कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय
कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय - वर्षांत समीक्षा-2018
कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2017 लागू; कुल 93 धाराओं में से 92 धाराओं को प्रासंगिक नियमों के साथ लागू किया गया
कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा संसद के चालू शीतकालीन सत्र में कंपनी (संशोधन) अध्यादेश 2018 के स्थान पर कंपनी (संशोधन) विधेयक 2018 लाने का प्रस्ताव
दिवाला और शोधन अक्षमता कोड (संशोधन) अधिनियम, 2018 तथा दिवाला और शोधन अक्षमता कोड (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2018 अधिसूचित
कंपनियों की वित्तीय जानकारी देने की प्रक्रिया में निवेशकों और जनता का भरोसा बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय वित्तीय सूचना प्राधिकरण (एनएफआरए) गठित
विभिन्न प्रक्रियाओं को दुरुस्त करने के लिए ई-शासन पहलों की शुरूआत
प्रविष्टि तिथि:
20 DEC 2018 10:31AM by PIB Delhi
सभी हितधारको को अधिक व्यापार सुगमता प्रदान करने, कार्पोरेट ढांचे में अधिक पारदर्शिता लाने और कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कुशलता बढ़ाने के संबंध में बेहतर कॉर्पोरेट अनुपालन के उद्देश्य से कार्पोरेट कार्य मंत्रालय ने पिछले एक साल (जनवरी-नवम्बर, 2018) के दौरान कई बड़ी पहलें/ फैसले किए हैं।
इनमें कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2017, कंपनी (संशोधन) अध्यादेश 2018, राष्ट्रीय वित्तीय सूचना प्राधिकरण (एनएफआरए) का गठन, दिवाला और शोधन अक्षमता कोड में संशोधन, सभी कंपनियों के निदेशकों के लिए ई-केवाईसी अभियान, निगमीकरण संबंधी आवेदनों के लिए प्रक्रियाओं को तेज बनाना, नियमों के अनुपालन में समानता और विवेकाधिकार को समाप्त करना शामिल है।
31 अक्टूबर, 2018 को जारी होने वाली विश्व बैंक की ‘डुइंग बिजनेस’ 2019 रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार भारत 23 पायदान चढ़कर 77वें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि 2017 में वह 100वें स्थान पर था। इस तरह भारत ने व्यापार शुरू करने और व्यापार करने के संबंध में 10 मानदंडों में से 6 मानदंडों में अपनी स्थिति में सुधार किया है। कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने व्यापार शुरू करने, दिवाला समस्या का हल करने और अल्पसंख्यक हितों की सुरक्षा करने में बहुत योगदान किया है।
कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की वर्ष भर की उपलब्धियों का विवरण इस प्रकार है :
कंपनी अधिनियम
कंपनी अधिनियम, 2013 :
अब तक धारा 465 को छोड़कर कंपनी अधिनियम, 2013 की सभी धाराओं को अधिसूचित किया जा चुका है। धारा 2 [खंड 67 (ix)] और धारा 230 [उप नियम (11) और (12)] के हिस्सों को अभी शुरू किया जाना है।
कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2017 :
माननीय राष्ट्रपति ने 3 जनवरी, 2018 को कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2017 को मंजूरी दे दी थी और यह कानून बन गया था। इस अधिनियम में कुल 93 धारायें हैं। अब तक कुल 93 धाराओं में से 92 धाराओं को प्रासंगिक नियमों के साथ लागू कर दिया गया है। एक धारा (निधियों से संबंधित धारा 81) और कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2017 की धारा 23 और 80 के कुछ हिस्सों के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत अधिसूचित नियमों और फार्मों के 3 समुच्चयों में संशोधन की आवश्यकता है। मंत्रालय में इसके अध्ययन की जरूरत है और इस काम में थोड़ा समय लग सकता है। मंत्रालय का प्रस्ताव है कि 31 दिसंबर, 2018 तक कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2017 की धारा 81 और धारा 23 के एक हिस्से को प्रासंगिक नियमों के साथ अधिसूचित कर दिया जाए।
कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत अपराधों से निपटने के लिए मौजूदा रूपरेखा तथा संबंधित मुद्दों की समीक्षा करने के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली को सौंप दी है। अपराधों की प्रकृति के आधार पर समिति ने कानूनी प्रावधानों को 8 श्रेणियों में बांटा है। समिति ने सुझाव दिया है कि गंभीर अपराधों के लिए मौजूदा सख्त कानून जारी रखे जायें, जिनके दायरे में सभी 6 श्रेणियां रहेंगी। दूसरी तरफ दो श्रेणियों के दायरे में आने वाली तकनीकी या प्रक्रिया संबंधी चूकों को घरेलू न्यायिक प्रक्रिया के तहत रखा जाए। इससे दो उद्देश्यों की पूर्ति होगी – व्यापार में सुगमता और बेहतर कॉर्पोरेट अनुपालन। इस कदम से विशेष अदालतों में दायर होने वाले मुकदमों की संख्या में भी कमी आएगी और इसके कारण गंभीर अपराधों का जल्द निपटारा होगा तथा गंभीर अपराधियों को सजा मिलेगी। कॉर्पोरेट ठगी से संबंधित धारा 447 के तहत देनदारी का कानून कॉर्पोरेट ठगी के हर मामले में कायम रहेगा। समीक्षा और सुझाव के तहत ज्यादातर धाराओं को शुरू करने के लिए अधिसूचित कर दिया गया है। समिति के सुझावों के आधार पर और व्यापार सुगमता को प्रोत्साहन देने तथा बेहतर कॉर्पोरेट अनुपालन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ने अध्यादेश लागू करने का फैसला किया था। इस तरह 2 नवम्बर, 2018 को कंपनी (संशोधन) अध्यादेश, 2018 को लागू कर दिया गया।
कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा संसद के चालू शीतकालीन सत्र में कंपनी (संशोधन) अध्यादेश 2018 के स्थान पर कंपनी (संशोधन) विधेयक 2018 लाने का प्रस्ताव है।
दिवाला और शोधन अक्षमता
वर्ष 2018 में राष्ट्रपति ने दिवाला और शोधन अक्षमता कोड (संशोधन) अध्यादेश, 2018 जारी किया।
2017 से दिवाला और शोधन अक्षमता प्रक्रिया के प्रभावी होने की शुरूआत हुई है और यह कानून बेहतर हो रहा है। नए कोड के प्रभावी होने का प्रमुख कारण न्यायपालिका द्वारा विवादों का फैसला करना है। कोड में विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए समयसीमा निर्धारित की गई है। इस कोड से ऐसी प्रक्रियाएं विकसित हुई है जिससे कानूनी अनिश्चितता में कमी आई है।
दिवाला और शोधन अक्षमता कोड (संशोधन) अध्यादेश, 2018 की अधिसूचना 19 जनवरी, 2018 को जारी की गई। इसने आईबीसी (संशोधन) अधिनियम का स्थान लिया। कोड में व्यक्तियों को कुछ विशेष परिस्थितियों में समाधान योजना प्रस्तुत करने का निषेध किया गया है। दिवाला विधि समिति की अनुशंसाओं के तहत अगस्त, 2018 में अध्यादेश में दूसरा संशोधन किया गया। 6 जून, 2018 की अधिसूचना के माध्यम से कोड में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी किया गया। कोड में संशोधन का उद्देश्य विभिन्न हितधारकों विशेषकर घर खरीदने वालों, सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमियों आदि के हितों को संतुलित करना था। कॉर्पोरेट कर्जदारों को दिवालियापन घोषित के स्थान पर समाधान प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके लिए ऋणदाताओं के मताधिकार के मूल्य को कम किया गया। समाधान प्रस्तुत करने वालों की योग्यता से जुड़े प्रावधानों में एकरूपता लाई गई।
राष्ट्रीय वित्तीय सूचना प्राधिकरण
कॉर्पोरेट क्षेत्र में लेखा घोटालों और धोखाधड़ियों को देखते हुए लेखा परीक्षण के लिए राष्ट्रीय वित्तीय सूचना प्राधिकरण (एनएफआरए) को एक स्वतंत्र नियामक के रूप में अधिसूचित किया गया। यह कम्पनी अधिनियम 2013 में किया गया एक महत्वपूर्ण बदलाव है। प्राधिकरण कम्पनियों के वित्तीय सूचना की गुणवत्ता की समीक्षा करेगा और उन लेखा परीक्षकों/लेखा कम्पनियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा जिन्होंने अपने वैधानिक उत्तरदायित्व का पालन नहीं किया है। आशा है कि इस निर्णय से विदेशी/घरेलू निवेश बढ़ेगा और आर्थिक विकास में तेजी आएगी। अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुपालन से लेखा परीक्षण क्षेत्र का विकास होगा तथा लेखा क्षेत्र के वैश्विकरण को समर्थन मिलेगा। अधिनियम की धारा 132 के अंतर्गत प्राधिकरण को लेखा परीक्षकों (सीए) और उनकी कम्पनियों, सूचीबद्ध कम्पनियों तथा गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कम्पनियों की जांच करने का अधिकार दिया गया है। सरकार ने इस प्राधिकरण का गठन किया है और एनएफआरए (अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति तथा सेवा व अन्य शर्तें) नियम 2018 प्रस्तुत किया है। 1 अक्टूबर, 2018 को श्री आर. श्रीधरन तथा डॉ. प्रसेनजीत मुखर्जी को क्रमशः प्राधिकरण का अध्यक्ष और पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया गया है।
कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 132 की उप-धारा 2 व 4 के अंतर्गत मंत्रालय ने अधिसूचना संख्या जीएसआर संख्या 1111(ई) दिनांक 13 नवंबर, 2018 के जरिए राष्ट्रीय वित्तीय सूचना प्राधिकरण नियम, 2018 को अधिसूचित किया है।
ई-प्रशासन
त्वरित और पारदर्शी प्रक्रियाओं के लिए कॉर्पोरेट मंत्रालय ने व्यापार में आसानी तथा मानकीकरण के लिए निम्न प्रमुख निर्णय लिए हैः-
- ‘रन की शुरूआत- अनूठा नाम आरक्षित करे’- नाम के लिए वेब सेवाः वेब आधारित एक सेवा की शुरूआत की गई। इसका नाम रन (आरयूएन) है- अनूठा नाम आरक्षित करे। नाम आरक्षण की प्रक्रिया को तेज, आसान और त्वरित बनाने के लिए 26 जनवरी, 2018 को इस सेवा की शुरूआत की गई। इस सेवा के द्वारा प्रक्रियाओं की संख्या में कमी लाई गई है। यह सेवा कम्पनियों के लिए हैं। 2 अक्टूबर, 2018 से यह सेवा एलएलपी (सीमित देयता साझेदारी) के लिए भी उपलब्ध है।
2. डीआईएन के आबंटन की प्रक्रिया का पुनर्निर्धारण : निदेशक के रूप में किसी व्यक्ति की नियुक्ति के समय संयुक्त एसपीआईसीई प्रपत्र के माध्यम से डीआईएन के आबंटन द्वारा इसकी प्रक्रिया का पुनर्निर्धारण (यदि डीआईएन न हो) किया गया है।
3. कंपनी की शुरूआत के लिए एमसीए शुल्क की छूट : इसके लिए पुनर्निर्धारण की एक सरकारी प्रक्रिया लागू की गई है। इसके तहत अधिकतम 10 लाख रुपये की अधिकृत पूंजी वाली सभी कंपनियों अथवा ऐसी कंपनियां, जिसमें कोई शेयर कैपिटल न हो, किन्तु अधिकतम 20 सदस्य हों, तो ऐसी कंपनियों की शुरूआत के लिए कोई शुल्क नहीं होगा।
4. आईएफएससी और छूट से जुड़ी अधिसूचनाओं के कारण ई-फॉर्म लागू करना, कंपनी कानून सीआरएल-01 में संशोधन, देरी के मामले में माफी योजना (सीओडीएस) लागू करना : आईएफएससी अधिसूचना में बदलाव, बदलावों से संबंधित छूट अधिसूचना और सीआरएल-01 (कंपनी द्वारा सहायक संस्थाओं के स्तरों की संख्या के बारे में पंजीयक के लिए विवरण) लागू होने के साथ-साथ कंपनी कानून में संशोधन के कारण ई-फॉर्म में 16 प्रकार की बदलाव किये गये है। साथ ही, फरवरी-मार्च, 2018 में सीओडीएस 2018 नये रूप में सामने आई।
5. सभी कंपनियों के निदेशकों के लिए ई-केवाईसी अभियान : एमसीए के माध्यम से ऐसे सभी डीआईएन धारकों के लिए डीआईआर-3 केवाईसी नामक एक अनिवार्य ई-फॉर्म लागू किया गया है, जिन्हें 31 मार्च, 2018 तक अथवा पहले डीआईएन आबंटित किया गया है और जिसके डीआईएन को स्वीकृति मिली हुई है। इस अभियान का लक्ष्य व्यक्तिगत डीआईएन धारकों का सत्यापन करना और अस्तित्वहीन अथवा फर्जी डीआईएन धारकों का सफाया करना है। केवाईसी प्रक्रिया के जरिये आधार, पासपोर्ट, व्यक्तिगत मोबाइल नम्बर और व्यक्तिगत ई-मेल आईडी जैसे अतिरिक्त विवरण प्राप्त किया जाता है। इसके अलावा, ऐसे हितधारकों के लिए विशेष प्रबंध किया गया है, जिनके पास आधार न हो। लगभग 33 लाख डीआईएन पंजीकृत हैं और लगभग 15.88 लाख डीआईएन धारकों ने 30 नवम्बर, 2018 तक डीआईआर केवाईसी दाखिल किये हैं। इस अभियान में एमसीए ने 11 लाख आधार कार्ड धारकों को जोड़ा है। भारत के किसी हिस्से में संचालित होने वाला अपनी तरह का यह एक अकेला अभियान है।
6. एलएलपी (एफआईएलएलआईपी) शुरू करने के लिए समन्वित फॉर्म : पूर्ववर्ती फॉर्म-2 के स्थान पर एक नया समन्वित फॉर्म एफआईएलएलआईपी लागू करके ‘नाम आरक्षण’, डीपीआईएन/डीआईएन का आबंटन और एलएलपी की शुरूआत जैसी तीन सेवाएं जोड़ दी गईं।
7. एलएलपी के लिए ‘नाम आरक्षण’ तथा ‘शुरूआत’ हेतु केन्द्रीय पंजीकरण केन्द्र (सीआरसी) स्थापित करना : कंपनियों के ‘नाम आरक्षण’ और ‘शुरूआत’ के लिए सीआरसी को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। जैसा कि, पिछले दो वर्षों से सीआरसी के संचालन को लागू किया गया है, मंत्रालय ने एलएलपी के लिए ‘नाम आरक्षण’ और ‘शुरूआत’ हेतु एकसमान जीपीआर प्रक्रिया शुरू की है और इसे सीआरसी के संचालन में शामिल किया है। सभी हितधारकों के लिए अधिकाधिक कारोबारी सुगमता प्रदान करने के बारे में मंत्रालय के उद्देश्यों के अनुसार सरकार द्वारा यह पुनर्निर्धारण प्रक्रिया चलाई जा रही है और इसके परिणामस्वरूप नये आवेदनों की प्रक्रिया में तेजी आने के साथ-साथ आवेदन संबंधी नियमों में एकरूपता आई है और निर्णय में आसानी हुई है।
राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण
दिवाला एवं शोधन अक्षमता के समाधान से जुड़े मामलों में तेजी लाने के लिए एमसीए ने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण के अंतर्गत 8 विशेष अदालतें गठित करने का प्रस्ताव रखा ताकि दिवालियापन से जुड़े मामलों से निपटा जा सके। इन अदालतों को मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद में स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य न्यायाधिकरण पर पड़ने वाले बोझ को कम करना है बावजूद इसके कि उसकी देश भर में 11 शाखाएं हैं। आईबीसी मामलों का समय पर समाधान करने के लिए दिल्ली, मुंबई की एनसीएलटी शाखाओं के अंतर्गत शुरूआत के लिए विशेष आईबीसी अदालतें स्थापित करने की परिकल्पना की गई। इसका मकसद एनपीए के तेजी से समाधान के लिए शोधन अक्षमता प्रक्रिया को मजबूत बनाना है।
भारतीय लेखाविधि मानक
लेखाविधि में और अधिक पारदर्शिता लाने के लिए, एमसीए ने भारतीय लेखाविधि मानक (आईएनडी एएस) 115 अधिसूचित किया जो 01 अप्रैल, 2018 से प्रभावी हो गया। आईएनडी एएस 115 अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग मानकों की तर्ज पर ग्राहकों से संपर्क बनाने के लिए एक नया राजस्व स्वीकृति मानक है, जो राजस्वों की अधिक पारदर्शी लेखाविधि में मदद करेगा और इसका प्रौद्योगिकी, रियल एस्टेट और दूरसंचार सहित विविध क्षेत्रों में कार्यरत कंपनियों पर असर पड़ेगा। आईएनडी एएस 115 का उद्देश्य ऐसे सिद्धांत स्थापित करना है, जिन्हें वित्तीय विवरणों के उपयोगकर्ता उपयोगी जानकारी देते समय प्रयोग में ला सकें। इसमें किसी कंपनी से अपेक्षा की जाती है कि वह राजस्व को स्वीकृति प्रदान करे ‘ताकि ग्राहकों को वस्तुओं अथवा सेवाओं का हस्तांतरण उतनी राशि में दिखाया जा सके जिसका वादा किया गया है। यह उस प्रतिफल को दर्शाता है जिसकी वस्तुओं अथवा सेवाओं के आदान-प्रदान में कंपनी अपेक्षा करती है’।
गैर सूचीबद्ध सरकारी कंपनियों की प्रतिभूतियों का डीमैटीरियलाइजेशन (वास्तविक शेयरों को डिजिटल शेयर में बदलने की प्रक्रिया)
कॉर्पोरेट ढांचे में अधिक पारदर्शिता लाने और केवाईसी तथा निवेशकों की रक्षा के मामले में प्रतिभूतियों के डीमैटीरियलाइजेशन (वास्तविक शेयर को डिजिटल शेयर में बदलने की प्रक्रिया) के लाभों को देखते हुए सरकार ने डिजिटल इंडिया पर ध्यान केन्द्रित किया और सीए-13 के अनुच्छेद 29(1)(बी) के अंतर्गत मंत्रालय ने उपयुक्त नियमों में संशोधन किया ताकि गैर सूचीबद्ध सरकारी कंपनियों के डीमैटीरियलाइजेशन को लागू किया जा सके साथ ही इस संबंध में सभी साझेदारों के साथ विचार-विमर्श किया गया और 10 सितम्बर, 2018 को नियमों में संशोधन किया गया। 02 अक्टूबर, 2018 से गैर सूचीबद्ध सरकारी कंपनियों द्वारा प्रतिभूतियों को जारी करने और उनके हस्तांतरण का काम केवल डीमैट रूप में करना अनिवार्य कर दिया गया है।
निवेशक शिक्षा और संरक्षण कोष
निवेशक शिक्षा और संरक्षण कोष (आईईपीएफ) प्राधिकरण ने 2018 में अपने नये प्रतीक चिन्ह का अनावरण किया ताकि मजबूत उपस्थिति और पहचान प्रदान की जा सके। आईईपीएफ प्राधिकार ने सीएससी ई-शासन सेवाएं भारत के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जहां सीएससी अन्य कार्यों के अलावा निवेश जागरूकता परियोजना के लिए ग्राम स्तर के उद्यमों की पहचान करेगा। आईपीएफ में और सुधारों पर सक्रियता से एमसीए नजर रखे हुए हैं।
दावा भुगतान की वर्तमान प्रक्रियाओं की समीक्षा के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) के जरिए कंपनी सेक्रेटरियों की एक समिति का गठन किया गया। समिति ने वर्तमान प्रक्रियाओं की समीक्षा की और सिफारिश की कि कंपनियों द्वारा दावों के ई-सत्यापन, दावेदार के ऑनलाइन पैन आधारित सत्यापन के साथ समूची प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाया जाए।
आईएपी की पहुंच बढ़ाने और पेशेवर संस्थानों, सीएससी ई-शासन और अन्य सहयोगी संस्थानों द्वारा चलाए जा रहे प्रमुख निगरानी के लिए एक नया पोर्टल www.iepfportal.in विकसित किया गया है। यह पोर्टल आईसीएआई, आईसीएसआई, आईसीओएआई और आईआईसीए तथा सीएससी ई-शासन जैसे सहयोगी संस्थानों को अपने पिछले और भविष्य के कार्यक्रमों का विवरण अपलोड करने के लिए पहुंच प्रदान करेगा।
प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में:
भारत में प्रतिस्पर्धा के विषय पर विचार-विमर्श की संभावनाओं में विस्तार करने और प्रतिस्पर्धा से संबंधित मामलों पर दुनिया भर की बहेतरीन पद्धतियों को यहां लाने के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने मार्च 2018 में नई दिल्ली में 17वें अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा नेटवर्क (आईसीएन) वार्षिक सम्मेलन का सफल आयोजन किया। इस सम्मेलन में 70 से ज्यादा देशों के लगभग 500 पेशेवरों ने भाग लिया, जिनमें प्रतिस्पर्धा एजेंसियों के अध्यक्ष, विधि और आर्थिक पेशेवर, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और अकादमियों के प्रतिनिधि और हितधारक शामिल थे।
एमसीए ने ‘वर्तमान नीतियों के प्रतिस्पर्धा आकलन’ के लिए औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग में सचिव श्री रमेश अभिषेक की अध्यक्षता तथा सात अन्य मंत्रालयों/संगठनों के प्रतिनिधित्व के साथ 1 जून, 2018 को एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया। इस समिति में मुख्य रूप से चुनिंदा कानूनों/नियमों/नीतियों/ हाल ही में बनाए गए विनियमों तथा आसन्न कानूनों की समीक्षा करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया, ताकि प्रतिस्पर्धा-विरोधी पहलुओं से जुड़े मामलों तथा प्रतिस्पर्धा के लिए कड़ी चुनौती प्रस्तुत करने वाले प्रतिबंधों/कानून के प्रावधानों पर ध्यान दिया जा सके।
इसके अलावा सरकार ने कानून का सुदृढ़ आर्थिक मूल तत्वों की जरूरतों के अनुरूप होना सुनिश्चित करने के अपने उद्देश्य का अनुसरण करते हुए 1 अक्टूबर, 2018 को सचिव, कॉर्पोरेट कार्य श्री इंजेती श्रीनिवास की अध्यक्षता में प्रतिस्पर्धा कानून समीक्षा समिति का गठन किया है। इस समिति को उत्कृष्ट अंतर्राष्ट्रीय पद्धतियों तथा क्षेत्रीय इंटरफेस आदि पर गौर करने के लिए प्रतिस्पर्धा अधिनियम/नियम/कानून की समीक्षा करने के लिए अधिदेशित किया गया है।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने संयोजन नियमों में संशोधन किया है। संशोधित नियमों में अन्य के अलावा नोटिस वापस लेने और उसे पक्षकारों द्वारा दोबारा दाखिल किए जाने की अनुमति देना, नोटिस के जवाब में स्वैच्छिक परिवर्तनों को दाखिल करने की अनुमति देना, परिवर्तनों के कार्यान्वयन का निरीक्षण करने के लिए एजेंसियों को नियुक्त करना आदि शामिल है।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सीसीआई की ओर से ‘‘सार्वजनिक खरीद और प्रतिस्पर्धा कानून’’ विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करने सहित मुम्बई, नई दिल्ली और अहमदाबाद में रोड शो आयोजित किए गए। प्रतिस्पर्धा के मामलों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए समय-समय पर इसी तरह के रोड शो आयोजित किए जा रहे हैं तथा आने वाले महीनों में ऐसे और भी रोड शो आयोजित किए जाने की योजना है।
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आर.एम/हिंदी इकाई
(रिलीज़ आईडी: 1556739)
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