गृह मंत्रालय

वर्षांत समीक्षा 2018 - गृह मंत्रालय

प्रविष्टि तिथि: 19 DEC 2018 2:02PM by PIB Delhi

गृह मंत्रालय की प्रमुख उपलब्धियां : जम्मू एवं कश्मीर में स्थानीय निकाय चुनावों का निर्विघ्न संचालन, पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों से आफस्पा हटाया गया, असम में एनआरसी को शांतिपूर्ण तरीके से जारी किया गया, वामपंथी अतिवाद के परिदृश्य में सुधार, पश्चिमी सीमा पर स्मार्ट बाड़, एकल अंक वाले अखिल भारतीय आपातकालीन फोन नंबर '112' की शुरुआत, द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग पर पहला भारत-चीन समझौता और राष्ट्रीय पुलिस स्मारक का अनावरण

 

सुर्खियां

वर्ष 2018 में आंतरिक सुरक्षा का परिदृश्य विस्तृत तौर पर शांतिपूर्ण रहा, वहीं बांग्लादेश, म्यांमार और चीन के साथ सीमाओं पर स्थिति में काफी सुधार हुआ। पश्चिमी सीमाओं पर हमारे सुरक्षा बलों ने युद्धविराम उल्लंघनों का उतने ही कड़े तौर पर जवाब दिया और घुसपैठ के प्रयासों को विफल किया। जम्मू एवं कश्मीर में ठोस आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशनों के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में आतंकवादियों का सफाया हुआ और स्थानीय निकाय चुनावों का निर्विघ्न संचालन हुआ। पूर्वोत्तर में पिछले चार वर्षों के दौरान सुरक्षा परिदृश्य में बड़े पैमाने पर सुधार हुआ है जिसके नतीजतन इस साल मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के हिस्सों से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (आफस्पा) को हटा दिया गया है। असम में बिना किसी हिंसा के ड्राफ्ट राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) जारी कर दिया गया और अंतिम एनआरसी आने वाला है। देश के आंतरिक इलाकों में वामपंथी अतिवाद से प्रभावित जिले 2013 में जहां 76 थे वो अब सिकुड़कर 58 रह गए हैं।

 

पुलिस बलों के आधुनिकीकरण (एमपीएफ) कार्यक्रम के अंतर्गत जम्मू में भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्मार्ट बाड़ की दो पायलट परियोजनाओं की शुरुआत की गई। आपातकालीन प्रतिक्रिया समर्थन प्रणाली (ईआरएसएस) के अंतर्गत एक एकल अंक वाले अखिल भारतीय आपातकालीन फोन नंबर '112' को लॉन्च किया गया है जिसकी शुरुआत हिमाचल प्रदेश और नागालैंड में की गई है। गृह मंत्रालय ने महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मसलों को संबोधित करने के लिए एक नया विभाग बनाया है, वहीं दो पोर्टलों 'महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध निवारण' (सीसीपीडब्ल्यूसी) और 'यौन अपराधियों पर राष्ट्रीय डाटाबेस' (एनडीएसओ) ने भी महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े विषयों को और आगे बढ़ाने का काम किया है।

 

इसके अलावा गुजरे साल में गृह मंत्रालय ने जो अन्य काम किए हैं उनमें - राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि में केंद्र के हिस्से को 75 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत करना, ई-वीज़ा की जबरदस्त सफलता, द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग पर भारत-चीन के बीच पहली उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन, क्षेत्रीय परिषदों की नियमित बैठकों का संचालन, प्रधानमंत्री के हाथों राष्ट्रीय पुलिस स्मारक को राष्ट्र के लिए समर्पित किया जाना और नए स्थापित किए गए पुलिस मैडल जैसी सुर्खियां भी शामिल हैं।

 

जम्मू एवं कश्मीर: सुरक्षा बलों ने आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशन शुरू किए; स्थानीय निकाय चुनावों का सफलतापूर्वक संचालन

 

कश्मीर घाटी में पत्थरबाज़ी की बार-बार होने वाली घटनाओं के बीच केंद्र सरकार ने मई 2018 में रमजान के पावन महीने के दौरान जम्मू एवं कश्मीर में सभी ऑपरेशनों को रोकने की घोषणा करते हुए एक प्रमुख समाधानकारक पहल की। हालांकि एक समीक्षा के बाद इसे रमजान की अवधि से आगे नहीं बढ़ाया गया जिसके बाद सुरक्षा बलों ने ठोस आतंकवाद विरोधी ऑपरेशनों को शुरू किया जिसके महत्वपूर्ण नतीजे मिले। इस साल 2 दिसंबर 2018 तक 587 घटनाओं में 238 आतंकवादी मारे गए और सुरक्षा बलों के 86 व्यक्ति शहीद हुए व 37 नागरिकों की जान गई। जून में गृह मंत्रालय ने जम्मू एवं कश्मीर पुलिस के लिए दो महिला बटालियन खड़ी करने को अपनी स्वीकृति दी।

 

केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 7-8 जून 2018 को जम्मू एवं कश्मीर की दो दिवसीय यात्रा की जहां उन्होंने केंद्रीय खेल मंत्रालय के द्वारा 'खेलो इंडिया' योजना के अंतर्गत ब्लॉक स्तर के खेलों के लिए 14.30 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता स्वीकृत करने की घोषणा की। केंद्रीय गृह मंत्री ने इसके अगले महीने भी 4-5 जुलाई 2018 को जम्मू एवं कश्मीर का दो दिन का दौरा किया जिस दौरान उन्होंने राज्य में सुरक्षा स्थिति और विकास से जुड़े मसलों की समीक्षा की।

 

राज्य में केंद्रीय गृह मंत्री की 4-5 जुलाई, 2018 की यात्रा के दौरान समीक्षा बैठक के अनुसार गृह मंत्रालय ने 28 सितंबर को राज्य सरकार द्वारा जम्मू एवं कश्मीर में आरंभ की गई नई पहलों की घोषणा की। इनमें सबसे महत्वपूर्ण घोषणा थी ऐतिहासिक स्थानीय निकाय चुनावों का शांतिपूर्ण संचालन। राज्य में ऐतिहासिक स्थानीय निकाय चुनावों से पहले केंद्रीय गृह मंत्री ने फिर से 23 अक्टूबर को श्रीनगर का दौरा किया और सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की।

 

इन स्थानीय निकाय चुनावों ने जम्मू एवं कश्मीर में लंबे समय से प्रतीक्षित जमीनी स्तर के लोकतंत्र को फिर से स्थापित करने में मदद की। यहां पर शहरी स्थानीय निकाय चुनाव वर्ष 2005 के बाद अब आयोजित किए गए और पंचायत चुनाव 2011 के बाद। इन चुनावों ने उचित तरीके से गठित स्थानीय निकायों को 14वें वित्त आयोग का करीब 4,335 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार किया। केंद्र सरकार ने इन चुनावों के निर्विघ्न संचालन के लिए पर्याप्त संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती समेत राज्य सरकार को हर संभव सहयोग प्रदान किया।

 

लेह और कारगिल की स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों को मजबूत और सशक्त किया गया है ताकि वे देश की सबसे स्वायत्त परिषद बनें और लद्दाख क्षेत्र के दूरस्थ इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने मौजूद विभिन्न मसलों को संबोधित करे। लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद्, लेह (एलएएचडीसी) और कारगिल स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद् (केएएचडीसी) को और अधिक शक्तियां दी गई हैं ताकि वे स्थानीय स्तर पर कर वसूल कर सकें और लगा सकें। इन्हें विभिन्न विभागों के कामकाज का और साथ ही साथ यहां स्थानांतरित होने वाले व काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर नियंत्रण भी दिया गया है।

 

जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशनों में विशेष पुलिस अधिकारियों द्वारा निभाई गंभीर भूमिका को देखते हुए गृह मंत्रालय ने 5 साल पूरे होने पर उनका मानदेय 6,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 9,000 और 15 वर्ष पूरे होने पर 12,000 कर दिया है। गृह मंत्रालय ने जम्मू एवं कश्मीर में बसे पश्चिमी पाकिस्तान के करीब 5,764 शरणार्थियों को 5.5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने की एक योजना को स्वीकृति दे दी है।

 

शांतिपूर्ण पूर्वोत्तर: मेघालय और अरुणाचल के हिस्सों से आफस्पा हटाया गया; ड्राफ्ट एनआरसी को शांतिपूर्ण तरीके से जारी किया गया; अधिक विद्रोही समूहों के साथ समझौते

 

पूर्वोत्तर में सुरक्षा परिदृश्य लगातार सुधर रहा है। वर्ष 1997 के बाद से पिछले दो दशकों में पहली बार पिछले साल विद्रोह की घटनाएं और सुरक्षा बलों व नागरिकों के बीच हताहतों की संख्या सबसे कम दर्ज की गईं। जहां त्रिपुरा और मिजोरम में अब करीब करीब कोई विद्रोह नहीं बचा है, वहीं अन्य राज्यों और इस क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में सुधार देखा गया है। 2014 के बाद से चार वर्षों में इस क्षेत्र में विद्रोह की घटनाओं में 63 प्रतिशत की गिरावट आई है। ठीक इसी तरह 2014 की तुलना में 2017 में यहां नागरिकों की मौतों में 83 प्रतिशत और सुरक्षा बलों में हताहतों की संख्या में 40 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई है।

 

इसके अलावा 31 मार्च को मेघालय के सभी इलाकों से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (आफस्पा) को हटाया जाना पूर्वोत्तर क्षेत्र के सुरक्षा परिदृश्य में विस्तृत सुधार का सजीव उदाहरण है। अरुणाचल प्रदेश में भी आफस्पा के दायरे में आने वाले इलाकों को, असम सीमा से लगे 16पीएस/चौकी क्षेत्रों से घटाकर तिरप, चैंगलांग और लॉन्गडिंग जिलों के साथ 8 पुलिस स्टेशनों तक कर दिया गया है।

 

केंद्र सरकार ने 28 अप्रैल के प्रभाव से एनएससीएन/एनके और एनएससीएन/आर के साथ युद्धविराम एक साल के लिए और बढ़ा दिया है।

 

पूर्वोत्तर क्षेत्र में कार्य करते हुए ब्रू व्यक्तियों के देश-प्रत्यावर्तन में बड़ी सफलता पाई गई जो 1997 से मिजोरम से विस्थापित हैं। इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह, मिजोरम के मुख्यमंत्री श्री ललथनहवला और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री श्री बिप्लव कुमार देब की उपस्थिति में 3 जुलाई को भारत सरकार, मिजोरम व त्रिपुरा की सरकारों और मिजोरम ब्रू विस्थापित लोगों के फोरम (एमबीडीपीएफ) के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

 

बिना किसी घटना के ड्राफ्ट राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को जारी किया जाना भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 25 जुलाई को गृह मंत्रालय ने असम राज्य सरकार और पड़ोसी राज्यों को दिशा निर्देश जारी किए कि वे 30 जुलाई 2018 को जारी होने जा रहे ड्राफ्ट एनआरसी से पहले और प्रकाशन के बाद में कानून और व्यवस्था को बनाए रखना सुनिश्चित करें। असम में ड्राफ्ट एनआरसी के प्रकाशन से पहले केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 22 और 30 जुलाई को दो अलग-अलग बयान जारी किए और आश्वस्त किया कि हर व्यक्ति को न्याय मिलेगा और सभी के साथ मानवीय तौर पर व्यवहार किया जाएगा।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने 9-10 जुलाई 2018 को शिलॉन्ग में पूर्वोत्तर परिषद् के 67वें पूर्ण अधिवेशन की अध्यक्षता की। उन्होंने आठों सदस्य राज्यों से अनुरोध किया कि केंद्र द्वारा हाल ही में स्वीकृत किए गए 4,500 करोड़ रुपये के वित्तीय पैकेज का कार्यान्वयन प्रभावी रूप से करें और उन्हें निर्देश दिए कि सरकार प्रायोजित योजनाओं की अंतिम बिंदु तक बेहतर प्रगति और विशेष क्षेत्रों पर ध्यान दें।

 

वामपंथी अतिवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित क्षेत्र सिकुड़े, विकास का इशारा

 

पिछले चार वर्षों में वामपंथी अतिवाद के परिदृश्य में ठोस सुधार आया है। हिंसा की घटनाओं में तीखी गिरावट हुई है और वामपंथी अतिवाद से होने वाली हिंसा का भौगोलिक फैलाव भी जहां 2013 में 76 जिलों में था वो अब सिर्फ 58 जिलों तक सीमित रह गया है। इसके अलावा इनमें से सिर्फ 30 जिले ऐसे हैं जो पूरे देश में 90 फीसदी वामपंथी हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं। ठीक इसी समय कुछ ऐसे नए जिले उभरे हैं जहां पर वामपंथी अतिवादी विस्तार के लिए अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

 

गृह मंत्रालय ने प्रभावित जिलों की समीक्षा करने के लिए सभी संबंधित राज्यों के साथ परामर्श करते हुए एक समग्र अभ्यास किया है ताकि संसाधनों की तैनाती को लेकर बदली हुई जमीनी हकीकत के साथ तालमेल रहे। इस अनुरूप सुरक्षा संबंधी खर्च योजना (एसआरई) वाले जिलों की सूची में से 44 जिलों को बाहर रखा गया है और 8 नए जिलों को जोड़ा गया है।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने 21 मई को छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में सीआरपीएफ की 241 बस्तरिया बटालियन की पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया। ये 'बस्तरिया बटालियन' 1 अप्रैल 2017 को अस्तित्व में आई थी जब बस्तर क्षेत्र में सीआरपीएफ के युद्ध ख़ाके में स्थानीय प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए इसे बनाया गया था।

 

आंतरिक सुरक्षा : गृह मंत्रालय ने मॉब लिंचिंग, तोड़फोड़ और इंटरनेट पर अफवाहबाज़ी की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया

 

गृह मंत्रालय ने आंतरिक सुरक्षा के मसले पर 7 मार्च को राज्यों को दो एडवाइज़री यानी सलाह जारी की कि देश के कुछ हिस्सों में मूर्तियों के साथ जो तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं उनका सख्ती से सामना करें। मॉब लिंचिंग यानी भीड़ द्वारा की जा रही हत्याओं की घटनाओं से निपटने के लिए भी राज्यों को एडवाइज़री जारी की गईं। सरकार ने 23 जुलाई को केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति स्थापित की ताकि मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर विचार किया जा सके; सरकार ने इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रियों का एक समूह गठित करने का फैसला लिया ताकि इस उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों पर विचार किया जा सके। केंद्रीय गृह सचिव ने 25 अक्टूबर को सोशल मीडिया मंचों के प्रतिनिधियों के साथ इंटरनेट पर अफवाहों के फैलाव और यौन रूप से अनुचित विषय वस्तु पर नियंत्रण रखने के संबंध में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उसके बाद भी कई और बैठक आयोजित की गईं।

 

सीमा प्रबंधन : स्मार्ट सीमा बाड़ की शुरुआत की गई

 

केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 17 सितंबर को जम्मू में भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग की दो पायलट परियोजनाओं का उद्घाटन किया। व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (सीआईबीएमएस) के अंतर्गत बनने वाली ये स्मार्ट बॉर्डर फेंसिंग परियोजनाएं देश में अपनी तरह की पहली हैं। इन दोनों परियोजनाओं में प्रत्येक, अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर 5.5 किलोमीटर सीमा क्षेत्र पर लगी हैं। इन पर हाइ-टेक निगरानी प्रणाली लगी है जो जमीन, जल, हवा और जमीन के नीचे बिजली का एक अदृश्य अवरोध पैदा करती है और सबसे कठिन इलाकों में घुसपैठ की कोशिशों को खोज निकालने व उन्हें असफल करने में बीएसएफ को मदद मिलती है। सीआईबीएमएस को ऐसे जमीनी हिस्सों पर चौकसी करने के लिए डिजाइन किया गया है जहां दुर्गम भूभाग या नदी तटीय सीमाओं की वजह से भौतिक निगरानी रखना संभव नहीं है।

 

सरकार ने 19 जनवरी को बीएसएफ की 6 अतिरिक्त बटालियन खड़ी करने को अपनी स्वीकृति दे दी जिसका कुल वित्तीय भार 2,090.94 करोड़ रुपये आएगा। इन सभी बटालियन को तब से तैनाती के लिए तैयार कर दिया गया है। इसी तरह आईटीबीपी में भी कुछ अतिरिक्त बटालियन खड़ी करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है।

 

केंद्रीय गृह मंत्री और बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार द्वारा 22 अप्रैल को बिहार के छपरा जिले के जलालपुर में आईटीबीपी की छठी बटालियन के नवनिर्मित मुख्यालय का उद्घाटन किया गया।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने 12 जुलाई 2018 को सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) को कार्यान्वित करने वाले फील्ड व राज्य स्तरीय अधिकारियों के साथ मुलाकात की।

 

पुलिस बलों का आधुनिकीकरण : ईआरएसएस की शुरुआत

 

सरकार के समक्ष पुलिस बलों के आधुनिकीकरण (एमपीएफ) का काम शीर्ष वरीयता में था और केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा 28 नवंबर को हिमाचल प्रदेश में और 1 दिसंबर को नागालैंड में आपातकालीन प्रतिक्रिया समर्थन प्रणाली (ईआरएसएस) के अंतर्गत एकल अंक के अखिल भारतीय आपातकालीन फोन नंबर '112' की शुरुआत इस दिशा में एक मील का पत्थर है।

 

एनसीआरबी ने 14 मार्च को एक मोबाइल एप्प टेम्पलेट का अनावरण किया जो नागरिकों के लिए 9 पुलिस संबंधी सेवाओं का एक गुच्छा है। ये सेवाएं नागरिकों और पुलिस के मध्य एक निर्बाध जुड़ाव प्रदान करती हैं। अनुकूलन के बाद राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस एप्प का स्वागत अपने सीसीटीएनएस मंचों पर कर सकते हैं जिसके माध्यम से नागरिक पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवा सकते हैं और अपनी शिकायत की स्थिति जान सकते हैं। इस एप्प में एक और व्यवस्था है जिसके जरिए शिकायतकर्ता एफआईआर ('संवेदनशील' की श्रेणी में आने वाली एफआईआर नहीं) डाउनलोड कर सकते हैं।

 

महिला सुरक्षा : गृह मंत्रालय में नया विभाग; साइबर अपराधों की रिपोर्ट करने वाले पोर्टल और आदतन यौन अपराधियों के डाटाबेस की शुरुआत

 

महिलाओं की सुरक्षा सभी के लिए चिंता का विषय है और सरकार के प्रयासों को सही दिशा में लगाने के लिए गृह मंत्रालय ने मई में एक नया विभाग बनाया है जो विस्तृत तौर पर महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मसलों को संबोधित करेगा। ये विभाग सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों और राज्य सरकारों के साथ समन्वय रखते हुए महिला सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं का सामना करता है। ऐसा माना गया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक राष्ट्रीय मिशन बनाया जाए जिसमें भागीदार मंत्रालयों / विभागों की हिस्सेदारी हो जो एक तय समय सीमा में विशेषीकृत कदम उठाएं। इसमें विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें (एफटीसी) स्थापित करना, फोरेंसिक ढांचे को मजबूत करना, यौन अपराधियों की राष्ट्रीय रजिस्ट्री निर्मित करना, अतिरिक्त सरकारी अभियोजन पक्ष नियुक्त करना और पीड़ितों को उचित चिकित्सकीय व पुनर्वास सुविधाएं प्रदान करना शामिल है।

 

सरकार ने 24 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्री समूह गठित किया ताकि काम के स्थल पर यौन उत्पीड़न को रोकने और उसका निपटारा करने के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचों को मजबूत किया जा सके।

 

20 सितंबर को गृह मंत्री ने महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दो अलग अलग पोर्टल शुरू किए। इनमें 'महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध निवारण' (सीसीपीडब्ल्यूसी) पोर्टल आपत्तिजनक ऑनलाइन विषय वस्तु पर नजर रखेगा और 'यौन अपराधियों पर राष्ट्रीय डाटाबेस' (एनडीएसओ) यौन अपराधों की निगरानी और जांच में सहयोग करेगा। 'साइबर क्राइम डॉट गव डॉट इन' (cybercrime.gov.in) बाल पोर्नोग्राफी, बाल यौन शोषण सामग्री, रेप और गैंग रेप जैसे यौन विषय वस्तु वाली सामग्री से संबंधित आपत्तिजनक ऑनलाइन विषय वस्तु पर नागरिकों की शिकायतें प्राप्त करता है। एनडीएसओ जिस तक सिर्फ कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ही पहुंच है वो यौन अपराधियों के मामलों में प्रभावी रूप से नजर रखने और जांच करने में सहयोग करता है।

 

नई दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम में 19 जून को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमति मेनका संजय गांधी द्वारा "बच्चों के विरुद्ध अपराधों के संबंध में पुलिस के लिए कानूनी प्रक्रियाओं की एक हैंडबुक" का विमोचन किया गया। 10 अगस्त को दिल्ली पुलिस की समस्त-महिला स्वॉट टीम के प्रवेश समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री मुख्य अतिथि थे।

 

वीज़ा व्यवस्था का उदारीकरण, ई-वीज़ा बेहद लोकप्रिय हुआ

 

पिछले एक वर्ष के दौरान गृह मंत्रालय ने भारत में वीज़ा प्रक्रिया को उदारीकृत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें से प्रमुख कदम निम्नलिखित हैं:

 

इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा सुविधा अब लगभग विश्व के सभी देशों का दायरा पूरा करती है। 166 देशों के विदेशी नागरिक अब इस सुविधा का लाभ 26 हवाई अड्डों और 5 बंदरगाहों पर ले सकते हैं। किसी विदेशी को अब अप्रवासन काउंटर पर अपने आगमन तक किसी भारतीय अधिकारी से बात करने की जरूरत नहीं है। ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (बीओआई) आमतौर पर 24 से 48 घंटे में तय करता है कि किसी विदेशी को ई-वीज़ा प्रदान करना है कि नहीं। ई-वीज़ा की लोकप्रियता अब आसमान छू रही है। ई-वीज़ा से भारत की यात्रा करने वाले विदेशियों की संख्या 2015 में 5.17 लाख थी जो इस साल 30 नवंबर तक बढ़कर 21 लाख हो गई। अब जितने कुल वीजा जारी किए जा रहे हैं उनमें से लगभग 40 प्रतिशत, ई-वीज़ा व्यवस्था के जरिए जारी किए जा रहे हैं और जल्द ही ये आंकड़ा 50 प्रतिशत को पार कर जाएगा जो कि इसकी लोकप्रियता का साक्ष्य है।

 

केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 13 अप्रैल को वेब आधारित एप्लीकेशन 'ई-एफआरआरओ' (ई-विदेशियों का क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय) की शुरुआत की। ये ई-एफआरआरओ व्यवस्था विदेशी नागरिकों को वीज़ा से जुड़ी 27 सेवाएं प्रदान करती है। ये बहुत सफल साबित हुई है और इससे विदेशियों को अपने रुकने के समय को ज्यादा बढ़ाने, वीज़ा स्थिति को बदलवाने जैसे कार्यों के लिए एफआरआरओ कार्यालयों में जाने की जरूरत से छुटकारा मिल गया है।         

 

पर्यटन और निवेश के बहाव को प्रोत्साहित करने के इरादे से अंडमान और निकोबार के 30 द्वीपों को विदेशी विषयक (प्रतिबंधित क्षेत्र) आदेश, 1963 के अंतर्गत अधिसूचित 'प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट' (आरएपी) व्यवस्था से बाहर रख दिया गया है। अंडमान एवं निकोबार द्वीप प्रशासन की अधिसूचना मुताबिक 11 निर्जन द्वीपों में विदेशियों को प्रवेश की अनुमति दे दी गई है जहां वे बिना आरएपी के सिर्फ दिन की यात्रा पर जा सकेंगे। इन द्वीपों में जाने के लिए विदेशियों के पंजीकरण की आवश्यकता को भी समाप्त कर दिया गया है।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने एफसीआरए प्रेषित धन की प्रभावी निगरानी के लिए 1 जून को एक ऑनलाइन विश्लेषण टूल की शुरुआत की।

 

ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण गृह मंत्रालय की कार्यक्रम मंजूरी और निवेश सुरक्षा मंजूरी तेज हुई

 

केंद्रीय गृह सचिव श्री राजीव गौबा ने भारत में आयोजित होने वाली वार्ता / सम्मेलन / कार्यशाला को सुरक्षा मंजूरी प्रदान करने के लिए 2 मई को एक ऑनलाइन इवेंट क्लियरेंस सिस्टम (https://conference.mha.gov.in) की शुरुआत की। इस सिस्टम ने विदेश में बने भारतीय मिशनों को ऐसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेने आ रहे विदेशी नागरिकों / प्रतिनिधियों को कॉन्फ्रेंस वीज़ा जारी करने में सक्षम किया है।

 

18 सितंबर को केंद्रीय गृह सचिव ने सुरक्षा मंजूरी प्रदान करने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल 'ई-सहज' का अनावरण किया। गृह मंत्रालय ने पिछले एक साल में सुरक्षा मंजूरी के करीब 1,100 मामलों में अनुमति दी है। वैसे तो इसके लिए दी गई समय सीमा 90 दिन है लेकिन गृह मंत्रालय सुरक्षा मंजूरी के मामलों में फैसला 60 दिन (2018 में प्रति मामले में औसत समय 53 दिन) में लेने को प्रयासरत रहता है जिसे और भी घटाने की कोशिशें की जा रही हैं। वर्ष 2016 में 6 महीने से भी पुराने 209 मामले थे जो बाद में कम होकर 154 मामले हुए और 2018 में ऐसे मामलों की संख्या 47 रह गई।

 

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग : द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग पर पहला भारत-चीन समझौता

 

द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग पर पहली भारत-चीन उच्च स्तरीय बैठक 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित हुई। केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह और चीनी जनवादी गणराज्य के लोक सुरक्षा मंत्री व राज्य काउंसलर श्री झाओ केजी ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। भारत के गृह मंत्रालय और चीन के लोक सुरक्षा मंत्रालय के बीच इन दोनों मंत्रियों द्वारा सुरक्षा सहयोग को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौता आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, संगठित अपराध, नशा नियंत्रण और ऐसे अन्य प्रासंगिक क्षेत्रों में सहयोग और चर्चा को और अधिक मजबूत और सशक्त करता है।

 

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री ने 15 जुलाई को ढाका में अपने बांग्लादेशी समकक्ष श्री असदुज्जमान खान के साथ गृह मंत्री स्तरीय वार्ता की छठी बैठक की सह-अध्यक्षता की। इन दोनों मंत्रियों की उपस्थिति में संशोधित यात्रा व्यवस्था 2018 (आरटीए 2018) पर भी हस्ताक्षर किए गए जिसमें आरटीए 2013 में संशोधन किया गया है ताकि स्टूडेंट वीज़ा और रोजगार की अवधि में बढ़ोतरी समेत दोनों देशों के मध्य वीज़ा व्यवस्था में और उदारीकरण होगा। अपनी तीन दिन की यात्रा के दौरान श्री राजनाथ सिंह ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री सुश्री शेख़ हसीना से भी मुलाकात की।

 

26 अक्टूबर को नई दिल्ली में भारत और म्यांमार के बीच 22वीं राष्ट्रीय स्तर की बैठक आयोजित की गई। इस दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्री राजीव गौबा और म्यांमार के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह मंत्रालय के उप-मंत्री मेजर जनरल ऑन्ग थू द्वारा किया गया। इस बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने इलाकों से संचालित हो रहे विद्रोही समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा सहयोग प्रदान करने और लोगों की गतिविधियों व सीमा पार व्यापार को सुगम बनाने को लेकर भी अपनी सहमति जताई।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने 21-24 जून 2018 को मंगोलिया का चार दिनों का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान गृह मंत्री ने मंगोलिया के प्रधान मंत्री के साथ मंगोलिया की पहली पेट्रोकैमिकल रिफाइनरी परियोजना के ऐतिहासिक समारोह की अध्यक्षता की। गृह मंत्री ने मंगोलिया के सीमा सुरक्षा प्राधिकरण (जीएबीपी) के मुख्यालय की यात्रा भी की और जीएबीपी के मुख्य नियंत्रण केंद्र में उच्च क्षमता वाले सर्वर को प्रदान करने के भारत सरकार के फैसले की घोषणा की जिससे उन्हें और बेहतर सीमा प्रबंधन करने में मदद मिलेगी।

 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कानून प्रवर्तन प्रशिक्षण पर अमेरिका के संघीय कानून प्रवर्तन प्रशिक्षण केंद्र (एफएलईटीसी) और भारत के पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरएंडडी) के बीच 7 फरवरी को एक सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर को मंजूरी दी।

 

28 मार्च को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंतर्राष्ट्रीय आपराधिकता पर काबू पाने और गंभीर संगठित अपराध का सामना करने के उद्देश्यों से सूचना के आदान प्रदान और सहयोग के संबंध में भारत, ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर को मंजूरी दी।

 

केंद्रीय गृह सचिव श्री राजीव गौबा ने 30 मई को नई दिल्ली में भारत और ब्रिटेन के बीच हुए तीसरे गृह मामलों के संवाद की सह-अध्यक्षता की। भारत और अमेरिका के बीच होमलैंड सुरक्षा संवाद पर वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक 18 जुलाई को आयोजित की गई। 

 

होमलैंड और सार्वजनिक सुरक्षा पर भारत और इजरायल के बीच संयुक्त संचालन समिति की दो दिवसीय बैठक 27-28 फरवरी 2018 को आयोजित हुई। इसमें सीमा प्रबंधन के अलावा पुलिस बलों के आधुनिकीकरण और क्षमता निर्माण पर चर्चा की गई।

 

मोरक्को से आए एक प्रतिनिधिमंडल ने 12 नवंबर को गृह मंत्रालय का दौरा किया और गृह राज्य मंत्री श्री किरण रिजिजु के नेतृत्व वाले भारतीय समूह के साथ आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहयोग को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 नवंबर को इस समझौते को मंजूर कर दिया।

 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 मार्च को भारत और फ्रांस के बीच नारकोटिक ड्रगों, साइकोट्रॉपिक पदार्थों और केमिकल प्रीकर्जर्स की गैर-कानूनी तस्करी में कमी लगाने और गैर-कानूनी उपभोग को रोकने और अन्य संबंधित अपराधों को लेकर एक समझौते को मंजूरी दी।

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने 14 मार्च को नई दिल्ली में पुलिस प्रमुखों के अंतर्राष्ट्रीय संघ (आईएसीपी) के दो दिवसीय प्रशांत एशिया क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया और गृह राज्य मंत्री श्री किरण रिजिजू ने इसके विदाई सत्र को संबोधित किया।

 

6 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री ने नई दिल्ली में तीन दिन के रक्षा एवं होमलैंड सुरक्षा एक्सपो व सम्मेलन 2018 का उद्घाटन किया।

 

केंद्र-राज्य निर्बाध संबंध : नियमित रूप से क्षेत्रीय परिषदों का संचालन

 

मौजूदा सरकार का ये उद्देश्य रहा है कि अंतर्राज्य परिषद् और साथ ही साथ क्षेत्रीय परिषदों के संस्थान को मजबूत किया जाए ताकि राज्यों के बीच और केंद्र व राज्यों के बीच सहयोग के एक अच्छे संघीय माहौल को प्रोत्साहित किया जाए और बनाकर रखा जाए। नतीजतन पिछले चार वर्षों के दौरान 600 से अधिक विषयों पर चर्चा की जा चुकी है और उनमें से 400 का समाधान निकाला जा चुका है।

 

केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली अंतर्राज्य परिषद् (आईएससी) की स्थायी समिति ने 25 मई को नई दिल्ली में हुई बैठक में पुंछी आयोग द्वारा दी गई सभी 273 सिफारिशों पर विचार-विमर्श का दुष्कर कार्य पूरा कर लिया। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में 26 अप्रैल को अहमदाबाद में पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद् की 23वीं बैठक की गई। दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद् की 28वीं बैठक केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 18 सितंबर को बैंगलुरू में हुई। बैठक में 27 बिंदुओं पर चर्चा हुई जिनमें से 22 का समाधान कर लिया गया। केंद्रीय गृह मंत्री ने 1 अक्टूबर ने कोलकाता में हुई पूर्वी क्षेत्रीय परिषद् की 23वीं बैठक की अध्यक्षता की जहां 30 विषयों पर चर्चा की गई जिनमें से 26 का समाधान निकाल लिया गया।

 

आपदा प्रबंधन को केंद्र से अधिक धन मिला : भारत सरकार ने एसडीआरएफ में अपना योगदान 75 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत किया; एनडीआरएफ की 4 नई बटालियन मंजूर हुईं

 

प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदा के दौरान आपदा प्रबंधन करना एक और ऐसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है जिसका भार गृह मंत्रालय पर है। 27 सितंबर को भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए 1 अप्रैल 2018 के प्रभाव से राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) में अपना योगदान 75 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत कर दिया। अब केंद्र सरकार एसडीआरएफ में 90 प्रतिशत योगदान देगी, वहीं सभी राज्य इसमें 10-10 प्रतिशत योगदान देंगे।

 

9 अगस्त को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 637 रुपये के अनुमानित खर्च पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की चार अतिरिक्त बटालियन खड़ी करने को मंजूरी दी। ये चार बटालियन शुरू में आईटीबीपी की दो बटालियन और बीएसएफ व असम राइफल्स की एक-एक बटालियन के तौर पर निर्मित की जाएंगी। बाद में इन चार बटालियन को एनडीआरएफ की बटालियन में तब्दील कर दिया जाएगा। क्षेत्रों की अतिसंवेदनशीलता के आधार पर इन चारों बटालियन को जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली एनसीआर में तैनात किया जाएगा। मौजूदा समय में एनडीआरएफ की 12 बटालियन हैं जो तुरंत प्रतिक्रिया मुहैया करवाने के लिए रणनीतिक रूप से देश भर में तैनात की गई हैं।

 

उप-राष्ट्रपति ने 22 मई को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) के दक्षिणी कैंपस की इमारत की आधारशिला रखी।

 

गृह मंत्रालय द्वारा गठित कार्य दल ने "आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे पर एक गठबंधन की स्थापना" (सीडीआरआई) पर अपनी रिपोर्ट 2 मई को केंद्रीय गृह मंत्री को प्रस्तुत की। गृह मंत्रालय और इसरो ने 20 सितंबर को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए ताकि आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए एक अति आधुनिक एकीकृत नियंत्रण कक्ष (आईसीआर-ईआर) की स्थापना की जा सके। इससे आपदा प्रबंधन के साथ साथ आंतरिक सुरक्षा की जरूरत भी पूरी होगी।

 

केरल में जुलाई-अगस्त में दो बार आई बाढ़ के दौरान मंत्रिमंडल सचिव ने अगस्त में राज्य में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करने के लिए एनसीएमसी की छह बैठकों की अध्यक्षता की। केंद्र ने बड़े स्तर पर बचाव और राहत कार्य चलाए। ये सबसे बड़े बचाव ऑपरेशनों में से एक था जिसमें 40 हैलीकॉप्टर, 31 विमान, 182 बचाव दल, रक्षा बलों की 18 मेडिकल टीम, एनडीआरएफ की 58 टीम, सीएपीएफ की 7 कंपनियां सेवा कार्यों में लगा दी गईं, साथ ही साथ इसमें 500 से ज्यादा नाव और आवश्यक बचाव उपकरण भी लगाए गए। उन्होंने 60,000 से ज्यादा इंसानी जिंदगियों को बचाया और उन्हें निर्जन या फंसे हुए क्षेत्रों से बचाते हुए राहत शिविरों में पहुंचाया। रक्षा विमानों और हैलिकॉप्टरों ने 1,168 घंटों की उड़ान भरते हुए 1,084 चक्कर लगाए, 1,286 टन सामान एयरलिफ्ट किया और 3,332 बचावकर्ताओं को उड़ान दी।

 

21 जुलाई को गृह राज्य मंत्री श्री किरण रिजिजू के नेतृत्व वाले केंद्रीय दल ने केरल में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की जिसके बाद 12 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्री ने केरल के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने रोजाना बचाव और राहत कार्यों पर निगरानी रखी और 17-18 अगस्त 2018 को राज्य की यात्रा की।

 

केंद्र ने बिना किसी रुकावट के समयोचित ढंग से केरल को तत्काल सहायता और राहत सामग्री प्रदान करवाई। बाढ़ प्रभावित केरल के लिए प्रधानमंत्री द्वारा घोषित की गई 500 करोड़ रुपये की केंद्र की सहायता राशि और केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा घोषित की गई 100 करोड़ रुपये की राशि 21 अगस्त को केरल सरकार को जारी कर दी गई। इससे पहले राज्य के एसडीआरएफ को पहले ही 562.45 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए जा चुके थे। बाद में केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में 6 दिसंबर को हुई एक उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) की बैठक में राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (एनडीआरएफ) की ओर से केरल को 3,048.39 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहयोग राशि भी स्वीकृत की गई।

 

4 अगस्त को गृह राज्य मंत्री श्री किरण रिजिजू ने नागालैंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया।

 

उड़ीसा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के बीच के तट पर आने वाले चक्रवाती तूफान 'तितली' से होने वाले भूस्खलन की आहट में प्रारंभिक उपायों का जायजा लेने के लिए मंत्रिमंडल सचिव की अध्यक्षता में 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) की बैठक हुई। 

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने 26 जनवरी को उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) की बैठक की अध्यक्षता की जहां बिहार के लिए 1711.66 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर की गई। इसके साथ ही साथ एचएलसी ने एनडीआरएफ से गुजरात राज्य के लिए 1055.05 करोड़ रुपये, केरल राज्य के लिए 169.63 करोड़ रुपये, राजस्थान राज्य के लिए 420.57 करोड़ रुपये, तमिल नाडु राज्य के लिए 133.05 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश राज्य के लिए 420.69 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल राज्य के लिए 838.85 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ के लिए 395.91 करोड़ रुपये और मध्य प्रदेश राज्य के लिए 836.09 करोड़ रुपये की सहायता राशि मंजूर की। एचएलसी ने 14 मई को असम, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, राजस्थान राज्यों और लक्षद्वीप के केंद्रशासित प्रदेश को 1,161.17 करोड़ रुपये की सहायता राशि मंजूर की। अपनी बैठक में 29 जून को एचएलसी ने बाढ़/सूखे से प्रभावित आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड राज्यों को अतिरिक्त केंद्रीय सहायता भी स्वीकृत की। 12 सितंबर को एचएलसी ने एनडीआरएफ से उत्तर प्रदेश (2017-18 के दौरान रबी के सूखे से प्रभावित) राज्य को 157.23 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र राज्य (2017 के दौरान तूफान और कीट हमले से प्रभावित) को 60.76 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता मंजूर की। केंद्रीय गृह मंत्री ने 31 अक्टूबर को साल 2018-19 के लिए एसडीआरएफ में केंद्र के हिस्से की 229.05 करोड़ रुपये की दूसरी किश्त अग्रिम तौर पर जारी करने की मंजूरी दी ताकि आंध्र प्रदेश में 11 अक्टूबर को आए खतरनाक चक्रवाती तूफान 'तितली' से प्रभावित लोगों को राहत उपाय प्रदान करने में राज्य की मदद हो सके। एचएलसी ने 19 नवंबर को एनडीआरएफ से 546.21 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता कर्नाटक के लिए मंजूर की। 30 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री ने साल 2018-19 के लिए एसडीआरएफ में केंद्र के हिस्से की 353.70 करोड़ रुपये की दूसरी किश्त अंतरिम राहत के तौर पर जारी करने को मंजूरी दी ताकि तमिलनाडु में तूफान गाजा से प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने में मदद की जा सके। 6 दिसंबर को हुई एचएलसी की बैठक में एनडीआरएफ से नागालैंड के लिए 131.16 करोड़ और आंध्र प्रदेश के लिए 539.52 करोड़ रुपये के अलावा केरल के लिए भी अतिरिक्त सहायता मंजूर की गई।

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 21 अक्टूबर को पुलिस स्मारक दिवस के अवसर पर बोलते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर एक पुरस्कार की घोषणा की ताकि आपदा मोचन कार्यों में लगे लोगों को सम्मानित किया जा सके। इस पुरस्कार की घोषणा हर साल की जाएगी जिसमें आपदा के बीच में लोगों की जान बचाने में दिखाई गई वीरता और साहस को सम्मानित किया जाएगा।

 

12 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा नई दि्ल्ली में आपदा अनुकूल बुनियादी ढांचे पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला (आईडब्ल्यूडीआरआई) का उद्घाटन किया गया। गृह राज्यमंत्री श्री किरण रिजिजू द्वारा इसके विदाई सत्र को संबोधित किया गया। नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने 19 मार्च के नई दिल्ली में आपदा जोखिम घटाने पर आधारित पहली भारत-जापान कार्यशाला का उद्घाटन किया , वहीं श्री किरण रिजिजू ने विदाई सत्र को संबोधित किया। श्री किरण रिजिजू ने मंगोलिया के उलानबातर में 3 से 6 जुलाई 2018 को हुए 'आपदा जोखिम कम करने के लिए एशियाई मंत्री सम्मेलन' (एएमसीडीआरआर) में हिस्सा लेने के लिए एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

 

पद्म पुरस्कार : रिकॉर्ड स्तर पर नामांकन हुए क्योंकि ये सर्वोच्च नागरिक सम्मान जनता के पुरस्कार बन गए

 

पद्म पुरस्कार-2019 के लिए रिकॉ़र्ड संख्या में 49,992 नामांकन प्राप्त किए जा चुके हैं जो 2010 में मिले नामांकनों से 32 गुना ज्यादा है। साल 2010 में जहां 1,313 नामांकन मिले थे, वहीं 2016 में ये संख्या 18,768 थी और 2017 में नामांकनों की संख्या 35,595 रही।

 

मौजूदा सरकार ने पद्म पुरस्कारों को सही मायनों में 'जनता के पुरस्कारों' में तब्दील कर दिया है। लोग प्रोत्साहित हुए हैं और ऐसे गुमनाम नायकों को नामांकित कर रहे हैं जो देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान (पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री) पाने के हकदार हैं।

 

साल 2016 में पद्म पुरस्कारों के लिए नामांकन प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया था और देश के नागरिक बड़ी संख्या में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित हों इस हेतु एक सरल, पहंचने में सहज और सुरक्षित ऑनलाइन मंच उपलब्ध कर दिया गया।

 

जिस तकनीकी हस्तक्षेप ने बड़ी संख्या में लोगों के लिए नामांकन प्रक्रिया तक पहुंच सरल की है और मौजूदा सरकार का राष्ट्र के लिए निस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे गुमनाम नायकों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने पर जो जोर है, इसी के परिणामस्वरूप ये परिवर्तन हुआ है।

 

नए पुलिस मैडलों की संस्थापना

 

सीएपीएफ कर्मियों के बहादुरी भरे प्रयासों को सम्मानित करने और ऊंचे मानदंडों के पेशेवर व्यवहार को प्रोत्साहित करने के लिए गृह मंत्रालय ने 28 जून को पांच नए पुलिस मैडलों की स्थापना की घोषणा की - गृह मंत्री का स्पेशल ऑपरेशन मैडल, आंतरिक सुरक्षा मैडल, असाधारण आशुचन पदक और उत्कृष्ट व अति-उत्कृष्ट सेवा मैडल। इसका उद्देश्य सेवा में उत्कृष्टता एवं पेशेवर व्यवहार को प्रोत्साहित करना और उन सुरक्षा कर्मियों को सम्मान देना है जो तनाव भरे वातावरण में और कठिन इलाकों में भी अच्छा काम कर रहे हैं। इससे पहले मार्च में सरकार ने देश की केंद्रीय जांच एजेंसियों और राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस में अपराध की जांच के लिए ऊंचे पेशेवर मानक प्रोत्साहित करने के लिए "पुलिस जांच में एक्सीलेंस के लिए केंद्रीय गृह मंत्री का मैडल" स्थापित किया। इसमें सब-इंस्पेक्टर से लेकर पुलिस अधीक्षक तक की रेंज के अधिकारियों की पात्रता रखी गई है। पिछले तीन वर्षों के अपराध आंकड़ों के औसत के आधार पर प्रति वर्ष कुल 162 मैडल प्रदान किए जाएंगे और इनमें से 137 मैडल राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के लिए होंगे और 25 केंद्रीय जांच एजेंसियों के लिए। विजेताओं के नामों की घोषणा प्रति वर्ष 15 अगस्त को की जाएगी।

 

राष्ट्र को समर्पित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 21 अक्टूबर को नई दि्ल्ली में पुलिस स्मारक दिवस पर राष्ट्रीय पुलिस स्मारक राष्ट्र को समर्पित किया। यह स्मारक शांति पथ के उत्तरी अंत पर चाणक्यपुरी में 6.12 एकड़ जमीन पर खड़ा किया गया है। इस राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में केंद्रीय मूर्ति है, एक वीरता की दीवार है जिस पर उन पुलिस कर्मियों के नाम उकेरे हुए हैं जिन्होंने कर्तव्य की राह में अपनी जान निछावर कर दी और शहीद पुलिस कर्मियों की स्मृति में एक विशेष कला संग्रहालय है।

 

ये पुलिस स्मारक देश के सभी केंद्रीय पुलिस संगठनों और सभी राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस बलों का प्रतिनिधित्व करता है। वर्ष 1947 के बाद से 34,844 पुलिस कर्मी शहीद हो चुके हैं और इस साल 424 ने अपनी जान गंवा दी।

 

स्डूटेंड पुलिस कैडेट (एसपीसी) कार्यक्रम की शुरुआत

 

एक अच्छी पहल के तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने 21 जुलाई को हरियाणा के गुरुग्राम में हुए एक आयोजन में पूरे देश में कार्यान्वित करने के लिए स्टूडेंट पुलिस कैडेट (एसपीसी) कार्यक्रम की शुरुआत की। इस एसपीसी कार्यक्रम के केंद्र में कक्षा 8 और 9 के छात्र हैं और इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि इसके कारण इन छात्रों पर काम का बोझ बढ़ न जाए।

 

सीएपीएफ जवानों के लिए करियर में वृद्धि और कल्याणकारी उपाय

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में 10 जनवरी को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक ने सीआईएसएफ के समूह '' कार्यकारी काडर की काडर समीक्षा को मंजूरी दे दी। इसके अंतर्गत सीआईएसएफ के वरिष्ठ ड्यूटी पदों में सुपरवाइजरी स्टाफ को बढ़ाने के लिए सहायक कमांडेंट से लेकर अतिरिक्त महानिदेशक जैसे विभिन्न रैंक वाले 25 पदों का निर्माण किया जाएगा।         

 

केंद्रीय गृह मंत्री ने 20 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया जिसका उद्देश्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के शहीदों के परिवारों की सहायता के लिए "भारत के वीर" पोर्टल के तहत फंड जुटाना था। इसके साथ-साथ कई वर्षों की परंपरा का पालन करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने 2018 का नया साल उत्तराखंड में आईटीबीपी के जवानों के साथ मनाया।

 

विविध : कैदियों के लिए विशेष क्षमा; चंडीगढ़ में सिख महिलाओं के लिए हैलमेट से छूट

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में 18 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महात्मा गांधी के 150वें जन्मवर्ष के उत्सव के हिस्से के तौर पर कैदियों के लिए विशेष क्षमा प्रदान करने को मंजूरी दी। इसमें घृणित अपराधों वाली कुछ श्रेणियों को छोड़कर बाकी ऐसे सभी कैदियों को तीन चरणों में क्षमा करने की पात्रता दी गई है जो बुजुर्ग हैं, दिव्यांग हैं या बहुत बीमार कैदी हैं और अपनी असल सजा अवधि का दो-तिहाई (66 प्रतिशत) हिस्सा पूरा कर चुके हैं।

 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 11 अक्टूबर को चंडीगढ़ प्रशासन को सलाह दी कि दिल्ली सरकार द्वारा जारी की गई उस अधिसूचना का पालन करें जिसमें चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश में दुपहिया वाहन चलाने के दौरान सिख महिलाओं को हैलमेट पहनने से छूट प्रदान की गई है।

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आरकेमीणा/एएम/जीबी

 


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