विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
"पर्यावरण संरक्षण के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है" : डॉ. हर्षवर्धन
"रियल टाईम नदी जल और वायु गुणवत्ता निगरानी (डब्ल्यूएक्यूएम) के लिए डीएसटी-इंटेल सहयोगात्मक अनुसंधान" और अनुसंधान परियोजनाओं की घोषणा
प्रविष्टि तिथि:
16 JAN 2018 6:04PM by PIB Delhi
विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। वे ‘रियल टाईम नदी जल और वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए डीएसटी-इंटेल सहयोगात्मक अनुसंधान’ और अनुसंधान परियोजनाओं की घोषणा के प्रतीक के रूप में आज होटल ताज महल में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहें थे। डॉ. हर्षवर्धन ने इस बात पर जोर दिया कि अनुसंधान को लोगों की समस्याएं हल करने वाला होना चाहिए। इसके लिए प्रभाव डालने वाले घटक की परिभाषा भी बदलने की आवश्यकता है। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि रियल टाईम जल और वायु गुणवत्ता के लिए विज्ञान और सामाजिक दायित्व के प्रति सरकार की यह एक और पहल है। उन्होंने कहा कि सार्वभौमिक साझेदारी से नवीनतम प्रौद्योगिकी समाधान प्रस्तुत करना सरकार का वैज्ञानिक दृष्टिकोण दर्शाता है।
इस अवसर पर वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि नैनो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत तीसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि भारत के अनुसंधान और विकास प्रयासों की सम्पूर्ण विश्व ने प्रशंसा की है। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि धरती पर ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे विज्ञान की सहायता से हल न किया जा सके। नामामि गंगे जैसे राष्ट्रीय अभियान को भी वैज्ञानिकों की मदद की आवश्यकता है।
इस अवसर पर बोलते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने प्रौद्योगिकी के द्वारा जल उपलब्धता और गुणवत्ता की चुनौतियों के समाधान के बारे में जानकारी प्रदान की। जल चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए उन्होंने विभिन्न प्रकार के अनुसंधान प्रयासों में सरकारी निवेश के बारे में भी बताया।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और इंटेल ने संयुक्त रूप से ‘’रियल टाईम नदी जल और वायु गुणवत्ता निगरानी के लिए अनुसंधान पहल’’ नाम से एक अनुसंधान कार्यक्रम आरंभ किया है। इसके तहत किफायती, बेतार सेंसर प्रौद्योगिकी, बेहतर संप्रेषण और एकत्रित व्यापक आंकड़ों के विश्लेषण के लिए प्रणाली विकसित की गई है।
इस संयुक्त कार्यक्रम में डीएसटी और इंटेल द्वारा संयुक्त रूप से निवेश किया जाएगा
और भारत तथा अमेरिका के विज्ञान और प्रौद्योगिकी फोर्म द्वारा द्विपक्षीय रूप से लागू किया जाएगा। यह कार्यक्रम दोनों देशों के लिए शैक्षणिक और उद्योगों के लिए एक अद्वितीय अवसर प्रदान करता है। यह कार्यक्रम सभी प्रकार के समाधान विकसित करने और कई अलग-अलग अनुसंधानों को संघटित करने, शहरी, घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों जैसे विभिन्न संदर्भों में पर्यावरण गुणवत्ता की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
रियल टाईम जल और वायु गुणवत्ता निगरानी के लिए चार परियोजनाओं का चयन किया गया हैः
व्यापक समीक्षा के बाद जल और वायु गुणवत्ता निगरानी के लिए अलग-अलग दो परियोजनाओं का चयन किया गया है। इन अनुसंधान परियोजनाओं में अग्रणी भारतीय वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थाएं जैसे आईआईटी और आईआईएससी तथा अमेरिका की शीर्ष संस्थाएं जैसे ड्यूक विश्वविद्यालय, दक्षिण कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, मिशीगन राज्य विश्वविद्यालय और स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय आदि के सहयोग से कार्य किया जाएगा।
वायु गुणवत्ता निगरानी की दो परियोजनाएं इस प्रकार हैः
- वायु गुणवत्ता निगरानी से प्राप्त टेम्पोरल वेरियबल्स (एसएटीवीएएम) विश्लेषण को व्यवस्थित करना
- हाई रेजोल्युशन वायु गुणवत्ता निगरानी और वायु प्रदूषण आंकड़ों का विश्लेषण करना।
इन परियोजनाओं से पीएम2.5 और गैस मानदंडों की वैधानिकता की वैज्ञानिक रूप से सूचना देने और समीक्षा करने वाली प्रणाली विकसित करने में मदद करेगी।
दो जल गुणवत्ता निगरानी करने वाली परियोजनाएं इस प्रकार हैः
- एक्वाटिक ऑटोनोमस ऑबजर्वेटरी (निराकारा स्वयंससिता वेदशाला - एनएसवीएस)
- रियल टाईम नदी जल निगरानी और निर्णय निर्माण के लिए संघटित किफायती जल सेंसर।
ये परियोजनाएं एकीकृत ऊर्जा संरक्षण प्रणाली के साथ स्वचालित नमूना लेने की क्षमताओं सहित किफायती, बहु-आयामी मानदंड और जल गुणवत्ता प्लेटफॉर्म बनाने और विकसित करने में सहायता करेंगी।
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वीके/एएम/पीसी/डीके-6344
(रिलीज़ आईडी: 1516982)
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