ग 327बी पानी टंकी बाईपास (भारत) ककारविट्टा (नेपाल) का हिस्सा है जिसमें 6-लेन वाली 825 मीटर लंबी सड़क भी शामिल है। मेची पुल एशियाई राजमार्ग संख्या 02 का भारत में आखिरी बिंदु है जोकि नेपाल की ओर जाता है और नेपाल को महत्वपूर्ण संपर्क उपलब्ध कराता है।
6.2 भारत और संयुक्त अरब अमीरात के समझौता ज्ञापन
सड़क परिवहन और राजमार्ग क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2017 में भारतीय गणतंत्र दिवस के अवसर पर अबुधाबी के राजकुमार के भारत दौरे के दौरान समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। समझौते में भारत और यूएई के बीच आपसी सहयोग और आदान प्रदान को बढ़ावा देने के प्रयास करना है ताकि ढांचा विकास और लॉजिस्टिक कुशलता के क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिले। दोनो पक्षों के बीच समझौते के अनुसार एक संयुक्त कार्यदल का गठन कर दिया गया है।
6.3 भारत और अफगानिस्तान के बीच मोटर वाहन समझौता
भारत और अफगानिस्तान के बीच यात्री, निजी और मालवाहक वाहनों की आवाजाही के नियमन के लिए सितंबर 2017 में एक समझौता हुआ ताकि सड़क मार्ग के जरिए क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा दिया सके। साथ ही सीमा पार सड़क परिवहन के जरिए भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार को प्रोत्साहित किया जा सके।
6.4 आईएमटी फ्रेंडशिप मोटर रैली-II, 2017
भारत-म्यामार-थाइलैंड फ्रेडशिप मोटर रैली-II 2017 का गुवाहटी से बैंकॉक के बीच आयोजन हुआ। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस रैली का आयोजन कलिंगा मोटर स्पोर्ट्स क्लब भुवनेश्वर और महिंद्रा एडवेंचर मुंबई के सहयोग से किया।
7 अन्य
7.1 सड़क के किनारे सुविधाएं
भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे सुविधाओं में वृद्दि के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्राधिकरण ने इसके लिए 183 स्थानों पर भूमि का अधिग्रहण भी कर लिया है और निजी क्षेत्र को भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है।
7.2 लाल बत्ती
देश में स्वस्थ लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने आपात सेवाओ और राहत सेवाओं आदि से संबद्ध को छोड़कर सभी प्रकार के वाहनों के ऊपर सभी लाल बत्तियों को हटाने का आदेश अधिसूचित कर दिया।
7.3 राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण को जांचने के उपाय के लिए पहल
निर्माण कार्य से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली के चारों ओर राजमार्ग परियोजनाओं पर काम करने वाले परियोजना निदेशकों, ठेकेदारों और क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत सभी निर्माण स्थलों और शिविरों में पानी के छिड़काव, कचरे को ढकना, डंपरों को कवर करना, साइटों पर पड़ी हुई मिट्टी को ढकना जैसे उपाय किए गए है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि निर्माण स्थलों का नियमित निरीक्षण किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी प्रदूषण नियंत्रण उपायों का पालन हो रहा है।
वीके/एएम/एकेजी/जे/एस/डी/एस-6197
(रिलीज़ आईडी: 1515508)
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