कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
डॉ. जितेंद्र सिंह:'नवीन भारत' की आकांक्षाओं के साथ सिनेमा मनोरंजन को जोड़ने की जरूरत
प्रविष्टि तिथि:
07 JAN 2018 10:51AM by PIB Delhi
केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा व अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि सिनेमा मनोरंजन को नवीन भारत की आकांक्षाओं के साथ सम्मिलित करने की आवश्यकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को चेन्नई में साउथ इंडियन फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स और भारत नीति द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक कार्यक्रम में दक्षिण भारत फिल्म उद्योग के प्रमुख दिग्गजों को संबोधित किया। जिनमें तमिल,मलयालम, तेलुगू और कन्नड़ सिनेमा के प्रसिद्ध संगीतकारों, निर्देशकों और संगीतकार शामिल थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने चेन्नई में गुजारे गए अपने जीवन के शुरुआती वर्षों को याद करते हुए बताया कि देवी सिनेमा कॉम्प्लेक्स और स्टार थियेटर किसी भी बच्चे के लिए पसंदीदा जगह होते थे। उन दिनों को याद करते हुए कहा कि वह दिन बीत चुके हैं,जब फिल्म देखने के लिए थिएटर की यात्रा उत्सव जैसा हुआ करता था। कई दिनों पहले योजना बनाई जाती थी और इसके बाद उस दिन को याद रखने की प्रक्रिया कई हफ्तों तक चलती थी।
उन्होंने कहा कि आज, एक बच्चे की जेब में एक मूवी थिएटर है और अपने स्मार्टफोन के स्क्रीन पर केवल एक स्पर्श के साथ अपनी पसंद की फिल्म देख सकता है। उन्होंने कहा कि नौजवानों का ये हिस्सा देश की आबादी में 70 फीसदी से अधिक है। ऐसे में फिल्म निर्माता को सीखने के साथ पीएम श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किये गए अद्भुत अभियानों के लिए मशाल वाहक के तौर पर सामने आना होगा, ताकि राष्ट्र निर्माण में वो खुद को शामिल करें।
डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि बिना संदेश के कोई भी फिल्म खोखली होती है।कोई भी फिल्म जिसमें बिना मनोरंजन के संदेश हो वो आज की युवाओं को आकर्षित करने में नाकाम होती हैं, जिन्हें संदेश देने की कोशिश की जाती है। इस संबंध में उन्होंने सत्यजीत रे की फिल्मों का विशेष तौर पर जिक्र किया। फिल्म पाथेर पंचाली का जिक्र करते हुए कहा कि किस तरह से उस फिल्म में मनोरंजन और संदेश दोनों का मेल था। 1950 में बनी फिल्म आज भी ये दर्शकों को बड़ी संख्या में अपनी तरफ आकर्षित करती है।
सालों साल तक धूम मचाने वाले लोकप्रिय हिंदी फिल्मों के निर्माता ए वी मय्यप्पन के पोते की तरफ इशारा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एक समय था जब बॉम्बे फिल्म इंडस्ट्री पर दक्षिण भारतीय फिल्म हाउस का दबदबा था। जिनमें एवीएम, मिथुन और एल.वी. प्रसाद घराने शामिल थे।इसलिए दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग में अपनी विरासत की वजह से अखिल भारतीय भूमिका में सामने आ सकती है,और इसके साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के "नवीन भारत" मिशन के संदेशवाहक बनने में अहम भूमिका निभा सकती है।
इंडियन फिल्म कमीशन और जीएसटी में कुछ बदलावों की मांग पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने फिल्म उद्योग से जुड़े प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली आने का न्यौता दिया और कहा कि इस मुद्दे पर खुले मन से विचारों का आदान-प्रदान होगा।
******
वीएल/एएम/एलआर/डीएस-6211
(रिलीज़ आईडी: 1515871)
आगंतुक पटल : 251