वित्‍त मंत्रालय

उन कंपनियों के मामले में न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) की वसूली से संबंधित प्रावधानों में ढील दी जाएगी जिनके खिलाफ दिवाला एवं दिवालियापन संहिता, 2016 के तहत कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया के लिए आवेदन स्वीकार किया गया है

प्रविष्टि तिथि: 06 JAN 2018 2:48PM by PIB Delhi

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115 जेबी के मौजूदा प्रावधानों में अन्य बातों के अलावा इस बात का भी उल्‍लेख है कि किसी कंपनी के मामले में न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) की वसूली के लिए दर्शाई गई नुकसान राशि अथवा अनवशोषित मूल्यह्रास, इनमें से जो भी बही खाते के अनुसार कम हो, को बही लाभ (बुक प्रॉफि‍ट) में से कम कर दिया जाएगा।

   इस संबंध में विभिन्न हितधारकों की ओर से इस आशय के अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं कि जिन कंपनियों के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया के लिए कोई आवेदन दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी), 2016 की धारा 7 या धारा 9 अथवा धारा 10 के तहत निर्णयन प्राधिकरण द्वारा स्वीकार किया गया है उन्‍हें अधिनियम की धारा 115 जेबी के तहत बही लाभ की गणना के लिए नुकसान राशि दर्शाने की अनुमति पर लगे प्रतिबंध के कारण भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

    इस तरह की कंपनियों द्वारा सामना की जाने वाली वास्तविक कठिनाई में कमी करने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि कर निर्धारण वर्ष 2018-19 (यानी वित्त वर्ष 2017-18) से जिस भी कंपनी के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया के लिए कोई आवेदन दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी) की धारा 7 या धारा 9 अथवा धारा 10 के तहत निर्णयन प्राधिकरण द्वारा स्वीकार किया गया है उनके मामले में अधिनियम की धारा 115 जेबी के तहत मैट की वसूली के लिए दर्शाई गई कुल नुकसान राशि (अनवशोषित मूल्यह्रास सहित) को बही लाभ (बुक प्रॉफि‍ट) में से कम करने की अनुमति होगी।

    इस संबंध में उपयुक्त विधायी संशोधन उचित समय पर किया जाएगा।

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वीके/एएम/आरआरएस/एसएस- 6212


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