पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

"खण्डों में काम करने की मानसिकता को तोड़ने और तारतम्य विकसित करने के लिये सामूहिक रूप से काम करने की जरूरत:" डॉ. हर्षवर्धन


पर्यावरण मंत्रालय में अंतर-मंत्रालयी समन्वय समिति की बैठक आयोजित

प्रविष्टि तिथि: 22 JAN 2018 3:47PM by PIB Delhi

     केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, विज्ञान एवं तकनीक एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने खण्डों में काम करने की मानसिकता को तोड़ने और तकनीकी समाधानों और अधिकतम इस्तेमाल के लिये तारतम्य विकसित करने के लिये मिलकर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। अपनी अध्यक्षता में आज पर्यावरण भवन में पांच मंत्रालयों एवं विभागों की अंतर-मंत्रालय समन्वय समिति की बैठक को संबोधित करते हुये डॉ. हर्ष वर्धन ने संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों से तकनीकी समाधानों में ऐसी समानताओं की पहचान करने को कहा जिन्हें विभिन्न हितधारकों तक ले जाया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी तरह की समस्याओं का समाधान विज्ञान के जरिये ढूंढ़ा जा सकता है लेकिन इसके लिये दृष्टिकोण को सहभागी प्रयत्नों और सामूहिक तारतम्य की ओर मोड़ने की जरूरत है। मंत्री महोदय ने आगे कहा कि विज्ञान एवं तकनीक विभाग (डीएसटी), वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर), जैवतकनीक विभाग (डीबीटी), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के बीच पहले ही एक उत्कृष्ट सामंजस्य का विकास किया जा चुका है और अब जिसे पर्यावरण एवं वन मंत्रालय में भी दोहराये जाने की जरूरत है। डॉ. हर्ष वर्धन ने आगे कहा कि सीएसआईआर, डीएसटी, डीबीटी एवं एमओईएस के पास उत्कृष्ट शोध क्षमतायें हैं और पर्यावरण मंत्रालय इसका लाभ उठा सकता है।

    सुस्पष्ट लक्ष्यों का निर्धारण और निर्धारित समय में कार्य करने की जरूरत पर जोर देते हुये डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि एक कार्यात्मक समूह बनाया जायेगा और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय उसके सचिवालय की तरह काम करेगा जिसमें प्रत्येक मंत्रालय एक नोडल अधिकारी को नामित करेगा। उन्होंने अगले एक वर्षों में परिणाम लाये जाने पर विशेष जोर दिया। मंत्री महोदय ने कहा कि हर महीने संयुक्त कार्यात्मक समूह की बैठक होगी और हर तिमाही में एक मंत्रिस्तरीय बैठक होगी। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी मंत्रालयों के सभी परियोजना समूह इस बैठक में भाग लेंगे।

    प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'वैज्ञानिक सामाजिक दायित्व' की चर्चा किये जाने का स्मरण करते हुये डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि यह अत्यावश्यक है कि विज्ञान को लोगों के फायदे के लिये प्रयोग किया जाये। उन्होंने बैठक में उपस्थित वैज्ञानिकों एवं वरिष्ठ अधिकारियों से अपील में कहा कि 115 आकांक्षी जिलों के लिये नवोन्मेषी समाधानों और परियोजनाओं को तैयार करें ताकि इन जिलों में मानव विकास इंडेक्स (एचडीआई) को सुधारा जा सके।

    पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव श्री सी.के. मिश्रा, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. राजीवन, विज्ञान एवं तकनीक विभाग के सचिव प्रो. आशुतोष शर्मा, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक विभाग के सचिव एवं महानिदेशक सीएसआईआर डॉ. गिरीश साहनी, डीबीटी के सचिव प्रो. के. विजय राघवन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के विशेष सचिव एवं महानिदेशक वन डॉ. सिद्धान्त दास, आईएमडी के डीजी डॉ. के. जे. रमेश, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अध्यक्ष श्री एस.पी.एस. परिहार और पांचों मंत्रालयों एवं विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने इस बैठक में भाग लिया।

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वीके/एएम/डीटी/वाईबी- 6423

 

 

 

 


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